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nuclear plant: कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र, यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

nuclear plant: नई दिल्ली । भारत में परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में एक लंबा इतिहास रहा है. देश ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अपने एनर्जी संसाधनों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए हमेशा प्रयास किया है. ऐसे ही प्रयासों में सबसे जरूरी भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयं थात्र, जिसे 1969 में स्थापित किया गया. यह संयंत्र भारत के लिए सिर्फ बिजली उत्पादन का साधन नहीं था, बल्कि यह उस समय आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का प्रतीक भी माना गया. कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयंत्र तारापुर परमाणु एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित है. यह मुंबई के पास स्थित है और इसे 28 अक्टूबर 1969 को शुरू किया गया था. इस संयंत्र की स्थापना के पीछे उद्देश्य था कि देश को स्वच्छ और लॉन्ग टर्म एनर्जी उपलब्ध कराई जा सके. तारापुर में दो उबलते जल रिएक्टर लगे हुए थे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 200 मेगावाट थी. जब यह संयंत्र चालू हुआ, तब यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु एनर्जी स्टेशन था. इस संयंत्र के जरिए भारत ने परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की और दुनिया के लिए अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी दिखाया. यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा? तारापुर परमाणु एनर्जी संयंत्र की यूनिट 1 अब 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. इसके अलावा, यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और उसे जुड़ने के बाद कुल उत्पादन और बढ़कर लगभग 200 मेगावाट से ज्यादा हो जाएगा. तारापुर संयंत्र ने वर्षों तक देश को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई. हाल ही में इस संयंत्र की यूनिट 1 का रिनोवेशन किया गया और अब यह फिर से 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक से पुरानी यूनिट को नया जीवन देने का पहला प्रयास है. यूनिट 1 के नवीनीकरण में छह साल का समय लगा. इसमें रिएक्टर की पाइपिंग, टरबाइन जनरेटर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया. इसके अलावा, 3डी लेजर स्कैनिंग, जंग-रोधी सामग्री, नई सुरक्षा प्रणालियां और कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण भी किया गया. संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है. अधिकारियों का कहना है कि यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे भी राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा. भारत की एनर्जी सुरक्षा और स्वच्छ एनर्जी में योगदान तारापुर संयंत्र की नई तकनीक और नवीनीकरण ने न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि देश को स्वच्छ एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद की है. इससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी और कार्बन एमिशन में भी कमी आएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता से भविष्य में पुराने रिएक्टरों का नवीनीकरण आसान होगा.

SOCIAL MEDIA BAN: भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

  SOCIAL MEDIA BAN: नई दिल्ली । भारत सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में पहले ही इस उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल रोक दिया गया है, और अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस दिशा में इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड, 2021 में संशोधन किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया मॉडल: कैसे काम करता है सरकार पूर्ण प्रतिबंध की जगह ऑस्ट्रेलिया मॉडल की ओर झुक रही है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका गया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत चल रही है और उम्र-आधारित नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है। क्यों उठ रहा यह कदम? इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने चेतावनी दी है कि युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन, कंपल्सिव यूज, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को एडिक्शन, अश्लील कंटेंट और डीपफेक जैसी ऑनलाइन समस्याओं से बचाया जा सके। मौजूदा कानून और DPDP एक्ट भारत में अभी कोई कानून नहीं है जो सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाए। लेकिन DPDP एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए पेरेंटल कंसेंट जरूरी है। इससे प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के डेटा कलेक्शन और टारगेटेड एड्स पर नियंत्रण रखना पड़ता है। दुनिया में स्थिति ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन। फ्रांस: 15 साल से कम उम्र पर सोशल मीडिया का उपयोग रोकने वाला बिल पास। यूके, स्पेन, डेनमार्क, ग्रीस: ऐसी पाबंदियों पर विचार भारत के कुछ राज्यों जैसे गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने पर चर्चा शुरू की है। चुनौतियां और विरोधाभास इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर डायरेक्टर अपर गुप्ता का कहना है कि भारत में यह बैन केवल कागज पर ही रह सकता है। बच्चे अक्सर फेक उम्र डालकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लेते हैं। अगला कदम सरकार अभी सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत कर रही है। कोई फाइनल फैसला या टाइमलाइन अभी तय नहीं हुई है, लेकिन लागू होने पर यह नियम भारत के करोड़ों युवा यूजर्स को प्रभावित करेगा, खासकर जब भारत दुनिया में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा मार्केट है।

AI IMPACT: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर विवाद, स्टॉल खाली कराने की चर्चा

  AI IMPACT: नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit में ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University विवादों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी ने एक चीनी रोबोटिक डॉग को अपने इनोवेशन के रूप में “ओरियन” नाम से पेश किया। क्या है पूरा मामला? वायरल दावों के मुताबिक, समिट में दिखाया गया रोबोडॉग दरअसल Unitree Go2 है, जिसे चीन की कंपनी Unitree Robotics बनाती है। यह AI-पावर्ड रोबोडॉग ऑनलाइन करीब 2-3 लाख रुपये में उपलब्ध है। आरोप लगे कि इम्पोर्टेड टेक्नोलॉजी को भारतीय डेवलपमेंट बताकर शोकेस किया गया। सूत्रों के हवाले से खबर आई कि विवाद के बाद यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर करने के निर्देश दिए गए और स्टॉल से उपकरण हटा लिए गए। हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि उन्हें समिट छोड़ने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। यूनिवर्सिटी की सफाई यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि रोबोडॉग को उन्होंने खुद मैन्युफैक्चर करने का दावा कभी नहीं किया। उनके मुताबिक, यह डिवाइस छात्रों के लिए एक “लर्निंग टूल” है, जिससे वे रोबोटिक्स और AI की समझ विकसित कर रहे हैं। राजनीतिक प्रतिक्रिया विवाद पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने तंज कसते हुए कहा कि AI समिट एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है, जहां भारतीय डेटा बेचा जा रहा है और चीनी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। आगे क्या? आईटी मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक काउंटर खाली करने का निर्देश जारी किया गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्हें अभी तक ऐसा कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला।

UP Politics: यूपी की सियासत से बड़ी खबर, AIMIM से बसपा अलायंस करेगी या नहीं? मायावती ने साफ कर दी तस्वीर

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले दावा किया जा रहा था कि बहुजन समाज पार्टी किसी दल के साथ गठबंधन कर सकती है. इस रेस में सबसे पहले नाम हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की अध्यक्षता वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का चल रहा था. अब इस पर राज्य की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने तस्वीर साफ कर दी है. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा है कि जैसे-जैसे UP में चुनाव पास आएंगे, जो लोग हमारे खिलाफ हैं, वे हमें सत्ता से दूर रखने की और भी कोशिश करेंगे और हमारे खिलाफ साजिश करेंगे. सिर्फ UP में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सभी अंबेडकरवादियों को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आत्म-सम्मान पाने के आंदोलन को मजबूत करने के लिए काम करते रहना चाहिए.पूर्व सीएम ने कहा कि आप सबको पता है कि इन दिनों AI को सफलता की पूंजी बताने की स्वार्थी बताने के बीच मीडिया में एक और चर्चा है कि विधानसभा 2027 चुनाव बसपा गठबंधन में लड़ेगी जो कि बिल्कुल झूठ है. ये फेक न्यूज है. मीडिया को ऐसी खबरों से बचना चाहिए. एक प्रेस वार्ता में मायावती ने कहा कि हम पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि हम विधानसभा चुनाव अकेले लडेंगे, लेकिन कुछ लोग और मीडिया घिनौनी साजिश में पड़कर अपनी इमेज खराब करते हैं. ये बसपा विरोधी एजेंडा है. लोगों को ऐसी खबरों पर ध्यान नहीं देना. कांग्रेस, सपा और बीजेपी की सोच संकीर्ण और बाबा साहेब की विरोधी है. मायावती ने क्यों किया अलायंस से इनकार? उन्होंने कहा कि इनसे गठबन्धन करके बसपा को नुकसान होता है. बसपा के लोग अकेले चुनाव लड़ने के लिए जी जान से लगे हुए हैं. बसपा, 2007 की तरह अकेले चुनाव लड़ेगी और चुनाव जीतेगी. बसपा सुप्रीमो को सिक्युरिटी दृष्टिगत टाइप 8 का बंगला मिलने के सवाल पर मायावती ने कहा कि जब यह मिला तो उसमें भी षडयंत्र के तहत ग़लत खबरें चलाई गई हैं एजेंडा के तहत. अब सुरक्षा के दृष्टिगत टाइप 8 का बंगला मिला जिसे मैने स्वीकार किया .उत्तर प्रदेश में 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि बहुजन समाज पार्टी किसी दल के साथ गठबंधन कर सकती है। सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा थी, वह हैदराबाद के सांसदअसदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार और उनके सुप्रीमो के कहने पर 2 जून 1995 गेस्ट हाउस में मुझपर हमला हुआ था जिसके अगले दिन भारत सरकार द्वारा मुझे सुरक्षा दी गई थी और सुरक्षित आवास भी लेकिन अब इतने समय के बाद भी सुरक्षा ख़तरा बड़ा है. पहले भी मुझे टाइप 8 का बंगला ही मिला था. चुनाव के नजदीक आते ही बसपा को सत्ता से दूर रखने के लिए विपक्षियों के हथकंडे बढ़ते जाएंगे.

GWARKA ACCIDENT: साहिल की मां ने आरोपी परिवार की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की, कहा – ‘इमोशनल ड्रामा कर रहे हैं, बचने नहीं दूंगी’

  GWARKA ACCIDENT: नई दिल्ली । दिल्ली के द्वारका में 3 फरवरी को हुए कार हादसे में साहिल धनेशरा की मौत के बाद उनकी मां ने आरोपी और उसके पिता की गिरफ्तारी की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि हादसे के बाद आरोपी परिवार संवेदना दिखाने के नाम पर इमोशनल ड्रामा कर रहा है और जनता को भावुक करके जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। साहिल की मां ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि अब तक आरोपी बाहर क्यों है और उनके पिता को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हादसे में साहिल की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनका कहना है कि केवल चालक ही नहीं बल्कि उसके पिता को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा परिवार क्रिमिनल है और लोगों को उनके नाटक से भावुक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सच्चाई सबके सामने है। उन्होंने कहा “अब तक आरोपी बाहर क्यों है… क्या उन्हें इंतजाम करना है जुगाड़ करना है? साहिल की मां ने आरोपी माता-पिता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे माता-पिता जिनको यह भी नहीं पता कि उनका बच्चा गाड़ी लेकर निकल जाता है वे बच्चों की जिम्मेदारी कैसे उठा सकते हैं। उनके अनुसार हादसे के बाद आरोपी पक्ष की ओर से कोई संवेदना नहीं दिखाई गई जबकि उनका बेटा हमेशा के लिए उनसे छिन गया। साहिल की मां ने ओवरटेक और सड़क नियमों को लेकर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि साहिल बस के पीछे चल रहा था और ट्रैफिक रुकने पर नियम के अनुसार दाहिनी ओर से ओवरटेक किया गया था जबकि स्कॉर्पियो चालक ने बाईं ओर से कट मारा जिससे हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि सड़क कर्वेचर वाली थी और स्कॉर्पियो बस के सामने से कट करते हुए सीधे साहिल से टकरा गया। भावुक होते हुए साहिल की मां ने कहा “बच्चे की जगह मां की गोद में होती है न कि सड़क पर। मैं अपने बेटे को जिस हालत में देख कर आई हूं उसे कभी नहीं भूल सकती और न्याय मिलने तक चुप नहीं बैठूंगी।” उन्होंने साफ संदेश दिया कि वे आरोपियों को बचने नहीं देंगी और कानूनी लड़ाई अंत तक लड़ेंगी।

RAJYASABHA ELECTION 2026: महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार और हरियाणा समेत 10 राज्यों के लिए राज्यसभा चुनाव की घोषणा, 16 मार्च को होगा मतदान

  RAJYASABHA ELECTION 2026: नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। यह चुनाव उन सदस्यों की जगह भरे जाने के लिए कराया जा रहा है, जिनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। कुल 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होंगे। आयोग के अनुसार 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने, जांच और नाम वापस लेने की प्रक्रिया तय समय सीमा के अनुसार पूरी की जाएगी। सभी सीटों के लिए मतदान और मतगणना 16 मार्च 2026 को ही होंगे। मतदान और मतगणना का कार्यक्रम 26 फरवरी 2026 को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है, जबकि 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च 2026 तय की गई है। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। कौन से राज्यों की सीटों पर चुनाव इस चुनाव में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश की सीटों के लिए चुनाव होगा। राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है और राज्यों में चुनावी हलचल बढ़ गई है। रिटायर हो रहे सदस्य महाराष्ट्र: डॉ. भगवत किशनराव कराड, डॉ. फौजिया तहसीन अहमद खान, प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी, शरदचंद्र गोविंदराव पवार, धैर्यशील मोहन पाटिल, रजनी अशोकराव पाटिल, रामदास बंदू अठावले। ओडिशा: ममता मोहंता, मुजीबुल्ला खान, सुजीत कुमार, निरंजन बिशी। तमिलनाडु: एन आर एलंगो, पी सेल्वारासु, एम थम्बिदुरई, तिरुची सिवा, डॉ. कनिमोझी एन वी एन सोमू, जी के वासन। पश्चिम बंगाल: साकेत गोखले, ऋतब्रत बनर्जी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य, मौसम नूर, सुब्रत बक्शी। असम: रामेश्वर तेली, भुवनेश्वर कलिता, अजीत कुमार भुइयां। बिहार: अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा, हरिवंश नारायण सिंह। छत्तीसगढ़: कवि तेजपाल सिंह तुलसी, फूलो देवी नेताम। हरियाणा: किरण चौधरी, राम चंदर जांगड़ा। हिमाचल प्रदेश: इंदु बाला गोस्वामी। तेलंगाना: डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, के आर सुरेश रेड्डी। राजनीतिक दल अब अपने उम्मीदवार तय कर रहे हैं और 16 मार्च 2026 को इन सभी सीटों के लिए मतदान होगा।

SALMAN’S FATHER: सलमान के पिता सलीम खान वेटिंलेटर पर…. लीलाबती अस्पताल में हुई सर्जरी

SALMAN’S FATHER: मुम्बई। फेमस फिल्म एक्टर सलमान खान के पिता सलीम खान (Salim Khan) को वेंटिलेटर (Ventilator) पर रखा गया है। दरअसल, मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।फेमस फिल्म एक्टर सलमान खान के पिता सलीम खान (Salim Khan) को वेंटिलेटर (Ventilator) पर रखा गया है। दरअसल, मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। परिवार के सदस्य जब उन्हें मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल (Lilavati Hospital, Mumbai) में लाए तब डॉक्टर्स ने उन्हें भर्ती किया और आईसीयू में रखा। पहले तो डॉक्टर्स ने सलीम खान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि उनकी सर्जरी हुई है। डॉक्टर ने क्या कहा? अभी तक सलीम खान के परिवार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, हॉस्पिटल के डॉ. जलील पारकर ने सलीम खान के बारे में जानकारी जरूरी दी है। डॉ.जलील पारकर ने बताया, ‘सलीम खान की सर्जरी हुई है। अब उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी हालत अभी स्थिर है। बुधवार सुबह 11 बजे, हम परिवार और रिश्तेदारों की सहमति से एक प्रेस बुलेटिन जारी करेंगे।’ मिलने पहुंच रहे परिवार के सदस्य डॉ. पारकर ने आगे कहा, ‘वह स्थिर हैं, लेकिन उनके क्लिनिकल स्टेटस को लेकर उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।’ बता दें, जब से सलीम खान हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं तब से खान परिवार के सदस्य बारी-बारी उनसे मिलने बांद्रा स्थित मेडिकल फैसिलिटी पहुंच रहे हैं। जावेद अख्तर और संजय दत्त भी हॉस्पिटल के बाहर स्पॉट हुए हैं। सलीम खान – द स्क्रीनराइटर सलीम खान को हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे प्रभावशाली स्क्रीनराइटरों में से एक माना जाता है। वह जावेद अख्तर के साथ मिलकर लिखते थे। उनकी जोड़ी को सलीम-जावेद कहा जाता था। उन्होंने 1970 और 1980 के दशक की शुरुआत में मेनस्ट्रीम बॉलीवुड को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक या दो नहीं 24 फिल्मों का स्क्रीनप्ले लिखा था और इसमें से 20 फिल्में हिट हुई थीं।

J/K NEWS: जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा, केंद्र के संकेत ने बढ़ाई उम्मीदें

J/K NEWS: नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द मिलने की संभावना फिर से सुर्खियों में आ गई है। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में कहा कि यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन जब संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है, तो जम्मू-कश्मीर को उसका अधिकार निश्चित रूप से मिलेगा। मेघवाल ने यह भी संकेत दिए कि प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इस पर फैसला सुनने को मिल सकता है। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया। तब से ही क्षेत्रीय राजनीतिक दल लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा लौटने से स्थानीय प्रशासनिक निर्णयों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी और विकास की गति तेज होगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मामले पर अपनी चिंता और उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रही है और लंबे इंतजार के बावजूद वे उम्मीद नहीं खो रहे हैं। अब, केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान के बाद उन्हें विश्वास है कि राज्य का दर्जा जल्द ही बहाल किया जा सकता है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला जनता की संवेदनशील भावनाओं से जुड़ा हुआ है और देर होने से लोगों में बची हुई उम्मीद भी खत्म हो सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल होना न केवल प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और विकास को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार मिलेंगे, जिससे विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था के मामलों में बेहतर निर्णय लेने में सुविधा होगी। हालांकि, अभी तक कोई निश्चित तारीख या आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से लगातार सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं। मेघवाल के बयान और पहले दिए गए लोकसभा आश्वासनों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है और यह मुद्दा उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद जल्द ही संसद या केंद्र सरकार के माध्यम से अंतिम रूप ले सकता है। निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर के लोगों और राजनीतिक दलों के लिए यह बड़ी उम्मीद की खबर है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक सुधार और विकास की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है। केंद्रीय मंत्रियों के संकेतों और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उम्मीदों के बीच लगता है कि अब राज्य के दर्जे की बहाली बहुत दूर नहीं है।

KARNATAKA CONGERESS LEADER : शादी में ‘बंदूक’ के साथ किया डांस, कर्नाटक में कांग्रेस नेता का वीडियो वायरल

KARNATAKA CONGRESS LEADER

HIGHLIGHTS: शादी समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कांग्रेस नेता मतीन पटेल गन जैसी वस्तु के साथ डांस करते दिखे नेता का दावा—असली हथियार नहीं, सिर्फ खिलौना था पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू की हथियार की प्रकृति की पुष्टि के बाद होगी कार्रवाई जनप्रतिनिधियों के आचरण पर फिर छिड़ी बहस KARNATAKA CONGERESS LEADER : कर्नाटक। कर्नाटक में एक पारिवारिक शादी समारोह का वीडियो अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। बता दें कि वायरल क्लिप में कांग्रेस नेता मतीन पटेल बंदूक के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अब राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। किंग में खलनायक बनेंगे अभिषेक बच्चन? वायरल रफ लुक ने बढ़ाई फिल्म को लेकर हलचल क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अफजलपुर से जुड़े कांग्रेस नेता मतीन पटेल को कलबुर्गी के एक रिसॉर्ट में संगीत की धुन पर नाचते हुए देखा जा सकता है। उनके हाथ में बंदूक है, जिसके साथ वे पोज भी देते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे कांग्रेस विधायक एम.वाई. पाटिल के करीबी माने जाते हैं। पटेल का बचाव—यह सिर्फ खिलौना था विवाद बढ़ने के बाद मतीन पटेल ने सफाई दी कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तु असली बंदूक नहीं, बल्कि एक खिलौना थी। उनके अनुसार, यह पारिवारिक कार्यक्रम था जिसमें बच्चों के कहने पर फिल्मी सीन की तरह एक अभिनय किया गया था । साथ ही उन्होंने कहा कि इस निजी आयोजन को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। यहां किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। T20 WC से 5 टीमें हुईं बाहर, 5 पहुंची सुपर 8 में, जाने क्या है पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के हाल? पुलिस ने लिया संज्ञान कलबुर्गी के पुलिस अधीक्षक शरणप्पा एसडी ने पुष्टि की कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वीडियो में दिख रही वस्तु की पुष्टि की जाए। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। आचरण पर उठे सवाल हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कोई कानूनी प्रावधान लागू होगा या नहीं, लेकिन इस घटना ने सार्वजनिक और निजी आयोजनों में जनप्रतिनिधियों के आचरण पर बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे दृश्य समाज में गलत संदेश दे सकते हैं, भले ही वे पारिवारिक कार्यक्रम का हिस्सा क्यों न हों।

असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के लिए सोमवार का दिन उलझनों भरा रहा। मणिशंकर अय्यर (Mani Shankar Aiyar.) जैसे नेता ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तो वहीं असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Bora) ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने पार्टी हाई कमान पर उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था। इस उठा पटक के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व के ऊपर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भाजपा की तरफ से राहुल गांधी को एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए कहा गया कि उन पर न तो उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा है और न ही उनके सहयोगियों को भरोसा है। दिन भर से कांग्रेस पार्टी के अंदर जारी घमासान पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस कहती है राहुल को हटाओ, ममता को लाओ, ‘इंडी-गठबंधन’ को बचाओ। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया। मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि कांग्रेस केरल हारेगी और विजयन जीतेंगे।” भाजपा नेता ने सवाल किया कि क्या यह समझने के लिए और सबूतों की जरूरत है कि न तो गांधी की अपनी पार्टी के नेता और न ही उनके सहयोगी उन्हें गंभीरता से लेते हैं। भाजपा नेता ने अपने हमले को और भी तीखा करते हुए कहा, “राहुल गांधी के पास न तो जनमत है और न ही संगत… वह बस एक असफल विशेषाधिकार प्राप्त वंशवादी हैं।” आपको बता दें, खबर लिखे जाने तक असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया था। इसके अलावा मणिशंकर अय्यर को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह अब पार्टी में नहीं है, ऐसे में उनके बयान को पार्टी से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है। दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने प्रवक्ता पवन खेड़ा और शशि थरूर पर भी निशाना साधा था। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। पार्टी की तरफ से कांग्रेस से संबंध न होने की बात पर पूर्व सांसद ने कहा कि उन्हें केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही पार्टी से निकाल सकते हैं। कांग्रेस पार्टी ने भले ही खुद को इस बयान से दूर कर लिया हो लेकिन भाजपा ने हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं द्वारा राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। राहुल गांधी को कांग्रेस के कट्टर वफादार मणिशंकर अय्यर ने खुलेआम नकार दिया।” भंडारी ने कहा, ”अय्यर हों या तृणमूल कांग्रेस या भूपेन बोरा सब जानते हैं। राहुल गांधी राजनीतिक ‘पप्पू’ हैं। कांग्रेस में अपना पूरा जीवन बिताने वाले वफादार अब खुलेआम राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं।” दरअसल, यह पूरा मामला कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर को भी अपने निशाना पर लिया। इसके अलावा असम से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन के इस्तीफे ने भी कांग्रेस पार्टी के दिन को बर्बाद करने की कोशिश की। मणिशंकर के मामले पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीखी टिप्पणी आई, जिसमें कहा गया कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी में नहीं है, तो उस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह नेहरू वादी और राजीववादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकालने का अधिकार केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को है।