कुछ मिनटों की स्क्रीन टाइम, लेकिन पहचान की गारंटी: संध्या मृदुल की कहानी..

नई दिल्ली: फिल्मी दुनिया में अक्सर यही माना जाता है कि बड़ा रोल ही बड़ी पहचान दिलाता है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो छोटे किरदार में भी दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। संध्या मृदुल इन्हीं कलाकारों में से एक हैं। साल 2002 में आई फिल्म साथिया में सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उन्होंने अपने दमदार अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा। रानी मुखर्जी के किरदार की बहन दीना के रूप में संध्या ने एक छोटे रोल में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शकों और क्रिटिक्स ने उन्हें नोटिस करना शुरू कर दिया। यही वह फिल्म थी जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी और उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत कलाकार के रूप में स्थापित किया। संध्या मृदुल का जन्म मुंबई में हुआ। उनके पिता पी.आर. मृदुल पेशे से वकील थे और बाद में जज बने। बचपन में ही परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया और पढ़ाई के लिए उन्हें जयपुर भेजा गया। संध्या के जीवन में बड़ा झटका तब आया जब 14 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनके बड़े भाई ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। पढ़ाई में संध्या ने हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने गणित में ग्रेजुएशन किया और पोस्ट ग्रेजुएशन मार्केटिंग में की, इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट जॉब भी की। साधारण नौकरी से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना आसान नहीं था, लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया। टीवी शो स्वाभिमान से उनके करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद बनेगी अपनी बातकोशिश और हू ब हू जैसे धारावाहिकों ने उन्हें टीवी की दुनिया में मजबूत पहचान दिलाई। टीवी के बाद संध्या मृदुल ने फिल्मों की ओर रुख किया। साथिया के बाद उन्होंने साल 2005 में आई पेज 3 में एयर होस्टेस का किरदार निभाया, जिसे क्रिटिक्स ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेडडेडलाइन: सिर्फ 24 घंटे और द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। संध्या सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने टीवी और वेब सीरीज में भी काम किया और हर प्लेटफॉर्म पर अपनी छाप छोड़ी। झलक दिखला जा में फर्स्ट रनर-अप रहने से उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। उनकी मेहनत और प्रतिभा के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स और नॉमिनेशन भी मिले, जिनमें पेज 3 के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान शामिल है। अपने करियर के दौरान संध्या ने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुना और अपनी एक्टिंग से दर्शकों को प्रभावित किया। संध्या मृदुल की कहानी यह साबित करती है कि छोटा रोल भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है, बशर्ते उसमें प्रतिभा और मेहनत हो।
मुनमुन सेन बर्थडे स्पेशल: 80 के दशक की ‘बोल्ड बाला’ जिसने हिंदी सिनेमा को किया चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 के दशक में महिलाएं अपने करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल मानती थीं। शादी और बच्चों के बाद बड़े कलाकारों के साथ काम करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। ऐसे में मुनमुन सेन ने इन सभी रूढ़िवादी नियमों को तोड़ते हुए अपनी पहचान बनाई। 28 मार्च को जन्मी मुनमुन सेन ने हिंदी और बंगाली सिनेमा में अपनी अलग छवि बनाई और उन्हें इंडस्ट्री कीबोल्ड बाला कहा गया। सिनेमा में आने का मुनमुन का कोई प्रारंभिक इरादा नहीं था। उनकी मां, सुचित्रा सेन, चाहती थीं कि उनकी बेटी फिल्मों से दूर रहे। लेकिन शादी और दो बच्चों की मां बनने के बाद मुनमुन ने खुद की पहचान बनाने के लिए फिल्मों का रुख किया। पति के सहयोग से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और पहला किरदार ही उन्हें सुर्खियों में ला गया। उनकी पहली फिल्मअंदर बाहर में उनका छोटा सा किरदार भी दर्शकों को प्रभावित करने के लिए काफी था। मुनमुन सेन ने इस फिल्म में आधुनिक और निडर महिला की भूमिका निभाई, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने100 डेज जख्मी दिल तेलुगु फिल्म सिरिवे नेलाअमर कंटक औरशीशा जैसी फिल्मों में काम किया। मुनमुन सेन की फिल्मों में बोल्ड और निडर भूमिकाओं के कारण उनका नाम हमेशा चर्चा में रहा। बंगाल में उनके बोल्ड किरदारों पर विरोध हुआ और उनके विवादित फोटोशूट ने इस बहस को और भी बढ़ा दिया। कई मैगजीन के लिए सेंसेशनल पोज देने के बावजूद मुनमुन ने अश्लीलता के आरोपों को बेखौफ झेला और 80-90 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार रहीं। सिर्फ फिल्मी करियर ही नहीं, उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चाओं का विषय रही। उनके नाम कई अफेयर्स जुड़े, जिनमें पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और प्रधानमंत्री इमरान खान, प्रोड्यूसर रोमू सिप्पी और विक्टर बनर्जी शामिल हैं। लेकिन मुनमुन सेन ने हमेशा बेबाकी से अफेयर्स की खबरों को नकारा और इमरान खान को अपना करीबी दोस्त बताया। मुनमुन सेन की कहानी यह दिखाती है कि एक महिला चाहे शादीशुदा हो या मां, अगर हिम्मत और आत्मविश्वास हो तो सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। उनके निडर किरदार और बोल्ड फिल्म च्वाइस ने हिंदी सिनेमा के उस समय के रूढ़िवादी नजरिए को चुनौती दी और उन्हें इंडस्ट्री की सबसे चर्चित और यादगार अभिनेत्रियों में शामिल किया।
बाल कलाकार से कॉमेडी आइकन: जगदीप की प्रेरक और भावुक कहानी

नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा में हास्य और चरित्र अभिनय के स्वर्णिम युग में जगदीप का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। वे केवल एक हास्य कलाकार नहीं थे, बल्कि अपनी अनूठी संवाद अदायगी और चेहरे के हाव-भावों के जरिए हास्य को नई पहचान देने वाले कलाकार थे। आगामी 29 मार्च को इस दिग्गज अभिनेता की जयंती है, जो 400 से अधिक फिल्मों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। जगदीप का फिल्मी सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने मात्र 3 रुपये की दिहाड़ी से शुरुआत की थी। देश विभाजन और गरीबी की त्रासदी को करीब से देख चुके इस बच्चे ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अभिनेता बनेंगे। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। 1951 में फिल्म ‘अफसाना’ की शूटिंग के दौरान मुख्य बाल कलाकार उर्दू संवाद नहीं बोल पाया, तब भीड़ का हिस्सा रहे जगदीप ने स्वयं वह संवाद बोल दिया। उनके इस हुनर से निर्देशक प्रभावित हुए और उन्हें 6 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने का मौका मिला। यही उनके फिल्मी करियर की शुरुआत थी। जगदीप का उच्चारण उर्दू में साफ और प्रभावशाली था। मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने दरबार में राजा के आने से पहले होने वाली अनाउंसमेंट में शानदार प्रदर्शन किया। डायरेक्टर ने उन्हें तत्काल सेट पर बुलाकर पहला किरदार दिया और उस समय ही उन्होंने ठान लिया कि अब अभिनय ही उनकी जिंदगी है। उनकी कॉमिक प्रतिभा का असली खुलासा तब हुआ जब निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें ‘धोबी डॉक्टर’ फिल्म में रोते हुए सीन में देखा। बिमल रॉय का मानना था कि जो पर्दे पर दूसरों को रुला सकता है, वही हास्य के माध्यम से गहराई दिखा सकता है। इसी वजह से उन्होंने जगदीप को फिल्म में बूट पॉलिश करने वाले लड़के का हास्यपूर्ण किरदार दिया। यह सीन जगदीप की जीवन और करियर में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसके बाद जगदीप ने ‘शोले’, ‘रोटी’, ‘एक बार कहो’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी से भरपूर भूमिकाएं निभाईं। उनका हास्य कभी जादुई था, कभी भावुक। दर्शक उन्हें सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं मानते थे, बल्कि उनकी अदायगी में छुपे जीवन अनुभव और संवेदनशीलता को भी महसूस करते थे। यही कारण है कि वे हिंदी सिनेमा में हास्य और चरित्र अभिनय का अविस्मरणीय नाम बने। जगदीप की कहानी यह बताती है कि संघर्ष, प्रतिभा और सही दिशा मिल जाए तो कोई भी साधारण बच्चा बड़े पर्दे का सितारा बन सकता है। 6 रुपये की दिहाड़ी से शुरू हुआ सफर उन्हें ‘सूरमा भोपाली’ और हिंदी सिनेमा के चिरस्थायी हास्य कलाकार के रूप में ले गया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल दर्शकों को हंसाया बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी दी।
आस्था के नाम पर अपराध पुणे में महिला से दुष्कर्म के आरोप में फर्जी बाबा अरेस्ट

नई दिल्ली:महाराष्ट्र में आस्था और विश्वास का दुरुपयोग कर महिलाओं के शोषण का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां पालघर निवासी ऋषिकेश वैद्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने खुद को भगवान शिव का अवतार बताकर एक महिला को अपने जाल में फंसाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस के अनुसार, यह मामला 2023 में शुरू हुआ जब पीड़िता की आरोपी से फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई। धीरे-धीरे आरोपी ने महिला का विश्वास जीत लिया और खुद को दिव्य शक्तियों वाला बताते हुए उसे यह यकीन दिलाया कि वह महादेव का अवतार है। इतना ही नहीं वह पीड़िता को पार्वती कहकर संबोधित करता था और धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर उसे मानसिक रूप से प्रभावित करता रहा। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2023 में आरोपी पुणे पहुंचा जहां मांजरी इलाके के एक लॉज में उसने महिला को कथित रूप से नशीला पदार्थ देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं उसने इस दौरान आपत्तिजनक तस्वीरें भी खींचीं और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर महिला को ब्लैकमेल करता रहा। इसके बाद मई 2024 में वसई के एक होटल में फिर से शोषण का प्रयास किया गया। पीड़िता जो कि 34 वर्षीय महिला है लंबे समय तक डर और ब्लैकमेल के कारण चुप रही लेकिन आखिरकार उसने हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ऋषिकेश वैद्य का तरीका बेहद सुनियोजित था और वह सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को निशाना बनाता था। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि वह कई अन्य महिलाओं को भी इसी तरह फंसा चुका हो सकता है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब अशोक खरात से जुड़े मामलों ने सुर्खियां बटोरीं और कई पीड़िताएं सामने आने लगीं। उसी से प्रेरित होकर इस पीड़िता ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का साहस दिखाया। माणिकपुर पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज की गई जिसे आगे की जांच के लिए हडपसर पुलिस को सौंपा गया। सीनियर इंस्पेक्टर हिरालाल जाधव के अनुसार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब यह जांच की जा रही है कि उसने कितनी महिलाओं को अपना शिकार बनाया। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है क्योंकि आरोपी धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर लोगों को धोखा देते हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि किस तरह स्वयंभू बाबा या फर्जी धार्मिक पहचान बनाकर कुछ लोग महिलाओं को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ितों का आगे आकर शिकायत करना और पुलिस की तत्परता ही सच को सामने लाने का सबसे बड़ा जरिया बनती है।
थिएटर से फिल्मों तक राकेश बेदी का सफर ‘धुरंधर’ ने फिर दिलाई नई पहचान…

नई दिल्ली: अभिनय की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो हर दौर में अपनी अलग छाप छोड़ते हैं और उन्हीं में से एक हैं राकेश बेदी जो इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 में अपने किरदार जमील जमाली को लेकर जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनकी संवाद अदायगी का अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शक एक बार फिर उनके अभिनय के कायल हो गए हैं। दिल्ली के श्रीराम सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी उनके हुनर की मिसाल देता है। एक नाटक के दौरान अचानक बिजली चली गई तो दर्शकों में शोर मच गया लेकिन उसी अंधेरे में राकेश बेदी मंच पर आए और अपनी आवाज के जादू से दर्शकों को बांधे रखा। करीब बीस मिनट तक बिना रोशनी के उन्होंने ऐसा माहौल बना दिया कि जब बिजली लौटी तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह घटना उनके नैसर्गिक अभिनय कौशल को दर्शाती है। इंजीनियर बनने का सपना उनके पिता देखते थे लेकिन राकेश बेदी का मन बचपन से ही अभिनय में रमा हुआ था। उन्होंने आईआईटी दिल्ली की परीक्षा भी दी लेकिन कुछ ही मिनटों में परीक्षा हॉल छोड़ दिया क्योंकि उनका झुकाव कला की ओर था। इसके बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय की पढ़ाई की जहां उनके सहपाठी ओम पुरी जैसे दिग्गज रहे। थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राकेश बेदी ने धीरे-धीरे टेलीविजन और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। ये जो है जिंदगी, श्रीमान श्रीमती, यस बॉस और भाभी जी घर पर हैं जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। फिल्मों में भी उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं लेकिन फिल्म चश्मे बद्दूर का ‘ओमी’ किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस फिल्म की निर्देशक सई परांजपे ने उन्हें सिर्फ उनकी चाल देखकर कास्ट किया था जो बाद में दर्शकों को खूब पसंद आई। हाल के दिनों में राकेश बेदी का नाम कुछ विवादों में भी आया लेकिन उन्होंने हमेशा बेबाकी से अपनी बात रखी। इसके बावजूद उनके काम की सराहना कम नहीं हुई और फिल्म धुरंधर 2 में उनके किरदार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह कितने बहुमुखी कलाकार हैं। अभिनय के अलावा राकेश बेदी को साहित्य और शायरी का भी शौक है। वह गजलें और नज्में लिखते हैं और अक्सर मुशायरों में हिस्सा लेते हैं। वह चार्ली चैपलिन से प्रेरित हैं और जॉनी वॉकर, संजीव कुमार और महमूद को अपना आदर्श मानते हैं। आज राकेश बेदी की कहानी यह बताती है कि अगर जुनून सच्चा हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं। इंजीनियरिंग की राह छोड़कर अभिनय को चुनने का उनका फैसला ही उन्हें उस मुकाम तक लेकर आया जहां आज उनका नाम सम्मान और प्रतिभा का पर्याय बन चुका है। शॉर्ट डिस्क्रिप्शन इंजीनियरिंग छोड़ अभिनय को चुना राकेश बेदी ने धुरंधर 2 में जमील जमाली बनकर फिर बटोरी सुर्खियां English Tags Rakesh Bedi, Dhurandhar 2, Jameel Jamali, Bollywood news, Indian actors, TV shows
जन्मदिन पर धमाका राम चरण की ‘Peddi’ का टीजर रिलीज ट्रांसफॉर्मेशन ने उड़ाए होश..
नई दिल्ली:साउथ सिनेमा के सुपरस्टार राम चरण एक बार फिर अपने दमदार अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी अपकमिंग फिल्म Peddi को लेकर पहले से ही चर्चा में बने हुए एक्टर ने अब अपने जन्मदिन के मौके पर फैंस को खास तोहफा दिया है। मेकर्स ने फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर रिलीज कर दिया है जिसने आते ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है। 27 मार्च को अपना 40वां जन्मदिन मना रहे राम चरण के लिए यह दिन और भी खास बन गया जब उनकी फिल्म का टीजर सामने आया। टीजर में उनका बिल्कुल अलग और चौंकाने वाला लुक देखने को मिल रहा है। इस बार एक्टर ने अपने किरदार के लिए जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है जिसे देखकर फैंस भी हैरान रह गए हैं। टीजर की शुरुआत एक रॉ और देहाती अंदाज से होती है जहां राम चरण कुश्ती के मैदान में नजर आते हैं। उनका रफ लुक और दमदार फिजीक उनके किरदार को और भी प्रभावी बनाता है। खास बात यह है कि टीजर में उनके किरदार का सफर क्रिकेट से कुश्ती तक दिखाया गया है जो कहानी में एक दिलचस्प ट्विस्ट का संकेत देता है। बारिश में भीगते हुए और मूंछों पर ताव देते हुए उनका अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है। टीजर के बैकग्राउंड में फिल्म का टाइटल ट्रैक भी सुनाई देता है जो पूरे माहौल को और ज्यादा एनर्जेटिक बना देता है। मेकर्स ने इस बार राम चरण को एक मास और रस्टिक अवतार में पेश किया है जो उनकी पिछली फिल्मों से बिल्कुल अलग नजर आता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उनके इस नए लुक की जमकर तारीफ हो रही है। फैंस लगातार कमेंट कर उनकी मेहनत और डेडिकेशन की सराहना कर रहे हैं। किसी ने इसे उनका अब तक का बेस्ट ट्रांसफॉर्मेशन बताया तो किसी ने कहा कि उन्हें पहचानना तक मुश्किल हो रहा है। कुछ फैंस ने तो उनके लुक की तुलना ऐतिहासिक और पौराणिक किरदारों से भी कर दी जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। फिल्म Peddi की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। यह एक्शन ड्रामा फिल्म 30 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में जाह्नवी कपूर, जगपति बाबू, शिवा राजकुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। RRR की सफलता के बाद राम चरण के हर प्रोजेक्ट को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह रहता है और ‘Peddi’ का यह टीजर उसी उत्साह को और बढ़ाने का काम कर रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि रिलीज के बाद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है।
संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत

नई दिल्ली:फिल्म इंडस्ट्री में सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष से होकर गुजरती हैं और ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कन्नड़ सिनेमा के स्टार ऋषभ शेट्टी की जिन्होंने बेहद साधारण शुरुआत से अपने करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज वह ना सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं बल्कि निर्देशक और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी खास पहचान बना चुके हैं लेकिन उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में पहचान बनाने से पहले ऋषभ शेट्टी ने एक प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था। इतना ही नहीं उन्होंने एक प्रोड्यूसर के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2008 में मुंबई के अंधेरी इलाके में वह वड़ा पाव खाते हुए सपने देखते थे लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन वह इतने बड़े स्टार बन जाएंगे। उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने साल 2012 में फिल्म तुगलक से अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया लेकिन इसके बावजूद फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम से दर्शकों का दिल जीतते गए। उनके करियर में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने फिल्म लूसिया में काम किया जो उनकी पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके बाद बेल बॉटम जैसी फिल्मों ने उन्हें और मजबूत बनाया। साल 2016 में उन्होंने फिल्म रिक्की के साथ बतौर निर्देशक भी कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की। हालांकि जिस फिल्म ने ऋषभ शेट्टी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में पहचान दिलाई वह थी कंतारा। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद उनकी फिल्म कंतारा चैप्टर 1 ने भी शानदार प्रदर्शन किया और इसे दर्शकों से भरपूर प्यार मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड करीब 850 करोड़ रुपये की कमाई की और साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही। खास बात यह रही कि इस फिल्म ने कई बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया जिनमें रजनीकांत की फिल्म कुली और आमिर खान की फिल्म सितारे जमीन पर जैसी बड़ी फिल्में शामिल थीं। आज ऋषभ शेट्टी की कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण घबराते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि अगर मेहनत और जुनून हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
बदलती छवि का दावा रवि किशन बोले अब सुरक्षित है उत्तर प्रदेश माधुरी दीक्षित का उदाहरण

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अक्सर बहस होती रही है लेकिन अब अभिनेता और सांसद रवि किशन ने इस विषय पर एक ऐसा बयान दिया है जिसने चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। रवि किशन ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की और कहा कि अब उत्तर प्रदेश की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने अपने बयान को मजबूत बनाने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का उदाहरण दिया जो हाल ही में गोरखपुर में तीन दिन तक रहीं और पूरी तरह सुरक्षित माहौल में अपना समय बिताकर लौटीं। रवि किशन ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब लोग उत्तर प्रदेश आने से डरते थे और यहां शूटिंग करने से भी कतराते थे। उन्होंने पुराने दौर का जिक्र करते हुए बताया कि लोग कहते थे कि वहां जाना सुरक्षित नहीं है लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है और यही कारण है कि बड़े कलाकार भी बिना किसी डर के यहां आ रहे हैं और समय बिता रहे हैं। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि माधुरी दीक्षित का गोरखपुर में तीन दिन रुकना इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। रवि किशन के इस बयान के दौरान वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में पूछा कि आखिर हंसी किस बात पर आ रही है। इसके बाद उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में एक और बात जोड़ते हुए कहा कि कई नेता भी अभिनेत्री से मिलने पहुंचे और खास बात यह रही कि वे अपने बाल रंगकर आए थे। उन्होंने यह बात हंसी मजाक में कही लेकिन इससे माहौल और भी हल्का हो गया। रवि किशन और माधुरी दीक्षित जल्द ही एक साथ एक नई फिल्म में नजर आने वाले हैं जिसका नाम मां बहन बताया जा रहा है। इस फिल्म में उनके साथ तृप्ति डिमरी भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी। फिल्म का टीजर पहले ही जारी हो चुका है और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित एक मां के किरदार में नजर आएंगी जबकि तृप्ति उनकी बेटी की भूमिका निभा रही हैं। रवि किशन के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनके पास कई प्रोजेक्ट लाइन में हैं। वह धमाल 4 और मिर्जापुर जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। इसके अलावा वह मामला लीगल है सीजन 2 और टैक्स डिपार्टमेंट स्टोरी में भी नजर आएंगे। एक समय भोजपुरी सिनेमा के बड़े सितारे रहे रवि किशन अब मुख्यधारा और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर सक्रिय हैं। वहीं माधुरी दीक्षित की बात करें तो उन्होंने हाल के वर्षों में फिल्मों के साथ साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। वे पिछली बार एक वेब शो में नजर आई थीं जिसमें उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी। फिल्मों में भी उन्होंने अपनी वापसी को मजबूत बनाए रखा है और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता अब भी बरकरार है। रवि किशन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश अपनी छवि सुधारने और निवेश तथा फिल्म शूटिंग के लिए एक आकर्षक केंद्र बनने की दिशा में प्रयास कर रहा है। उनके इस बयान ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस को तेज कर दिया है और यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई प्रदेश की तस्वीर अब बदल चुकी है।
जापानी और दो हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित थी ये 1980 की फिल्म, बनने में लगे पूरे 5 साल

नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जो अपनी कहानी, स्टारकास्ट और निर्माण की वजह से चर्चा में रहती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है The Burning Train, जो 1980 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म जितनी बड़ी स्टारकास्ट के लिए जानी जाती है, उतनी ही अपने निर्माण और प्रेरणा को लेकर भी खास मानी जाती है। 5 साल में तैयार हुई फिल्मइस मल्टीस्टारर फिल्म की घोषणा साल 1976 में की गई थी, लेकिन इसे रिलीज होने में पूरे पांच साल लग गए। मार्च 1980 में जब फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो इसकी ओपनिंग 100% ऑक्यूपेंसी के साथ हुई। हालांकि, शुरुआती शानदार शुरुआत के बावजूद फिल्म धीरे-धीरे बॉक्स ऑफिस पर कमजोर पड़ गई और औसत साबित हुई। विदेशी फिल्मों से ली गई प्रेरणाकम ही लोग जानते हैं कि The Burning Train की कहानी पूरी तरह मौलिक नहीं थी। यह एक जापानी और दो हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित थी: The Bullet Train (जापान)The Towering InfernoThe Cassandra Crossing इन तीनों फिल्मों की कहानी और कॉन्सेप्ट को मिलाकर एक बड़ी आपदा-आधारित कहानी तैयार की गई, जिसे भारतीय दर्शकों के लिए ढाला गया। क्या थी कहानी की खासियत?जापानी फिल्म The Bullet Train में ट्रेन में बम लगाकर उसे एक निश्चित स्पीड से नीचे आने पर उड़ाने की धमकी दी जाती है। वहीं The Towering Inferno से इंसानी भावनाओं और आपदा के दौरान लोगों की प्रतिक्रिया को दिखाने का विचार लिया गया। इसके अलावा The Cassandra Crossing से “चलती ट्रेन में फंसे लोगों की जान का खतरा” वाला एंगल जोड़ा गया। इन तीनों तत्वों को मिलाकर एक ऐसी कहानी बनाई गई, जिसमें आग से घिरी ट्रेन में फंसे यात्रियों की जिंदगी और जंग को दिखाया गया। स्टारकास्ट थी फिल्म की सबसे बड़ी ताकतइस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टीस्टार कास्ट थी। इसमें Dharmendra, Hema Malini, Vinod Khanna, Jeetendra, Parveen Babi और Neetu Singh जैसे कई बड़े सितारे नजर आए थे।फिल्म का निर्देशन Ravi Chopra ने किया था, जो मशहूर फिल्मकार B. R. Chopra के बेटे हैं। आज भी क्यों है खास?भले ही बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन आज The Burning Train को एक क्लासिक डिजास्टर फिल्म के रूप में याद किया जाता है। इसकी कहानी, स्केल और स्टारकास्ट इसे अपने समय से आगे की फिल्म बनाते हैं।
अक्षय कुमार का रिएक्शन: 'हमें एक्टर बने रहना चाहिए', राजपाल यादव के केस पर बोले प्रोड्यूसर नहीं बनना चाहिए

नई दिल्ली। अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने को-स्टार राजपाल यादव के चेक बाउंस और लोन केस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। अक्षय ने साफ कहा कि एक्टर को फिल्म प्रोड्यूसर बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और उन्हें एक्टिंग में ही ध्यान देना चाहिए। फिल्म प्रोड्यूस करने से मना कियाअक्षय कुमार ने बताया कि जब राजपाल यादव फिल्म प्रोड्यूस करने की सोच रहे थे, तब उन्हें सलाह दी गई थी कि एक्टर को सिर्फ एक्टिंग पर ही फोकस करना चाहिए। अक्षय ने कहा, “हम एक्टर्स हैं। प्रोड्यूसर को पता होता है कि फिल्म कैसे प्रोड्यूस करनी है। आप तब ही प्रोड्यूसर बनें जब आपको पूरा ट्रिक पता हो। एक्टर हो तो एक्टर ही बने रहना चाहिए।” राजपाल यादव की तारीफअक्षय ने राजपाल यादव की काम करने की शैली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राजपाल पैसा कमाने के लिए कभी शॉर्टकट नहीं अपनाएंगे और उम्मीद है कि वह अब उस स्थिति से बाहर आ गए हैं। अक्षय ने आगे कहा, “लोग अपना 100% देते हैं, लेकिन राजपाल 120–140% देते हैं। उनके साथ काम करने में मज़ा आता है, और हमारी केमिस्ट्री इतनी नेचुरल है कि कई बार लाइन लिखी भी नहीं होती स्क्रिप्ट में।” भूत बंगला में वापसीअक्षय कुमार और राजपाल यादव की ऑनस्क्रीन जोड़ी हमेशा दर्शकों को पसंद आई है। दोनों ने पहली बार 2004 में मुझसे शादी करोगी फिल्म में साथ काम किया था। अब ये जोड़ी भूत बंगला में नजर आएगी। फिल्म को प्रियदर्शन डायरेक्ट कर रहे हैं और इसमें अक्षय लीड रोल में हैं। इसके अलावा फिल्म में तब्बू और वामिका गब्बी भी अहम किरदार निभा रही हैं। फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली है और फैंस इस कॉमेडी हॉरर फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।