बदलती छवि का दावा रवि किशन बोले अब सुरक्षित है उत्तर प्रदेश माधुरी दीक्षित का उदाहरण

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अक्सर बहस होती रही है लेकिन अब अभिनेता और सांसद रवि किशन ने इस विषय पर एक ऐसा बयान दिया है जिसने चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। रवि किशन ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की और कहा कि अब उत्तर प्रदेश की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने अपने बयान को मजबूत बनाने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का उदाहरण दिया जो हाल ही में गोरखपुर में तीन दिन तक रहीं और पूरी तरह सुरक्षित माहौल में अपना समय बिताकर लौटीं। रवि किशन ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब लोग उत्तर प्रदेश आने से डरते थे और यहां शूटिंग करने से भी कतराते थे। उन्होंने पुराने दौर का जिक्र करते हुए बताया कि लोग कहते थे कि वहां जाना सुरक्षित नहीं है लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है और यही कारण है कि बड़े कलाकार भी बिना किसी डर के यहां आ रहे हैं और समय बिता रहे हैं। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि माधुरी दीक्षित का गोरखपुर में तीन दिन रुकना इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। रवि किशन के इस बयान के दौरान वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में पूछा कि आखिर हंसी किस बात पर आ रही है। इसके बाद उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में एक और बात जोड़ते हुए कहा कि कई नेता भी अभिनेत्री से मिलने पहुंचे और खास बात यह रही कि वे अपने बाल रंगकर आए थे। उन्होंने यह बात हंसी मजाक में कही लेकिन इससे माहौल और भी हल्का हो गया। रवि किशन और माधुरी दीक्षित जल्द ही एक साथ एक नई फिल्म में नजर आने वाले हैं जिसका नाम मां बहन बताया जा रहा है। इस फिल्म में उनके साथ तृप्ति डिमरी भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी। फिल्म का टीजर पहले ही जारी हो चुका है और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित एक मां के किरदार में नजर आएंगी जबकि तृप्ति उनकी बेटी की भूमिका निभा रही हैं। रवि किशन के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनके पास कई प्रोजेक्ट लाइन में हैं। वह धमाल 4 और मिर्जापुर जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। इसके अलावा वह मामला लीगल है सीजन 2 और टैक्स डिपार्टमेंट स्टोरी में भी नजर आएंगे। एक समय भोजपुरी सिनेमा के बड़े सितारे रहे रवि किशन अब मुख्यधारा और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर सक्रिय हैं। वहीं माधुरी दीक्षित की बात करें तो उन्होंने हाल के वर्षों में फिल्मों के साथ साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। वे पिछली बार एक वेब शो में नजर आई थीं जिसमें उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी। फिल्मों में भी उन्होंने अपनी वापसी को मजबूत बनाए रखा है और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता अब भी बरकरार है। रवि किशन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश अपनी छवि सुधारने और निवेश तथा फिल्म शूटिंग के लिए एक आकर्षक केंद्र बनने की दिशा में प्रयास कर रहा है। उनके इस बयान ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस को तेज कर दिया है और यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई प्रदेश की तस्वीर अब बदल चुकी है।
जापानी और दो हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित थी ये 1980 की फिल्म, बनने में लगे पूरे 5 साल

नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जो अपनी कहानी, स्टारकास्ट और निर्माण की वजह से चर्चा में रहती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है The Burning Train, जो 1980 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म जितनी बड़ी स्टारकास्ट के लिए जानी जाती है, उतनी ही अपने निर्माण और प्रेरणा को लेकर भी खास मानी जाती है। 5 साल में तैयार हुई फिल्मइस मल्टीस्टारर फिल्म की घोषणा साल 1976 में की गई थी, लेकिन इसे रिलीज होने में पूरे पांच साल लग गए। मार्च 1980 में जब फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो इसकी ओपनिंग 100% ऑक्यूपेंसी के साथ हुई। हालांकि, शुरुआती शानदार शुरुआत के बावजूद फिल्म धीरे-धीरे बॉक्स ऑफिस पर कमजोर पड़ गई और औसत साबित हुई। विदेशी फिल्मों से ली गई प्रेरणाकम ही लोग जानते हैं कि The Burning Train की कहानी पूरी तरह मौलिक नहीं थी। यह एक जापानी और दो हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित थी: The Bullet Train (जापान)The Towering InfernoThe Cassandra Crossing इन तीनों फिल्मों की कहानी और कॉन्सेप्ट को मिलाकर एक बड़ी आपदा-आधारित कहानी तैयार की गई, जिसे भारतीय दर्शकों के लिए ढाला गया। क्या थी कहानी की खासियत?जापानी फिल्म The Bullet Train में ट्रेन में बम लगाकर उसे एक निश्चित स्पीड से नीचे आने पर उड़ाने की धमकी दी जाती है। वहीं The Towering Inferno से इंसानी भावनाओं और आपदा के दौरान लोगों की प्रतिक्रिया को दिखाने का विचार लिया गया। इसके अलावा The Cassandra Crossing से “चलती ट्रेन में फंसे लोगों की जान का खतरा” वाला एंगल जोड़ा गया। इन तीनों तत्वों को मिलाकर एक ऐसी कहानी बनाई गई, जिसमें आग से घिरी ट्रेन में फंसे यात्रियों की जिंदगी और जंग को दिखाया गया। स्टारकास्ट थी फिल्म की सबसे बड़ी ताकतइस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टीस्टार कास्ट थी। इसमें Dharmendra, Hema Malini, Vinod Khanna, Jeetendra, Parveen Babi और Neetu Singh जैसे कई बड़े सितारे नजर आए थे।फिल्म का निर्देशन Ravi Chopra ने किया था, जो मशहूर फिल्मकार B. R. Chopra के बेटे हैं। आज भी क्यों है खास?भले ही बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन आज The Burning Train को एक क्लासिक डिजास्टर फिल्म के रूप में याद किया जाता है। इसकी कहानी, स्केल और स्टारकास्ट इसे अपने समय से आगे की फिल्म बनाते हैं।
अक्षय कुमार का रिएक्शन: 'हमें एक्टर बने रहना चाहिए', राजपाल यादव के केस पर बोले प्रोड्यूसर नहीं बनना चाहिए

नई दिल्ली। अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने को-स्टार राजपाल यादव के चेक बाउंस और लोन केस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। अक्षय ने साफ कहा कि एक्टर को फिल्म प्रोड्यूसर बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और उन्हें एक्टिंग में ही ध्यान देना चाहिए। फिल्म प्रोड्यूस करने से मना कियाअक्षय कुमार ने बताया कि जब राजपाल यादव फिल्म प्रोड्यूस करने की सोच रहे थे, तब उन्हें सलाह दी गई थी कि एक्टर को सिर्फ एक्टिंग पर ही फोकस करना चाहिए। अक्षय ने कहा, “हम एक्टर्स हैं। प्रोड्यूसर को पता होता है कि फिल्म कैसे प्रोड्यूस करनी है। आप तब ही प्रोड्यूसर बनें जब आपको पूरा ट्रिक पता हो। एक्टर हो तो एक्टर ही बने रहना चाहिए।” राजपाल यादव की तारीफअक्षय ने राजपाल यादव की काम करने की शैली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राजपाल पैसा कमाने के लिए कभी शॉर्टकट नहीं अपनाएंगे और उम्मीद है कि वह अब उस स्थिति से बाहर आ गए हैं। अक्षय ने आगे कहा, “लोग अपना 100% देते हैं, लेकिन राजपाल 120–140% देते हैं। उनके साथ काम करने में मज़ा आता है, और हमारी केमिस्ट्री इतनी नेचुरल है कि कई बार लाइन लिखी भी नहीं होती स्क्रिप्ट में।” भूत बंगला में वापसीअक्षय कुमार और राजपाल यादव की ऑनस्क्रीन जोड़ी हमेशा दर्शकों को पसंद आई है। दोनों ने पहली बार 2004 में मुझसे शादी करोगी फिल्म में साथ काम किया था। अब ये जोड़ी भूत बंगला में नजर आएगी। फिल्म को प्रियदर्शन डायरेक्ट कर रहे हैं और इसमें अक्षय लीड रोल में हैं। इसके अलावा फिल्म में तब्बू और वामिका गब्बी भी अहम किरदार निभा रही हैं। फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली है और फैंस इस कॉमेडी हॉरर फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
बॉलीवुड में फ्लॉप हीरो, साउथ में है सुपरस्टार का दर्जा, फिल्मों और बिजनेस से बनाया 1400 करोड़ का नेटवर्थ

नई दिल्ली: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार राम चरण का नाम आज भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में खास पहचान रखता है. साउथ में ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले राम चरण का बॉलीवुड में सफर कुछ खास नहीं रहा, लेकिन उनकी मेहनत, डांसिंग स्किल और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें तेलुगु सिनेमा का जिंदा सितारा बना दिया. 27 मार्च 1985 को चेन्नई में जन्मे राम चरण अभिनेता चिरंजीवी के बेटे हैं. फिल्मी खानदान से आने के बावजूद राम चरण ने अपने करियर में कभी पिता के नाम का सहारा नहीं लिया. उन्होंने मुंबई के किशोर नमित कपूर एक्टिंग स्कूल में प्रशिक्षण लिया और पूरी मेहनत के साथ अभिनय की दुनिया में कदम रखा. राम चरण ने अपने करियर की शुरुआत साल 2007 में फिल्म ‘चिरुथा’ से की. पहले ही प्रयास में उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू का अवॉर्ड मिला. असली पहचान उन्हें साल 2009 में आई ‘मगधीरा’ से मिली. एसएस राजामौली की इस फिल्म में राम चरण ने डबल रोल निभाया और यह तेलुगु सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बन गई. इसके बाद उन्होंने ‘ऑरेंज’, ‘राचा’, ‘नायक’ और ‘येवादू’ जैसी कई सफल फिल्में दी, जिन्होंने उनकी स्टारडम को और मजबूत किया. लेकिन राम चरण का असली टर्निंग पॉइंट साल 2022 में रिलीज हुई ‘आरआरआर’ साबित हुई. जूनियर एनटीआर के साथ नजर आए राम चरण ने इस फिल्म में अपने अभिनय, डांस और स्क्रीन प्रेजेंस से पूरी दुनिया में नाम कमाया. 550 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 1,300 करोड़ से अधिक की कमाई की और इसका गाना ‘नाटू-नाटू’ ऑस्कर अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच गया. इस गाने की शूटिंग के दौरान राम चरण ने 12 दिन लगातार प्रैक्टिस की और घुटनों में चोट झेलते हुए भी मेहनत जारी रखी. हालांकि बॉलीवुड में उनका सफर उतना सफल नहीं रहा. साल 2013 में प्रियंका चोपड़ा और संजय दत्त के साथ ‘जंजीर’ के रीमेक में उन्होंने काम किया, लेकिन फिल्म फ्लॉप रही और बॉक्स ऑफिस पर अपना बजट भी नहीं वसूल कर पाई. यही कारण है कि राम चरण साउथ इंडस्ट्री में सुपरस्टार हैं लेकिन बॉलीवुड में उनकी किस्मत कुछ खास नहीं चली. कम ही लोग जानते हैं कि राम चरण सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक सफल बिजनेसमैन भी हैं. उन्होंने एयरलाइन कंपनी और पोलो राइडिंग क्लब जैसे कई कारोबार खड़े किए. उनकी मेहनत और बिजनेस स्किल्स ने उन्हें लगभग 1,370 से 1,400 करोड़ रुपए की संपत्ति दिलाई. फिल्मी खानदान की मेगा फैमिली से ताल्लुक रखने वाले राम चरण के चाचा पवन कल्याण और नागेंद्र बाबू भी तेलुगु सिनेमा के बड़े सितारे हैं, जबकि उनके कजिन अल्लू अर्जुन सुपरस्टार हैं. राम चरण की दो बहनें सुष्मिता और श्रीजा मीडिया से दूर रहती हैं. राम चरण की कहानी मेहनत, फिल्मी विरासत और अद्वितीय सफलता का उदाहरण है. बॉलीवुड में असफलता और साउथ में सुपरस्टार बनने का उनका सफर दर्शाता है कि सच्ची मेहनत और लगन किसी भी चुनौती को मात दे सकती है. ‘आरआरआर’ जैसी ग्लोबल हिट ने उन्हें सिर्फ साउथ का नहीं, बल्कि पूरे विश्व का स्टार बना दिया.
प्रिया राजवंश: सिर्फ 7 फिल्मों में रातोंरात सुपरस्टार, चेतन आनंद संग लिव-इन रिलेशनशिप और रहस्यमयी मौत

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो काम बेहद कम करने के बावजूद अपने अभिनय और व्यक्तित्व से हमेशा के लिए दर्शकों के दिलों में जगह बना लेते हैं. ऐसे ही कलाकार थीं दिवंगत अभिनेत्री प्रिया राजवंश जिन्होंने अपने करियर में केवल सात फिल्में कीं, लेकिन हर फिल्म में अपने किरदार की सादगी, गंभीरता और प्रभाव से एक अमिट छाप छोड़ी. 27 मार्च 2000 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका अभिनय और जीवन आज भी फिल्मों के चाहने वालों के बीच जीवित है. प्रिया राजवंश का असली नाम वीरा सुंदर सिंह था. उनका जन्म 30 दिसंबर 1936 को शिमला में हुआ था. उनके पिता सरकारी अधिकारी थे और परिवार का फिल्मों से कोई संबंध नहीं था. प्रिया ने अपनी पढ़ाई शिमला में पूरी की और इसके बाद अभिनय की ट्रेनिंग लेने के लिए लंदन चली गईं. लंदन में एक फोटोग्राफर ने उनकी कुछ तस्वीरें खींचीं और इन्हीं तस्वीरों ने उनकी किस्मत बदल दी. मशहूर निर्देशक चेतन आनंद ने उनकी तस्वीरें देखकर उन्हें अपनी फिल्म ‘हकीकत’ में काम करने का मौका दिया. यह फिल्म रिलीज होते ही हिट साबित हुई और प्रिया रातों-रात स्टार बन गईं. प्रिया ने अपने करियर में केवल सात फिल्में कीं, लेकिन हर फिल्म में उनका किरदार दर्शकों के दिल में घर कर गया. उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं ‘हीर रांझा’, ‘हंसते जख्म’, ‘हिंदुस्तान की कसम’, ‘कुदरत’ और ‘हाथों की लकीरें’. इन फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग रोल निभाए और हर किरदार में अपने अभिनय का पूरा जादू दिखाया. यही वजह थी कि उनके कम फिल्मों के बावजूद उनका नाम भारतीय सिनेमा में अमर हो गया. प्रिया के करियर का एक अनोखा पहलू यह भी रहा कि उन्होंने ज्यादातर फिल्में चेतन आनंद के निर्देशन में कीं. इस दौरान उनके और चेतन आनंद के बीच करीबी बढ़ी और यह रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल गया. दोनों ने कभी शादी नहीं की, लेकिन लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे. हालांकि, इस रिश्ते का असर उनके करियर पर पड़ा क्योंकि उन्होंने अन्य फिल्ममेकरों के साथ काम नहीं किया और उनके फिल्मी सफर को सीमित कर दिया. 1997 में चेतन आनंद के निधन के बाद प्रिया पूरी तरह अकेली पड़ गईं और उन्होंने खुद को एक्टिंग की दुनिया से अलग कर लिया. लेकिन 27 मार्च 2000 को प्रिया राजवंश अपने ही घर में मृत पाई गईं. जांच में यह सामने आया कि उनकी हत्या की गई थी. पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण मामला कभी साबित नहीं हो सका. इस तरह उनकी मौत आज भी बॉलीवुड के इतिहास में एक रहस्यमयी और दुखद घटना के रूप में दर्ज है. प्रिया राजवंश की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी. उनके अभिनय, उनके रिश्ते और उनका व्यक्तित्व आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है. उनकी फिल्मों की सादगी और उनकी अदाकारी ने उन्हें केवल एक अभिनेत्री ही नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की यादगार हस्ती बना दिया. भले ही उन्होंने कम फिल्में की हों, लेकिन प्रिया राजवंश का नाम और उनका योगदान हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिट रहेगा.
‘हम आपके हैं कौन’ की पूजा: रेणुका शहाणे का फिल्मी करियर, निर्देशन और निजी जिंदगी का अनोखा संगम

नई दिल्ली: फिल्मों में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो हमेशा के लिए दर्शकों के दिल में बस जाते हैं। रेणुका शहाणे उन्हीं कलाकारों में से हैं, जिनकी पहचान ‘हम आपके हैं कौन’ में निभाए गए पूजा के किरदार से जुड़ी है। इस फिल्म ने उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें बॉलीवुड में स्थायी पहचान दिलाई।शुरूआत और टीवी करियर 27 मार्च 1965 को मुंबई में जन्मीं रेणुका शहाणे एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता भारतीय नौसेना में अधिकारी थे और मां शांता गोखले थिएटर व फिल्मों से जुड़ी थीं। बचपन में माता-पिता का अलग होना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। रेणुका ने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म ‘हाच सुनबाईचा भाऊ’ से की। इसके बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में कदम रखा और दूरदर्शन के लोकप्रिय शो ‘सुरभि’ में काम किया। उस समय टीवी पर कम चैनल थे, इसलिए उनका चेहरा घर-घर में पहचान में आ गया।‘हम आपके हैं कौन’ ने बदली तकदीर साल 1994 में उन्हें सूरज बड़जत्या की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में पूजा का किरदार मिला। सलमान खान और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थे। पूजा की सादगी और आदर्श बहू की छवि ने दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म में उनके किरदार की मौत का सीन इतना भावुक था कि आज भी लोग उसे याद करते हैं। इस फिल्म के बाद रेणुका के पास कई फिल्म और टीवी ऑफर्स आने लगे। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। मराठी फिल्म ‘अबोली’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार (मराठी) मिला।निर्देशन में कदम फिल्मों के अलावा रेणुका ने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और ‘त्रिभंगा’ जैसी फिल्म बनाई, जिसमें परिवार और रिश्तों की जटिलताओं को खूबसूरती से दिखाया गया।निजी जिंदगी और प्यार रेणुका ने 25 मई 2001 को अभिनेता आशुतोष राणा से शादी की। दोनों की मुलाकात डायरेक्टर हंसल मेहता की एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। शादी के बाद उन्हें दो बेटे, शौर्यमन और सत्येंद्र, हुए। रेणुका शहाणे की कहानी फिल्मों की सफलता, यादगार किरदारों, निर्देशन और निजी जिंदगी की अनोखी यात्रा का मिश्रण है। उन्होंने अपनी प्रतिभा और सादगी से दर्शकों के दिल में स्थायी जगह बनाई।
पर्दे के पीछे का जादू ऐसे बनते हैं बॉलीवुड के ग्रैंड सेट और इन फिल्मों ने खर्च में रच दिया इतिहास

नई दिल्ली । फिल्मों में दिखने वाली भव्यता सिर्फ कलाकारों या लोकेशन की देन नहीं होती बल्कि उसके पीछे एक पूरी टीम की महीनों की मेहनत छिपी होती है। जब भी आप किसी ऐतिहासिक या भव्य फिल्म को देखते हैं तो उसके सेट आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। लेकिन यह जादू अचानक नहीं बनता बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और बेहद तकनीकी प्रक्रिया होती है। फिल्म का सेट तैयार करने की जिम्मेदारी प्रोडक्शन डिजाइनर और आर्ट डायरेक्टर की होती है। ये लोग निर्देशक के विजन को समझकर पहले ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं। इसमें हर छोटी बड़ी डिटेल शामिल होती है जैसे महल का आकार दरवाजों की डिजाइन रंगों का संयोजन और यहां तक कि दीवारों की बनावट तक। इसके बाद लकड़ी फाइबर प्लास्टर और अन्य विशेष सामग्री की मदद से सेट को धीरे धीरे खड़ा किया जाता है। कई बार सेट इतने वास्तविक बनाए जाते हैं कि दर्शक उन्हें असली लोकेशन समझ बैठते हैं। भारतीय सिनेमा में भव्य सेट्स की बात हो और संजय लीला भंसाली का नाम न आए ऐसा हो ही नहीं सकता। उनकी फिल्मों की पहचान ही उनके शानदार और महंगे सेट होते हैं जो कहानी को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं। अगर बॉलीवुड के सबसे महंगे सेट्स की बात करें तो बाजीराव मस्तानी इस लिस्ट में सबसे ऊपर नजर आती है। इस फिल्म में रणवीर सिंह दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा हैं। मुख्य भूमिकाओं में थे और इसके सेट को तैयार करने में लगभग 145 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यह सेट अपनी भव्यता और डिटेलिंग के लिए आज भी याद किया जाता है। वहीं देवदास भी अपने समय की सबसे आलीशान फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शाहरुख खान ऐश्वर्या राय बच्चन और माधुरी दीक्षित नजर आए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के सेट पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हुए थे जिसमें से 12 करोड़ सिर्फ चंद्रमुखी के कोठे के निर्माण में लगे थे।प्रेम रतन धन पायो भी शाही ठाठ बात के लिए जानी जाती है। सलमान खान और सोनम कपूर स्टारर है फिल्म के सेट को बनाने में लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये खर्च हुए थे जिससे फिल्म को एक रॉयल लुक दिया जा सका। इसी तरह जोधा अकबर जिसमें ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन नजर आई थीं उसके सेट पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। फिल्म के महलों और दरबारों की भव्यता ने दर्शकों को जोड़ा कर दिया था। कलंक भी अपने विशाल सेट्स के लिए चर्चा में रही। वरुण धवन आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर स्टार इस फिल्म के सेट को तैयार करने में करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इन फिल्मों के सेट सिर्फ खर्च के आंकड़े नहीं हैं बल्कि यह दर्शाते हैं कि सिनेमा एक विजुअल आर्ट है जहां हर फ्रेम को खास बनाने के लिए बारीकी से काम किया जाता है। यही वजह है कि जब दर्शक इन फिल्मों को देखते हैं तो उन्हें सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि एक भव्य अनुभव भी मिलता है जो लंबे समय तक याद रहता है।
मुनमुन सेन: सैफ अली खान की पूर्व प्रेमिका, 20 भाषाओं में 60 फिल्में और रॉयल बैकग्राउंड वाली एक्ट्रेस

नई दिल्ली : हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा में कई अभिनेत्रियां रही हैं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई लेकिन समय के साथ लाइमलाइट से दूर होती चली गईं। ऐसी ही एक नाम है मुनमुन सेन, जिनकी जिंदगी फिल्मों, रिश्तों और शाही बैकग्राउंड का दिलचस्प संगम रही है। मुनमुन सेन ने 20 से ज्यादा भाषाओं में करीब 60 फिल्मों और 40 टीवी सीरियल्स में अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया। उनका नाम एक समय सैफ अली खान के साथ भी जुड़ा था, जिसने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।फिल्मी करियर और विरासत मुनमुन सेन, दिग्गज अभिनेत्री सुचित्रा सेन की बेटी हैं और खुद भी इंडस्ट्री में बड़ा नाम रही हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, तमिल, तेलुगु समेत कई भाषाओं में काम किया। अपने करियर में उन्हें नंदी स्टेट अवॉर्ड, कालकेंद्र स्क्रीन अवॉर्ड और भारत निर्माण अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिले। उनकी निजी जिंदगी भी किसी शाही कहानी से कम नहीं रही। उनकी सास इला देवी कूचबिहार की राजकुमारी थीं और रिश्तेदार गायत्री देवी जयपुर की महारानी रहीं। यह शाही बैकग्राउंड उनके व्यक्तित्व को और खास बनाता है।रिश्ते और निजी जिंदगी 90 के दशक में मुनमुन सेन का नाम सैफ अली खान के साथ जुड़ा, जिससे वो मीडिया की सुर्खियों में आईं। इसके अलावा उनका नाम प्रोड्यूसर रोमू सिप्पी और अभिनेता विक्टर बनर्जी के साथ भी जोड़ा गया। 1978 में उन्होंने भरत देव वर्मा से शादी की, जो त्रिपुरा के शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी दो बेटियां, रायमा सेन और रिया सेन, आज इंडस्ट्री में जाना-पहचाना चेहरा हैं।फिल्मों से दूरी और अब की जिंदगी एक समय इंडस्ट्री में सक्रिय रहने वाली मुनमुन सेन अब कम ही फिल्मों में नजर आती हैं। वह कभी-कभी इवेंट्स, पेज-3 पार्टियों और सोशल अपीयरेंस में दिखाई देती हैं। इसके अलावा उन्हें पेंटिंग और एंटीक चीजों को कलेक्ट करने का शौक है। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी से कंपेरेटिव लिटरेचर में मास्टर्स किया और अब एक बंगाली कुकबुक पर भी काम कर रही हैं। भले ही वह पर्दे से दूर हों, लेकिन उनका नाम आज भी फिल्म इंडस्ट्री में खास पहचान रखता है। मुनमुन सेन की कहानी फिल्मी करियर, प्यार और शाही विरासत का ऐसा संगम है, जो उन्हें एक अद्वितीय स्थान देती है।
जब शूटिंग बनी हकीकत 1988 की इस फिल्म में सचमुच चाकू लगने पर भी एक्टिंग करते रहे नाना पाटेकर

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि समय के साथ एक मिसाल बन जाती हैं। साल 1988 में रिलीज हुई सलाम बॉम्बे! ऐसी ही एक कल्ट क्लासिक फिल्म है जिसने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई। बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी सशक्त कहानी और दमदार अभिनय के दम पर तीन राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए और ऑस्कर तक का सफर तय किया। इस फिल्म का निर्देशन मीरा नायर ने किया था और इसमें नाना पाटेकर रघुबीर यादव और बाल कलाकार शफीक सैयद जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म का रनटाइम करीब 1 घंटा 35 मिनट था लेकिन इसकी कहानी और प्रभाव लंबे समय तक दर्शकों के दिलो दिमाग में बना रहा। इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है। दरअसल फिल्म के क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान एक खतरनाक हादसा हो गया था। सीन के मुताबिक शफीक सैयद का किरदार कृष्णा नाना पाटेकर के किरदार पर चाकू से हमला करता है। इस सीन को फिल्माने के लिए पूरी तैयारी की गई थी और सुरक्षा के तौर पर नाना पाटेकर के पेट पर टायर बांधा गया था ताकि चाकू उन्हें नुकसान न पहुंचा सके। लेकिन शूटिंग के दौरान एक छोटी सी चूक भारी पड़ गई। जब शफीक सैयद ने सीन के अनुसार चाकू मारा तो वह टायर को पार करते हुए सच में नाना पाटेकर के पेट में जा लगा। इससे उनके पेट से खून बहने लगा लेकिन हैरानी की बात यह रही कि नाना पाटेकर ने सीन को बीच में नहीं रोका और अभिनय जारी रखा। सेट पर मौजूद लोगों को लगा कि यह सब उनकी शानदार एक्टिंग का हिस्सा है और वे उनकी तारीफ करने लगे। कुछ देर बाद जब स्थिति स्पष्ट हुई तब सभी को एहसास हुआ कि यह कोई अभिनय नहीं बल्कि असली हादसा था। इसके बाद तुरंत उनका इलाज कराया गया। यह घटना नाना पाटेकर की प्रोफेशनलिज्म और अपने काम के प्रति समर्पण को दर्शाती है। फिल्म की बात करें तो करीब 20 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 45 लाख की कमाई की थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी। आज भी इसकी IMDb रेटिंग 7.9 के आसपास बनी हुई है जो इसकी गुणवत्ता को दर्शाती है। पुरस्कारों की बात करें तो सलाम बॉम्बे! ने 1989 में तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। शफीक सैयद को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला जबकि मीरा नायर को बेस्ट रीजनल फिल्म के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।इस फिल्म ने एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया। मदर इंडिया के बाद यह दूसरी भारतीय फिल्म बनी जिसे ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया। कुल मिलाकर सलाम बॉम्बे सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा का एक ऐसा अध्याय है जिसमें संघर्ष, यथार्थ और सिनेमा की ताकत का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। आज भी यह फिल्म और इससे जुड़ी कहानियां लोगों को उतना ही प्रभावित करती हैं जितना इसके रिलीज के समय करती थीं।
सिनेमाघरों में पहले पहुंचेगी वाल्मिकी रामायण फर्स्ट लुक ने जगाई भक्ति और भव्यता की लहर

नई दिल्ली । राम नवमी के पावन अवसर पर भारतीय सिनेमा को एक और भव्य पौराणिक प्रस्तुति की झलक देखने को मिली जब फिल्म वाल्मिकी रामायण का पहला लुक जारी किया गया। इस खास मौके पर सामने आए पोस्टर ने दर्शकों के मन में श्रद्धा और उत्सुकता दोनों को एक साथ जगा दिया। पोस्टर में भगवान राम के चरणों की झलक दिखाई गई है जो फिल्म की आध्यात्मिक गहराई और उसके भावनात्मक पक्ष को उजागर करती है। इस फिल्म को Bhavna Talwar निर्देशित कर रही हैं और यह 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह Ranbir Kapoor की बहुचर्चित फिल्म रामायण से पहले बड़े पर्दे पर दस्तक देगी। जहां एक ओर रणबीर कपूर की फिल्म को लेकर पहले से ही जबरदस्त बज बना हुआ है वहीं वाल्मिकी रामायण की एंट्री ने इस प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना दिया है। दर्शकों को अब एक ही साल में रामायण की दो अलग अलग व्याख्याएं देखने का मौका मिलने वाला है। वाल्मिकी रामायण की टीम भी इसे खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। फिल्म से जुड़े नाम इसकी भव्यता का अंदाजा खुद ही दे देते हैं। मशहूर प्रोडक्शन डिजाइनर Sabu Cyril जो बाहुबली जैसी फिल्मों में अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। इसके अलावा सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी Binod Pradhan संभाल रहे हैं जबकि साउंड डिजाइन के लिए ऑस्कर विजेता Resul Pookutty जुड़े हुए हैं। फिल्म का स्क्रीनप्ले Anand Neelakantan ने लिखा है और डायलॉग्स Chandraprakash Dwivedi द्वारा तैयार किए गए हैं। इस मजबूत टीम के चलते फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं। हालांकि फिल्म के ऐलान के साथ ही सोशल मीडिया पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं। कुछ यूजर्स ने फिल्म के लुक की तारीफ की और इसे भव्य और आध्यात्मिक बताया वहीं कुछ ने सवाल उठाए कि क्या यह फिल्म एनिमेशन आधारित होगी या इसमें एआई का इस्तेमाल किया गया है। कई लोगों ने यह भी कहा कि लगातार बन रही रामायण फिल्मों के बीच कहीं कहानी की मौलिकता प्रभावित न हो जाए। दूसरी ओर Nitesh Tiwari द्वारा निर्देशित रणबीर कपूर की रामायण भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म को दो भागों में रिलीज किया जाएगा और इसका पहला पार्ट दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में आने की तैयारी में है। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में नजर आएंगे जबकि साउथ की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा Sunny Deol Yash और Lara Dutta जैसे बड़े नाम भी इसमें शामिल हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो साल 2026 भारतीय सिनेमा में रामायण की कहानियों के नाम रहने वाला है। एक तरफ वाल्मिकी रामायण अपनी पारंपरिक और शास्त्रीय प्रस्तुति के साथ दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश करेगी वहीं दूसरी तरफ रणबीर कपूर की फिल्म आधुनिक तकनीक और बड़े स्टारकास्ट के साथ नई पीढ़ी को लुभाने का प्रयास करेगी। अब देखना यह होगा कि दर्शक किस प्रस्तुति को ज्यादा पसंद करते हैं और कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बाजी मारती है।