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S. S. Rajamouli की वाराणसी बनी ग्लोबल चर्चा का केंद्र प्रियंका चोपड़ा और महेश बाबू का मेगा प्रोजेक्ट

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के मशहूर निर्देशक S. S. Rajamouli का अगला मेगा प्रोजेक्ट वाराणसी इन दिनों जबरदस्त चर्चा में बना हुआ है फिल्म की शूटिंग अभी जारी है लेकिन इसके पहले ही इसके भव्य सेट ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है हाल ही में इस फिल्म के सेट की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जो इतनी वास्तविक लग रही हैं कि दर्शक असली और नकली के बीच फर्क ही नहीं कर पा रहे हैं इस फिल्म में सुपरस्टार Mahesh Babu और ग्लोबल आइकन Priyanka Chopra मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं वहीं Prithviraj Sukumaran भी इस बड़े प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा हैं इंटरनेशनल लेवल पर बन रही इस फिल्म को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है खास बात यह है कि फिल्म के लिए उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर Varanasi को हूबहू हैदराबाद के स्टूडियो में तैयार किया गया है यहां गंगा के घाट मंदिरों की वास्तुकला और संकरी गलियों को इतनी बारीकी से रिक्रिएट किया गया है कि पहली नजर में यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि यह असली लोकेशन नहीं है बल्कि एक सेट है बताया जा रहा है कि फिल्म के टीजर लॉन्च से पहले दुनियाभर के कई इंटरनेशनल मीडिया हाउस को भारत बुलाया गया था जहां उन्हें इस विशाल सेट का दौरा कराया गया इस दौरान कलाकारों और मेकर्स ने फिल्म के विजन और स्केल की झलक भी दिखाई सेट पर मौजूद छोटे छोटे मॉडल्स और मिनिएचर्स से लेकर बड़े घाटों की संरचना तक हर चीज में अद्भुत डिटेलिंग देखने को मिली सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में नदी किनारे बने मंदिरों की खूबसूरती और शहर की जीवंतता साफ झलक रही है कई फैंस ने इन तस्वीरों को देखकर हैरानी जताई और कहा कि यह सेट किसी हॉलीवुड प्रोडक्शन से कम नहीं लग रहा है फिल्म की खास बात यह भी है कि इसकी शूटिंग सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि इसे कई अंतरराष्ट्रीय लोकेशन्स पर भी फिल्माया जा रहा है खबरों के मुताबिक अगला शेड्यूल अंटार्कटिका में शूट किया जाएगा जो इसे और भी भव्य और अनोखा बना देगा राजामौली अपने बड़े विजन और शानदार फिल्ममेकिंग के लिए जाने जाते हैं और इस फिल्म से भी दर्शकों को कुछ अलग और भव्य देखने की उम्मीद है वाराणसी सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को ग्लोबल मंच पर पेश करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है

एक नहीं दो घड़ियां क्यों पहनते हैं Abhishek Bachchan जानिए बच्चन परिवार की दिलचस्प कहानी

नई दिल्ली:  हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता Abhishek Bachchan एक हाई प्रोफाइल इवेंट में नजर आए जहां उनका ऑल ब्लैक लुक चर्चा का केंद्र बन गया लेकिन उनके स्टाइल से भी ज्यादा जिस चीज ने लोगों का ध्यान खींचा वह थी उनकी दोनों कलाईयों पर बंधी घड़ियां सोशल मीडिया पर जैसे ही उनकी तस्वीरें सामने आईं वैसे ही यह सवाल तेजी से वायरल हो गया कि आखिर वह दोनों हाथों में घड़ी क्यों पहनते हैं इवेंट में अभिषेक बेहद स्टाइलिश और कॉन्फिडेंट नजर आए एक हाथ में गोल्डन वॉच और दूसरे में ब्लैक कलर की वॉच पहने उनका लुक क्लासी और अलग दिख रहा था फैंस ने उनके इस अंदाज को लेकर कई तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए कुछ लोगों ने इसे नया फैशन ट्रेंड बताया तो कुछ ने इसे स्टेटस सिंबल माना लेकिन इस स्टाइल के पीछे की असली कहानी कुछ और ही है दरअसल दोनों हाथों में घड़ी पहनना कोई नया फैशन नहीं बल्कि बच्चन परिवार की एक पुरानी परंपरा है यह आदत अभिषेक के पिता महानायक Amitabh Bachchan में भी देखी जाती है और इसके पीछे की जड़ें उनकी मां Jaya Bachchan से जुड़ी हुई हैं अभिषेक ने एक इंटरव्यू में इस परंपरा के बारे में खुलकर बताया था उन्होंने कहा कि उनकी मां जया बच्चन जब यूरोप में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थीं तब वह एक साथ दो टाइम जोन को मैनेज करने के लिए दोनों हाथों में घड़ी पहनती थीं एक घड़ी भारत का समय दिखाती थी जबकि दूसरी यूरोप का इससे उन्हें अपने परिवार खासकर भारत में मौजूद लोगों के साथ बातचीत का समय तय करने में आसानी होती थी समय के साथ यह आदत सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव बन गई बाद में Amitabh Bachchan ने भी इसे अपनाया और अब Abhishek Bachchan भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं यही वजह है कि जब भी वह दोनों हाथों में घड़ी पहने नजर आते हैं तो यह सिर्फ स्टाइल नहीं बल्कि परिवार के साथ जुड़ी एक खास भावना का प्रतीक होता है सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों के बाद अब फैंस इस स्टाइल को नए नजरिए से देख रहे हैं यह सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो समय और रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखने की खूबसूरत कहानी कहती है

सपोर्टिंग किरदारों से तंग आए समीर सोनी बोले अब या तो हीरो बनूंगा या एक्टिंग छोड़ दूंगा

नई दिल्ली:बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं जो सालों तक मेहनत करने के बावजूद वो मुकाम हासिल नहीं कर पाते जिसके वे हकदार होते हैं। उन्हीं में से एक नाम है समीर सोनी का जिन्होंने करीब 25 साल तक इंडस्ट्री में काम किया लेकिन उन्हें हमेशा सपोर्टिंग रोल में ही देखा गया। अब इतने लंबे इंतजार के बाद उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। हाल ही में समीर सोनी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए साफ तौर पर कहा कि अब वह सपोर्टिंग किरदार नहीं निभाना चाहते। उन्होंने लिखा कि 25 साल तक इंतजार करने के बाद अब समय आ गया है कि उन्हें लीड रोल मिले। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें मुख्य भूमिका नहीं मिलती है तो वह एक्टिंग छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं। उनके इस बयान ने फैंस और इंडस्ट्री दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। समीर सोनी का यह फैसला सिर्फ एक नाराजगी नहीं बल्कि उनके लंबे संघर्ष और अंदरूनी भावनाओं का परिणाम माना जा रहा है। उन्होंने अपने करियर में बेटे भाई पति और पिता जैसे कई किरदार निभाए लेकिन कभी भी कहानी के केंद्र में नहीं रहे। अब वह खुद को एक लीड एक्टर के रूप में साबित करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने यह सख्त रुख अपनाया है। अगर उनके करियर पर नजर डालें तो उन्होंने टीवी से अपनी पहचान बनाई। समंदर जस्सी जैसी कोई नहीं और परिचय नई जिंदगी के सपनों का जैसे शोज में उन्होंने शानदार काम किया और घर घर में पहचाने गए। इसके बाद उन्होंने फिल्म चाइना गेट से बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि फिल्मों में भी उन्हें ज्यादातर सपोर्टिंग रोल ही मिले। फिल्म बागबान में अमिताभ बच्चन के बेटे के रूप में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया और यह उनके करियर का एक अहम मोड़ साबित हुआ। इसके अलावा उन्होंने फैशन विवाह और स्टूडेंट ऑफ द ईयर जैसी फिल्मों में भी काम किया और अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। साल 2010 में उन्होंने बिग बॉस 4 में हिस्सा लेकर भी दर्शकों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी पर्सनल लाइफ भी काफी दिलचस्प रही है। उनकी शादी नीलम कोठारी से हुई है जो 80 और 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री रही हैं। दोनों की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों पहले अपने अपने रिश्तों में असफल रहे लेकिन बाद में एक दूसरे में सच्चा प्यार मिला और उन्होंने शादी कर ली। समीर सोनी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडस्ट्री में कंटेंट और किरदारों की विविधता पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका यह कदम यह भी दिखाता है कि अब कलाकार सिर्फ काम करने के लिए नहीं बल्कि सही पहचान और सम्मान के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनका यह फैसला उनके करियर को नई दिशा देता है या वह सच में एक्टिंग को अलविदा कह देते हैं।

ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपने अभिनय और सादगी से एक अलग पहचान बनाई उन्हीं में से एक थे फारूख शेख जिनका जन्म 25 मार्च 1948 को गुजरात के सूरत जिले के अमरोली में हुआ था अपने करियर की शुरुआत उन्होंने एक ऐसे समय में की जब सिनेमा में समानांतर सिनेमा की एक नई धारा आकार ले रही थी और फारूख शेख इस धारा के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे फारूख शेख की शिक्षा मुंबई में हुई उन्होंने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला लिया और फिर सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की डिग्री प्राप्त की यह दिलचस्प है कि वे लॉ के फाइनल ईयर में पढ़ रहे थे जब उन्हें अपनी पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला उनकी पहली फिल्म गर्म हवाथी जिसे निर्देशक एमएस सथ्यू ने बनाया था इस फिल्म को भारतीय न्यू वेव सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित यह फिल्म विभाजन के बाद के दौर में एक मुस्लिम परिवार के संघर्ष और पहचान के संकट को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकार थे और इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र सात सौ पचास रुपये की फीस मिली थी गर्म हवाके बाद फारूख शेख ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने शतरंज के खिलाड़ीजैसी फिल्म में सत्यजीत रे के निर्देशन में काम किया जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई इसके बाद गमनमें उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली रहा जिसमें उन्होंने एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई जो मुंबई में संघर्ष करता है और अंततः अपने घर वापस नहीं लौट पाता यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है फारूख शेख केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंकर भी थे उन्होंने रेडियो पर क्विज शो होस्ट किए और दूरदर्शन के कार्यक्रम युवा दर्शनऔर यंग वर्ल्डके माध्यम से घर घर में लोकप्रियता हासिल की उनकी मधुर आवाज और सादगी भरा अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आता था उनकी फिल्मों में नूरीचश्मे बुद्दूरकथासाथ साथकिसी से न कहनारंग बिरंगीएक पलअंजुमनफासलेऔर बाजारजैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं इनमें चश्मे बुद्दूरको खासतौर पर दर्शकों ने बहुत पसंद किया और यह उनकी सबसे लोकप्रिय फिल्मों में से एक बन गई फारूख शेख का फिल्मी करियर 1977 से 1989 तक सक्रिय रहा इसके बाद उन्होंने टेलीविजन में काम करना शुरू किया और 1988 से 2000 तक टीवी पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई बाद में 2008 में उन्होंने एक बार फिर फिल्मों में वापसी की और लाहौरये जवानी है दीवानीशंघाईऔर क्लब 60जैसी फिल्मों में काम करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया अपने पूरे करियर में फारूख शेख ने जिस तरह के किरदार निभाए वे यथार्थ के बेहद करीब थे और उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा को एक नई दिशा दी 28 दिसंबर 2013 को दुबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया लेकिन उनके अभिनय और सादगी की छाप आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा है

सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत

नई दिल्ली :अभिनेता और फिल्ममेकर सौरभ शुक्ला ने जीवन और रिश्तों को लेकर एक गहरा और विचारोत्तेजक दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस दुनिया में परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती और इंसान स्वभाव से अपूर्ण होता है। उनके अनुसार यही अपूर्णता जीवन को आगे बढ़ने का अवसर देती है और इसमें सुधार की हमेशा गुंजाइश बनी रहती है। आईएएनएस से बातचीत में सौरभ शुक्ला ने कहा कि अगर कोई चीज पूरी तरह से परफेक्ट हो जाए तो उसमें आगे बढ़ने या कुछ नया सीखने की संभावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि अपूर्णता ही वह तत्व है जो इंसान को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। उनके मुताबिक परफेक्शन भले ही सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन वास्तव में यह एक स्थिर और बोरिंग स्थिति है, जबकि अपूर्णता जीवन को गतिशील बनाए रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान अक्सर अपने जीवन में परफेक्ट रिश्तों या परफेक्ट शादी की तलाश करता है, लेकिन यह एक भ्रम है। वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अपूर्ण होता है और उसकी असली खूबसूरती भी इन्हीं खामियों को स्वीकार करने में है। जब हम अपने साथी की कमियों को समझते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं, तभी एक मजबूत और गहरा रिश्ता बनता है। सौरभ शुक्ला ने रिश्तों में ईमानदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि किसी भी रिश्ते में पारदर्शिता और सच्चाई का होना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्ते में सच को छुपाता है, तो भले ही वह बात उस समय संभल जाए, लेकिन भविष्य में यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि जब सच्चाई सामने आती है तो सबसे ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि आपको पहले ही यह नहीं बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि रिश्तों में झूठ या छुपाव धीरे धीरे भरोसे को कमजोर करता है। इससे शक पैदा होता है और व्यक्ति हर बात पर संदेह करने लगता है। ऐसे में रिश्ता कमजोर हो जाता है और उसकी नींव हिल जाती है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए ईमानदारी और खुलापन सबसे जरूरी तत्व हैं। उन्होंने एक दार्शनिक दृष्टिकोण रखते हुए यह भी कहा कि इंसान के नजरिए से इस जीवन में एक ही चीज को पूरी तरह परफेक्ट माना जा सकता है और वह है मृत्यु। उनके अनुसार जीवन के बाद क्या होता है, यह किसी को नहीं पता, लेकिन जीवन में अपूर्णता ही हमें आगे बढ़ने और सीखने का अवसर देती है। सौरभ शुक्ला ने अपने फिल्मी करियर का जिक्र करते हुए भी कहा कि उनकी हाल ही में रिलीज फिल्म में भी यही थीम देखने को मिलती है, जहां रिश्तों में छिपे सच और उससे पैदा होने वाले बदलावों को दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन की तरह फिल्मों में भी असली कहानी तब शुरू होती है जब किरदार अपनी कमजोरियों और सच्चाइयों का सामना करते हैं। उनके विचार जीवन के इस सरल लेकिन गहरे सत्य को उजागर करते हैं कि परफेक्शन की तलाश छोड़कर जब हम अपनी अपूर्णताओं को अपनाते हैं, तभी जीवन में असली संतुलन और संतोष संभव होता है।

सुनील ग्रोवर बने कॉमेडी की धड़कन हर किरदार में ढलने वाला बेमिसाल हुनर

नई दिल्ली । छोटे पर्दे की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ अभिनय नहीं करते बल्कि अपने हुनर से पूरी इंडस्ट्री का स्तर ही बदल देते हैं और सुनील ग्रोवर उन्हीं में से एक हैं। हाल के समय में जहां एक ओर फिल्म धुरंधर द रिवेंज और उसके लीड स्टार रणवीर सिंह की चर्चा हर तरफ सुनाई दे रही है वहीं दूसरी ओर सुनील ग्रोवर अपने जबरदस्त टैलेंट के दम पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अगर बड़े पर्दे पर किसी को गिरगिट कहा जाए तो छोटे पर्दे पर यह खिताब बिना किसी हिचक के सुनील ग्रोवर को दिया जा सकता है क्योंकि वह हर किरदार में इस तरह ढल जाते हैं कि असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। कॉमेडी की दुनिया में सुनील ग्रोवर का सफर आसान नहीं रहा लेकिन उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर एक अलग मुकाम हासिल किया। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में गुत्थी डॉक्टर मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी जैसे किरदारों ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई। इन किरदारों के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि कॉमेडी केवल हंसी तक सीमित नहीं होती बल्कि यह एक कला है जो दर्शकों के दिल में जगह बना लेती है। समय के साथ जब कपिल शर्मा का शो नए प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और द ग्रेट इंडियन कपिल शो के रूप में सामने आया तो शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया उतनी मजबूत नहीं रही लेकिन जैसे ही सुनील ग्रोवर की एंट्री हुई शो की पूरी तस्वीर बदल गई। उनकी मौजूदगी ने शो में नई जान फूंक दी और दर्शकों को फिर से वही पुराना जादू महसूस होने लगा। आज हालात यह हैं कि दर्शक शो देखने के लिए खास तौर पर सुनील ग्रोवर का इंतजार करते हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी मिमिक्री है। चाहे वह किसी मशहूर शख्सियत का अंदाज हो या किसी काल्पनिक किरदार का रूप सुनील उसे पूरी शिद्दत से निभाते हैं। उन्होंने कई बड़े कलाकारों की नकल इतनी सटीक तरीके से की है कि खुद असली कलाकार भी हैरान रह जाते हैं। मंच पर उनकी मौजूदगी दर्शकों को बांधे रखती है और हर परफॉर्मेंस एक नया अनुभव बन जाती है। सिर्फ कॉमेडी ही नहीं बल्कि सुनील ग्रोवर की सादगी भी उन्हें खास बनाती है। कैमरे के सामने जहां वह ऊर्जा और हास्य से भरपूर नजर आते हैं वहीं निजी जिंदगी में वह बेहद साधारण और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में भी देखते हैं। आज के दौर में जब कंटेंट तेजी से बदल रहा है और दर्शकों की पसंद भी लगातार विकसित हो रही है ऐसे समय में सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार का लगातार प्रासंगिक बने रहना उनकी काबिलियत का सबसे बड़ा सबूत है। वह न सिर्फ लोगों को हंसाते हैं बल्कि अपने अभिनय से उन्हें भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं। सच कहा जाए तो सुनील ग्रोवर का टैलेंट अनुभव करना अपने आप में एक खास एहसास है और यही उन्हें टीवी का सच्चा लेजेंड बनाता है।

‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका

नई दिल्ली। अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की जोड़ी ने कई हिट फिल्में दी हैं। दोनों के नाम गरम मसाला, हेरा फेरी जैसी फिल्में हैं। और अब आने वाले दिनों में भूत बंगला और हैवान में दोनों का काम नजर आने वाला है। अब हाल में डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी अक्षय को कोई स्क्रिप्ट नहीं सुनाई। दोनों के बीच बस बातचीत होती है और वो फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं। प्रियदर्शन ने कहा कि हैवान के लिए खुद अक्षय ने उनसे रोल मांगा था। दोनों के बीच बातचीत हुई और अक्षय को फिल्म मिल गई। अक्षय ने खुद मांगा रोलन्यूज18 के साथ बातचीत में प्रियदर्शन ने बताया कि भूत बंगला की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार ने उनसे पूछा था कि वो अगली कौनसी फिल्म बना रहे हैं। डायरेक्टर ने उनसे कह दिया कि वो फिल्म बना रहे हैं लेकिन उन्हें विलेन नहीं मिल रहा है। अक्षय जो जब फिल्म के बारे अक्षय को पता चला तो वो इसका हिस्सा बन गए। प्रियदर्शन ने कहा कि वो बहुत हैरान थे। फिल्म के बारे में कोई डिटेल में डिस्कशन नहीं हुआ। मैंने अक्षय को कभी फिल्म नरेट नहीं की। मैं उन्हें बस कहानी और किरदार बता देता हूं। वो हमेशा मुझसे पूछते हैं कि मैं कितना एक्साइटेड हूं। अगर मैं उन्हें कहता हूं कि मैं एक्साइटेड हूं तो वो खुश नहीं होंगे। अगर मैंने कह दिया कि मैं बहुत एक्साइटेड हूं तो वो कहेगा चलिए फिल्म बनाते हैं सर। अब कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते प्रियदर्शनडायरेक्टर प्रियदर्शन ने कहा कि वो अब पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते। हैवान में भी कुछ सीन कॉमेडी के हैं। लेकिन वो एक थ्रिलर फिल्म है। डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें काम करते हुए 45 साल हो गए हैं। अब वो थोड़ा स्लो होना चाहते हैं। ओप्पम का हिंदी रीमेकबता दें, अक्षय कुमार की हैवान एक मलयालम फिल्म ओप्पम की हिंदी रीमेक है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे कैदी पर आधारित है जो सजा सुनाने वाले जज और उनकी बेटी को मार देना चाहता है। लेकिन इसमें बिल्डिंग का लिफ्टमैन भी है जो जज की बेटी को बचाने की कोशिश करता है। खास बात ये है कि ये किरदार अंधा है। इस किरदार को सैफ अली खान निभाने वाले हैं। फिल्म हैवान इस साल अगस्त में दस्तक देने वाली है।

‘Sabarmati Report’ के बाद Ekta Kapoor का बड़ा ऐलान-अब आएगी ‘The Terror Report’

नई दिल्ली। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री एकता कपूर ने अपनी नई फिल्म द टेरर रिपोर्ट का ऐलान कर दिया है। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह फिल्म पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कीमिया पीओके पर आधारित होगी। एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर फिल्म का टीजर शेयर करते हुए बताया कि इस बार की कहानी और भी ज्यादा बोल्ड, निडर और दमदार होगी। फिल्म के निर्देशक विष्णुवर्धन होंगे, जो इससे पहले ‘शेरशाह’ जैसी हिट फिल्म दे चुके हैं। पिछली फिल्म की झलक में प्रदर्शित अनाउंस वीडियोफिल्म के अनाउंसमेंट वीडियो की शुरुआत ‘साबरमती रिपोर्ट’ के कुछ अहम सीन और डायलॉग्स से होती है। इसमें नरेंद्र मोदी को अपनी टीम के साथ फिल्म देखते हुए भी दिखाया गया है। साथ ही योगी आदित्यनाथ का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। पिछली फिल्म की कहानी और रिसर्च के लिए काफी एक्टर मिले थे, जिसमें विक्रांत मैसी के अभिनय को भी काफी पसंद किया गया था। ऐसे में अब ‘द टेरर रिपोर्ट’ लेकर दर्शकों के बारे में विस्तार से बताया गया है। 1998 से 2025 तक की कहानियों पर आधारित कहानी‘डी टेरर रिपोर्ट’ की कहानी 1998 से 2025 तक की उन घटनाओं को दर्शाती है, जो पीओके और उससे जुड़े ऑपरेशनों की कहानी हैं- गिरजाघर। फिल्म में व्हेल, सुरक्षा संचालन और वैज्ञानिक विद्वानों को बड़े पैमाने पर दिखाया गया है। अनाउंसमेंट वीडियो में संकेत दिया गया है कि यह कहानी उन अनसुने बयानों को सामने लाएगी, जिसमें अब तक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन नहीं किया गया है। फ़िल्म के क्वेश्चन एक गंभीर और वास्तविक विषय को दर्शकों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टार कास्ट और रिलीज डेट का इंतजारएनालॉग फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, फिल्म के प्रोडक्शन में शोभा कपूर, तनुज गर्ग, अतुल कस्बेकर और सुधीर चौधरी जैसे नाम जुड़े हुए हैं। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘द टेरर रिपोर्ट’ पर दर्शकों की उम्मीदें कितनी खराब हैं।

जयपुर फुट ने बदली किस्मत सुधा चंद्रन बनीं इंटरनेशनल सेलिब्रिटी…

नई दिल्ली: प्रसिद्ध अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन की जीवन यात्रा संघर्ष, हिम्मत और प्रेरणा की मिसाल है। एक समय ऐसा भी आया जब एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने साहस और दृढ़ संकल्प से नई शुरुआत की। आज वह अपनी सफलता का बड़ा श्रेय जयपुर फुट को देती हैं, जिसने उन्हें फिर से खड़े होकर आगे बढ़ने का हौसला दिया एक पुराने वीडियो में सुधा चंद्रन भावुक होकर डॉ. पी.के. सेठी और राजस्थान का आभार व्यक्त करती नजर आती हैं। वह कहती हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें जयपुर फुट का सबसे बड़ा योगदान है। इसी कृत्रिम पैर की मदद से उन्होंने न केवल चलना सीखा, बल्कि नृत्य और अभिनय की दुनिया में भी दमदार वापसी की सुधा चंद्रन की यह कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है। उनका मानना है कि यदि व्यक्ति के अंदर मजबूत इच्छाशक्ति हो और सही समर्थन मिले, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। जयपुर फुट जैसी सुलभ और प्रभावी तकनीक ने न केवल उनका जीवन बदला, बल्कि देश-विदेश में कई लोगों को नई उम्मीद भी दी है उन्होंने समाज में दिव्यांगता को लेकर बने नजरिए पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि वह ‘हैंडिकैप’ या ‘दिव्यांग’ जैसे शब्दों को समाज की सोच से हटाना चाहती हैं और लोगों को यह समझाना चाहती हैं कि किसी भी शारीरिक कमी के बावजूद व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है उनकी संघर्षपूर्ण कहानी को नाचे मयूरी फिल्म के जरिए भी दर्शाया गया, जिसमें उन्होंने खुद अपनी भूमिका निभाई थी। इस फिल्म ने उनकी जिंदगी के उस दौर को सामने रखा, जब उन्होंने एक हादसे के बाद फिर से अपने सपनों को जिया टेलीविजन पर भी सुधा चंद्रन ने अपनी अलग पहचान बनाई। कहीं किसी रोज में ‘रमोला सिकंद’ के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उनका अनोखा अंदाज और स्टाइल दर्शकों को बेहद पसंद आया  सुधा चंद्रन की कहानी यह सिखाती है कि जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न आए, हिम्मत और सही सहयोग से उसे हराया जा सकता है। ‘जयपुर फुट’ उनके लिए सिर्फ एक कृत्रिम पैर नहीं, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हुआ

जब रिहर्सल बना इतिहास ,श्रेया घोषाल का पहला ही गाना दिला गया नेशनल अवॉर्ड

नई दिल्ली । बॉलीवुड की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती और श्रेया घोषाल की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही रही महज 16 साल की उम्र में उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने उन्हें सीधे देश की सबसे बड़ी गायिकाओं की कतार में खड़ा कर दिया यह कहानी शुरू होती है संजय लीला भंसाली की फिल्म देवदास से जब भंसाली एक नई और ताजा आवाज की तलाश में थे तभी उनकी नजर श्रेया घोषाल पर पड़ी उन्होंने श्रेया को फिल्म के एक खास गाने के लिए चुना जिसका नाम था बैरी पिया यह गाना फिल्म में ऐश्वर्या राय और शाहरुख खान पर फिल्माया गया था और इसकी धुन और भावनाओं को जीवंत करने के लिए एक मासूम लेकिन मजबूत आवाज की जरूरत थी इस गाने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है जब श्रेया पहली बार रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचीं तो उन्हें यह बताया गया कि यह सिर्फ एक तरह का ट्रायल या प्रैक्टिस सेशन है उन्होंने बिना किसी दबाव के हेडफोन लगाया और गाना शुरू कर दिया उनकी आवाज में सहजता और मासूमियत इतनी स्वाभाविक थी कि हर सुर दिल को छू रहा था बीच में जब वे रुकीं तो भंसाली ने उन्हें गाना जारी रखने को कहा और श्रेया ने बिना यह सोचे कि यह असली रिकॉर्डिंग है पूरा गाना गा दिया स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उस वक्त हैरान रह गए थे क्योंकि एक किशोरी की आवाज में इतनी परिपक्वता और भावनात्मक गहराई कम ही देखने को मिलती है खास बात यह रही कि जिस टेक को श्रेया केवल प्रैक्टिस समझकर गा रही थीं वही टेक इतना परफेक्ट निकला कि उसे ही फिल्म का फाइनल वर्जन बना दिया गया इस गाने में उनके साथ उदित नारायण की आवाज भी थी जिसने इस गीत को और भी खास बना दिया जब फिल्म रिलीज हुई तो यह गाना लोगों के दिलों में बस गया और श्रेया घोषाल रातों रात एक बड़ा नाम बन गईं उनकी आवाज की मिठास और भावनाओं की सच्चाई ने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दिलाई सबसे बड़ी बात यह रही कि अपने पहले ही बॉलीवुड गाने के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जो किसी भी नए कलाकार के लिए एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है इस एक गाने ने श्रेया के करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक हिट गाने देकर खुद को बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और प्रतिभाशाली गायिकाओं में शामिल कर लिया आज भी जब देवदास के गानों की बात होती है तो बैरी पिया सबसे पहले याद आता है और उसके पीछे होती है एक 16 साल की लड़की की वह आवाज जिसने बिना किसी दबाव के सिर्फ दिल से गाकर इतिहास रच दिया