रिश्तों की सच्चाई पर्दे के पीछे होती है डेजी शाह को अब भी है पलाश स्मृति के फिर साथ आने की उम्मीद

नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर से डायरेक्टर बने पलाश मुच्छल और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज़ स्मृति मंधाना की शादी कभी फैंस के लिए किसी सपने से कम नहीं थी लेकिन यह सपना 25 नवंबर 2025 को हकीकत बनने से पहले ही टूट गया। सांगली में होने वाली इस शादी को सेरेमनी से ठीक एक दिन पहले अचानक रद्द कर दिया गया जिसने दोनों के चाहने वालों को हैरान और मायूस कर दिया। शुरुआत में इसकी वजह स्मृति के पिता की खराब तबीयत बताई गई लेकिन धीरे धीरे सोशल मीडिया और खबरों में कई तरह के आरोप प्रत्यारोप सामने आने लगे जिससे मामला और उलझता चला गया। अब इस पूरे विवाद पर बॉलीवुड एक्ट्रेस डेजी शाह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। खास बात यह है कि डेजी शाह जल्द ही पलाश मुच्छल की अगली डायरेक्टोरियल फिल्म में नजर आने वाली हैं ऐसे में उनका बयान और भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान डेजी ने न सिर्फ इस मुद्दे पर खुलकर बात की बल्कि एक संतुलित और परिपक्व सोच भी सामने रखी। डेजी शाह ने बताया कि शादी कैंसिल होने के बाद पलाश सीधे उनसे संपर्क करने में हिचकिचा रहे थे। उन्हें कुछ अनजान लोगों के जरिए फिल्म का ऑफर मिला जो उन्हें थोड़ा असामान्य लगा। डेजी के अनुसार उनकी पलाश की बहन पलक से अच्छी दोस्ती है इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि अगर पलाश सच में उन्हें फिल्म में लेना चाहते तो वह सीधे या परिवार के माध्यम से संपर्क करते। इस अजीब स्थिति को समझने के लिए डेजी ने खुद पहल की और पलाश को मैसेज कर पूरी बात पूछी। इस पर पलाश ने जवाब दिया कि मौजूदा हालात को देखते हुए वह किसी से सीधे बातचीत करने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर था कि बात का गलत मतलब निकाला जा सकता है। डेजी ने इस पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वह किसी की निजी जिंदगी के आधार पर उसे जज करने में विश्वास नहीं रखतीं। उनका मानना है कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग अलग रखना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा हमें नहीं पता कि असल में क्या हुआ है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और हम सिर्फ सुनी सुनाई बातों के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं। यह दो परिवारों का निजी मामला है और सच्चाई क्या है यह वही लोग बेहतर जानते हैं। डेजी शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह नजरिया किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं है बल्कि वह निष्पक्ष रहने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान को उसके निजी जीवन की घटनाओं के आधार पर जज करना सही नहीं है खासकर तब जब पूरी सच्चाई सामने न आई हो। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि मीडिया और सोशल मीडिया पर जो बातें सामने आती हैं वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होतीं। अंत में डेजी ने उम्मीद जताई कि पलाश और स्मृति के बीच चीजें फिर से ठीक हो सकती हैं। उन्होंने कहा वे दोनों बहुत प्यारी जोड़ी हैं और मुझे उम्मीद है कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा और वे फिर से साथ आ सकते हैं। डेजी का यह बयान न केवल उनके संवेदनशील और संतुलित नजरिए को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि रिश्तों को समझने के लिए धैर्य और निष्पक्षता कितनी जरूरी होती है।
OTT Release: 20 मार्च के दिन ओटीटी पर रिलीज हुईं 10 नई फिल्में और सीरीज, ये रही पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। धुरंधर 2’ देख ली? अब घर पर बैठकर कुछ अलग और हटकर देखना चाहते हैं? बढ़िया! आपके लिए 20 मार्च के दिन ओटीटी पर कई सारी फिल्में और सीरीज रिलीज हुई हैं। चलिए हम आपको इन फिल्मों और सीरीज के बारे में बताते हैं। इनके बारे में पढ़िए, फिर अपने टेस्ट के हिसाब से फिल्म या सीरीज चुनिए और अपने वीकेंड का मजा दोगुना कर दीजिए। बॉर्डर 2सनी देओल, वरुण धवन और अहान शेट्टी की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के बाद अब ओटीटी पर दस्तक दी है। ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म के कलेक्शन की बात करें तो इसने भारतीय बॉक्स ऑफिस से 329.42 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस से 450.18 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। चिरैयाजियोहॉटस्टार पर रिलीज हुई ‘चिरैया’ एक ऐसी फिल्म है जो सीधे दिल को छूती है। ये कहानी किसी बड़े एक्शन या धमाके की नहीं, बल्कि हमारे समाज की उन चिरैयों (बेटियों) की है जो पिंजरे को तोड़कर उड़ने का सपना देखती हैं। इस फिल्म में दिव्या दत्ता ने लीड रोल प्ले किया है। वलवारा‘वलवारा’ एक ऐसी फिल्म है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि सुख और सुविधाओं से दूर, भारत के गांवों में आज भी जीवन कितना संघर्षपूर्ण हो सकता है। आप इस फिल्म को Sun NXT या ओटीटी प्ले प्रीमियम पर देख सकते हैं। सीथा पयनम‘सीथा पयनम’ सिर्फ एक रोमांटिक फिल्म नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रति हमारे नजरिए को बदलने वाली फिल्म है। यह सिखाती है कि कभी-कभी किसी काम में देरी होना भी हमारे लिए वरदान साबित हो सकता है। आप इस फिल्म को Sun NXT या ओटीटी प्ले प्रीमियम पर देख सकते हैं। पीकी ब्लाइंडर्स: द इम्मोर्टल मैनस्टीवन नाइट की इस मास्टरपीस फिल्म में दिखाया जाता है कि थॉमस शेल्बी (सिलियन मर्फी) अब गैंगस्टर नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा इंसान बन गया है जो शांति की तलाश में रिटायर हो चुका है। लेकिन 1940 का दौर और वर्ल्ड वॉर 2 की आग उसे चैन से बैठने नहीं देती। आप इस फिल्म को नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। कासरगोड एम्बेसी‘कासरगोड एम्बेसी’ साउथ की क्राइम थ्रिलर सीरीज है। इसके जी5 पर सात एपिसोड रिलीज हुए हैं। यह सीरीज 2000 के दशक के आखिर में केरल के उत्तरी जिलों में सक्रिय एक विशाल नकली पासपोर्ट रैकेट की खतरनाक और काली दुनिया को उजागर करती है। जटाधारा‘जटाधारा’ एक्शन-थ्रिलर फिल्म है। जी5 की इस फिल्म में सुधीर बाबू और सोनाक्षी सिन्हा हैं। यह फिल्म एक धन के राक्षस की कहानी बताती है। इसके साथ ही, आस्था और तर्क के बीच के टकराव को दर्शाती है। डेडलोक सीजन 2‘डेडलोक सीजन 2’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। इसके कुल 6 एपिसोड्स हैं। हर हफ्ता नया एपिसोड आएगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इसका आखिरी एपिसोड 17 अप्रैल के दिन रिलीज हाेगा। बता दें, इस बार मामला तस्मानिया की ठंड से निकलकर ऑस्ट्रेलिया के तपते हुए नॉर्दर्न टेरिटरी पहुंच गया है। डेड ऑफ विंटर‘डेड ऑफ विंटर’ साल की सबसे चर्चित हॉरर/थ्रिलर फिल्मों में से एक है। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बर्फीले तूफान के दौरान एक दूरदराज के इलाके में फंस जाते हैं। इस दौरान उन्हें सिर्फ ठंड से ही नहीं लड़ना है, बल्कि अंधेरे में छिपे किसी अनजान खतरे से भी बचना पड़ता है। आप इस फिल्म को लायंसगेट प्ले पर देख सकते हैं।
बड़ी फ्लॉप के बावजूद अक्षय कुमार की फिल्म बनी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर

नई दिल्ली। अक्षय कुमार ने अपने करियर में कई हिट और कुछ फ्लॉप फिल्में भी दी हैं। आज हम आपको अक्षय की एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जो फ्लॉप थी। हालांकि फ्लॉप होने के बाद भी इस फिल्म ने एक रिकॉर्ड अपने नाम किया था। वो भी कोई आम रिकॉर्ड नहीं बल्कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। किस फिल्म ने फ्लॉप होकर बनाया रिकॉर्डजिस फिल्म की हम बात कर रहे हैं वो है बॉस। बॉस फिल्म में अक्षय के साथ मिथुन चक्रवर्ती, शिव पंडित, रोनित रॉय और असिन लीड रोल में थे। फिल्म फ्लॉप हुई थी बॉक्स ऑफिस पर। किसने बनाया पोस्टरअब रिकॉर्ड की बात करें तो इस फिल्म से अक्षय का एक पोस्टर बना गया था। अक्षय के फैन क्लब टीम ने स्पेशल पोस्टर बनाया था बॉस का जो दुनिया का सबसे बड़ा पोस्टर था। इस पोस्टर को बनाने में 4 महीने लग गए थे।अ किसको पछाड़ा थाइससे पहले जो सबसे बड़ा पोस्टर था वो था लिटल ग्रांसडेन एयरफिल्ड, लिटल ग्रांसडेन, यूके का जो अक्टूबर 2013 में आया था। माक्रो आर्ट्स ने पोस्टर को मैन्यूफैक्चर किया था। यह वही कंपनी है जिसने माइकल जैक्सन का पोस्टर भी बनाया था। कितना लंबा और चौड़ा था पोस्टरबॉस के पोस्टर की बात करें तो ये 58.87 मीटर चौड़ा और 54.94 मीटर लंबा था। जब गिनीज के ऑफिशियल्स आए तब उन्होंने पोस्टर को नापा और फिर पता चला इस पोस्टर ने माइकल जैक्सन के पोस्टर को 15-20 पर्सेंट के मार्जन से पछाड़ा था। भूत बंगला में आएंगे नजरफिलहाल अक्षय की फिल्मों की बात करें तो वह अब भूत बंगला मूवी में नजर आने वाले हैं। यह एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है जिसमें अक्षय के साथ परेश रावल, तब्बू, वामिका गब्बी और राजपाल यादव लीड रोल में हैं। इस फिल्म के जरिए अक्षय, फिल्ममेकर प्रियदर्शन के साथ 14 साल बाद नजर आ रहे हैं। अक्षय की अपकमिंग फिल्मेंइसके अलावा अक्षय की कई फिल्में रिलीज होंगी जिसमें वेलकम टू द जंगल, हेरा फेरी 3 और हैवान हैं। वेलकम टू द जंगल में अक्षय के साथ सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, रवीना टंडन, दिशा पाटनी समेत कई सेलेब्स हैं। वहीं हेरा फेरी 3 में वह सुनील शेट्टी और परेश रावल के साथ दिखेंगे। हैवान में सैफ और अक्षय कुमार लीड रोल में हैं। वहीं हाल ही में यह भी खबर आई कि अक्षय, गोलमाल 5 में भी नजर आएंगे। इस फिल्म में हालांकि वह विलन का किरदार निभाएंगे। वैसे हैवान में भी अक्षय का नेगेटिव ही किरदार है।
अश्लीलता के आरोप में ‘सरके चुनर’ गाना घिरा विवाद में महिला आयोग ने जारी किया समन

नई दिल्ली: फिल्म ‘KD The Devil’ के आइटम नंबर ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह गाना अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गूंज अब राजनीतिक और कानूनी गलियारों तक पहुंच चुकी है। गाने की सामग्री को लेकर उठे सवालों के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग ने गाने को उत्तेजक और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा है कि इसकी सामग्री भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती प्रतीत होती है। आयोग का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में गलत संदेश देती है और विशेषकर महिलाओं की गरिमा को प्रभावित करती है। इसी के चलते आयोग ने फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें अभिनेता संजय दत्त, अभिनेत्री नोरा फतेही और फिल्म के निर्देशक को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। सभी को 24 मार्च को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले में गाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध देखने को मिला है। आलोचकों का कहना है कि गाने के बोल और प्रस्तुति अश्लीलता की सीमा को पार करते हैं। बढ़ते विवाद के बाद फिल्म के हिंदी वर्जन को कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा चुका है। वहीं अभिनेत्री नोरा फतेही ने इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि हिंदी वर्जन में गाना इस तरह से पेश किया जाएगा। उनके अनुसार गाने की शूटिंग कन्नड़ वर्जन के लिए की गई थी और हिंदी वर्जन के कंटेंट की जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा है कि वह इस गाने का प्रचार नहीं करेंगी। इससे पहले यह मामला संसद तक भी पहुंच चुका है, जहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के तहत संबंधित गाने पर कार्रवाई करते हुए इसे प्रतिबंधित भी किया गया है। कुल मिलाकर ‘सरके चुनर’ गाना अब एक बड़े विवाद का केंद्र बन चुका है, जहां एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता और दूसरी ओर सामाजिक जिम्मेदारी के बीच बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या निर्णय सामने आता है, यह देखना अहम होगा और यह तय करेगा कि इस तरह के कंटेंट पर आगे किस तरह की सख्ती बरती जाएगी
‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव
फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है। कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं। कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है। उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है। कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है। कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है
चांद देख लेना में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह की जोड़ी ने दिखाया गहरा भावनात्मक रिश्ता

नई दिल्ली : सलमान खान ने ईद के मौके पर अपने प्रशंसकों को एक खास तोहफा दिया है। उनकी आने वाली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ का नया गीत ‘चांद देख लेना’ रिलीज हो चुका है, जिसने अपने भावनात्मक अंदाज से दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जो प्यार, जुदाई और उम्मीद की गहराई को बेहद सजीव तरीके से प्रस्तुत करता है। इस गीत में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह की जोड़ी एक ऐसे रिश्ते को दर्शाती है, जिसमें दूरी तो है लेकिन दिलों का जुड़ाव बेहद मजबूत है। कहानी एक सैनिक और उसकी पत्नी के इर्द गिर्द घूमती है। जहां एक ओर सैनिक सरहद पर देश की रक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी घर पर उसके सुरक्षित लौटने की आस लगाए बैठी है। यह भावनात्मक जुड़ाव ही गीत की आत्मा है, जो हर उस परिवार की कहानी को छूता है जो अपने प्रियजनों की वापसी का इंतजार करते हैं। ‘चांद देख लेना’ में चांद को एक भावनात्मक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ईद का चांद जहां खुशी और मिलन का संदेश देता है, वहीं करवा चौथ का चांद प्यार, विश्वास और इंतजार की गहराई को दर्शाता है। गीत इन दोनों भावनाओं को एक साथ पिरोकर एक खूबसूरत अनुभव बनाता है, जो दर्शकों के दिल को छू जाता है। इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है, जिनकी धुनें हमेशा से ही श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाती हैं। गीत को निहाल टौरो और अंकोना मुखर्जी ने अपनी मधुर आवाज दी है, जिन्होंने इस गीत के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पहले आए गीतों को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था और अब यह नया गीत फिल्म के भावनात्मक पक्ष को और मजबूत करता है। ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ का नाम पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया ताकि फिल्म की कहानी में मौजूद मानवीय पहलुओं को अधिक गहराई से दिखाया जा सके। सलमान खान द्वारा निर्मित और अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म बहादुरी, त्याग और रिश्तों की मजबूती की कहानी को सामने लाने का प्रयास करती है। ‘चांद देख लेना’ इसी कहानी का एक अहम हिस्सा है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल होता है। यह गीत उन अनगिनत परिवारों की भावनाओं का आईना है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा और वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं और गर्व के साथ उनके कर्तव्य को स्वीकार करते हैं। यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक गहरी भावना है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा
Bengali Film : बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर आउट क्रांति और अपराध की उलझी कहानी

Bengali Film : नई दिल्ली: बंगाली सिनेमा के दर्शकों के लिए एक नई और दिलचस्प पेशकश के रूप में फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर जारी कर दिया गया है। इस टीजर ने रिलीज होते ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है क्योंकि इसमें एक ऐसी कहानी की झलक दिखाई गई है जो समाज, अपराध और क्रांति के बीच की जटिल रेखा को दर्शाती है। फिल्म की कहानी 1960 के दशक के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो उस समय के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। टीजर में अभिनेता जीत एक बिल्कुल नए और प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। उनका किरदार अनंत सिंह नाम के एक रहस्यमयी शख्स के इर्द गिर्द घूमता है, जिसे समाज का एक हिस्सा अपराधी मानता है जबकि कुछ लोग उसे गरीबों का मसीहा समझते हैं। यह द्वंद्व ही फिल्म की कहानी को और गहराई देता है और दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े करता है। फिल्म में अनंत सिंह के अतीत और वर्तमान को भी समानांतर रूप से दिखाया गया है। कहानी के अनुसार वह कभी स्वतंत्रता सेनानी रहा था और मास्टरदा सूर्य सेन के नेतृत्व में भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल था। लेकिन आजादी के बाद जब वह उन आदर्शों को टूटते हुए देखता है, जिनके लिए उसने अपना सब कुछ समर्पित किया था, तो उसके भीतर गहरा मोहभंग पैदा होता है। यही मोहभंग उसे एक अलग राह पर ले जाता है, जहां वह समाज के भ्रष्ट और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करता है। टीजर में दिखाया गया है कि कैसे अनंत सिंह समाज के उन लोगों को निशाना बनाता है जो कमजोर और वंचित वर्ग का शोषण करते हैं। उसके इन कदमों से शहर में एक ओर डर का माहौल बनता है तो दूसरी ओर लोगों के बीच जिज्ञासा भी बढ़ती है। इसी बीच इंस्पेक्टर दुर्गा रॉय की एंट्री होती है, जो अनंत सिंह की तलाश में एक सख्त अभियान शुरू करती हैं। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि क्या अनंत सिंह वास्तव में एक अपराधी है या फिर वह एक क्रांतिकारी है जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहा है। फिल्म का टीजर अपने विजुअल्स और कहानी के अंदाज से दर्शकों को 1960 के दशक के कोलकाता में ले जाता है, जहां सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और सत्ता की खामियां साफ दिखाई देती हैं। कहानी का यह पहलू इसे सिर्फ एक थ्रिलर नहीं बल्कि एक विचारोत्तेजक फिल्म भी बनाता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। कुल मिलाकर ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर एक मजबूत और गहन कहानी की झलक पेश करता है, जिसमें जीत का किरदार, रहस्यमयी कथानक और सामाजिक संदेश मिलकर इसे एक बहुप्रतीक्षित फिल्म बनाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अपने पूरे स्वरूप में दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है
DHURANDHAR 2 : रणवीर सिंह का जलवा बरकरार, लेकिन पहले पार्ट की तरह धमाका नहीं

DHURANDHAR 2 : नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज रिलीज हो चुकी है और पहले पार्ट की सफलता के बाद इस फिल्म को लेकर हाइप तो जबरदस्त था। दर्शकों ने एडवांस बुकिंग कर अपनी वफादारी दिखाई लेकिन कुछ शहरों में प्रीव्यू शोज़ कैंसल होने से निराशा भी हुई। जो लोग फिल्म देखने पहुंचे उनके लिए अनुभव मिला लेकिन पूरी तरह संतोषजनक नहीं। कहानी फिल्म की कहानी छह चैप्टर में बंटी है। शुरुआत में जसकीरत सिंह रांगी रणवीर सिंह और उसके परिवार की पृष्ठभूमि दिखाई जाती है। पिता भी फौजी थे और जसकीरत भी फौज में भर्ती होने वाला था लेकिन परिवार की रक्षा के लिए उसे बंदूक उठानी पड़ती है। अपनी खुद की जंग लड़ते हुए जसकीरत देश के लिए एजेंट बनता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी के रूप में काम करता है। GUDI PADWA: आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष पहले पार्ट की कहानी रहमान डकैत अक्षय खन्ना की मौत पर खत्म हुई थी। इस पार्ट में जसकीरत हमजा उसका भाई उजैर दानिश पंडोर को सत्ता में बैठाकर अपने मिशन में आगे बढ़ता है। मेजर इकबाल अर्जुन रामपाल उसे उसके बड़े साहब से मिलवाते हैं जिससे कहानी आगे बढ़ती है। अभिनय रणवीर सिंह पूरे चार घंटे स्क्रीन पर छाए रहते हैं। उनके एक्शन इमोशन और गुस्से के सीन परफेक्ट हैं। अर्जुन रामपाल को अधिक स्क्रीन स्पेस मिला है लेकिन उनके किरदार में उतनी गहराई नहीं। संजय दत्त और सारा अर्जुन के सीन सीमित हैं जबकि माधवन और राकेश बेदी बीच-बीच में फिल्म में जान डालते हैं।निर्देशन आदित्य धर का रिसर्च और डिटेल्ड वर्क काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने नोटबंदी अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का कनेक्शन कहानी में जोड़ा है। लेकिन पहले पार्ट के मुकाबले इस बार कहानी में सरप्राइज एलिमेंट कम हैं और कई सीन लंबी खींची गई लगती हैं। शुरुआत और क्लाइमैक्स दमदार हैं लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा धीमा और अनुमानित लगता है। संगीत संगीत इस बार पहले पार्ट जितना प्रभावशाली नहीं। एक-दो गाने छोड़कर बाकी यादगार नहीं हैं और रोमांटिक सॉन्ग थोड़े जबरन ठूंसे हुए लगते हैं। देखें या नहीं अगर आपने पहला पार्ट देखा है तो यह जरूर देखें। हाइप या सेलेब्स के रिव्यू से प्रभावित न हों। फिल्म ठीक-ठाक एंटरटेनमेंट देती है लेकिन पहले पार्ट जैसी रोमांचक सरप्राइज और दमदार कहानी की उम्मीदें कम रखें।
अमिताभ बच्चन के लिए गाने से मना कर दिया था किशोर कुमार ने, कहा क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?

नई दिल्ली । बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन को लेकर कई किस्से मशहूर हैं लेकिन उनमें से एक बेहद मज़ेदार और कम जानी-पहचानी कहानी है। यह कहानी जुड़ी है उनकी फिल्म ‘नमक हलाल से जिसमें किशोर कुमार ने एक गाने के लिए शुरू में मना कर दिया था। कहानी यह है कि फिल्म के गाने कि पग घुंघरू बांध मीरा नाची थीं को कंपोज़ किया था बप्पी लहरी ने। बप्पी लहरी चाहते थे कि यह गाना उनके मामा किशोर कुमार गाएं। जब उन्होंने किशोर कुमार को यह गाना पहली बार सुनाया तो किशोर कुमार ने बेहद मज़ाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी यह गाना है या कहानी? मैं यह नहीं गाऊंगा। क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?” किशोर कुमार के अनुसार यह गाना इतना लंबा और जटिल था कि उन्होंने शुरू में इसे गाने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि लोग इतनी बड़ी-बड़ी रचनाएँ लेकर आते हैं और इसे गाना आसान नहीं है। लेकिन बप्पी लहरी की लगातार समझाइश और मनाने के बाद किशोर कुमार आखिरकार राज़ी हो गए और उन्होंने यह गाना गाया। फिल्म के निर्देशक थे प्रकाश मेहरा और इस फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और कुल ग्रॉस कलेक्शन करीब 12 करोड़ 64 लाख रुपये रहा। इस गाने ने दर्शकों के बीच खासा लोकप्रियता हासिल की और किशोर कुमार की आवाज़ को अमिताभ बच्चन की अदाकारी के साथ जोड़कर यादगार बना दिया। यह किस्सा यह दिखाता है कि भले ही किशोर कुमार जैसी महान आवाज़ वाले कलाकार के लिए भी कभी-कभी किसी गाने की शुरुआत चुनौतीपूर्ण होती थी लेकिन आखिरकार उनकी प्रतिभा और समझाइश ने हर बाधा पार कर दी। गाने और कहानी के बीच का यह मज़ेदार संवाद आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के बीच चर्चित है।
2004 की सुपरहिट रोमांस मूवी, जिसे ऋतिक रोशन ने ठुकराया और लीड एक्टर बना नेशनल अवॉर्ड विजेता
नई दिल्ली। आज हम आपको साल 2004 में आई एक ऐसी रोमांटिक फिल्म के बारे में बता रहे हैं जिसे जोधा अकबर स्टार ऋतिक रोशन ने रिजेक्ट कर दिया था। उन्हें फिल्म पसंद भी आई थी, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने फिल्म को मना कर दिया था। बाद में, इसी फिल्म के लिए सैफ अली खान को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। क्या आप पहचान पाए फिल्म का नाम? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं। इस फिल्म का नाम है हम तुम। क्या आमिर ने भी रिजेक्ट की थी हम तुम?फिल्म को कुणाल कोहली ने डायरेक्ट किया था। हाल ही में कुणाल कोहली ने ही बताया कि इस फिल्म को ऋतिक रोशन ने रिजेक्ट कर दिया था। हम तुम को लेकर बात की जाती है कि सैफ अली खान के रोल को हां करने से पहले कई स्टार्स जिसमें आमिर खान का नाम भी शामिल है, ने फिल्म को रिजेक्ट कर दिया था। अब फिल्म के डायरेक्टर ने स्क्रीन के साथ खास बातचीत में बताया कि आमिर खान ने फिल्म की स्क्रिप्ट ही नहीं सुनी थी। पहले तलाक से गुजर रहे थे आमिर खानहम तुम के डायरेक्टर कुणाल कोहली ने कहा, “नहीं, दरअसल, आमिर ने फिल्म की स्क्रिप्ट ही नहीं सुनी थी। उस वक्त वो रीना दत्ता के साथ अपने पहले तलाक से गुजर रहे थे। तो वो अपने राइट फ्रेम ऑफ माइंड में नहीं थे। ऋतिक रोशन को स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई थी। लेकिन वो इस रोल के लिए तैयार नहीं थे। क्योंकि उन्होंने कहा था- मुझे पता नहीं है कि ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ (2003) में मेरा किरदार कैसा दिखेगा या स्वीकार किया जाएगा, जो कि हुआ भी नहीं। ऋतिक ने क्यों रिजेक्ट कर दी थी फिल्म?कुणाल ने आगे कहा कि उनकी अपनी फिल्म मुझसे दोस्ती करोगे (2002) उनके (ऋतिक) साथ काम नहीं की थी। लेकिन उन्होंने कुणाल से कहा था ये फिल्म असली सोना है। ऋतिक ने कहा था कि हम तुम करने का उनके अंदर अभी कॉन्फिडेंस नहीं है। तो उन्होंने फिल्म के लिए मना कर दिया था।सैफ अली खान ने जीता था नेशनल अवॉर्डजब सैफ को इस फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था तब उनके साथ स्वदेस के लिए शाहरुख खान और ब्लैक के लिए अमिताभ बच्चन नॉमिनेट हुए थे। सैफ ने जब नेशनल अवॉर्ड जीता तो लोगों ने कहा कि सैफ से ज्यादा अमिताभ और शाहरुख ये अवॉर्ड डिजर्व करते हैं। लोगों का कहना था कि सैफ को ये अवॉर्ड इसलिए मिला क्योंकि उनकी मां शर्मिला टैगोर उस वक्त सीबीएफसी की चेयरपर्सन थीं। हालांकि, ये पुराने इंटरव्यू में सैफ ने कहा था- मेरी मां इसे मेरे लिए लेकर नहीं आई हैं। क्योंकि अगर मेरी मां मुझे ऐसे चीजें दे सकतीं तो वो इससे कहीं ज्यादा देतीं।