बॉलीवुड की होली स्पेशल हिट्स, ‘रंग बरसे’ से लेकर ‘होली के दिन’ तक, आज भी हैं एवरग्रीन

नई दिल्ली: होली का त्योहार बस आने ही वाला है और हर तरफ उत्सव का माहौल है। रंग, गुलाल और मिठाईयों के बीच बॉलीवुड के एवरग्रीन होली गाने इस त्योहार को और भी खास बना देते हैं। ये गाने सिर्फ संगीत नहीं बल्कि यादों का हिस्सा बन गए हैं और दशकों से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे 5 गानों की, जो हर होली को जश्न में बदल देते हैं। सबसे पहले आते हैं नरगिस दत्त और राजकुमार पर फिल्माए गए गीत ‘होली आई रे’ की। 1950 में रिलीज हुए इस गाने को शकील बदायूनी ने लिखा था। यह गाना बॉलीवुड के इतिहास में होली के सबसे बेहतरीन और कालजयी गीतों में से एक माना जाता है। आज भी जब यह गाना बजता है, त्योहार की खुशियाँ दोगुनी हो जाती हैं। 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ का गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ भी हर होली पर सुना और गाया जाता है। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया यह गाना आनंद बक्शी के लिखे शब्दों और मस्त धुन के कारण हमेशा लोकप्रिय रहा। यह गाना इस त्योहार की मस्ती और उमंग का सबसे बेहतरीन प्रतीक बन चुका है। बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में ‘सिलसिला’ का गाना ‘रंग बरसे’ कभी पीछे नहीं रहता। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया यह गीत त्रिकोणीय प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने के बोल हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे और आज भी यह गाना होली पार्टीज़ और उत्सवों में सबका फेवरेट बना हुआ है। 1990 के दशक की यादों में बसे जूही चावला और शाहरुख खान के फिल्म ‘डर’ का गाना ‘अंग से अंग लगाना’ भी होली की धूम में अपना खास स्थान रखता है। इस गीत को आनंद बक्शी ने लिखा और विनोद राठौड़, अल्का याग्निक और सुदेश भोसले ने अपनी आवाज दी। शाहरुख का नेगेटिव रोल और जूही के साथ उनकी केमिस्ट्री इसे आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाती है। और अंत में, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गाना ‘होली खेले रघुबीरा’ हमेशा होली के रंगों में चार चाँद लगा देता है। इसकी धुन और गीतकार की कला इसे हर होली पार्टी में बजाने योग्य बनाती है। ये पांच गाने सिर्फ संगीत का आनंद नहीं देते, बल्कि हर बार होली का जश्न और उत्साह दोगुना कर देते हैं। चाहे यह पुरानी फिल्में हों या आधुनिक पार्टीज़, इन गानों की धुन और बोल हर उम्र के लोगों के लिए होली के त्योहार को और रंगीन बना देते हैं। इस होली, इन गानों को सुनकर आप भी अपने घर और दोस्तों के साथ त्योहार का मजा दोगुना कर सकते हैं।
मिलावटी खोया से होली पर खतरा: घर पर पहचानें शुद्ध खोया

नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ गई है। इसी बीच मिलावटखोर मिलावटी खोया बेचकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 12,800 किलो खोया बिक्री पर रोक दिया और 760 क्विंटल से अधिक खोया नष्ट कराया। ये कोई अलग मामला नहीं है, देशभर से मिलावटी खोया मिलने और उसकी बिक्री पर कार्रवाई की खबरें लगातार आ रही हैं। मिलावटी खोया दिखने में असली जैसा लगता है, लेकिन इसके सेवन से पेट दर्द, अपच, गैस, दस्त, फूड पॉइजनिंग, लिवर और किडनी की समस्या और हार्ट हेल्थ पर नकारात्मक असर हो सकता है। अगर इसमें डिटर्जेंट या यूरिया जैसी हानिकारक चीजें मिली हों, तो यह केमिकल टॉक्सिसिटी का कारण बन सकती है। डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार मिलावटी खोया अक्सर स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, रिफाइंड तेल या वनस्पति घी, यहां तक कि साबुन या डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ मिलाकर बनाया जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट डिजीज का खतरा होता है और पाचन तंत्र प्रभावित होता है। घर पर असली और नकली खोया पहचानना आसान है। FSSAI के अनुसार असली खोया मुलायम, दानेदार और हल्का गुलाबी रंग का होता है, जबकि मिलावटी खोया चिपचिपा, बहुत चिकना या रासायनिक गंध वाला हो सकता है। अगर आप घर पर खोया बनाना चाहते हैं तो प्रक्रिया सरल है। दूध को कड़ाही में उबालें, मीडियम आंच पर लगातार चलाएं और किनारों पर जमने वाली मलाई को वापस मिलाएं। जैसे-जैसे पानी सूखता है, दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाएगा। जब मिश्रण पूरी तरह गाढ़ा होकर एक जगह इकट्ठा हो जाए, तो गैस बंद करें। ठंडा होने पर खोया और सख्त और दानेदार हो जाएगा। इसे एयरटाइट डिब्बे में फ्रिज में 4-5 दिन या फ्रीजर में महीने भर रखा जा सकता है। अगर किसी दुकान पर मिलावटी खोया मिलने का शक हो तो पहले दुकानदार से बात करें। संतोषजनक जवाब न मिले तो FSSAI के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत दर्ज करें। स्थानीय पुलिस और जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना दी जा सकती है। शिकायत के लिए सैंपल और रसीद सुरक्षित रखें। मिलावटी फूड बेचने वालों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द, दुकान सील और गंभीर मामलों में जेल की सजा शामिल हो सकती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर जांच के बाद सैंपल लैब में भेजते हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हैं। होली पर मिठाइयों का मज़ा लेते हुए मिलावटी खोया से बचना बेहद जरूरी है। घर पर शुद्ध खोया बनाएं और सुरक्षित मिठाइयों का आनंद लें।
बर्डवॉचिंग लवर्स के लिए खास, सर्दियां खत्म होने से पहले घूम आएं ये 4 जगह

नई दिल्ली । हर सर्दियों में उत्तर भारत परिंदों का स्वर्ग बन जाता है। साइबेरिया और दूसरे ठंडे इलाकों से हजारों पक्षी यहां की झीलों तालाबों और वेटलैंड्स में आकर डेरा डालते हैं। सर्दियों के खत्म होने से पहले इन परिंदों का दीदार करने के लिए आप उत्तर भारत की कुछ बेहतरीन जगहों पर जाने का प्लान कर सकते हैं। परिंदों का स्वर्ग साइबेरियन क्रेन बार हेडेड गीज फ्लेमिंगो और अलग अलग तरह की बतखें सर्दियों में उत्तर भारत की रौनक बढ़ा देती हैं। लेकिन ये नजारा हमेशा नहीं रहता। मार्च आते आते ये मेहमान पक्षी फिर से अपने देश की ओर उड़ान भरने लगते हैं। घूमने का बना लें प्लान धुंध के बीच से उड़ते बेहद खूबसूरत पक्षी को देखने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया रहता है। आइए जानते हैं उत्तर भारत की कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में जहां आप सर्दियों के खत्म होने से पहले इन परिंदों का दीदार कर सकते हैं।केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर में स्थित यह नेशनल पार्क देश के सबसे मशहूर बर्ड सैंक्चुअरी में से एक है। पहले इसे भरतपुर बर्ड सैंक्चुअरी के नाम से जाना जाता था। यह जगह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है।हरियाणा में सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान मध्य एशिया यूरोप और साइबेरिया से हजारों पक्षी यहां आते हैं। यहां आप पेंटेड स्टॉर्क पेलिकन क्रेन कई तरह की बतखें और शिकारी पक्षी आसानी से देख सकते हैं।पोंग बांध झील हिमाचल प्रदेश पोंग बांध झील जिसे महाराणा प्रताप सागर के नाम से भी जाना जाता है सर्दियों के महीनों में प्रवासी जलपक्षियों का एक विशाल ठिकाना बन जाती है। धौलाधार पर्वत श्रृंखला से घिरी यह झील एक सुंदर वातावरण प्रदान करती है।हरिके आर्द्रभूमि पंजाब हरिके आर्द्रभूमि ब्यास और सतलुज नदियों के संगम पर स्थित है। इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी आर्द्रभूमियों में से एक माना जाता है। पक्षी प्रेमियों को यहां गुच्छेदार बत्तखें पोचार्ड और दलदली बाज देखने को मिलते हैं।
इस होली कम समय में बनाए गुझिया, तलते वक्त फट जाती है तो यहां देखें आसान रेसिपी

नई दिल्ली । होली का त्योहार गुझिया के बिना अधूरी है। गुझिया की तैयारी कुछ दिनों पहले से ही शुरु हो जाती है। लेकिन ऑफिस और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की कमी है। ऐसे में काफी लोग होली के मौके पर गुझिया बना नहीं पाते हैं और बाजार से खरीद कर लाते हैं। बाजार की गुझिया का स्वाद घर जैसा नहीं होता है। साथ बाजार की गुझिया में चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है जिसकी चलते यह सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ आसान तरीके हैं जिनकी मदद से आप होली के मौके पर कम समय में गुझिया बना सकते हैं। इसके साथ ही गुझिया बनाने में लोगों को एक और समस्या रहती है कि तलते समय यह फट जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं किस तरह कम समय में गुझिया बनाएं और वह भी बिना फटे। गुझिया की सामग्री मैदा- दो कपघी- 1 कपपानी- 1 कपखोया- 1 कपचीनी- 1 कप1 छोटा चम्मच छोटी इलायची1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ बादामनारियल का बुरादाकाजूकिशमिशचिरौंजी गुझिया बनाने की विधि मैदे में आधा कप घी और पानी मिलाकर अच्छे से गूंथकर आधे घंटे के लिए ढककर रख दें। खोए को हल्की आंच पर थोड़ी देर के लिए भून लें। खोया जब ठंडा हो जाए तो इसमें बादाम, इलायची पाउडर और चीनी मिला दें। गूंथे हुए मैदे की लोई बनाकर उसे गोल पूरी की तरह बेल लें। अब उसमें तैयार मिश्रण भरकर किनारों पर हल्का पानी लगाकर उसे बंद करें। फैंसी कटर की मदद से गुझिया के किनारों को शेप दे सकते हैं। एक कढ़ाई में घी डालकर गर्म कर लें। हल्की आंच पर गुझिया को तब तक तलें जब तक वह हल्के भूरे रंग की न हो जाए। एक बड़े प्लेट में टिश्यू पेपर बिछाकर उसपर गुझिया निकाल लें। जब ये ठंडा हो जाए तो उसे एक डिब्बे में बंद करके रख दें। फट जाती है तो अपनाएं ये तरीके गुझिया तलने के लिए हमेशा मोटी तली वाली कढ़ाई लेना चाहिए। पतली कढ़ाई में गुझिया जल्दी जल जाती है। गुझिया तलने के लिए तेल न तो ज्यादा होना चाहिए और न ही कम। तेल को मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल से धुआं नहीं उठना चाहिए। तेल तैयार हो जाए तो कढ़ाई के हिसाब से गुझिया डालें। गुझिया डालते ही उसे हिलाना नहीं चाहिए। इससे फटने का डर रहता है। गुझिया को 7-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाना चाहिए। तेज आंच पर पकाने से ये अंदर से कच्ची रह सकती है और साथ ही फट भी सकती है। जब गुझिया एक तरह से सुनहरी हो जाए तब इसे पलटें।
तनाव मुक्त जीवन के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..

नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोग जिम और कसरत का सहारा लेते हैं, लेकिन मन का स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मन को स्वस्थ रखने के लिए योग में चित्त की मुख्य 5 वृत्तियों का अभ्यास किया जाता है। इन वृत्तियों की समझ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है और जीवनशैली सुधारने में मदद मिलती है। चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे सभी प्रकार के बोझ और विकारों से मुक्त करना। योग में पांच प्रमुख वृत्तियां बताई गई हैं: प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति। 1. प्रमाणवृत्ति: यह ध्यान का पहला चरण है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है। आँखों और कानों से प्राप्त अनुभव के माध्यम से मन को वास्तविकता से जोड़ा जाता है। 2. विपर्ययवृत्ति: इसमें मन में उत्पन्न भ्रम और गलत ज्ञान को दूर किया जाता है। विपर्ययवृत्ति का लक्ष्य मन के भीतर पल रहे विरोधाभासी विचारों को संशोधित करना है। 3. विकल्प वृत्ति: यह कल्पनाशील ज्ञान से संबंधित है, जिसे वस्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे शब्द ज्ञान या कल्पना द्वारा प्राप्त ज्ञान कहा जा सकता है। 4. निद्रावृत्ति: इसका अर्थ है ज्ञान की कमी। इस अवस्था में मन ज्ञान की स्थिति से दूर होता है और अज्ञान या तमस का अनुभव करता है। 5. स्मृतिवृत्ति: जब मन बार-बार पुरानी यादों को याद करता है और अतीत के सुखद पलों में खुद को डुबो देता है। इन पांच वृत्तियों का अभ्यास मानसिक विकारों और तनाव को हटाने में सक्षम है। योग के माध्यम से इन पर ध्यान केंद्रित कर मन को शांत, सशक्त और बोझ-मुक्त बनाया जा सकता है। तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना जरूरी है, और चित्त की ये पाँच वृत्तियां इसे संभव बनाती हैं।
Holi Skincare Tips: रंगों का त्योहार खुशी से मनाएं, स्किन और बालों को रखें सुरक्षित

नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और रंग-गुलाल की तैयारी जोरों पर है। लेकिन उत्साह के बीच अक्सर लोग अपनी त्वचा और बालों की देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं। केमिकल युक्त रंगों से स्किन इरीटेशन, एलर्जी, रैशेज और बालों के रूखेपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप रंगों का मजा बिना किसी नुकसान के ले सकते हैं। होली खेलने से पहले अपनाएं ये उपाय, मॉइस्चराइजर की मोटी परत लगाएं होली से एक रात पहले चेहरे और शरीर पर अच्छी तरह मॉइस्चराइजर लगाएं। होली खेलने से ठीक पहले भी इसकी मोटी परत लगाएं। इससे त्वचा पर एक सुरक्षा कवच बन जाता है और रंग गहराई तक नहीं जाता।सनस्क्रीन जरूर लगाएं अक्सर होली खुले मैदान या छत पर खेली जाती है। ऐसे में धूप से बचाव जरूरी है। एसपीएफ 50 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं ताकि यूवी किरणों से त्वचा सुरक्षित रहे। नारियल तेल और हल्दी का इस्तेमाल होली से एक-दो दिन पहले त्वचा पर नारियल तेल और हल्दी लगाने से त्वचा मजबूत होती है और रंगों का असर कम पड़ता है। बालों में भी नारियल तेल लगाकर रखें, इससे रंग आसानी से निकल जाता है। होली खेलने के बाद रखें इन बातों का ध्यान जोर से स्क्रबिंग न करें रंग हटाने के लिए त्वचा को बार-बार रगड़ना नुकसानदायक हो सकता है। इससे त्वचा में जलन और रैशेज बढ़ सकते हैं। पहले सादे पानी से धोएं होली के बाद सबसे पहले सादे पानी से रंग धोएं। तुरंत साबुन या बॉडी वॉश का उपयोग न करें। जब ज्यादातर रंग निकल जाए तब हल्के क्लींजर का इस्तेमाल करें। एलोवेरा जेल लगाएं त्वचा साफ करने के बाद एलोवेरा जेल लगाएं। यह स्किन को ठंडक देता है और डैमेज हुई त्वचा की मरम्मत में मदद करता है। आंखों और बालों की सुरक्षा भी जरूरी होली के दौरान आंखों में रंग जाने से संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए सनग्लासेस पहनें। बालों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तेल लगाएं या हेयर मास्क का उपयोग करें। जिन्हें सांस की समस्या है, वे गुलाल से दूरी बनाए रखें। हर्बल गुलाल है सुरक्षित विकल्प पक्के रंगों में मेटल साल्ट्स, सिंथेटिक डाई और इंडस्ट्रियल पिगमेंट हो सकते हैं, जो त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए हर्बल या प्राकृतिक गुलाल से होली खेलना बेहतर और सुरक्षित विकल्प है।
क्यों ड्रैगन फ्रूट बन रहा है हेल्थ प्रेमियों की पहली पसंद: जानें इसके सम्पूर्ण लाभ

नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक हो गए हैं। लोग स्वस्थ रहने के लिए फल, सब्जियां और हेल्दी डाइट का सेवन करना पसंद कर रहे हैं। ऐसे ही एक फल है ड्रैगन फ्रूट जिसे कुछ लोग पिटाया भी कहते हैं। इसका छिलका गुलाबी और अंदर का गूदा सफेद या हल्का गुलाबी होता है। इसके छोटे-छोटे काले बीज इसे और आकर्षक बनाते हैं। यह फल मुख्य रूप से थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में उगाया जाता है और गर्मियों में खाने के लिए उत्तम माना जाता है। ड्रैगन फ्रूट में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और विभिन्न विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें पॉलीफेनोल्स, कैरोटीनॉयड और बीटासायनिन जैसे पौधे यौगिक होते हैं। विटामिन सी, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन और बीटालेन जैसी एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी इसे सेहत के लिए और प्रभावशाली बनाती है। ड्रैगन फ्रूट पाचन के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को दूर करता है। फाइबर आंतों की गतिविधियों को नियमित करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में भी ड्रैगन फ्रूट की अहम भूमिका है। विटामिन-सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इस कारण इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए लाभकारी है। ड्रैगन फ्रूट ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके फाइबर ब्लड फ्लो में शुगर के अवशोषण को धीमा कर देते हैं, जिससे शुगर लेवल संतुलित रहता है। डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। वजन घटाने वालों के लिए ड्रैगन फ्रूट एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से रोकता है। इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसमें पानी की पर्याप्त मात्रा होती है, जिससे शरीर तरोताजा रहता है और वजन कम करने में भी सहायता मिलती है। दिल के स्वास्थ्य के लिए भी ड्रैगन फ्रूट फायदेमंद है। इसमें प्राकृतिक स्वस्थ वसा विशेष रूप से ओमेगा-3 और ओमेगा-9 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और दिल की बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं। त्वचा के लिए ड्रैगन फ्रूट का सेवन बेहद लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेषकर विटामिन सी, त्वचा को झुर्रियों और महीन रेखाओं से बचाते हैं। इसके नमी बनाए रखने वाले गुण त्वचा को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इस तरह ड्रैगन फ्रूट न सिर्फ स्वाद में अनोखा और आकर्षक है, बल्कि यह शरीर और त्वचा के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप पाचन सुधार, इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर कंट्रोल और त्वचा की सुंदरता सभी का लाभ पा सकते हैं।
जानें सुबह की सैर का सही तरीका, जो बीपी और शुगर दोनों को नियंत्रित रखे

नई दिल्ली: आज के समय में लगभग हर घर में हाई बीपी और शुगर के मरीज मिल जाते हैं। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही सुबह की सैर को स्वास्थ्य का संजीवनी मानते हैं। नियमित सुबह की सैर इन रोगों को नियंत्रित रखने में दवा की तरह काम करती है। कैसे होती है फायदा?सुबह के वक्त शरीर ‘बायोकेमिकल’ प्रक्रिया से गुजरता है। ठंडी हवा में निकलने से शरीर प्राकृतिक इंसुलिन का निर्माण करता है। तेज़ कदमों से सैर करने पर मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदल देती हैं। यह प्रक्रिया शुगर नियंत्रण में दवा की तरह काम करती है। सैर करने से धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ बढ़ता है, जिससे हाई बीपी प्रभावित नहीं होता। शोध से पता चला है कि लगातार 3 महीने तक रोज़ाना 30 मिनट की सुबह की सैर शुगर लेवल कम कर सकती है। सैर के अन्य लाभ: गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और रक्त धमनियों पर दबाव कम होता है। दिल की सेहत बेहतर होती है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है। रक्त संचार बेहतर होने से पूरे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। सैर का सही तरीका: सैर ब्रह्म मुहूर्त में करें, जब वायुमंडल में ऑक्सीजन भरपूर हो। तेज़-तेज़ और लंबे कदमों से चलें, लेकिन हांफे नहीं। शुरुआत में 30 मिनट से करें, धीरे-धीरे समय और रफ्तार बढ़ाएं। रोजाना कम से कम 1 घंटे की सैर को लक्ष्य बनाएं। सुबह की नियमित सैर न केवल बीपी और शुगर, बल्कि हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसे जीवनशैली में शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
STRESS FREE LIFE : स्ट्रेस फ्री लाइफ के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..

STRESS FREE LIFE : नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोग जिम और कसरत का सहारा लेते हैं, लेकिन मन का स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मन को स्वस्थ रखने के लिए योग में चित्त की मुख्य 5 वृत्तियों का अभ्यास किया जाता है। इन वृत्तियों की समझ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है और जीवनशैली सुधारने में मदद मिलती है। चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे सभी प्रकार के बोझ और विकारों से मुक्त करना। योग में पांच प्रमुख वृत्तियां बताई गई हैं: प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति। 1. प्रमाणवृत्ति: यह ध्यान का पहला चरण है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है। आँखों और कानों से प्राप्त अनुभव के माध्यम से मन को वास्तविकता से जोड़ा जाता है। 2. विपर्ययवृत्ति: इसमें मन में उत्पन्न भ्रम और गलत ज्ञान को दूर किया जाता है। विपर्ययवृत्ति का लक्ष्य मन के भीतर पल रहे विरोधाभासी विचारों को संशोधित करना है। 3. विकल्प वृत्ति: यह कल्पनाशील ज्ञान से संबंधित है, जिसे वस्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे शब्द ज्ञान या कल्पना द्वारा प्राप्त ज्ञान कहा जा सकता है। 4. निद्रावृत्ति: इसका अर्थ है ज्ञान की कमी। इस अवस्था में मन ज्ञान की स्थिति से दूर होता है और अज्ञान या तमस का अनुभव करता है। 5. स्मृतिवृत्ति: जब मन बार-बार पुरानी यादों को याद करता है और अतीत के सुखद पलों में खुद को डुबो देता है। इन पांच वृत्तियों का अभ्यास मानसिक विकारों और तनाव को हटाने में सक्षम है। योग के माध्यम से इन पर ध्यान केंद्रित कर मन को शांत, सशक्त और बोझ-मुक्त बनाया जा सकता है। तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना जरूरी है, और चित्त की ये पाँच वृत्तियां इसे संभव बनाती हैं।
MotivationTips: कॉन्फिडेंस की कमी बन रही है सफलता में रुकावट जानिए आत्मविश्वास बढ़ाने के असरदार तरीके

MotivationTips: नई दिल्ली। Confidence Gain। कई बार हम पूरी मेहनत और तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं लेकिन आखिरी समय पर आत्मविश्वास की कमी हमें पीछे धकेल देती है। इंटरव्यू हो प्रेजेंटेशन हो या कोई नया काम शुरू करना हो यदि खुद पर भरोसा कमजोर पड़ जाए तो आसान काम भी कठिन लगने लगता है। यही वजह है कि कई लोग प्रतिभाशाली और मेहनती होने के बावजूद अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। आत्मविश्वास कोई जन्म से मिला गुण नहीं है बल्कि इसे रोजमर्रा की आदतों से विकसित किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि छोटे छोटे बदलाव अपनाकर अपने भीतर छिपी क्षमता को बाहर लाया जा सकता है। जब हम खुद को समझते हैं और अपनी प्रगति को पहचानते हैं तो धीरे धीरे आत्मबल मजबूत होने लगता है। सबसे पहले जरूरी है कि छोटी छोटी सफलताओं को नजरअंदाज न किया जाए। अक्सर लोग दिनभर की उपलब्धियों को महत्व नहीं देते लेकिन हर छोटा कदम आगे बढ़ने का संकेत होता है। यदि आप अपनी छोटी उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं तो दिमाग सकारात्मक संकेत देता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। स्पष्ट लक्ष्य तय करना भी बेहद जरूरी है। बिना दिशा के आगे बढ़ना मुश्किल होता है। छोटे और व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं और उन्हें समय सीमा में पूरा करने की कोशिश करें। जब लक्ष्य पूरे होते हैं तो खुद पर भरोसा मजबूत होता है। बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक तरीका है। पॉजिटिव सेल्फ टॉक आत्मविश्वास बढ़ाने का शक्तिशाली साधन है। अक्सर हम खुद से नकारात्मक बातें करते हैं जिससे मनोबल गिरता है। यदि इन विचारों को बदलकर सकारात्मक संवाद अपनाया जाए तो बड़ा फर्क पड़ सकता है। मैं सक्षम हूं और मैं कोशिश करूंगा जैसे वाक्य मन को मजबूत बनाते हैं और डर को कम करते हैं। नई स्किल सीखना भी आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभावी तरीका है। जब आप कोई नया कौशल सीखते हैं या नई जानकारी हासिल करते हैं तो भीतर से आत्मसंतोष मिलता है। यह अनुभव धीरे धीरे आत्मविश्वास को मजबूत करता है। चाहे कोई कोर्स हो नई भाषा हो या कोई रचनात्मक गतिविधि सीखना हमेशा फायदेमंद रहता है। बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना भी जरूरी है। सीधा खड़े होना आंखों में देखकर बात करना और हल्की मुस्कान बनाए रखना ये छोटी बातें भी आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। सकारात्मक शारीरिक हावभाव अपनाने से न केवल दूसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है बल्कि खुद को भी भीतर से मजबूती महसूस होती है। साथ ही सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना आत्मविश्वास के लिए लाभकारी है। हमारा वातावरण हमारी सोच को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो प्रेरित करें और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। नकारात्मक माहौल से दूरी बनाकर ही आत्मबल को सुरक्षित रखा जा सकता है। आत्मविश्वास धीरे धीरे विकसित होने वाली शक्ति है। निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से इसे मजबूत बनाया जा सकता है। जब खुद पर भरोसा मजबूत होता है तो सफलता की राह भी आसान लगने लगती है।