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Holi Skin Care: होली की मस्ती में ऐसे रखें अपनी खूबसूरत स्किन का ख्याल, एलर्जी भी रहेगी दूर

नई दिल्ली । होली का त्योहार खुशियों और रंगों का पर्व है लेकिन सावधानी न बरती जाए तो यही रंग आपकी त्वचा के लिए घातक साबित हो सकते हैं. बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले रंग और गुलाल त्वचा पर जलन खुजली और एलर्जी पैदा कर सकते हैं. इसी विषय पर लोकल-18 की टीम ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के चर्म एवं गुप्त रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरजीत सिंह से विशेष बातचीत की और जाना कि होली के दौरान त्वचा का ख्याल कैसे रखें. होली खेलने से पहले अपनाएं यह सुरक्षा कवच डॉ. अमरजीत सिंह ने सलाह दी है कि होली खेलने घर से बाहर निकलने से पहले अपनी त्वचा की सुरक्षा की तैयारी कर लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि केमिकल आधारित रंगों के असर को कम करने के लिए चेहरे और शरीर के खुले हिस्सों पर गोले का तेल नारियल तेल या कोई अच्छा मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं. ऐसा करने से त्वचा पर एक सुरक्षा परत बन जाती है जिससे रंगों का हानिकारक प्रभाव त्वचा के रोमछिद्रों के अंदर नहीं समा पाता और बाद में रंग छुड़ाना भी आसान हो जाता है.बदलते मौसम और त्वचा का ध्यान चूंकि होली के समय मौसम में भी बदलाव हो रहा होता है इसलिए त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है. डॉ. सिंह के अनुसार इस समय हल्की सी लापरवाही भी लंबे समय तक त्वचा की परेशानी बढ़ा सकती है. उन्होंने कहा कि जितना संभव हो सके प्राकृतिक और हर्बल रंगों का ही उपयोग करें. कुछ सस्ते गुलाल में भी कांच के कण या हानिकारक रसायन हो सकते हैं जो चेहरे पर रगड़ने से घाव या गंभीर इन्फेक्शन दे सकते हैं. अगर लग जाए पक्का रंग तो क्या करें? अक्सर लोग पक्का रंग छुड़ाने के लिए त्वचा पर कठोर साबुन या अन्य केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं. डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि यदि चेहरे पर पक्का रंग लग गया है तो उसे सबसे पहले सादे पानी से धोएं और अपने नियमित साबुन का उपयोग करें. यदि रंग नहीं छूट रहा है तो उसे बार-बार न रगड़ें. ज्यादा रगड़ने से त्वचा छिल सकती है और घाव हो सकते हैं. ऐसे में धैर्य रखें और धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीके से रंग को निकलने दें. लापरवाही पड़ सकती है भारी विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि अगर होली खेलने के बाद त्वचा पर खुजली जलन या दाने उभरने लगें तो घर पर खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं. अक्सर देखा जाता है कि होली के बाद अस्पतालों में आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के मरीज बढ़ जाते हैं. यदि लोग पहले से ही सावधानी रखें और बचाव के तरीके अपनाएं तो उन्हें अस्पताल जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी.

मार्च में बनाएं घूमने का प्लान, सुकून और फ्रेशनेस देंगे ये खास डेस्टिनेशन

नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं तो मार्च का महीना ट्रैवल के लिए बेहतरीन माना जाता है। न कड़ाके की ठंड न चिलचिलाती गर्मी हल्का सुहावना मौसम सफर को आरामदायक बना देता है। यही वजह है कि इस समय पहाड़ हरियाली और आध्यात्मिक स्थलों की खूबसूरती और भी निखर जाती है। अगर आप भी मन को तरोताजा करने और तनाव को पीछे छोड़ने का प्लान बना रहे हैं तो ये तीन जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। कूर्ग भारत का स्कॉटलैंड कर्नाटक में बसा कूर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। इसे भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मार्च के महीने में यहां का मौसम बेहद खुशनुमा रहता है। चारों ओर फैले कॉफी के बागान धुंध से ढकी पहाड़ियां झरनों की कलकल ध्वनि और हरियाली से भरा वातावरण मन को सुकून देता है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं तो कूर्ग एक परफेक्ट चॉइस है। यहां एबी फॉल्स राजा सीट और दुबारे एलीफेंट कैंप जैसे दर्शनीय स्थल आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। ऋषिकेश अध्यात्म और एडवेंचर का संगम उत्तराखंड का ऋषिकेश मार्च में और भी आकर्षक हो जाता है। वसंत ऋतु में यहां का मौसम सुहावना रहता है जिससे गंगा किनारे बिताया गया समय खास बन जाता है। सुबह की गंगा आरती और शांत वातावरण मन को गहरी शांति देता है। सिर्फ आध्यात्म ही नहीं रोमांच के शौकीनों के लिए भी यह जगह खास है। रिवर राफ्टिंग बंजी जंपिंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियां एडवेंचर का अलग ही अनुभव कराती हैं। अगर आप आध्यात्मिक सुकून और रोमांच दोनों चाहते हैं तो ऋषिकेश आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।सिक्किम वादियों में सजा स्वर्ग पूर्वोत्तर भारत का सिक्किम मार्च में रंग-बिरंगे फूलों और साफ आसमान के साथ किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण यहां की पहचान हैं। गंगटोक त्सोमगो लेक और प्राचीन बौद्ध मठों की खूबसूरती यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। साफ हवा और प्राकृतिक नज़ारे तनाव को दूर कर मन को पूरी तरह रिफ्रेश कर देते हैं। अगर आपकी ट्रैवल लिस्ट में सिक्किम अब तक सिर्फ नाम भर था तो मार्च इसे सच में देखने का सही समय है।

बोर्ड एग्जाम में घबराहट और भूलने की समस्या से कैसे निपटें..

नई दिल्ली।बोर्ड एग्जाम का समय छात्रों के लिए हमेशा तनावपूर्ण होता है। कई बार ऐसा होता है कि घंटों पढ़ाई करने के बाद भी पेपर हाथ में आते ही सब कुछ भूल जाता है। यह सिर्फ छात्रों की कमजोरी नहीं, बल्कि एक सामान्य मानसिक प्रतिक्रिया है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के कंसल्टेंट साइकियाट्रिक डॉक्टर पार्थ नागड़ा के अनुसार यह स्ट्रेस और घबराहट का परिणाम होता है। परीक्षाएं आपकी याददाश्त और समझने की क्षमता को परखने का तरीका हैं। इसलिए पॉजिटिव सोच और आत्मविश्वास के साथ इन पर काबू पाना जरूरी है। डॉक्टर कहते हैं कि खुद को पॉजिटिव कल्पना में देखें। उदाहरण के लिए सोचें कि आप स्कूल टॉपर बन रहे हैं और अपने जीवन में खुशहाल और संतुलित भविष्य जी रहे हैं। यह मानसिक तैयारी आपको परीक्षा में घबराहट कम करने में मदद करेगी। इतना ही नहीं, यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा सफलता का केवल एक तरीका है, जीवन में अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। पढ़ाई की तैयारी के टिप्स:छोटे और आसान लक्ष्य तय करें। उदाहरण के लिए 25–30 मिनट पढ़ें, 10 मिनट रिवीजन करें और 15 मिनट ब्रेक लें। खुद के नोट्स बनाएं क्योंकि लिखने से याददाश्त तेज होती है। कठिन टॉपिक्स को छोटे हिस्सों में बांटकर अभ्यास करें और आत्मविश्वास बनाए रखें। डायग्राम और चित्रों का इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है। पढ़ाई के लिए टाइम टेबल तय करें और रोज 7–8 घंटे नींद लें। नींद के दौरान पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है। दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करें और घर का पौष्टिक खाना खाएं। रोज 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज से दिमाग सक्रिय रहता है। परीक्षा का सामना करने के टिप्स:आखिरी समय की पढ़ाई से बचें। इससे आत्मविश्वास कमजोर होता है और तनाव बढ़ता है। परीक्षा से एक दिन पहले बैग, पैन-पेंसिल, हॉल टिकट जैसी जरूरी चीजें तैयार रखें। खुद की तुलना दूसरों से न करें। हर छात्र की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। आराम के लिए म्यूजिक सुनें, हल्की टहलें या दोस्तों से बात करें। डॉक्टर बताते हैं कि अगर अत्यधिक घबराहट या पैनिक अटैक हो तो गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन अपनाएं। फिर भी अगर राहत न मिले तो किसी अच्छे साइकियाट्रिस्ट से परामर्श जरूर लें। इस तरह, पढ़ाई और परीक्षा की सही तैयारी, पॉजिटिव सोच और मानसिक संतुलन के जरिए छात्र अपनी घबराहट को कम कर सकते हैं और बोर्ड एग्जाम का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं। याद रखें, असफलता भी सफलता का हिस्सा है और उससे सीखकर आगे बढ़ना सबसे महत्वपूर्ण है।

वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स

नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की फिटनेस का राज उनके ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह ने अब सबके सामने साझा किया है। वजन घटाने की चाहत रखने वाले अक्सर भारी एक्सरसाइज और महंगी डाइट प्लान की ओर रुख करते हैं, लेकिन सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि वजन कम करने के लिए सबसे आसान तरीका रोज़मर्रा की थाली में संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो में बताया कि नई डाइट लेने की बजाय अपनी प्लेट स्ट्रक्चर को सही करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है। सिद्धार्थ के अनुसार हर खाने की थाली में तीन मुख्य घटक होने चाहिए। पहला और सबसे अहम हिस्सा है पाम प्रोटीन। इसमें आप चिकन, पनीर, टोफू, दाल या अंडे शामिल कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि दिन के हर खाने में प्रोटीन का होना जरूरी है। बिना प्रोटीन के वजन घटाना मुश्किल है क्योंकि यह मसल्स को बनाए रखने और शरीर की चर्बी कम करने में मदद करता है। दूसरा हिस्सा है स्मार्ट कार्ब्स। आम धारणा है कि कार्ब्स खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन सिद्धार्थ इसे गलत मानते हैं। यदि कार्ब्स सही मात्रा और सही समय पर शामिल किए जाएं, तो यह वजन घटाने में सहायक हो सकते हैं। इसके लिए आप अपनी प्लेट में एक मुट्ठी रोटी, चावल या शकरकंद जैसी चीजें ले सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और आप दिनभर एक्टिव रहते हैं। तीसरा और महत्वपूर्ण हिस्सा है सब्जियां। हर प्लेट में कम से कम दो मुट्ठी हरी सब्जियों का होना जरूरी है। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और बार-बार खाने की इच्छा को कम करती है। फाइबर का सेवन मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है। सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि कई बिजी प्रोफेशनल्स जो केवल 5 से 7 किलो वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें कार्ब्स पूरी तरह से हटाने की जरूरत नहीं है। असली फर्क संतुलित प्लेट स्ट्रक्चर से आता है। प्रोटीन, स्मार्ट कार्ब्स और हरी सब्जियों का सही अनुपात रखने से वजन घटाना सरल और स्वस्थ दोनों होता है। इसके अलावा सिद्धार्थ ने कहा कि छोटी-छोटी आदतें भी असर डालती हैं। खाने से पहले पानी पीना, धीमी गति से खाना, और रात के समय हल्का खाना शरीर को डिटॉक्स करने और वजन नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरीके को अपनाकर किसी भी व्यक्ति को अतिरिक्त मेहनत किए बिना फिटनेस और वजन में सुधार महसूस हो सकता है। वास्तव में, फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि आप महंगी डाइट प्लान या जिम में घंटों समय बिताएं। सही प्लेट स्ट्रक्चर, संतुलित भोजन और थोड़ी जागरूकता से वजन कम करना हर किसी के लिए संभव है। यदि आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज ही अपनी प्लेट को संतुलित करने की शुरुआत करें और छोटे-छोटे बदलाव को जीवनशैली में शामिल करें।

आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ

नई दिल्ली । आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने का आसान उपाय बताया है। उनका सुझाव है कि प्रतिदिन पपीता खाने से शरीर में जमा बुरा कोलेस्ट्रॉल LDL नियंत्रित होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। पपीता क्यों खाएं? पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विटामिन C फाइबर और कई पोषक तत्व होते हैं। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार नियमित रूप से पपीता खाने से कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी कम होता है। पपीता आयुर्वेद में पाचन सुधारने वाला फल माना जाता है। यह शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकालने में मदद करता है और कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है। इसके अलावा पपीते में मौजूद फाइबर गुड कोलेस्ट्रॉल HDL बढ़ाने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है। प्रतिदिन कितना पपीता खाएं? आचार्य बालकृष्ण के अनुसार: रोजाना 1 कटोरी पपीता सुबह या शाम खाया जा सकता है। इसे बिना नमक के खाना चाहिए। सर्दी-जुकाम में पपीते पर थोड़ा काली मिर्च पाउडर छिड़ककर खाया जा सकता है। पपीता तले-भुने भोजन के साथ न मिलाएं। आसान और किफायती उपाय पपीता घर में आसानी से उपलब्ध होता है और इसका सेवन सरल प्राकृतिक और किफायती तरीका है कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने का। यह न केवल दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि पाचन तंत्र और कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत देता है।

HEART HEALTH: हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना

  HEART HEALTH: नई दिल्ली एक मशहूर कहावत है ‘ईट द रेनबो’। इसका मतलब है अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करें। यह सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंस-बेस्ड सलाह भी है। रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पॉलीफेनॉल्स जैसे पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज की हालिया स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है। डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के अनुसार, एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स अनस्टेबल मॉलिक्यूल होते हैं जो सेल्स को डैमेज करते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स इन्हें न्यूट्रलाइज कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। विटामिन A, C, E, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन, सेलेनियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व इन फूड्स में होते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं, ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं। जब शरीर में स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी प्रभावी ढंग से काम करता है। हार्ट हेल्थ के लिए यह बेहद जरूरी है क्योंकि हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जब ऑक्सिडाइज्ड होता है तो आर्टरीज की वॉल्स पर जमाव बनता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। एंटीऑक्सिडेंट्स इस प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं, ब्लड फ्लो बेहतर रखते हैं और दिल पर दबाव कम करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, एजिंग स्पीड कम करने में भी यह सहायक होते हैं। ऑक्सिडेटिव डैमेज की वजह से सेल्स, डीएनए, प्रोटीन और बॉडी फैट डैमेज होते हैं जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड यह डैमेज कम कर सेल्स की उम्र बढ़ाते हैं। सप्लीमेंट की जरूरत आमतौर पर तब होती है जब डाइट संतुलित न हो, या व्यक्ति प्रदूषण, स्मोकिंग, क्रॉनिक स्ट्रेस या कमजोर इम्यून सिस्टम से प्रभावित हो। रोजाना पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए 4-5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त माना जाता है। हाई-डोज सप्लीमेंट्स लेने से नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है। एंटीऑक्सिडेंट फूड को डाइट में शामिल करने के लिए किसी महंगे प्लान की जरूरत नहीं। कोशिश करें कि थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें।एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं बल्कि हेल्थ स्ट्रैटेजी है। यह हार्ट हेल्थ बेहतर रखता है, इम्यूनिटी मजबूत करता है और उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित करता है। रंगीन और नेचुरल डाइट लंबे समय तक सेहतमंद रहने में अहम भूमिका निभाती है।

Holi 2026: रंगों से पहले स्किन को करें प्रोटेक्ट, अपनाएं ये आसान Pre-Holi स्किन केयर रूटीन

  Holi 2026:  नई दिल्ली । Holi का त्योहार खुशियों उमंग और रंगों से भरा होता है लेकिन बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी जबकि मथुरा-वृंदावन में उत्सव की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि आप त्योहार से 5-7 दिन पहले अपनी स्किन को तैयार करें ताकि रंगों का असर कम से कम हो और त्वचा हेल्दी बनी रहेनई दिल्ली होली से 5-7 दिन पहले क्या करें? डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार होली से एक हफ्ता पहले से ही स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। फेस और बॉडी पर नियमित मॉइश्चराइजर लगाएं। किसी नए ब्यूटी प्रोडक्ट केमिकल पील या हार्श ट्रीटमेंट को ट्राई न करें।अगर पहले से एक्ने एलर्जी या रैश की समस्या है तो पहले उसका इलाज कराएं क्योंकि सेंसिटिव स्किन पर रंग ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले ये 3 चीजें जरूर लगाएं तेल की पतली परत: होली खेलने से 20-30 मिनट पहले चेहरे गर्दन हाथ-पैरों पर नारियल या बादाम का तेल लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है और रंग सीधे त्वचा में नहीं चिपकते। मॉइश्चराइजर: तेल के बाद वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं। सनस्क्रीन: धूप में खेलने से पहले कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा का सनस्क्रीन 15-20 मिनट पहले अप्लाई करें। जरूरत हो तो दोबारा लगाएं।अलग-अलग स्किन टाइप के लिए खास टिप्स ड्राई स्किन हेवी मॉइश्चराइजर और क्रीम-बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। रात में स्किन रिपेयर क्रीम लगाएं ताकि नमी बरकरार रहे। ऑयली स्किन हल्का नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर चुनें। ज्यादा ऑयलिंग से बचें लेकिन एक पतली प्रोटेक्टिव लेयर जरूर रखें। सेंसिटिव स्किन खुशबूदार या केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचें। पहले पैच टेस्ट करें और जहां तक संभव हो हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का ही उपयोग करें। केमिकल रंगों से बचाव क्यों जरूरी? विशेषज्ञों के अनुसार कई रंगों में लेड मरकरी और अन्य हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं जो स्किन एलर्जी रैश और पिगमेंटेशन का कारण बन सकते हैं। अगर रंग लगाने के बाद जलन या खुजली हो तो त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय सादे पानी से धोएं और जरूरत पड़ने पर स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें। क्या बिल्कुल न करें? रंग छुड़ाने के लिए स्किन को जोर से न रगड़ें।हार्श स्क्रब या केरोसिन जैसे घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें।बहुत गर्म पानी से चेहरा न धोएं।सही तैयारी के साथ आप होली के रंगों का आनंद भी ले सकते हैं और अपनी त्वचा को सुरक्षित भी रख सकते हैं।

पालक खाने से पथरी और जोड़ों में दर्द? इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी..

नई दिल्ली ।पालक को अक्सर सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि यह रक्त बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने और पेट की सेहत सुधारने में मदद करता है। लेकिन हर किसी के लिए यह सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों के लिए पालक का सेवन परेशानी का कारण बन सकता है। आयुर्वेद में पालक के गुण और शरीर के दोषों वात, पित्त, कफ पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है। जहां यह रक्तवर्धक और पोषण से भरपूर है, वहीं इसके अत्यधिक सेवन से पथरी का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उन लोगों को, जिन्हें पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन UTI या किडनी की समस्याएं हैं, पालक से बचना चाहिए। यह मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा कर सकता है और आगे जाकर पथरी का कारण बन सकता है। यदि आपकी पाचन शक्ति कमजोर है, तो पालक से परहेज करना बेहतर है। पाचन अग्नि मंद होने पर पालक पेट में सही तरीके से पचता नहीं और टॉक्सिन पैदा कर सकता है। इससे पेट भारी, गैस या खराब बैक्टीरिया का विकास हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में वात और कफ की अधिकता वाले लोग भी पालक का सेवन सीमित करें। पालक की भारी प्रकृति कफ को बढ़ाकर श्वसन समस्याएं और वात को बढ़ाकर जोड़ों में जकड़न या गैस की समस्या पैदा कर सकती है। पालक फायदेमंद होने के बावजूद कुछ परिस्थितियों में नुकसानदेह भी हो सकता है। खासकर यूटीआई, पथरी, कमजोर पाचन शक्ति और वात-कफ अधिक होने वाले लोगों को पालक का सेवन सीमित करना चाहिए। संतुलित मात्रा और सही तैयारी के साथ पालक का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन साव

पूरे शरीर के लिए योग का वरदान: सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे और अभ्यास

नई दिल्ली ।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां अनियमित दिनचर्या, तनाव और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत आम हो गई है, वहीं शरीर कमजोर और सुस्त महसूस करना भी आम बात हो गई है। ऐसे समय में रोजाना 10 से 15 मिनट का योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक ऊर्जा बढ़ाने में भी कारगर साबित होता है । मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, सर्वांगपुष्टि आसन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासान है। यह पूरे शरीर को सक्रिय कर मांसपेशियों की ताकत, रक्त संचार और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, जिससे कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है। सर्वांगपुष्टि आसन पूरे शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर पेट, कमर और पैरों की चर्बी घटाने में मदद करता है। बेहतर रक्त संचार के कारण शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा, मोटापा, कब्ज और शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याओं में सुधार आता है। बच्चों और युवाओं में हाइट और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने में भी यह आसन सहायक है। जोड़ों की जकड़न दूर होती है, लचीलापन बढ़ता है और थकान एवं तनाव कम होकर ऊर्जा का स्तर बनाए रहता है। हालांकि, इसे करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। गर्दन, पीठ या कंधे में चोट, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएं और पीरियड्स के दौरान भी इसे टालें। शुरुआत में अभ्यास को ज्यादा लंबा न रखें, सांस पर ध्यान दें और खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद ही करें। असुविधा या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं। सर्वांगपुष्टि आसन शरीर को मजबूत बनाता है, सुस्ती दूर करता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है। रोजाना 10 मिनट का नियमित अभ्यास आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने का सरल और प्रभावी तरीका है।

कार, बस या फ्लाइट में मोशन सिकनेस? इन आसान टिप्स से राहत पाएं

नई दिल्ली। सफर का मज़ा तब ही बढ़ता है जब रास्ता आरामदायक और परेशानी-मुक्त हो। लेकिन कई लोगों के लिए बस, कार या फ्लाइट में सफर करना मोशन सिकनेस के कारण मुश्किल भरा हो जाता है। चक्कर, उलझन, मतली और कभी-कभी उल्टी की समस्या ऐसे यात्रियों के लिए ट्रिप का मज़ा ही खराब कर देती है। खासकर बच्चों और महिलाओं में मोशन सिकनेस अधिक देखने को मिलती है। मोशन सिकनेस तब होती है जब आंखों, कानों और शरीर से मिलने वाले संकेत दिमाग तक अलग-अलग तरीके से पहुंचते हैं। यानी शरीर को स्थिर महसूस होता है, लेकिन आंखें चलती हुई चीजें देखती हैं। यही असंतुलन दिमाग को भ्रमित करता है और मतली, चक्कर या उल्टी जैसी समस्याएं पैदा करता है। मोशन सिकनेस क्यों होती है?हमारे कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम, जिसे वेस्टिब्युलर सिस्टम कहते हैं, शरीर की गति को महसूस करता है। जब यह सिस्टम और आंखों से मिलने वाली जानकारी मेल नहीं खाती, तो दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है। इसका असर मतली, उल्टी, पसीना और सिरदर्द के रूप में दिखता है। लंबी यात्रा, घुमावदार सड़कें और बंद वाहन इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं। मोशन सिकनेस से बचने के आसान उपाय1. सही सीट का चुनाव करेंकार में आगे की सीट, बस में खिड़की के पास और फ्लाइट में विंग के पास वाली सीट अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती है। यहां बैठने से झटके कम महसूस होते हैं और चक्कर आने की संभावना घटती है। 2. हल्का और संतुलित भोजन करेंसफर से पहले तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें और बहुत ज्यादा खाली पेट भी न रहें। अदरक की चाय, नींबू पानी या हल्का स्नैक मोशन सिकनेस को कम करने में मदद कर सकते हैं।3. नजरें स्थिर रखेंचलती गाड़ी में मोबाइल या किताब पढ़ना मोशन सिकनेस को बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि दूर किसी स्थिर बिंदु को देखें या आंखें बंद करके आराम करें। 4. ताजी हवा और हाइड्रेशनवाहन में ताजी हवा का इंतजाम रखें। खिड़की खोलें या एयर वेंट को अपनी ओर रखें। साथ ही पानी की छोटी-छोटी घूंट लेते रहें। यह शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाएगा और उलझन कम करेगा। 5. दवाइयों का सहाराअगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी-नॉशिया या एंटीहिस्टामिन दवाएं ली जा सकती हैं। इन्हें सफर शुरू होने से पहले लेना ज्यादा असरदार होता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दवा लेने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। मोशन सिकनेस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही तैयारी और सावधानी अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सही सीट पर बैठना, हल्का भोजन करना, नजरें स्थिर रखना और पर्याप्त हाइड्रेशन, सफर को आरामदायक और मज़ेदार बना सकते हैं।