किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है

नई दिल्ली । आज के समय में किडनी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और इसे अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे जैसे किडनी की कार्यक्षमता घटती है शरीर की त्वचा और नाखून कई संकेत देने लगते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम संकेतों में से एक है त्वचा का अत्यधिक रूखा होना। त्वचा खुरदुरी पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है कई बार इसमें दरारें भी पड़ जाती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है। लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है। यह खुजली कभी शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहती है और कभी पूरे शरीर में फैल जाती है। अगर यह लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान उभरने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। किडनी सही से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई देता है जो पीली धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा पर मोटी और पीली परत भी बन जाती है। इसके अलावा नाखूनों में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है। कभी कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों टखनों हाथों या चेहरे पर सूजन आ सकती है और त्वचा तनी या चमकदार दिख सकती है। खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर छोटे दाने या रैशेज भी उभर सकते हैं जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी यह दोबारा उभर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ पैर या चेहरे पर दिखाई देते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं। पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है। इसलिए अगर त्वचा में लगातार रूखापन खुजली दाने नाखूनों में बदलाव सूजन या किसी भी तरह की असामान्य गांठ नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर किडनी समस्याओं और फेलियर को रोका जा सकता है। अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही अपने शरीर के छोटे छोटे संकेतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार

नई दिल्ली ।होली के त्योहार में रंगों की मस्ती तभी फीकी पड़ने लगती है जब स्किन एलर्जी या जिद्दी केमिकल वाले रंगों का डर सताने लगता है। अक्सर लोग अपनी त्वचा के खराब होने के खौफ से खुद को घर के अंदर कैद कर लेते हैं, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप सही Pre-Holi और Post-Holi स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो आप बिना किसी फिक्र के गुलाल और पानी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं वे प्रभावी टिप्स जो आपकी त्वचा को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाकर उसे रेशमी और चमकदार बनाए रखेंगे।होली से पहले: सुरक्षा की ढाल तैयार करेंहोली के मैदान में उतरने से पहले अपनी त्वचा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाना जरूरी है, ताकि रंग रोमछिद्रों के अंदर न समा सकें। इसके लिए सबसे पहला कदम है “त्वचा को डीप मॉइस्चराइज करना”। घर से बाहर निकलने से पहले स्किन को अच्छे से हाइड्रेट करें। आप लाइट वेट मॉइस्चराइजर या हाइलूरोनिक एसिड वाले सीरम का उपयोग कर सकते हैं। यह त्वचा और रंगों के बीच एक फिजिकल बैरियर बना देता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है, तो तेल आधारित मॉइस्चराइजर लगाना सबसे बेहतर विकल्प है। दूसरा महत्वपूर्ण टिप है “एक्सफोलिएशन से दूरी”। होली से कम से कम दो दिन पहले किसी भी तरह के स्क्रब या फेस पीलिंग ट्रीटमेंट से बचें। एक्सफोलिएशन से डेड स्किन हट जाती है, जिससे नई त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है और रंगों के केमिकल उस पर तुरंत जलन या रैशेज पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने नाखूनों की सुरक्षा करना न भूलें। नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश या बेस कोट की एक परत लगाएं, ताकि रंग अंदर तक न फंसे और बाद में आसानी से साफ हो जाए। अंत में एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। धूप में घंटों होली खेलने से होने वाली टैनिंग और UV किरणों के नुकसान से बचने के लिए इसे चेहरे, गर्दन और बाहों पर जरूर लगाएं। होली के बाद: ऐसे लौटाएं अपनी खोई हुई रौनकरंगों से सराबोर होने के बाद बारी आती है उन्हें सही तरीके से साफ करने की। यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग “गर्म पानी” का इस्तेमाल करके करते हैं। हमेशा याद रखें कि रंगों को ठंडे पानी से ही धोना चाहिए। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और अधिक पक्का कर देता है, जिससे उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है। त्वचा से रंग हटाने के लिए किसी कठोर साबुन के बजाय “जेंटल और हाइड्रेटिंग फेस क्लींजर” का चुनाव करें। इसे सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से रगड़ें और फिर पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चेहरा सुखाते समय तौलिए से रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से थपथपाकर Pat dry सुखाएं। एक बार रंग निकल जाने के बाद, नमी को लॉक करना सबसे जरूरी है। त्वचा के नेचुरल हाइड्रेशन लेवल को बहाल करने के लिए रिपेयरिंग सीरम और एक हैवी मॉइस्चराइजर लगाएं। अंत में भले ही होली खत्म हो गई हो, लेकिन अगले कुछ दिनों तक सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखें, क्योंकि रंगों के संपर्क में आने के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है और सूरज की रोशनी उसे जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है।
रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि नियमित वेतन बंद होने के बाद घर का खर्च कैसे चलेगा। जिन लोगों ने पहले से पेंशन या निवेश की ठोस योजना नहीं बनाई होती, उनके लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार की एक लोकप्रिय और सुरक्षित योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आती हैसीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम। यह योजना खासतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित आय मिलती रहे और पूंजी भी सुरक्षित रहे। एक सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आकर्षक ब्याज दर के साथ हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है। यही तिमाही ब्याज वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी नियमित आय का काम करता है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित योजना है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जिससे यह और अधिक आकर्षक बन जाती है। इस योजना में निवेश करने के लिए सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु होना आवश्यक है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के वे लोग भी निवेश कर सकते हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली हो, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश करें। खाता व्यक्तिगत रूप से या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है, लेकिन प्राथमिक खाताधारक की आयु पात्रता के अनुरूप होनी चाहिए। निवेश सीमा की बात करें तो SCSS में न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है और राशि 1,000 के गुणांक में ही जमा करनी होती है। अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपए है। यदि पति और पत्नी दोनों अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक निवेश संभव है। ध्यान रहे कि इस योजना में निवेश एकमुश्त करना होता है, किस्तों में जमा करने का विकल्प नहीं है। कई लोग रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पीएफ, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की राशि को इसमें लगाकर सुरक्षित और नियमित आय सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तिमाही आधार पर खाते में जमा होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 30 लाख रुपए निवेश करता है, तो उसे सालाना लगभग 2.46 लाख रुपए ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपए और औसतन लगभग 20,500 रुपए प्रतिमाह के बराबर नियमित आय प्राप्त होगी। यह राशि रिटायरमेंट के बाद घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है। खाता देश के अधिकृत बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पहचान पत्र, पैन कार्ड और निवेश राशि के साथ आवेदन करना होता है। कुल मिलाकर, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम उन लोगों के लिए मजबूत विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के साथ नियमित और सुनिश्चित आय चाहते हैं।
होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…

नई दिल्ली।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा है सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस ब्रेक और शाम की थकान तक कई लोग दिन में तीन से चार बार या उससे भी अधिक चाय पीते हैं ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब नहीं है चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन हल्का दाग छोड़ सकते हैं खासकर दांतों पर लेकिन ये तत्व सीधे तौर पर होंठों को स्थायी रूप से काला नहीं करते असली समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक गर्म चाय बार बार पीता है गर्म पेय का लगातार संपर्क होंठों की नाजुक त्वचा को प्रभावित करता है इससे त्वचा की ऊपरी परत सूखने लगती है और धीरे धीरे पपड़ी बनती है लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है विशेषज्ञ बताते हैं कि होंठों के कालेपन के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ा कारण है जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो होंठ सूखकर बेजान हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक गुलाबी रंग फीका पड़ने लगता है धूम्रपान या तंबाकू सेवन भी होंठों की रंगत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निकोटीन और अन्य रसायन पिगमेंटेशन को बढ़ाते हैं जिससे होंठ धीरे धीरे काले हो सकते हैं इसी तरह बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना भी हानिकारक है सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ा सकती हैं जिससे होंठों का रंग गहरा हो जाता है लिप केयर की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है बार बार होंठ चाटना सस्ते या घटिया गुणवत्ता वाले लिप प्रोडक्ट्स का उपयोग करना या रात में मॉइस्चराइज न करना होंठों की सेहत पर असर डालता है कुछ मामलों में एलर्जी या हार्मोनल बदलाव भी रंग में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है वैश्विक स्तर पर भी त्वचा और होंठों की सुरक्षा को दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा माना गया है जैसा कि World Health Organization अपने स्वास्थ्य संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों में त्वचा सुरक्षा पर जोर देता है अगर आप होंठों की प्राकृतिक रंगत बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं दिनभर पर्याप्त पानी पिएं SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करें अत्यधिक गर्म चाय या कॉफी से बचें धूम्रपान से दूरी रखें और सोने से पहले होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं यदि होंठों का रंग अचानक बहुत ज्यादा गहरा हो जाए जलन सूजन या दर्द महसूस हो तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है क्योंकि कभी कभी यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है
रिश्तों से पहले खुद से रिश्ता, क्यों बढ़ रहा है सिंगल रहने और सेल्फ केयर का ट्रेंड
लीजिये आ गया घूमने के लिये परफेक्ट मौसम, जानिए दिल्ली में घूमने लायक जगहों के नाम

नई दिल्ली । दिल्ली की सर्दियां और हल्की बसंत की हवा घूमने का ऐसा समय है जब राजधानी की खूबसूरती अपने पूरे रंग में दिखाई देती है. ऐतिहासिक इमारतों से लेकर आधुनिक पार्कों तक, दिल्ली में घूमने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है. नीचे दिल्ली की कुछ चुनिंदा और सबसे लोकप्रिय जगहों की जानकारी दी गई है. इंडिया गेट – देशभक्ति का प्रतीक राजपथ अब कर्तव्यपथ पर स्थित इंडिया गेट दिल्ली का हमेशा पसंद किया जाने वाला घूमने का स्थान है. यह विशाल वार मेमोरियल प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बनाया गया था. यहां के हरे-भरे लॉन पिकनिक और शाम की सैर के लिए आदर्श हैं. लाल किला – इतिहास का शानदार अध्याय लाल किला, दिल्ली का सबसे भव्य किला और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है. शाहजहां द्वारा निर्मित इस किले में कई सुंदर महल, संग्रहालय और विशाल उद्यान हैं. यह दिल्ली की पहचान और इतिहास प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा स्थान है. क़ुतुब मीनार – दिल्ली का आसमान छूता आकर्षण 12वीं सदी में बनी क़ुतुब मीनार 73 मीटर ऊंची ऐतिहासिक मीनार है, जो अपनी जटिल नक्काशी और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. इसके आसपास का क़ुतुब परिसर भी उतना ही खूबसूरत है. यह फोटो खींचने और इतिहास जानने के शौकीनों के लिए बेस्ट जगह है. अक्षरधाम मंदिर – कला, संस्कृति और भव्यता दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक मंदिरों में से एक अक्षरधाम मंदिर दिल्ली की शान है. यहां की भव्य पत्थर नक्काशी, संगीतमय फाउंटेन शो और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. लोटस टेंपल – शांत वातावरण के साथ खूबसूरत वास्तुकला सफेद संगमरमर से बना लोटस टेंपल अपनी कमल आकार की डिजाइन के लिए विश्वप्रसिद्ध है. यह बहाई उपासना स्थल है और यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है. ध्यान और शांति पसंद करने वालों के लिए यह आदर्श स्थान है. हुमायूं का मकबरा – मुगल कला का उत्कृष्ट नमूना हुमायूं का मकबरा दिल्ली का पहला गार्डन टॉम्ब माना जाता है और यह ताजमहल का प्रेरणास्रोत भी माना जाता है. चारों तरफ फैले हरे उद्यान इसे और आकर्षक बनाते हैं. सर्दी के मौसम में यहां घूमना बेहद सुखद अनुभव होता है. दिल्ली में मौसम सुहाना हो तो घूमने का मज़ा दोगुना हो जाता है. ऐतिहासिक धरोहरें, आधुनिक वास्तुकला, पार्क, मंदिर, यह शहर हर तरह के यात्री के लिए कुछ खास रखता है. इसलिए इस मौसम में दिल्ली को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें.
गाजर जल्दी हो जाती है काली और सूखी? जानिए स्टोर करने का सही तरीका वरना होगा नुकसान

नई दिल्ली।सर्दियों के मौसम में बाजार में गाजर की भरमार रहती है लोग सलाद सब्जी जूस और हलवे के लिए एक साथ ज्यादा मात्रा में गाजर खरीद लेते हैं लेकिन कुछ ही दिनों में गाजर सूखने लगती है काली पड़ जाती है या गलकर खराब हो जाती है कई बार फ्रिज में रखने के बावजूद भी इसकी ताजगी बरकरार नहीं रहती ऐसे में जरूरत है सही स्टोरेज तकनीक अपनाने की ताकि गाजर कई हफ्तों तक कड़क और लाल बनी रहे सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि गाजर खरीदते ही उसके ऊपर लगे हरे पत्तों को अलग कर दें ये पत्ते गाजर की नमी को तेजी से खींचते हैं जिससे गाजर जल्दी मुरझा जाती है अगर आप चाहते हैं कि गाजर ज्यादा दिनों तक ताजा रहे तो पत्तों को काटकर अलग कर दें और केवल जड़ वाला हिस्सा ही स्टोर करें दूसरा तरीका है गाजर को पानी में स्टोर करना गाजर को पहले साफ पानी से धो लें फिर एक एयरटाइट कंटेनर या कांच के जार में रखें उसमें इतना पानी भरें कि गाजर पूरी तरह डूब जाए इसके बाद जार को फ्रिज में रख दें ध्यान रहे कि हर दो से तीन दिन में पानी बदलते रहें इससे गाजर अपनी नमी बनाए रखती है और कई हफ्तों तक कड़क बनी रहती है अगर आप गाजर को सूखे तरीके से स्टोर करना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें फिर पेपर टॉवल या अखबार में लपेटकर जिप लॉक बैग में रखें यह तरीका अतिरिक्त नमी को सोख लेता है जिससे सड़न की संभावना कम हो जाती है ध्यान रखें कि गाजर बिल्कुल सूखी हो क्योंकि हल्की सी नमी भी फ्रिज में फफूंद और सड़न को बढ़ावा दे सकती है लंबे समय के लिए गाजर सुरक्षित रखना हो तो ब्लांचिंग और फ्रीजिंग का तरीका अपनाया जा सकता है गाजर को छोटे टुकड़ों में काट लें फिर उन्हें दो मिनट के लिए उबलते पानी में डालें इसके तुरंत बाद बर्फ वाले ठंडे पानी में डालकर ठंडा करें फिर अच्छी तरह सुखाकर फ्रीजर बैग में पैक कर दें इस तरीके से गाजर लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और जरूरत पड़ने पर सीधे इस्तेमाल की जा सकती है एक और जरूरी बात यह है कि गाजर को सेब या केले जैसे फलों के साथ न रखें ये फल एथिलीन गैस छोड़ते हैं जिससे गाजर जल्दी पककर खराब हो सकती है इसलिए फ्रिज में अलग ड्रॉअर या अलग कंटेनर में स्टोर करना बेहतर रहता है अगर इन आसान और प्रभावी तरीकों को अपनाया जाए तो गाजर कई हफ्तों तक ताजी बनी रह सकती है इससे न केवल स्वाद और पोषण बरकरार रहता है बल्कि बार बार सब्जी खराब होने से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बचाया जा सकता है
SAFETY ALERET: थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त अलर्ट, Central Drugs Standard Control Organization और Drug Controller General of India ने जारी किए नए निर्देश

SAFETY ALERET: नई दिल्ली। देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर स्वास्थ्य महकमे ने गंभीर चेतावनी जारी की है। हाइपरथायरॉइडिज्म के इलाज में दी जाने वाली कार्बिमाजोल और विभिन्न बैक्टीरियल संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली डॉक्सीसाइक्लिन के कुछ नए और संभावित रूप से खतरनाक दुष्प्रभाव सामने आए हैं। दवाओं की सुरक्षा की राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा के बाद नियामक संस्थाओं ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि इन दवाओं के पैकेट, लेबल और प्रिस्क्रिप्शन जानकारी में नए साइड इफेक्ट्स को स्पष्ट और प्रमुख चेतावनी के रूप में दर्ज किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बिमाजोल का उपयोग मुख्य रूप से बढ़े हुए थायरॉइड हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह दवा लंबे समय से प्रभावी उपचार के रूप में इस्तेमाल होती रही है, लेकिन हालिया आकलन में पाया गया है कि कुछ मरीजों में इसके सेवन से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या खतरनाक रूप से कम हो सकती है। इस स्थिति को एग्रानुलोसाइटोसिस कहा जाता है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी होने पर साधारण संक्रमण भी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। वायरस, बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से लड़ने की क्षमता घटने के कारण मरीज को तेज बुखार, गले में खराश, कमजोरी या बार-बार संक्रमण की शिकायत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए चिकित्सकों को सलाह दी गई है कि कार्बिमाजोल लेने वाले मरीजों की नियमित ब्लड जांच कराई जाए और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सा परीक्षण कराया जाए। वहीं, डॉक्सीसाइक्लिन को लेकर भी चिंताजनक संकेत मिले हैं। यह एंटीबायोटिक दवा त्वचा रोग, श्वसन संक्रमण, मूत्र संक्रमण और अन्य बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में व्यापक रूप से दी जाती है। हालांकि इसे आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन नई समीक्षा में कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दुष्प्रभाव सामने आए हैं। मरीजों में मूड में बदलाव, घबराहट, चिंता, अवसाद, भ्रम या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण देखे गए हैं। यद्यपि ऐसे मामले अपेक्षाकृत दुर्लभ बताए गए हैं, फिर भी एहतियात के तौर पर इन संभावित जोखिमों को दवा की आधिकारिक जानकारी में शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि डॉक्टर और मरीज दोनों पूरी तरह सतर्क रह सकें। नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवा कंपनियों को पारदर्शिता के साथ सभी संभावित जोखिमों को सामने लाना होगा। अब इन दवाओं के पैकेट पर सख्त सुरक्षा चेतावनी छापना अनिवार्य होगा। साथ ही चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे दवा लिखते समय मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और संभावित जोखिमों पर विशेष ध्यान दें। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा अचानक बंद न करें, क्योंकि इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। लेकिन यदि बुखार, गले में संक्रमण, मानसिक अस्थिरता या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार ही इन संभावित दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
TODAY’S RASHIFAL: शुक्रवार का राशिफल, जाने क्या कहते हैे आपके स्टार्स

TODAY’S RASHIFAL: युगाब्ध-5126, विक्रम संवत 2082, राष्ट्रीय शक संवत-1947, सूर्योदय 06.44, सूर्यास्त 06.04, ऋतु – शीतफाल्गुन शुक्ल पक्ष तृतीया, शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, मेष राशि :- मित्तव्ययता रखें क्योंकि रुपये-पैसों की सुविधा आगे मिले न मिले। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बना रहेगा। बचते-बचते कलह विवाद का डर बना रहेगा। शुभांक-4-5-7वृष राशि :- निकटस्थ व्यक्ति का सहयोग काम को गति दिला देगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। शुभांक-3-5-7मिथुन राशि :- कार्यारम्भ से पहले उचित मूल्याकंन कर लें। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर-प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। मेहमानों का आगमन होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। शुभांक-5-7-9कर्क राशि :- ज्ञानीजनों का सानिध्य प्राप्त होगा। आध्यात्मिक वातावरण बनेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। यात्रा का योग बन रहा है। शुभांक-2-6-7सिंह राशि :- विवादों व मुकदमे बाजी से राहत मिलेगी। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-4-6-8कन्या राशि :- भावनाओं में न बहें, सावधान रहें। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। अपने आपको अधिक सक्रिय पायेगें। अवरुद्घ कार्य सम्पन्न होंग। समाज में मान-सम्मान ब$ढेगा। आय-व्यय की स्थिति समान्य रहेगी। शुभांक-3-5-7तुला राशि :- शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग है। शुभांक-2-4-6वृश्चिक राशि :- कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। हरि करे सो खरी अत: हानि का कोई भय नहीं, यथावत कार्य जारी रखें। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। मातृ पक्ष से विशेष लाभ। शुभांक-2-4-7धनु राशि :- मुंह मांगी मुराद मिलेगी यानि इच्छित फल की प्राप्ति होगी। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। शुभांक-3-5-8मकर राशि :- स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। बचते-बचते कलह विवाद का डर बना रहेगा। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। शुभांक-3-6-9कुम्भ राशि :- अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढ़ने के आसार रहेंगे। अपने काम को प्राथमिकता से करें। किसी से निकटता प्रेम-प्रसंग में बदलेगी। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-3-5-7मीन राशि :- नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। संतान पक्ष से थोड़ी चिंता रहेगी। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। शुभांक-5-8-9
महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, सही रूटीन है जरूरी, जानिए बिगिनर्स के लिए स्किन केयर का A to Z

नई दिल्ली। आज के समय में धूल, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारी त्वचा पर दिखता है। अगर आप भी अपनी स्किन का ख्याल रखना शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्किन केयर कोई मुश्किल काम नहीं है। एक सही रूटीन का मतलब महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना है। एक बेसिक स्किन केयर रूटीन को दो हिस्सों में बांटा जाता है- मॉर्निंगऔर नाइट । आइए जानते हैं कि अगर आप बिगिनर हैं, तो आपकी मॉर्निंग और ईवनिंग स्किन केयर रूटीन कैसी होनी चाहिए। मॉर्निंग स्किन केयर रूटीन सुबह के रूटीन का मुख्य उद्देश्य आपकी त्वचा को हाइड्रेट करना और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना होता है। क्लींजिंग- सुबह उठने के बाद एक माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोएं। यह रात भर में त्वचा पर जमा हुए तेल और पसीने को साफ कर देता है। मॉइस्चराइजिंग- चेहरा धोने के बाद त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। अपनी स्किन टाइप ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन के अनुसार एक हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है। सनस्क्रीन- सबसे जरूरी स्टेप है। चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर, सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। यह त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने, झुर्रियों और टैनिंग से बचाता है। कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। नाइट स्किन केयर रूटीन रात का समय त्वचा की मरम्मत के लिए होता है। रात में आपकी स्किन सेल्स खुद को रिपेयर करती हैं, इसलिए यह रूटीन बहुत जरूरी है। डबल क्लींजिंग या डीप क्लीन- अगर आपने दिन में मेकअप या सनस्क्रीन लगाया है, तो उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। पहले क्लींजिंग मिल्क या ऑयल से चेहरा साफ करें, फिर फेस वॉश का इस्तेमाल करें। टोनिंग- अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो आप टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह त्वचा के pH लेवल को संतुलित करता है और पोर्स को साफ रखता है। आई क्रीम या सीरम- अगर आपको डार्क सर्कल्स या मुहांसों जैसी समस्या है, तो रात में इनसे जुड़े ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स या आई क्रीम लगाएं। मॉइस्चराइजर- रात में त्वचा को गहरे पोषण की जरूरत होती है। ऐसा मॉइश्चराइजर चुनें जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स हों, जो रात भर आपकी त्वचा को रिपेयर कर सकें। बिगिनर्स के लिए कुछ जरूरी बातें पैच टेस्ट- कोई भी नया प्रोडक्ट पूरे चेहरे पर लगाने से पहले उसे हाथ पर लगाकर 24 घंटे तक चेक करें कि कहीं जलन तो नहीं हो रही। धैर्य रखें- किसी भी स्किन केयर रूटीन का असर दिखने में कम से कम 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। इसलिए रातों-रात चमत्कार की उम्मीद न करें। पानी पिएं- बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स तभी असर करेंगे जब आपका शरीर अंदर से हाइड्रेटेड होगा। दिन भर में भरपूर पानी पिएं।अपनी स्किन टाइप पहचानें- बिना अपनी स्किन टाइप जाने कोई भी प्रोडक्ट न खरीदें। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।