त्वचा पर आएगा हीरे जैसा नेचुरल निखार, अपनाएं ये ट्रिक

नई दिल्ली| आज के समय में ऐसे कई बड़े और महंगे प्रोडक्ट हैं जिनका उपयोग हम अपने चेहरे और त्वचा को चमकाने के लिए करते हैं। लेकिन कई बार पैसे ना होने की वजह से हम इन प्रोडक्ट को नहीं खरीदते हैं। लेकिन आप परेशान होने की बात नहीं है अगर आप अपनी त्वचा को और ज्यादा चमकना चाहती हैं तब आपके लिए एक छोटा सा नींबू ही काफी कारगर साबित हो सकता है बस इससे जुड़ा आपको यह उपाय और यह ट्रिक अपनाना चाहिए। नींबू के छिलके का कमालहम। अक्सर नींबू के रस का इस्तेमाल स्वाद के लिए करते हैं, लेकिन हम अक्सर उसके छिलकों को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है नींबू का छिलका ही आपके चेहरे और स्किन को काफी हद तक चमक सकता है। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, नींबू के छिलके आपकी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। चलिए जानते हैं कैसे। नींबू के छिलके के फायदे प्राकृतिक ब्लीचये त्वचा पर मौजूद काले धब्बे और दाग-धब्बे हल्के करने में मदद करते हैं। निखारये त्वचा में रक्त संचार को बढ़ाते हैं, जिससे चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक आती है। रूखी हुई त्वचा हटानाछिलकों का पाउडर रूखी त्वचा (डेड स्किन) हटाने के लिए एक बेहतरीन एक्सफ़ोलिएटर का काम करता है। इस प्रकार करें इस्तेमालआप नींबू के छिलके के पाउडर से एक फ़ेस पैक बना सकते हैं। इसके लिए, नींबू के छिलकों को धूप में सुखा लें और उन्हें पीसकर बारीक पाउडर बना लें। अब, इस पाउडर का 1 चम्मच, 1 चम्मच शहद और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएँ, 15 मिनट तक लगा रहने दें, और फिर ठंडे पानी से धो लें। नींबू के छिलकों से करें मसाजएक अच्छा नींबू लेने उसको काटकर उसके अंदरूनी हिस्से पर थोड़ी सी चीनी या शहद छिड़कें।हल्के हाथों से इसे अपने चेहरे पर धीरे-धीरे रगड़ें। इससे आपकी त्वचा से टैनिंग हटाने में मदद मिलेगी और त्वचा मुलायम महसूस होगी। इस प्रकार आप नींबू नींबू के छिलके से अपनी त्वचा का भरपूर ध्यान रख सकती हैं और उसे चमका सकती हैं।
गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

नई दिल्ली। गर्भावस्था का समय महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ता है। ऐसे में संतुलित और पोषक आहार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इन्हीं पोषक तत्वों में फोलिक एसिड को विशेष स्थान दिया जाता है, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है। फोलिक एसिड, विटामिन बी-9 का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक स्रोत फोलेट कहलाता है। यह शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और रक्त निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है। गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का तेजी से विकास होता है, तब यह पोषक तत्व उसकी वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बच्चे के सबसे महत्वपूर्ण विकास चरण होते हैं। इसी समय भ्रूण के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण होता है। फोलिक एसिड इस प्रक्रिया में सहायक होता है और न्यूरल ट्यूब को सही तरीके से विकसित करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बच्चे में जन्म के समय विकास संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। फोलिक एसिड की कमी केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। इसकी कमी से शरीर में कमजोरी, थकान, एनीमिया और सिरदर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं ताकि शरीर पहले से तैयार हो सके। यह पोषक तत्व कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी, दालें, चना, मूंग और मसूर इसके अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा संतरा, अनार जैसे फल और बादाम-अखरोट जैसे सूखे मेवे भी शरीर में फोलिक एसिड की पूर्ति करते हैं। पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में भी गर्भावस्था के दौरान विशेष आहार पर जोर दिया गया है। इस अवधि को संतुलित भोजन और सही जीवनशैली का समय माना जाता है, जिसमें शरीर को आवश्यक पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन महत्वपूर्ण होता है। सही आहार न केवल मां के स्वास्थ्य को बनाए रखता है, बल्कि शिशु के समुचित विकास में भी मदद करता है। आज के समय में फोलिक एसिड को गर्भावस्था का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। यह न केवल बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूती देता है, बल्कि मां को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए इसे “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है, क्योंकि यह आने वाले जीवन की नींव को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कम समय में बड़ा स्वाद: बूंदी रायता से पाएं गर्मी में राहत और ताजगी..

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में खाने की थाली में कुछ ऐसा होना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दे और खाने को हल्का बना दे। ऐसे समय में दही से बनी चीजों की मांग बढ़ जाती है क्योंकि यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मदद करती हैं। इन्हीं में से एक आसान और लोकप्रिय विकल्प है बूंदी रायता, जो हर उम्र के लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है। बूंदी रायता अपनी सादगी और झटपट बनने वाली रेसिपी के लिए जाना जाता है। यह एक ऐसी डिश है जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और यह खाने के साथ परफेक्ट साइड डिश के रूप में काम करता है। खासकर मसालेदार खाने के साथ इसका स्वाद और भी बेहतर महसूस होता है, क्योंकि यह स्वाद को संतुलित करता है और पेट को ठंडक देता है। इस रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजा दही को अच्छे से फेंटना होता है ताकि वह मुलायम और क्रीमी हो जाए। इसके बाद इसमें थोड़ा पानी मिलाकर इसकी मोटाई को संतुलित किया जाता है। ऐसा करने से रायता हल्का और खाने में आसान बनता है। इसके बाद इसमें पहले से तैयार या हल्की तली हुई बूंदी डाली जाती है, जो इस डिश की मुख्य सामग्री होती है। अब इसमें स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जाता है। कई लोग इसमें काला नमक और भुना हुआ जीरा भी डालते हैं, जिससे इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। चाहें तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च या धनिया भी मिलाया जा सकता है, जो इसे ताजगी और सुगंध प्रदान करता है। सभी सामग्री को अच्छे से मिलाने के बाद इसे कुछ मिनट के लिए रखा जाता है, ताकि बूंदी दही को अच्छे से सोख ले और स्वाद और निखर जाए। बूंदी रायता सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। दही में मौजूद पोषक तत्व पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जबकि बूंदी इसे हल्का और एनर्जी देने वाला बनाती है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी सहायक होता है। इस रेसिपी की खासियत यह है कि इसे किसी भी खाने के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। चाहे रोजमर्रा का भोजन हो या कोई खास अवसर, बूंदी रायता हर प्लेट में एक अलग ही स्वाद जोड़ देता है। इसकी आसान तैयारी और शानदार स्वाद इसे हर घर की पसंदीदा डिश बना देता है।
गर्म मौसम में यूरिन जलन की समस्या? ये घरेलू तरीके देंगे आराम..

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की शारीरिक परेशानियां लेकर आता है। तेज धूप, अधिक पसीना और शरीर में पानी की कमी के कारण लोग अक्सर डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करते हैं। इसी वजह से यूरिन में जलन जैसी समस्या भी काफी आम हो जाती है, जो कई लोगों के लिए असहज स्थिति पैदा कर देती है। डॉक्टरों के अनुसार, जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है। यही गाढ़ा यूरिन मूत्र मार्ग में जलन और असहजता का कारण बनता है। इसके अलावा, बैक्टीरियल इंफेक्शन, गलत खान-पान और साफ-सफाई की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना। नियमित अंतराल पर पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और यूरिन पतला होकर जलन कम करता है। इसके साथ ही नारियल पानी और छाछ का सेवन भी शरीर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। ये दोनों पेय शरीर को ठंडक देते हैं और अंदरूनी संतुलन बनाए रखते हैं। नींबू पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिससे यूरिन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है। जौ का पानी भी एक पारंपरिक और प्रभावी उपाय माना जाता है, जो मूत्र मार्ग की जलन को शांत करने में मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में भी सहायक होता है और गर्मी के प्रभाव को कम करता है। गर्मी के दिनों में खान-पान पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना या जंक फूड शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं, जिससे यूरिन जलन की समस्या और अधिक बढ़ सकती है। ऐसे में हल्का और संतुलित आहार लेना बेहतर होता है। साफ-सफाई का ध्यान रखना भी इस समस्या से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों की स्वच्छता बनाए रखना और सूती, आरामदायक कपड़े पहनना संक्रमण के खतरे को कम करता है। अगर जलन के साथ बुखार, बदबूदार पेशाब या खून जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।
फोलिक एसिड क्यों कहलाता है ‘प्रेग्नेंसी का विटामिन’? मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी

नई दिल्ली गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस समय मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी विकास हो रहा होता है। इसी कारण डॉक्टर फोलिक एसिड के सेवन की सलाह देते हैं, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी विटामिन” भी कहा जाता है। फोलिक एसिड, विटामिन-बी समूह का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों और कुछ सूखे मेवों में पाया जाता है। शरीर में यह नई कोशिकाओं के निर्माण और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था में इसका सबसे अहम काम भ्रूण के न्यूरल ट्यूब (brain and spinal cord) का सही विकास करना होता है। यदि गर्भधारण से पहले और शुरुआती तीन महीनों में फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में न लिया जाए, तो बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का विकास प्रभावित होना। इसी वजह से विशेषज्ञ गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा बनी रहे और भ्रूण का विकास सही तरीके से हो सके। फोलिक एसिड की कमी से गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, कमजोरी, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह शरीर में रक्त निर्माण को भी संतुलित रखता है, जिससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। आयुर्वेद में गर्भावस्था को “गर्भिणी परिचर्या” कहा गया है, जिसमें संतुलित आहार को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें पालक, मेथी, आंवला, संतरा, अनार, मूंग, चना, बादाम और अखरोट जैसे फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधियों का सेवन भी डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संतुलित आहार और फोलिक एसिड का सही सेवन गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।
गर्मियों का एनर्जी बूस्टर: शिकंजी, स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल

नई दिल्ली| गर्मियों की तेज धूप और लू से राहत पाने के लिए शिकंजी एक बेहतरीन और प्राकृतिक पेय माना जाता है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक भी प्रदान करती है। नींबू, काला नमक, भुना जीरा और पुदीने से बनी यह पारंपरिक ड्रिंक गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शिकंजी शरीर में पसीने के जरिए खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करती है। इसमें मौजूद नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो इम्युनिटी को मजबूत बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। शिकंजी पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। भुना जीरा पाचन क्रिया को मजबूत करता है और सूजन कम करने में सहायक होता है, जबकि पुदीना शरीर को ताजगी देता है और डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है। इसके अलावा यह वजन नियंत्रित करने में भी मददगार है। नींबू में मौजूद पेक्टिन फाइबर भूख को नियंत्रित करता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम हो सकता है। यही कारण है कि इसे एक हेल्दी समर ड्रिंक माना जाता है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी आम समस्या है, ऐसे में शिकंजी हाइड्रेशन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह थकान को कम करती है और शरीर को पूरे दिन तरोताजा बनाए रखती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार के कृत्रिम और मीठे पेय की बजाय घर पर बनी शिकंजी का सेवन अधिक फायदेमंद है। इसे बनाना भी बेहद आसान है ताजा नींबू का रस, ठंडा पानी, काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है। नियमित रूप से शिकंजी का सेवन गर्मियों में शरीर को न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि त्वचा की सेहत और पाचन को भी बेहतर बनाता है।
हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है

नई दिल्ली| कई लोग अक्सर हाथ और पैरों के ठंडे या सुन्न रहने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल मौसम या सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं होता है, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से ये हिस्से ठंडे महसूस होने लगते हैं। रक्त का सही प्रवाह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा खराब पाचन भी इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर सबसे पहले हाथ-पैरों पर दिखाई देता है। तनाव और कमजोरी भी इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो यह गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने की स्थिति में रेनॉड्स डिजीज का खतरा हो सकता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और अन्य जटिल समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं भी इस स्थिति से जुड़ी हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और पैदल चलना चाहिए, ताकि रक्त संचार बेहतर बना रहे। हाथ-पैरों की हल्की मालिश और गर्म रखने के उपाय भी राहत दे सकते हैं। इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है, इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।
गर्मी में शरीर को ठंडक देने वाला देसी ड्रिंक: झटपट गुलकंद ठंडाई बनाना सीखें

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, लू और शरीर में थकान जैसी कई समस्याएं लेकर आता है। इस समय शरीर को ऐसे पेय की जरूरत होती है जो न सिर्फ ठंडक दे बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करे। पारंपरिक भारतीय रसोई में ऐसे कई प्राकृतिक विकल्प मौजूद हैं, जिनमें गुलकंद ठंडाई एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावी पेय माना जाता है। यह ड्रिंक गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देने के साथ-साथ अंदरूनी ताजगी भी बनाए रखती है। गुलकंद ठंडाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम समय में घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें उपयोग होने वाली सामग्री पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना ठंडक और पोषण प्रदान करती है। गुलकंद, दूध और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इसे एक संपूर्ण हेल्दी ड्रिंक बनाता है, जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है। इस पेय को बनाने के लिए सबसे पहले कुछ मुख्य सामग्री जैसे बादाम, काजू, सौंफ, खसखस और इलायची को थोड़ी देर के लिए पानी में भिगोया जाता है ताकि वे नरम हो जाएं और आसानी से पीसे जा सकें। इसके बाद इन्हें मिक्सर में डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार किया जाता है, जो ठंडाई का बेस तैयार करता है। यह पेस्ट न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी देता है। इसके बाद ठंडा दूध लिया जाता है और उसमें गुलकंद मिलाया जाता है। गुलकंद अपने ठंडक देने वाले गुणों के कारण शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है और गर्मी के असर को कम करता है। दूध में गुलकंद अच्छी तरह मिलाने के बाद तैयार ड्राई फ्रूट्स पेस्ट इसमें डाला जाता है। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने पर एक गाढ़ी और स्वादिष्ट ठंडाई तैयार हो जाती है। स्वाद और खुशबू को और बेहतर बनाने के लिए इसमें गुलाब जल और थोड़ी चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बाद इसे गिलास में डालकर ऊपर से बर्फ के टुकड़े और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर परोसा जाता है। यह ठंडाई पीने में जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही शरीर को ठंडक और राहत देने वाली भी होती है। गुलकंद ठंडाई केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है, लू के प्रभाव को कम करती है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। गर्मी में होने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत की तरह काम करती है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए एक सुरक्षित और लाभकारी पेय विकल्प है, जिसे गर्मियों के मौसम में जरूर अपनाया जा सकता है।
वजन बढ़ा तो सपना अधूरा रह सकता है मोटापा कैसे कर रहा प्रेग्नेंसी प्लानिंग को प्रभावित

नई दिल्ली । आज के दौर में मोटापा सिर्फ एक लाइफस्टाइल समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह धीरे धीरे प्रजनन क्षमता पर गहरा असर डालने वाला बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बढ़ता वजन अब उन कपल्स के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है जो माता पिता बनने का सपना देख रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार अधिक वजन महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। यह असर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर पड़ता है जिससे गर्भधारण की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। कई मामलों में कंसीव करने में ज्यादा समय लगने लगता है और कभी कभी मेडिकल सहायता की जरूरत भी पड़ती है। महिलाओं की बात करें तो शरीर में अतिरिक्त चर्बी हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकती है। इससे ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है या पूरी तरह रुक सकता है। यह स्थिति गर्भधारण की संभावना को सीधे तौर पर कम कर देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS से भी जुड़ा हुआ है जो महिलाओं में बांझपन की एक प्रमुख वजह माना जाता है। इसके अलावा जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स अधिक होता है उनमें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है और IVF जैसे ट्रीटमेंट की सफलता दर भी कम हो सकती है। वहीं पुरुषों पर भी मोटापे का असर कम गंभीर नहीं है। अतिरिक्त वजन के कारण शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर घट सकता है जिससे स्पर्म काउंट कम हो जाता है। इसके साथ ही स्पर्म की गुणवत्ता और उनकी गति पर भी असर पड़ता है। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। यदि इसके साथ खराब खानपान तनाव और शारीरिक निष्क्रियता जुड़ जाए तो समस्या और बढ़ सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस समस्या को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि व्यक्ति अपने शरीर के वजन में सिर्फ पांच से दस प्रतिशत की कमी भी लाता है तो इससे फर्टिलिटी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करना इस दिशा में बेहद प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं। स्वास्थ्य संस्थानों का भी मानना है कि गर्भधारण की योजना बनाने से पहले हेल्दी वजन बनाए रखना जरूरी है। इससे न सिर्फ कंसीव करने की संभावना बढ़ती है बल्कि मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। समय पर मेडिकल जांच और सही सलाह लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत में तेजी से बढ़ते मोटापे के मामलों को देखते हुए अब यह जरूरी हो गया है कि लोग इस समस्या को सिर्फ बाहरी रूप से न देखें बल्कि इसके अंदर छिपे स्वास्थ्य जोखिमों को भी समझें। प्रजनन क्षमता पर इसका प्रभाव एक गंभीर संकेत है जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसलिए यदि आप माता पिता बनने की योजना बना रहे हैं तो अपने वजन पर ध्यान देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। एक स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ परिवार की नींव रख सकता है और यही छोटी सी समझ आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकती है।
बिना शराब पिए भी खराब हो सकता है आपका लिवर; जंक फूड और पेनकिलर्स के इस घातक गठजोड़ को पहचानें।

नई दिल्ली। मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण इंजन कहा जाने वाला ‘लिवर’ आज एक अनचाहे खतरे के साये में है। अक्सर माना जाता है कि लिवर की खराबी का एकमात्र कारण अत्यधिक शराब का सेवन है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली की कुछ सामान्य चीजें शराब से भी अधिक तेजी से इस अंग को नष्ट कर रही हैं। लिवर न केवल शरीर से जहरीले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालता है, बल्कि यह पाचन के लिए पित्त बनाने और महत्वपूर्ण विटामिन्स को स्टोर करने का कार्य भी करता है। यदि इसमें सूजन या खराबी आती है, तो यह पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को ठप कर सकता है। दुर्भाग्यवश, आजकल हर दूसरा व्यक्ति ‘फैटी लिवर’ की समस्या से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण वह भोजन है जिसे हम सुरक्षित और सामान्य समझकर खा रहे हैं। लिवर को चुपचाप नुकसान पहुँचाने वाली चीजों में सबसे ऊपर प्रोसेस्ड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थ आते हैं। इन डिब्बाबंद स्नैक्स में नमक, चीनी और कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स की भारी मात्रा होती है, जो लिवर की कोशिकाओं में सूजन पैदा करती है। इसी श्रेणी में अत्यधिक चीनी वाले आहार भी शामिल हैं। जब हम सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत अधिक मीठा खाते हैं, तो लिवर उस अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने लगता है। समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होकर सिरोसिस और फाइब्रोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर सकता है। एक और गंभीर खतरा बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स और प्रोटीन पाउडर के सेवन से जुड़ा है। फिटनेस के प्रति बढ़ते जुनून के कारण कई लोग बिना उचित जानकारी के भारी मात्रा में सप्लीमेंट्स लेते हैं, जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके साथ ही, मामूली शारीरिक दर्द के लिए बार-बार पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाएं) लेना भी एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। ये दवाएं रक्त के माध्यम से सीधे लिवर तक पहुँचती हैं और उसे अंदर से डैमेज करना शुरू कर देती हैं। वहीं, जंक फूड और डीप फ्राइड आइटम्स जैसे मोमोज, चाऊमीन और फ्रेंच फ्राइज में इस्तेमाल होने वाला तेल लिवर की पाचन शक्ति को नष्ट कर देता है। लिवर की सेहत को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह विटामिन A, D, E और B12 का मुख्य भंडार है। शराब जहाँ इन पोषक तत्वों को सोख लेती है, वहीं ये पांचों ‘साइलेंट किलर’ लिवर की फिल्टर करने की क्षमता को खत्म कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर की रक्षा के लिए प्राकृतिक और संतुलित आहार ही सबसे उत्तम मार्ग है। यदि आप भी नियमित रूप से बाजार के तले-भुने खाने या बिना जरूरत दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आज ही संभलने की जरूरत है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए लिवर का ‘हैप्पी और हेल्दी’ होना अनिवार्य है।