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समर सुपरफूड खसखस: शरीर को ठंडक के साथ देता है एनर्जी और जरूरी न्यूट्रिएंट्स

नई दिल्ली। गर्मियों की तेज धूप और लू से राहत पाने के लिए लोग कई उपाय अपनाते हैं, लेकिन पारंपरिक देसी नुस्खों की बात ही अलग होती है। ऐसा ही एक असरदार उपाय है खसखस, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान करता है। दादी-नानी के जमाने से खसखस का शरबत और दूध गर्मियों में खासतौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है। आयुर्वेद में खास स्थान, पित्त दोष को करता है शांतखसखस को आयुर्वेद में पित्त दोष को शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है और अंदर से राहत पहुंचाती है। गर्मियों में पेट की जलन, पैरों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में खसखस का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है। पोषक तत्वों का भंडारखसखस छोटे दानों में बड़ा पोषण छुपाए हुए है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने और मौसमी बीमारियों से बचाव में भी मदद करते हैं। ठंडक के साथ बेहतर पाचनगर्मियों में डिहाइड्रेशन और एसिडिटी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में खसखस का सेवन शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखता है और पेट के एसिड को नियंत्रित करता है। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से भी राहत दिलाता है। अच्छी नींद और मानसिक शांतिखसखस का सेवन मानसिक शांति के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को रिलैक्स करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है। आज के तनाव भरे जीवन में यह एक प्राकृतिक उपाय के रूप में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। त्वचा और जोड़ों के लिए भी लाभकारीखसखस का तेल जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से फायदा पहुंचाते हैं। इसके अलावा, खसखस को दूध के साथ पीसकर लगाने से त्वचा की जलन, मुंहासे और सनबर्न में भी राहत मिलती है। सीमित मात्रा में करें सेवनहालांकि खसखस बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अगर किसी को एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। देसी नुस्खा, बड़ा फायदागर्मियों में रोजाना खसखस का शरबत या दूध लेने से शरीर ठंडा, स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। यह एक आसान और प्राकृतिक तरीका है, जिससे आप खुद को गर्मी के असर से बचा सकते हैं। खसखस गर्मियों में शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने, नींद बेहतर करने और त्वचा व जोड़ों की समस्याओं से राहत दिलाने वाला एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर देसी उपाय है।

हेल्थ टिप्स: सुबह उठते ही शरीर में जकड़न दूर करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करते हैं। इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, शरीर में अकड़न बढ़ती है और धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द की समस्या आम हो जाती है। कई लोगों को सुबह उठते ही शरीर भारी लगना, जकड़न महसूस होना और जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आयुर्वेद में इसका प्राकृतिक समाधान बताया गया है। आमवातारि वटी: जोड़ों के दर्द में कारगर उपायआयुर्वेद के अनुसार जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न का मुख्य कारण “वात” का बढ़ना और पाचन तंत्र का कमजोर होना है। इसी समस्या से राहत पाने के लिए आमवातारि वटी के सेवन की सलाह दी जाती है। यह आयुर्वेदिक औषधि शरीर में जमा “आम” (टॉक्सिन) को कम करने में मदद करती है और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाती है। हालांकि, इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। ‘आम’ बढ़ने से बढ़ती हैं बीमारियांजब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में “आम” यानी विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।यह आम आंतों में संक्रमण पैदा करता है और धीरे-धीरे जोड़ों में सूजन, दर्द और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी समस्याओं को जन्म देता है। इस स्थिति में व्यक्ति के लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का शक्तिशाली मिश्रणआमवातारि वटी कई प्रभावी जड़ी-बूटियों से मिलकर बनी होती है। इसमें शुद्ध गुग्गुलु, चित्रक मूल, त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा), शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये सभी मिलकर न सिर्फ जोड़ों के दर्द को कम करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करते हैं। जीवनशैली में बदलाव भी जरूरीकेवल दवा लेने से ही पूरी राहत नहीं मिलती, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी बेहद जरूरी है। सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। इसके साथ मेथी के दाने या लहसुन का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। लहसुन में मौजूद गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। नियमित व्यायाम से मिलेगा फायदालंबे समय तक एक ही जगह बैठने से मांसपेशियों में खिंचाव और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए बीच-बीच में उठकर हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करना जरूरी है। नियमित व्यायाम न सिर्फ जोड़ों को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर को लचीला भी बनाए रखता है। सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरीअगर जोड़ों का दर्द लगातार बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सही इलाज और दिनचर्या में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ रही है। आयुर्वेदिक औषधि आमवातारि वटी और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।

गर्मियों में त्वचा का खास ख्याल, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से पाएं नैचुरल ग्लो

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरा बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में त्वचा की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बिना किसी केमिकल के अपने चेहरे को निखार सकते हैं और दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं। नीम: पिंपल्स और एक्ने का दुश्मनआयुर्वेद में नीम को बेहद गुणकारी माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गर्मियों में अगर पिंपल्स या एक्ने की समस्या हो रही है, तो नीम के पत्तों को पीसकर मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। इससे त्वचा साफ होती है और निखार बढ़ता है। मंजिष्ठा: स्किन टोन को बनाए संतुलितमंजिष्ठा को आयुर्वेद में रक्त शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह त्वचा की रंगत को सुधारने में मदद करती है। मंजिष्ठा का सेवन करने के साथ-साथ इसका फेस पैक बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्किन टोन में निखार आता है। हल्दी: दाग-धब्बों से छुटकाराहर घर में मौजूद हल्दी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी और चंदन के साथ चुटकी भर हल्दी मिलाकर फेस पैक लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और ग्लो बढ़ता है। चंदन: ठंडक और पोषण का खजानागर्मियों में चंदन का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद होता है। इसमें शीतलता के गुण होते हैं, जो त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे पोषण भी देते हैं। यह धूप के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है और त्वचा को तरोताजा बनाए रखता है। मुलेठी: टैनिंग और डार्क स्पॉट से राहतमुलेठी का इस्तेमाल सिर्फ खांसी-जुकाम के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी किया जाता है।इसके लेप से डार्क स्पॉट और टैनिंग कम होती है, जिससे चेहरा साफ और चमकदार नजर आता है। नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर रिजल्टइन सभी जड़ी-बूटियों का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा से जुड़ी समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नई चीज को इस्तेमाल करने से पहले स्किन टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी तरह की एलर्जी से बचा जा सके। गर्मियों में नीम, मंजिष्ठा, हल्दी, चंदन और मुलेठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां त्वचा को निखारने, दाग-धब्बे कम करने और नैचुरल ग्लो पाने में बेहद असरदार साबित होती हैं।

सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा

नई दिल्ली । आज की तेज़-तर्रार लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान ने पेट की समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Stand with Science” के अनुसार पवनमुक्तासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योगासन माना जा रहा है। संस्कृत में पवन का अर्थ है वायु और मुक्त का अर्थ है छोड़ना। इस आसन का उद्देश्य शरीर में फंसी हानिकारक गैस और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। जब आप घुटनों को धीरे-धीरे छाती की ओर दबाते हैं, तो यह पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है जिससे पाचन अग्नि तेज होती है और भोजन का अवशोषण बेहतर होता है। पवनमुक्तासन के लाभ गैस, कब्ज और ब्लोटिंग से राहत – यह वात विकारों को कम करता है, पुरानी कब्ज और एसिडिटी को दूर करता है और आंतों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। वेट लॉस में मदद – पेट, जांघों और कमर के आसपास की जिद्दी चर्बी कम करने में सहायक। पेल्विक और प्रजनन अंगों के लिए लाभकारी – महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता कम करने में मदद करता है। पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभकारी – लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है और निचले हिस्से के दर्द को कम करता है। कैसे करें पवनमुक्तासन योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। गहरी सांस लेते हुए दाएं घुटने को मोड़कर छाती के पास लाएं। हाथों की उंगलियों को जोड़कर घुटने को पकड़ें। सांस छोड़ते हुए सिर उठाकर नाक को घुटने से छूने की कोशिश करें। इसी प्रक्रिया को बाएं पैर और फिर दोनों पैरों के साथ दोहराएं। इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। सावधानियाँ उच्च रक्तचाप, हर्निया, स्लिप डिस्क या हाल ही में पेट की सर्जरी कराए लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।गर्भवती महिलाएं इसे न करें।केवल 5 मिनट का यह योगासन रोजाना करने से न केवल पाचन सुधारता है बल्कि पेट, कमर और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाकर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करता है।

वजन घटाना हो या हार्मोन बैलेंस, सुबह खाली पेट पिएं ये 5 सुपर ड्रिंक्स

नई दिल्ली । महिलाओं के लिए दिन की शुरुआत सही खानपान से करना बेहद जरूरी होता है क्योंकि सुबह का पहला आहार शरीर के मेटाबॉलिज्म और पूरे दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है खासतौर पर आयरन की कमी, पीसीओएस और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए कुछ खास ड्रिंक्स बहुत लाभकारी साबित हो सकती हैं सबसे पहले चिया सीड्स और नींबू पानी की बात करें तो यह ड्रिंक ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर से भरपूर होती है एक गिलास पानी में चिया सीड्स भिगोकर उसमें नींबू मिलाकर पीने से वजन घटाने में मदद मिलती है और त्वचा में भी प्राकृतिक निखार आता है दूसरा है मेथी दाना पानी जिसे रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट पीना चाहिए यह ड्रिंक इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने और पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में काफी प्रभावी मानी जाती हैएलोवेरा जूस भी महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होता है इसे पानी में मिलाकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर की सूजन कम होती है साथ ही यह जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है धनिया पानी एक और उपयोगी ड्रिंक है जिसे उबालकर पीया जाता है यह शरीर में पानी रुकने की समस्या को कम करता है और थायराइड के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है इसके अलावा यह यूरिन इंफेक्शन के खतरे को भी कम करता है अंत में दालचीनी और शहद की चाय का सेवन करने से मीठा खाने की इच्छा कम होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है यह ड्रिंक वजन नियंत्रण के लिए बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है इन सभी ड्रिंक्स को नियमित रूप से सुबह खाली पेट लेने से शरीर डिटॉक्स होता है हार्मोन संतुलित रहते हैं और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है हालांकि किसी भी नई चीज को दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना भी जरूरी है इस तरह छोटी सी सुबह की आदत महिलाओं के लिए बड़ी हेल्थ बेनिफिट साबित हो सकती है और उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रख सकती है

अदरक और सेंधा नमक से बने तेल से कान के दर्द में राहत, जानें इस्तेमाल से पहले की सावधानी

नई दिल्ली। आज के समय में कान का दर्द आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक हेडफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। सुनने के लिए इस्तेमाल होने वाले ये उपकरण केवल सुनने की क्षमता को प्रभावित नहीं करते, बल्कि कानों में जकड़न, सूखापन और दर्द भी बढ़ाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, कान दर्द का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। हल्के और शुरुआती दर्द में राहत पाने के लिए अदरक और सेंधा नमक से बना तेल प्रभावी माना जाता है। तेल बनाने की विधिसामग्री:अदरक का रस – 1 छोटी चम्मचसेंधा नमक – 1 चुटकीनींबू – 2 बूंदसरसों का तेल – 2 बड़े चम्मचविधि:सभी सामग्री को सरसों के तेल में मिलाकर हल्का गर्म करें।अच्छे से पक जाने पर तेल को छानकर अलग कर लें।ठंडा होने पर प्रभावित कान में 2-3 बूंद डालें। इस तेल में अदरक को दर्द निवारक और वात शांत करने वाला माना जाता है। सेंधा नमक भी दर्द को कम करने और वात को संतुलित करने में मदद करता है। इस्तेमाल करने से पहले सावधानियांकान को अच्छी तरह से साफ कर लें। गंदगी होने पर संक्रमण और दर्द बढ़ सकता है।यदि कान में घाव या बहाव है, तो इस तेल का इस्तेमाल न करें। ऐसे मामलों में चिकित्सक की सलाह लें।नहाते समय ध्यान दें कि साबुन या पानी कान में न जाए, क्योंकि इससे शुष्कता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा रहता है। हर दो दिन में कान की सफाई करें, ताकि तेल और गंदगी का मिश्रण संक्रमण न पैदा करे। आयुर्वेदिक लाभअदरक की गर्म तासीर और वात शांत करने वाले गुण दर्द को कम करते हैं।सेंधा नमक सूजन और जकड़न को दूर करने में मदद करता है।नियमित इस्तेमाल से कान में हल्कापन और आराम मिलता है। अदरक और सेंधा नमक से बना यह तेल हल्के कान दर्द और जकड़न में राहत देता है। इसे इस्तेमाल करने से पहले कान की सफाई और किसी घाव की स्थिति जांचना जरूरी है। नहाते समय पानी के कान में जाने से बचें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लें। यह प्राकृतिक और सरल उपाय वात दोष को संतुलित करके कान दर्द कम करने में मदद करता है।

Travel Tips: अप्रैल में केरल घूमने का है अपना अलग मजा, जानिए इन जगहों के बारे में

नई दिल्ली। अप्रैल का महीना शुरुआती गर्मी लेकर आता है जिसके कारण लोग पहले ही कहीं-कहीं घूमने का मन बना लेते हैं। अप्रैल के महीने में लोग बाहर निकल जाते हैं। क्योंकि इस समय गर्मी उतनी ज्यादा नहीं होती है जितनी आने वाले और महीना में आ जाती है। अप्रैल के महीने में केरल घूमने काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि वहां काफी हरियाली देखने को मिलती है। केरल में आपका ही जगह पर बड़े ही आसानी से घूम सकते हैं तो चलिए उनके बारे में बताते हैं। केरल घूमने के लिए है खासअप्रैल का मौसम बहुत खास होता है क्योंकि गर्मी काम होती है। ऐसे में आप केरल जाकर वहां पर कई सारी जगह का आनंद उठा सकते हैं।अगर आप भी अपने परिवार और दोस्तों के साथ केरला घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप इन सभी जगह को नोट कर लें। नेचर लवर्स के लिए है बेस्टकेरल के जंगल और पहाड़ हरे रंग की चादर की तरह नजर आते हैं, जो फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं।केरल का प्लान बनाते समय मुन्नार को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।ये जगह नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। अलेप्पी भी है परफेक्टवेनिस नाम से मशहूर अलेप्पी ऐसी शानदार जगह है, जहां आकर आप केरल के सबसे खूबसूरत नजारे का दीदार कर सकते हैं।यहां आने के बाद आपका मन बिल्कुल भी नहीं करेगा कि आप वापस जाएं। यहां की सुंदरता आपका मन को मोह लेगा और फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह काफी फेमस है। अलेप्पी वैसे तो हनीमून कपल्स के बीच ज्यादा पॉपुलर है, लेकिन आप यहां फैमिली, दोस्तों के साथ भी जाने की प्लानिंग कर सकते हैं। केरल का वायनाडकेरल में वायनाड भी घूमने वाली अच्छी जगह है। जो अपने झरनों के लिए खासतौर से मशहूर है। इस समय यहां घूमने के लिए यहां पर काफी अच्छी-अच्छी जगह है मिल जाएगी। यहां आपको काफी कुछ देखने को मिलेगा जिसे देखने के बाद आपका मन यहां से लौटने का बिल्कुल भी नहीं करेगा।

DIY पैर की देखभाल: घर बैठे करें Pedicure और दें पैरों को नई जान

नई दिल्ली। आज के समय में पार्लर जाना सबसे बड़ा खर्च समझ में आता है। पार्लर जाने का मतलब आप घर से बाहर निकलो फिर धूप हो या ठंड। फिर पार्लर में बैठकर काफी टाइम बिताओ और ऊपर से पार्लर के इतने सारे खर्चे होते हैं कि आपको काफी ज्यादा सेविंग करना पड़ता है तब जाकर वह सारी चीजें हो पाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं और टैनिंग को दूर करना चाहती हैं। तो किसी भी वीकेंड पर आप घर पर पार्लर जैसा पेडिक्योर कर सकती हैं। बस करें ये काममहिलाएं अपने पैरों को खूबसूरत बनाने के लिए पार्लर में जाकर पेडिक्योर करवाती हैं। इसका जेब खर्च पर भी असर दिखने लगता है। अगर आप भी घर पर पेडिक्योर करने की सोच रही हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी आपको देते हैं। इस प्रकार पैरों को बनाए खूबसूरतघर पर पेडिक्योर करने के लिए एक टब में हल्का गर्म पानी लें।जब तक पानी गर्म हो, तब तक अगर आपके पैरों में नेलपेंट लगी है, तो इसको रिमूव कर दें।फिर हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा, शैंपू, आधा चम्मच नमक और थोड़ा सा नींबू का रस मिक्स करें।इसमें एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।फिर पैरों को 30 मिनट तक पानी में रखें।अब हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।स्क्रब का इस्तेमाल करके पैरों की मसाज कर सकती हैं। मसाज के दौरान नाखून, एड़ी और तलवों की सफाई करें।अच्छे से सफाई के बाद अपने पैरों को दूसरे टब में रखें औऱ साफ पानी से पैरों को धो लें। पैरों को साफ पानी से धो लें और इनको साफ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।आप चाहें तो किसी खास तेल की मदद से पैरों की मसाज भी कर सकती हैं।इसके बाद नाखूनों को शेप में काटकर नेलपेंट लगाएं।नेलपेंट लगने के बाद आप पैरों पर अच्छी फुट क्रीम या लोशन लगा सकती हैं।

भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी

नई दिल्ली। देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू से बचाव के लिए सही कपड़ों का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मौसम में अगर आप राहत चाहते हैं, तो सूती कपड़े यानी Cotton Fabric सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पूरे दिन आपको आरामदायक महसूस कराते हैं। क्यों खास है सूती कपड़ा? जानिए इसके फायदेसूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह के सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘सांस लेने योग्य’ यानी ब्रीदेबल फैब्रिक होता है। इससे हवा आसानी से आर-पार हो सकती है, जिससे त्वचा ठंडी बनी रहती है। साथ ही, यह पसीने को जल्दी सोख लेता है और उसे हवा के संपर्क में लाकर जल्दी सुखा देता है। इससे शरीर में चिपचिपाहट नहीं होती और आप तरोताजा महसूस करते हैं। इसके विपरीत, Polyester और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना सोख नहीं पाते। इससे पसीना त्वचा पर जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में प्राकृतिक फैब्रिक का चुनाव ही समझदारी है। आराम के साथ स्टाइल भी, हर मौके के लिए परफेक्टसूती कपड़े न सिर्फ आरामदायक होते हैं, बल्कि स्टाइलिश भी होते हैं। आजकल कॉटन में कई तरह के डिजाइन जैसे स्ट्राइप्स, चेक्स और सॉलिड पैटर्न मिलते हैं, जिन्हें आप कैजुअल और फॉर्मल दोनों लुक में आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह फैब्रिक हल्का, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होता है, जिससे दिनभर पहनने पर भी कोई परेशानी नहीं होती। रंगों का चुनाव भी है उतना ही जरूरीगर्मी में सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसके रंग का चुनाव भी अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, आसमानी और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। वहीं, काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल जैसे रंग गर्मी को ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। मन और शरीर दोनों को दे सुकूनसही कपड़े न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी गर्मियों में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आई हैं। गर्मी से बचाव का आसान फॉर्मूलाअगर आप भीषण गर्मी में खुद को कूल और कंफर्टेबल रखना चाहते हैं, तो सूती कपड़े और हल्के रंगों का चुनाव जरूर करें। यह न केवल आपको गर्मी से राहत देंगे, बल्कि आपकी सेहत और स्टाइल दोनों को बेहतर बनाएंगे।

‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ‘ओम’ को केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। हर मंत्र और ध्यान की शुरुआत इसी से होती है, लेकिन अब यह केवल आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि ‘ओम’ का उच्चारण शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ध्वनि कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के सातों चक्रों को सक्रिय करने के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी जागृत करता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है। ‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है। सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभावमानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है। वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टिNational Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है। वेगस नर्व को करता है मजबूतविशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है। मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है। कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा। आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।