ऐंठन और दर्द से परेशान? इन योगासन से मिलेगा आराम और पीरियड्स होंगे बेहतर

नई दिल्ली। पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और अनियमित चक्र जैसी परेशानियां कई महिलाओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट कुछ विशेष योगासन को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। योग इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीके से कम करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। नियमित योग अभ्यास से मासिक धर्म चक्र सही रहता है, दर्द कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। साथ ही मंत्रालय ने मासिक धर्म के दौरान सेहत सुधारने के लिए कुछ आसान और प्रभावी योगासनों को अपनाने की सलाह महिलाओं को दी है। ये आसान आसन घर पर भी किए जा सकते हैं और पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधाओं को काफी हद तक कम करने में प्रभावी भी हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, इन आसनों को नियमित रूप से करने से न सिर्फ मासिक धर्म संबंधी शारीरिक समस्याएं कम होती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। योग अभ्यास के साथ माइंडफुलनेस रखना भी जरूरी है। हालांकि पीरियड्स के दौरान अगर दर्द बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद के साथ योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। बेहतर मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए सुप्त बद्ध कोणासन करें, यह आसन पेल्विक क्षेत्र को खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है और पेट व कमर के दर्द को कम करता है। पश्चिमोत्तानासन यह आसन पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मासिक धर्म संबंधी ऐंठन और दर्द में राहत मिलती है। यह तनाव भी कम करता है। वहीं, वक्रासन रीढ़ की हड्डी को मोड़ने वाला यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने में मदद करता है। बालासन या बच्चे की मुद्रा कहलाने वाला यह आसन शरीर को गहरी छूट देता है। पीरियड्स के दौरान होने वाली थकान और मूड स्विंग्स को शांत करता है। सेतु बंधासन, जिसे पुल मुद्रा भी कहते हैं, आसन कमर और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है व हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में सहायक है। साथ ही विपरीत करणी भी राहत देता है। दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटने वाला यह आसन रक्त प्रवाह को सुधारता है और पैरों में सूजन तथा थकान को कम करता है।
क्या आपका बायां हाथ दर्द कर रहा है? जानिए कब यह दिल की बीमारी का इशारा बन जाता है

नई दिल्ली। आजकल हृदय रोग मृत्यु का एक बड़ा कारण बन गया है। यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, सीने में दर्द, सांस फूलना और खासकर बाएं हाथ में दर्द जैसे लक्षण हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में एक पल की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन बताता है कि यदि हृदय रोग के मुख्य लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं और उसकी पहचान करें और बचाव के लिए कुछ उपाय दिए गए हैं, उसे फॉलो करें। एक्सपर्ट स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोग से बचा जा सकता है। संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और समय पर जांच से दिल स्वस्थ रहता है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके अपने और अपने परिवार के हृदय की रक्षा कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, सीने में भारीपन या दर्द, बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द, सांस फूलना, थकान होना, ठंडा पसीना आना जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा, अगर धड़कन बार-बार अनियमित, तेज या फड़फड़ाती महसूस हो रही है तो यह हृदय रोग का संकेत हो सकता है। चक्कर आना या बेहोशी भी खतरनाक हो सकता है। यह तब होती है जब मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता। यह अनियमित हृदय गति या ब्लडप्रेशर की समस्या का संकेत हो सकता है। बार-बार ऐसा होने पर इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं। हृदय रोग से बचाव के लिए संतुलित आहार लें, ताजी सब्जियां, फल, दालें, अनाज और कम तेल-मसालेदार भोजन खाएं। नियमित व्यायाम करें, इसके लिए रोजाना कम से कम 30-40 मिनट योग या हल्का व्यायाम करें। ब्लड प्रेशर और शुगर जांच नियमित करवाएं। धूम्रपान और शराब छोड़ें, ये हृदय के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। तनाव कम करें, इसके लिए ध्यान, प्राणायाम या अच्छी नींद से तनाव नियंत्रित रखें। साथ ही ज्यादा तला-भुना और जंक फूड न खाएं। लंबे समय तक एक जगह बैठे न रहें, तनाव और चिंता को बढ़ने न दें। इन सभी लक्षणोंं को नजरअंदाज न करें।
सावधान! कच्चा प्याज बना सकता है सेहत बिगाड़ने की वजह, जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

नई दिल्ली। भारतीय खाने में कच्चा प्याज एक अहम हिस्सा माना जाता है। सलाद से लेकर दाल-रोटी तक, इसे खाने के साथ जोड़ना आम बात है। प्याज में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं। लेकिन हर हेल्दी चीज हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं होता। मेडिकल रिसर्च बताती है कि कच्चा प्याज कुछ खास परिस्थितियों में शरीर को फायदा देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि किन लोगों को इसे नहीं खाना चाहिए। जिन लोगों को पाचन से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें प्याज के सेवन से बचना चाहिए। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, कच्चे प्याज में ऐसे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो आंत में पूरी तरह पच नहीं पाते। इन्हें फोडमैप कहा जाता है, जो पेट में गैस बनने की वजह बन सकते हैं। जिन लोगों को पहले से गैस, पेट फूलना या अपच की समस्या रहती है, उनके लिए कच्चा प्याज खाने के बाद ये परेशानी और बढ़ सकती है। इसी तरह, एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या वाले लोगों को भी कच्चे प्याज से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कच्चा प्याज पेट में एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है। इससे एसिड रिफ्लक्स की समस्या तेज हो सकती है, जिसमें खाना वापस गले की ओर आने लगता है। इसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से यह समस्या रहती है, उनके लिए कच्चा प्याज ट्रिगर का काम कर सकता है। कुछ मामलों में कच्चा प्याज एलर्जी की वजह भी बन सकता है। हालांकि, यह समस्या हर किसी में नहीं होती, लेकिन जिन लोगों को प्याज से एलर्जी होती है, उनके शरीर में तुरंत प्रतिक्रिया दिखाई दे सकती है। रिसर्च बताती है कि ऐसे लोगों को त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में परेशानी तक हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को प्याज खाने के बाद ऐसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ब्लड प्रेशर और खास तरह की दवाएं लेने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। कच्चे प्याज में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो खून को पतला करने में मदद कर सकते हैं। सामान्य स्थिति में यह दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहा है, तो यह असर ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना ज्यादा मात्रा में कच्चा प्याज नहीं खाना चाहिए। सर्जरी से जुड़े मामलों में भी कच्चा प्याज नुकसानदायक हो सकता है। मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, ऑपरेशन से पहले और बाद में ऐसी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है जो खून को पतला करती हैं। कच्चा प्याज भी इसी श्रेणी में आता है। अगर किसी व्यक्ति का हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, तो इसके सेवन से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है और रिकवरी पर असर पड़ सकता है।
गर्मियों में आंखों की सुरक्षा: जानें आसान उपाय और एक्सरसाइज

नई दिल्ली । गर्मियों में तेज धूप गर्म हवा और डिजिटल उपकरणों की बढ़ती निर्भरता ने आंखों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। लंबे समय तक मोबाइल कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन के संपर्क में रहना आंखों में जलन सूखापन धुंधलापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ा देता है। ऐसे में अपनी आंखों का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार गर्मियों में आंखों को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए कुछ आसान और प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले आता है 20-20-20 नियम। इसके अनुसार हर 20 मिनट स्क्रीन पर काम करने के बाद 20 फीट लगभग 6 मीटर दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। यह छोटा अभ्यास आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है फोकस बदलने से तनाव कम होता है और आंखों की थकान भी दूर होती है। इसके अलावा आई पामिंग एक बेहद सरल और असरदार तरीका है। इसके लिए सुबह और शाम 2-3 मिनट दोनों हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और बंद आंखों पर हल्के से रखें। इससे आंखों को तुरंत गहरा आराम मिलता है और धूप या स्क्रीन से होने वाले तनाव में कमी आती है। गर्मियों में आंखों की देखभाल के लिए त्राटक अभ्यास भी लाभकारी है। इसके लिए मोमबत्ती की लौ या किसी काले बिंदु पर बिना पलक झपकाए कुछ सेकंड तक नजर टिकाएं और फिर आंखें बंद कर लें। यह अभ्यास आंखों को मजबूत बनाने के साथ-साथ ध्यान की क्षमता को भी बढ़ाता है। सिर्फ स्क्रीन टाइम ही नहीं बल्कि आंखों की साधारण एक्सरसाइज भी जरूरी है। आंखों को ऊपर-नीचे दाएं-बाएं और गोल-गोल घुमाना चाहिए। पास और दूर की वस्तुओं पर फोकस बदलना भी आंखों की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है। गर्मियों में आंखों को ठंडक देने के लिए पानी के छींटे भी फायदेमंद हैं। बाहर आने या लंबे काम के बीच समय-समय पर आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारने से राहत मिलती है। इसके अलावा स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना अच्छी रोशनी में काम करना और रोजाना पर्याप्त नींद लेना भी आंखों की थकान और जलन को कम करने में मदद करता है। आंखों की देखभाल केवल डिजिटल उपकरणों और गर्मी तक सीमित नहीं है। पर्याप्त पानी पीना हरी सब्जियों और विटामिन ए युक्त आहार लेना और धूल-मिट्टी से बचाव भी आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। गर्मियों में ये छोटे-छोटे उपाय अपनाकर आप अपनी आंखों को न सिर्फ स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि तेज रोशनी स्क्रीन और धूल से होने वाली परेशानियों से भी बच सकते हैं। यही नहीं नियमित अभ्यास से आंखों की रोशनी बनी रहती है आंखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आंखें लंबे समय तक तनावमुक्त रहती हैं।
गर्मियों का सुपरफ्रूट खरबूजा: शरीर को ठंडक और त्वचा को निखार देने वाला फल

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां शरीर को अत्यधिक पसीना और पानी की कमी से जूझना पड़ता है, वहीं ऐसे फलों का सेवन जो ठंडक पहुंचाएं और स्वास्थ्य बनाए रखें, बेहद जरूरी है। खरबूजा इसी श्रेणी में एक बेहतरीन फल माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, खरबूजा गर्मियों के लिए वरदान के समान है। यह न केवल प्यास बुझाता है बल्कि शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है। खरबूजे में लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाता है। साथ ही इसमें उच्च मात्रा में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर की ऊर्जा बनाए रखने, पाचन क्रिया सुधारने और त्वचा तथा आंखों की सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होते हैं। आयुर्वेद में खरबूजे को ठंडा और पित्तशामक फल माना गया है। गर्मियों में यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है, पेट को ठंडक पहुंचाता है और हृदय को राहत देता है। इसे कटकर, जूस बनाकर या सलाद में शामिल कर रोजाना खाया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, खरबूजा न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है बल्कि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध भी है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सेवन करना चाहिए। खरबूजे के नियमित सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है। गर्मी में पसीना अधिक निकलने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है, लेकिन खरबूजा प्राकृतिक रूप से पानी की पूर्ति करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुधारता है, कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है और पेट को साफ रखता है। विटामिन सी से भरपूर खरबूजा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, जिससे गर्मियों में होने वाली वायरल और अन्य बीमारियों से बचाव होता है। यह वजन नियंत्रित करने में भी मददगार है क्योंकि कम कैलोरी होने के साथ-साथ फाइबर से भरा होने के कारण पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। त्वचा और आंखों की देखभाल में भी खरबूजा कारगर है। इसमें मौजूद विटामिन ए और सी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखते हैं। गर्मियों में धूप और पसीने से जो त्वचा प्रभावित होती है, खरबूजा उसे निखारने में मदद करता है। इसके अलावा, विटामिन ए आंखों की रोशनी बनाए रखने और आंखों की थकान कम करने में सहायक होता है। इस प्रकार, गर्मियों में शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और त्वचा तथा आंखों के स्वास्थ्य के लिए खरबूजा एक सुपरफ्रूट के रूप में उभरता है। चाहे कटकर खाएं, जूस बनाकर पिएं या सलाद में डालकर सेवन करें, यह फल गर्मियों में हर घर का अनमोल साथी बन सकता है।
क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही

नई दिल्ली । बाजार से फल खरीदते समय अक्सर हम उनकी चमक और उन पर लगे आकर्षक स्टिकर्स को देखकर उनकी क्वालिटी का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन यही छोटे-छोटे स्टिकर्स आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। Food Safety and Standards Authority of India ने हाल ही में इसको लेकर चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार फलों पर लगे इन स्टिकर्स को चिपकाने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया जाता है वह खाने योग्य नहीं होता। जब हम फल खाते समय केवल स्टिकर हटाकर उसे सीधे खा लेते हैं तो कई बार उस गोंद का हिस्सा फल पर ही रह जाता है और अनजाने में हमारे शरीर के अंदर चला जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में केमिकल जमा कर सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। स्टिकर के नीचे का हिस्सा और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इस जगह पर धूल मिट्टी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो सामान्य पानी से धोने पर पूरी तरह साफ नहीं होते। इसके अलावा फलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड भी स्टिकर के नीचे फंस जाते हैं और वही हिस्सा सबसे ज्यादा जहरीला बन सकता है। कई लोग यह मानते हैं कि स्टिकर लगे फल बेहतर क्वालिटी या एक्सपोर्ट ग्रेड के होते हैं लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल इन स्टिकर्स का उपयोग केवल फल की पहचान और बिलिंग के लिए किया जाता है जिसे PLU कोड कहा जाता है। कई बार बाजार में साधारण फलों पर भी नकली स्टिकर्स लगाकर उन्हें महंगा और प्रीमियम दिखाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनका पाचन तंत्र संवेदनशील होता है। लगातार ऐसे केमिकल्स के संपर्क में आने से इम्युनिटी पर भी असर पड़ सकता है। इससे बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले केवल स्टिकर हटाना पर्याप्त नहीं है बल्कि जिस जगह स्टिकर लगा था उसे हल्का सा काटकर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा फलों को हमेशा बहते पानी में अच्छी तरह रगड़कर धोना चाहिए ताकि उनकी सतह पर मौजूद गंदगी और केमिकल्स हट सकें। जहां तक संभव हो सेब या नाशपाती जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सख्त फलों को साफ करने के लिए मुलायम ब्रश का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ताकि उनके कोनों में फंसी गंदगी बाहर निकल सके। हालांकि फलों को साफ करने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे और अधिक नुकसान हो सकता है। यह छोटी-सी सावधानी आपको और आपके परिवार को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है। इसलिए अगली बार जब भी फल खरीदें तो केवल उनकी चमक नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान जरूर रखें।
Travel Tips: दोस्तों के साथ ट्रिप पर निकलें, इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली। अगर दोस्तों के साथ घूमने का मन है, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना आपकी यात्रा को मज़ेदार, सुरक्षित और स्मरणीय बना देता है। यहाँ कुछ Travel Tips साझा कर रहा हूँ: 1. योजना पहले से बनाएं घूमने की जगह, वहां के मौसम और प्रमुख आकर्षणों की जानकारी पहले से जुटा लें।यात्रा का बजट तय करें ताकि पैसे की चिंता न रहे।यदि ग्रुप में लोग अलग-अलग शहरों से आ रहे हैं, तो meeting point और टाइमिंग पहले तय कर लें। 2. सुरक्षा और स्वास्थ्यदोस्तों के साथ भी अपने जरूरी दस्तावेज़ और पहचान पत्र हमेशा साथ रखें।हेल्थ किट (बैंड-एड, दवाई, हैंड सेनिटाइज़र, मास्क) साथ रखें।भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सामान और बैग का ध्यान रखें।यदि किसी को कोई एलर्जी या मेडिकल कंडीशन है, तो पहले से तैयारी कर लें। 3. साझा बजट और खर्चखाने-पीने, यात्रा और होटल के खर्च का हिसाब साझा करें।मोबाइल पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल करें ताकि कैश की जरूरत कम हो।बड़े ग्रुप में एक व्यक्ति को ट्रैवल कास्टर बनाना अच्छा होता है, जो खर्च और बिल्स संभाले। 4. पैकिंग टिप्सहल्का और मौसम के अनुसार कपड़े पैक करें।कैमरा, पावर बैंक, चार्जर, सनग्लास और हेडफोन रखना न भूलें।यात्रा के दौरान हल्का बैकपैक रखें ताकि मूवमेंट आसान हो। 5. सहयोग और टीम भावनादोस्तों के साथ यात्रा में कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं। धैर्य रखें और सबकी पसंद का सम्मान करें।समय का ध्यान रखें, ताकि किसी की जगह पर देर न हो।ग्रुप में रोचक खेल, गाने या म्यूजिक प्लेलिस्ट बना लें, इससे यात्रा का मज़ा बढ़ता है। 6. यादें संजोएँफोटो और वीडियो लें, ताकि यात्रा की यादें हमेशा ताजा रहें।सोशल मीडिया पर साझा करना हो तो समूह की सहमति जरूर लें।
चेहरा खिला-खिला दिखेगा, बस इन स्किन केयर टिप्स को अपनी रूटीन में शामिल करें

नई दिल्ली।अगर आप भी बेदाग और चमत्कार चेहरा पाने की सोच रही है तो अब यह बिल्कुल आसान हो गया है क्योंकि अब आप अपने चेहरे पर आसानी से गला घर पर ही पा सकती हैं। इसके लिए आपको ना ज्यादा खर्च करने की जरूरत है और ना ज्यादा टाइम पार्लर में बिताने की। तो चलिए आपको कुछ ऐसे ही ट्रिक के बारे में बताते हैं। हाइड्रेशन है सबसे महत्वपूर्णगर्मियों का महीना शुरू ही हो गया है ऐसे में अपने आप को हाइड्रेट रखने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।त्वचा की सेहत के लिए हाइड्रेशन अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है। पानी की कमी से त्वचा सूखी और बेजान हो जाती है। संतुलित आहार से भी फायदाकई बार हमारी स्कीम बाहर के ज्यादा खान-पान के कारण भी काफी बिगड़ने लगती है जिसे हमें सुधारना चाहिए।त्वचा की देखभाल में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हरी सब्जियां, ताजे फल, नट्स और स्वस्थ वसा से भरपूर आहार त्वचा को अंदर से पोषण देता है। विटामिन सी और ई से भरपूर भोजन कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देता है। व्यायाम से बढ़ेगा रक्त संचारएक्टिव रहने से त्वचा की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। योग, दौड़ना, नृत्य या जिम में व्यायाम करने से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे त्वचा में चमक आती है। स्किन केयर रूटीन का पालन करेंसही स्किन केयर रूटीन का पालन करना आवश्यक है। दिन में दो बार चेहरे को साफ करने से गंदगी और अतिरिक्त तेल दूर होता है। कई बार लोग हाथ पैर धो लेते हैं लेकिन चेहरा साफ करने के लिए सही टाइम का इंतजार करते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही आपको तनाव से बचना चाहिए आप जितना तनाव में रहेंगे आपके चेहरे और स्क्रीन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
बच्चों के लिए संजीवनी है जायफल, लेकिन सेवन से पहले जानें जरूरी सावधानियां

नई दिल्ली। बदलते मौसम का असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर पड़ता है। कभी-कभी तो कभी-कभी पेट खराब हो जाता है, उन्हें जल्दी ही ठिकाने लगा दिया जाता है। ऐसे में माता-पिता बार-बार सुरक्षित और प्राकृतिक उपायों की तलाश करते हैं। भारतीय परंपरा में आयुर्वेद को स्वास्थ्य का उत्कृष्ट आधार माना जाता है, जिसमें कई घरेलू औषधियों का उल्लेख किया गया है। दोस्तों में से एक है जयफल, जिसके बारे में बच्चों को बेहद बताया गया है। आयुर्वेद में जायफल का महत्वआयुर्वेद के अनुसार जायफल में वात-शामक, पाचन शक्ति वाले और मस्तिष्क को पोषण देने वाले गुण पाए जाते हैं। यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही गैस, अपच और पतले पेट दर्द जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। नियमित एवं सही तरीकों से इसका उपयोग बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक माना जाता है। सीधे सेवन से परहेज़ क्यों?यद्यपि जायफल में प्रचुरता है, लेकिन इसकी तासीर गर्म और तीक्ष्ण है। इसलिए बच्चों को यह सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा सकता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि किसी भी औषधि को ‘संस्कार’ प्रक्रिया से तैयार करने के बाद ही उसका सेवन करना चाहिए, ताकि उसका गुणधर्म हो और शरीर पर कोमल प्रभाव पड़े। पारंपरिक विधि: इस तरह सुनिश्चित करेंपुराने समय में बच्चों के लिए जयफल को विशेष प्रक्रिया से तैयार किया जाता था। सबसे पहले इसे दूध में डाला जाता है, जिससे इसका तीखापन कम होता है। इसके बाद कुछ समय के लिए दही में रखा जाता है, जो इसके अनुरूप होता है। अंत में इसे घी में पकाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जायफल को दूध में घिसकर बहुत ही कम मात्रा में बच्चों को दिया जाता है। यह विधि जयफल की गर्म तासीर को कम करके बच्चों के लिए सुरक्षित बना देती है। क्या हैं फायदे?इस तरह तैयार किया गया जायफल बच्चों के पाचन तंत्र को मजबूत करता है, ग्लूकोज-जुकाम से बचाव में मदद मिलती है और नींद भी बेहतर होती है। साथ ही यह दिमागी विकास में सहायक माना जाता है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में दिया जाए तो यह एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है। ध्यान में सावधानियां जरूर रखेंबच्चों को जायफल देते समय मात्रा का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। अधिक मात्रा में सेवन करने से सामान्य प्रभाव हो सकता है, जैसे चक्कर आना, पेट संबंधी समस्याएं। किसी भी घरेलू उपाय को पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से लेना बेहतर होता है, खासकर अगर बच्चा बहुत छोटा हो या पहले किसी समस्या से पीड़ित हो। जायफल एक शक्तिशाली औषधि है, लेकिन सही और मात्रा में यह बच्चों के लिए चमत्कारी साबित होती है। पारंपरिक तरीके से इसे तैयार करके इसका सेवन करें, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
सुबह उठते ही ज्यादा पानी पीना पड़ सकता है भारी, जानिए सही तरीका

नई दिल्ली। सुबह उठते ही खूब सारा पानी पीना आजकल एक ट्रेंड बन गया है। कोई तांबे के बर्तन का पानी पीने की सलाह देता है, तो कोई खाली पेट 1 लीटर पानी पीने को फायदेमंद बताता है। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह आदत हर किसी के लिए सही नहीं होती और कुछ मामलों में सेहत पर उल्टा असर भी डाल सकती है। ज्यादा पानी पीने से पाचन पर असरसुबह के समय शरीर की पाचन क्रिया धीरे-धीरे सक्रिय होती है। ऐसे में अगर आप एकदम से बहुत ज्यादा पानी पी लेते हैं, तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे खाना ठीक से पच नहीं पाता और पेट में गैस, भारीपन या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भूख कम लगने की समस्याखाली पेट अधिक मात्रा में पानी पीने से पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे भूख कम लगती है। इसका असर आपकी डाइट और पोषण पर पड़ सकता है, क्योंकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। पेट दर्द और असहजताकई लोगों को सुबह ज्यादा पानी पीने के बाद पेट दर्द या असहजता महसूस होती है। यह शरीर पर अचानक पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण हो सकता है। क्या है सही तरीका?विशेषज्ञों के अनुसार, पानी पीने का सही तरीका यह है: सुबह उठकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पिएंएक बार में 1 लीटर पानी पीने से बचेंगुनगुना पानी बेहतर माना जाता हैजब प्यास लगे, तभी पानी पिएंकैसे पिएं पानी?हमेशा बैठकर और धीरे-धीरे (घूंट-घूंट) पानी पिएंखड़े होकर पानी पीने से बचेंपूरे दिन में पानी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएंमौसम के अनुसार बदलें आदतगर्मियों में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, इसलिए मात्रा बढ़ाई जा सकती हैसर्दियों में हल्का गुनगुना पानी पर्याप्त होता हैआयुर्वेद क्या कहता है? Ayurveda के अनुसार, हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए पानी पीने का तरीका भी उसी के अनुसार होना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पानी पीना शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है। क्यों जरूरी है संतुलन?पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन सही मात्रा और सही समय पर। जरूरत से ज्यादा पानी पीना उतना ही नुकसानदायक हो सकता है जितना कम पानी पीना।