नवरात्रि स्पेशल: 10 मिनट में बनाएं चटपटे दही वाले आलू

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व चल रहा है और कई लोग इस दौरान नौ दिन का व्रत रखते हैं। व्रत में हल्का और स्वादिष्ट खाना खाने का मन करना स्वाभाविक है और ऐसे में “दही वाले आलू” एक बेहतरीन विकल्प हैं। खट्टा-मीठा स्वाद व्रत के दौरान खाने में आनंद देता है और इसे बनाना भी बेहद आसान है। सामग्री की बात करें तो इसके लिए आपको चाहिए 3-4 मीडियम साइज़ के उबले हुए आलू 1 कप अच्छी तरह फेंटा हुआ दही 1-2 चम्मच घी 1 छोटा चम्मच जीरा 1-2 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार सेंधा नमक ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर व्रत वाला और सजाने के लिए धनिया पत्ती। विधि शुरू करने के लिए सबसे पहले कढ़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। जीरा चटकने लगे तो हरी मिर्च डालकर हल्का भूनें। इसके बाद उबले हुए आलू डालें और 2-3 मिनट तक हल्का सुनहरा होने दें। अब गैस धीमी कर दें और फेंटा हुआ दही डालें। ध्यान रखें कि दही डालते समय गैस धीमी हो ताकि दही फटे नहीं। तुरंत अच्छी तरह चलाएं और उसमें सेंधा नमक काली मिर्च और लाल मिर्च पाउडर डाल दें। इसे तब तक पकाएं जब तक ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी न हो जाए। अंत में ऊपर से धनिया पत्ती डालकर गरमागरम परोसें। यह रेसिपी व्रत में खाने के लिए हल्की और स्वादिष्ट है और इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। दही वाले आलू का खट्टा-मीठा स्वाद व्रत के खाने में नया तड़का लगाता है और सभी उम्र के लोगों को पसंद आता है।
स्मार्ट किचन हैक्स से आसान बनाएं काम, नारियल तोड़ने के ये तरीके जान लें

नई दिल्ली:रसोई में कई बार छोटी सी चीज भी बड़ा काम बना देती है और जटा वाला कच्चा नारियल उन्हीं में से एक है बाहर से बेहद सख्त और अंदर से मुलायम यह नारियल दिखने में आसान लगता है लेकिन इसे तोड़ना कई लोगों के लिए चुनौती बन जाता है सही तरीका न पता होने के कारण लोग नारियल खरीदने के बाद भी उसे इस्तेमाल नहीं कर पाते अगर आप भी नारियल तोड़ने में परेशानी महसूस करते हैं तो कुछ आसान ट्रिक्स अपनाकर यह काम मिनटों में किया जा सकता है सबसे पहले नारियल की बाहरी जटा को हटाना जरूरी होता है इसके लिए नारियल को कुछ समय के लिए गर्म पानी में डालकर रखें इससे जटा थोड़ी ढीली हो जाती है और उसे निकालना आसान हो जाता है इसके बाद चाकू या पेचकस की मदद से धीरे धीरे जटा हटाई जा सकती है जटा हटाने के बाद नारियल पर तीन छोटे निशान दिखाई देते हैं जिन्हें आमतौर पर आंख कहा जाता है इनमें से किसी एक को नुकीली चीज से छेद करके नारियल का पानी निकाला जा सकता है इससे नारियल हल्का हो जाता है और आगे का काम और आसान हो जाता है इसके बाद नारियल को तोड़ने के लिए माइक्रोवेव या ओवन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है नारियल को कुछ मिनट के लिए गर्म करने से उसका छिलका और अंदर का हिस्सा अलग होने लगता है जिससे इसे तोड़ना आसान हो जाता है हल्के से वार करने पर नारियल आसानी से दो हिस्सों में बंट जाता है और पूरी गरी बाहर आ जाती है अगर आपके पास माइक्रोवेव नहीं है तो गैस पर भी नारियल को हल्का गर्म करके तोड़ा जा सकता है नारियल को धीरे धीरे घुमाते हुए गर्म करें और फिर हल्के से हथौड़े या किसी भारी चीज से उस पर वार करें इससे नारियल आसानी से टूट जाएगा और उसकी गरी अलग करना आसान हो जाएगा इन आसान तरीकों से न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि नारियल को बिना नुकसान पहुंचाए पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता है थोड़ी सावधानी और सही तकनीक अपनाकर यह काम बेहद आसान बनाया जा सकता है
हेल्दी फूड का सच 5 ऐसी चीजें जो आपकी सेहत को चुपचाप पहुंचा रही हैं नुकसान

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास इतना समय नहीं बचता कि वे रोज ताजा और संतुलित भोजन तैयार कर सकें। ऐसे में बाजार में मिलने वाले पैक्ड और रेडी टू ईट फूड्स उनकी पहली पसंद बनते जा रहे हैं। कंपनियां भी इस जरूरत को भुनाने के लिए हेल्दी नेचुरल और शुगर फ्री जैसे आकर्षक लेबल लगाकर इन उत्पादों को बेचती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जिन चीजों को हम सेहत के लिए फायदेमंद समझते हैं वही धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। डिब्बाबंद और बाजार में मिलने वाले फ्रूट जूस को अक्सर लोग फलों का बेहतर विकल्प मान लेते हैं। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पैक्ड जूस में लंबे समय तक खराब न होने के लिए प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। वहीं ताजे जूस में से फाइबर निकाल दिया जाता है जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। बिना फाइबर के जूस शरीर में तेजी से शुगर बढ़ाता है और लीवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इंस्टेंट ओट्स को लोग वजन घटाने का आसान तरीका मानते हैं लेकिन 2 मिनट में बनने वाले ओट्स असल में काफी प्रोसेस्ड होते हैं। इनमें सोडियम चीनी और कृत्रिम फ्लेवर मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। अगर आप ओट्स का सही फायदा चाहते हैं तो कम प्रोसेस्ड विकल्प चुनना ज्यादा बेहतर होता है। ब्राउन ब्रेड को भी लोग हेल्दी समझकर खाते हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ नाम का ही हेल्दी होता है। बाजार में बिकने वाली कई ब्राउन ब्रेड में मैदा की मात्रा ज्यादा होती है और उसे भूरा दिखाने के लिए अलग से रंग मिलाया जाता है। यह पाचन को प्रभावित करने के साथ वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। फ्लेवर्ड दही और पैक्ड लस्सी भी हेल्दी के नाम पर बेचे जाने वाले ऐसे उत्पाद हैं जिनमें जरूरत से ज्यादा चीनी मिलाई जाती है। इनका स्वाद भले ही अच्छा लगे लेकिन ये शरीर को उतना फायदा नहीं देते जितना सादा दही देता है। साथ ही इनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। शुगर फ्री प्रोडक्ट्स भी एक बड़ा भ्रम हैं। लोग सोचते हैं कि इनमें चीनी नहीं होती इसलिए ये सुरक्षित हैं लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं जो लंबे समय में शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं। ज्यादा मात्रा में इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम केवल पैकेट पर लिखे दावों पर भरोसा न करें बल्कि उसके अंदर मौजूद सामग्री को भी समझें। जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें। याद रखें असली हेल्दी फूड वही है जो प्राकृतिक हो और जिसे ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसी केमिकल की जरूरत न पड़े।
बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें

नई दिल्ली । आज के समय में जहां लोग वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वहीं अगर बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घटने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल भाषा में इसे बिना किसी कारण वज़न कम होना कहा जाता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि 6 से 12 महीनों के भीतर शरीर का 5 प्रतिशत या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के कम हो जाए तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। हमारा शरीर मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन के आधार पर काम करता है। जब शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी होती है तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तेजी से जलाने लगता है जिससे वजन अचानक कम होने लगता है। इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम कारणों में से एक है हाइपरथायरायडिज्म। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाना खाने के बावजूद तेजी से दुबला होने लगता है। इसके साथ घबराहट, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। इसी तरह टाइप 2 मधुमेह भी अचानक वजन घटने का कारण बन सकती है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट और मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाता है जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है। बार बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना इसके सामान्य संकेत हैं। कई मामलों में यह समस्या कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खर्च करती हैं और शरीर को कमजोर बना देती हैं। भूख कम होना, लगातार थकान और बिना वजह वजन गिरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।अवसाद या अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति की भूख प्रभावित हो जाती है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे या तो व्यक्ति खाना छोड़ देता है या शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और वजन गिरने लगता है। इसके अलावा शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों की आदत भी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण वजन तेजी से घट सकता है। अचानक वजन कम होना कभी भी सामान्य बात नहीं होती बल्कि यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है। यदि आप भी बिना कारण वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच जैसे ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग करवाना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान और इलाज ही आपको बड़ी और गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।
जहां सुकून और डर साथ रहते हैं, 1986 की त्रासदी से जुड़ी है इस झील की कहानी

नई दिल्ली दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगती हैं, लेकिन उनके अंदर खतरनाक रहस्य भी पाए जाते हैं। न्योस झील ऐसी ही एक झील है, जो अपनी प्राकृतिक प्रकृति के साथ-साथ संकटग्रस्त इतिहास के लिए भी जानी जाती है। अफ्रीकी देश कैमरून में स्थित यह झील के लिए भी रहस्य बनी हुई है। 1986: जब लेक ने उगला डेथ का बादल देखा21 अगस्त 1986 की रात इतिहास की सबसे रहस्यमय प्राकृतिक घटनाएँ दर्ज हैं। उस दिन इस झील से अचानक निकला आसमानी गैस का बादल, जिसने आसपास के लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की आबादी वाले इस गैस क्लाउड ने करीब 1800 लोगों, 3500 लोगों और अनगिनत पक्षियों की जान ले ली। सबसे अजीब बात यह है कि लोग सोते-सोते ही दम तोड़ गए और उन्हें कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला। क्या है ‘लिमनिक विस्फोट’ का रहस्य?इस घटना को लिमनिक विस्फोट का नाम दिया गया है। असल में, यह झील एक वैज्ञानिक क्रेटर में बनी है, जहां नीचे मौजूद मैग्मा कांसॉली कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। यह गैस झील की गहराई में जमा होता है और जब दबाव अधिक बढ़ता है, तो अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकलता है। यह गैस हवा से भारी होती है, इसलिए जमीन के पास बहती है और ऑक्सीजन की जगह ले जाती है, जिससे सांस लेना असंभव हो जाता है। राक्षसों के बीच बसी है यह खतरनाक झीललेक न्योस उत्तर-पश्चिमी कैमरून के ओकू आर्किटेक्चर क्षेत्र में स्थित है। यह एक क्रेटर झील है, जो टोकरा विस्फोट से बने पानी के दावे से बनी है। झील की गहराई में मौजूद गैस का लगातार जमाव इसमें दुनिया की सबसे खतरनाक झीलें शामिल हैं। यहां की जमीन और प्राकृतिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह प्राकृतिक खतरे हमेशा के लिए बरकरार है। गेन ने कैसे किया खतरनाक को कम1986 की घटना के बाद इस खतरे को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया। वर्ष 2001 में यहां ‘डीगैसिंग सिस्टम’ का आविष्कार किया गया, जिसके माध्यम से पाइपों के माध्यम से गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। इसके बाद 2011 में दो और पाइपलाइन लगाए गए, जिससे गैस पर नियंत्रण हो गया। अब झील से गैस धीरे-धीरे-धीमी गहराई पर बनी हुई है, जिससे बड़े विस्फोट की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। आज भी रहस्य और डॉक्टर का रहस्य हैआज भी न्योस झील देखने में शांत और सुंदर दिखती है, लेकिन इसके अंदर छिपा खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इस झील और अफ्रीका की अन्य झीलों पर नजर रख रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को बरकरार रखा जा सके।
महिलाओं की नींद पर रिसर्च, सामने आया ‘स्लीप जेंडर गैप’ का सच

नई दिल्ली बायबैक द्वारा किए गए कई शोधों में एक दिलचस्प लेकिन अनोखा तथ्य सामने आया है- महिलाओं और पुरुषों की नींद का साफ मतलब है। इस अंतर को जेंडर स्लीप गैप कहा जाता है। यह केवल सोने के समय का फर्क नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता, गहराई और मानसिक प्रभावों से भी फर्क पड़ता है। मातृभाषा की नींद पर गहरा असरएक अध्ययन के अनुसार, 45 साल से कम उम्र की केवल 48% माताएं ही प्रतिदिन 7 घंटे की नींद ले कर बेरोजगार हैं, जबकि बिना बच्चों वाली 62% महिलाएं पूरी तरह से सोती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश की महिलाओं की नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। बच्चों की देखभाल, रात में बार-बार उठना और वजन का बोझ महिलाओं की नींद को बाधित करता है। ग्लोबल रिपोर्ट में भी आई सच्चाई सामने2025 में स्लीप साइकल की एक ग्लोबल रिपोर्ट में पाया गया कि केवल 57% महिलाएं ही सामान्य मूड के साथ जागती हैं, जो पुरुषों के लिए कम है। यह संकेत बताता है कि महिलाओं की नींद केवल कम होती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। सबसे बड़ी वजहमहिलाओं के जीवन में ऐसे कई चरण आते हैं, जहां मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति जैसे परिवर्तन होते हैं। ये बदलाव नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। नींद का बार-बार टूटना और गहरी नींद की कमी महिलाओं में आम समस्या बन जाती है, जिससे शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता। सामाजिक दबाव और जिम्मेदारियाँ भी जिम्मेदारकेवल जैविक कारण ही नहीं, बल्कि सामाजिक कारण भी ये ‘जेंडर स्लीप गैप’ हैं। घर और काम के बीच संतुलन, परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और मानसिक तनाव, महिलाओं की नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। महिलाओं को अधिक नींद क्यों आती है?विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाएं अधिक से अधिक मल्टीटास्किंग करती हैं और वैज्ञानिक रूप से भी अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे उनके दिमाग को आराम की अधिक आवश्यकता होती है। लेकिन जब इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है, तो इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है। स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असरमहिलाओं में लगातार नींद की कमी से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हृदय रोग और मेटाबोलिक विकार का खतरा भी बढ़ जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है। जागरूकता ही समाधान‘जेंडर स्लीप गैप’ को डाउनलोड करें और इसे कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। परिवार और समाज को भी इस दिशा में प्रेरित किया जाएगा, ताकि महिलाओं को पर्याप्त सुविधा और बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।
नवरात्रि डाइट टिप्स: साबूदाना बना सबसे बेहतर विकल्प, हल्का और हेल्दी भोजन

नई दिल्ली चैत्र नवरात्रि के नौ पावन दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दौरान शरीर को स्वायत्त ऊर्जा और पोषण की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। सही आहार न लेने पर कमजोरी, थकान और पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं। ऐसे में साबूदाना व्रत का एक आदर्श और मानक आहार के रूप में सामने आता है। प्रभावकारी, स्वादिष्ट और तत्काल ऊर्जा प्रदान करने वालासाबूदाना कसावा (टैपिओका) का कन्द से तैयार किया जाता है और दानों के रूप में छोटे-छोटे मोती के रूप में होता है। पानी या दूध में मसाले के बाद यह स्टॉक और हो जाता है। व्रत के दौरान इसमें सजावट, खेड या साधारण स्टॉकर यात्रा होती है। सुबह-सुबह साबूदाना के सेवन से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और थकान महसूस नहीं होती। पोषण से भरपूर, पाचन के लिए लाभकारीसाबूदाना कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत है, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन और विटामिन भी पाए जाते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है। व्रत के दौरान अक्सर गैस, अपच या भारीपन महसूस होता है, लेकिन साबूदाना इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है। यह प्रभाव होता है और आसानी से पच जाता है, जिससे पेट पर भी प्रभाव पड़ता है। दिल, वजन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिएसाबूदाना में मौजूद पदार्थ और मैग्नीशियम दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं और ब्लड वॉल्यूम को स्थिर बनाए रखते हैं। कम कैलोरी होने के कारण यह वजन बढ़ने से भी रोकता है। इसमें मौजूद विटामिन्स और बालों के अलावा त्वचा और बालों के लिए भी चमत्कारी होते हैं। नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे शारीरिक संतुलन से लड़ने में सक्षम बनता है। कृमि में भी सीमित मात्रा में मिलावटविशेषज्ञ के अनुसार, साबूदाना की मात्रा सीमित मात्रा में हो सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखने में मदद करते हैं। हालाँकि, इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। ऐसे डॉक्यूमेंट्री साबूदानासाबूदाना बनाने में 2-3 घंटे का समय लगता है. इसके बाद फ़्लॉइकर में आलू, मटर और मूंगफली की दुकानें शामिल हैं। विभिन्न प्रकार की इकाइयाँ तैयार करें। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ राक्षसी भी है। मूंगफली और आलू मिलाने से इसमें प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे व्रत के दौरान संपूर्ण आहार बन जाता है।
सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान

नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास घर का ताजा और पुराना खाना बनाने का समय कम हो रहा है। यही वजह है कि लोग मार्केट में मीटिंग वाले स्ट्रैटेजी और रेडी-टू-ईट फूड पर भारी प्रतिबंध हो गए हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को ‘हल्दी’ में शामिल किया जाता है। हर ‘हेल्दी’ चीज़ सच में स्वस्थ नहीं हैबाजार में ऐसे कई खाद्य उत्पाद मौजूद हैं, जिनमें कम चीनी, ज्यादा पोषण और फिटनेस के नाम शामिल हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। इनमें से कुछ चीनी, केमिकल और सर्जिकल शरीर को धीरे-धीरे नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 ‘हेल्डी’ फ़ार्म, जो असल में आपकी सेहत बना सकते हैं। 1. साबुत अनाज: साबुत अनाज की कमी, शुगर अधिकपैक्ड सामान में स्टेक-इलेक्ट्रिक उत्पाद शामिल हैं, लेकिन इनमें अक्सर अतिरिक्त चीनी, प्रिजर्वेटिव और कलात्मक रंग मिलाए जाते हैं। वहीं, साबुत अनाज की दुकानों पर मिलने वाले सामुहिक फलों में भी सब्जी की कमी होती है, जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। ऐसे में पूरा फल खाना बड़ा खतरनाक होता है। 2. इंस्टिटेंट ओट्स: अधिकांश व्यापारियों का नुकसानइन्टेंट ओट्स को अर्ली बनने वाला वैलिडिटी विकल्प माना जाता है, लेकिन काफी आकर्षक बनाया जाता है। इसमें स्वाद, नमक और कई बार चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बजाय कम आकर्षक वाले स्टील-कैट ओट्स बड़े पैमाने पर उद्यम और राक्षसी होते हैं। 3. ब्राउन बेडर: नाम ‘हेल्दी’, अंदर से मेडाबाजार में मिलने वाली ज्यादातर ब्राउन ब्रेडेड को मल्टीग्रेन या आटा ब्रेडेड बेरोजगारों द्वारा बेची जाती है, लेकिन हकीकत में इनमें मैदा की मात्रा अधिक होती है। रंग देने के लिए कैरमल या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिससे यह भूरा दिखता है। ऐसे में ब्राउन बेडर को आंख बंद करके स्टेक मैन लेना गलत हो सकता है। 4. फ्लेवर्ड दही या लस्सी: स्वाद में मीठा, सेहत में नुकसानपैक्ड फ्लेवर्ड दही या लस्सी का स्वाद अच्छा ही लगता है, लेकिन इनमें फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और मात्रा में शुगर मिलाई होती है। इसके नियमित सेवन से वजन बढ़ सकता है और रक्त शर्करा में कमी हो सकती है। सादा दही या घर की बनी लस्सी मुख्य रूप से सुरक्षित विकल्प है। 5. शुगर मुक्त उत्पाद: शुगर मुक्त उत्पादयहां ‘शुगर-फ्री’ के नाम पर कई उत्पाद खत्म किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर या रिफाइंड तत्व मौजूद हैं। लंबे समय तक इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है। प्राकृतिक मिश्रण जैसे गुड़ या शहद को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। सही चुनाव से ही संभव सही स्वास्थ्यविशेषज्ञ का मानना है कि संभवतः संभव हो, प्राकृतिक और कमोडिटी भोजन को ही शामिल करना चाहिए। ट्रैक्टर और विज्ञापन के झांसे में गाइन ‘हल्दी’ टैग वाले प्रोडक्ट्स पर नजर बंद करके पक्का नुकसान हो सकता है।
गर्मी में राहत का आसान उपाय, शीतली प्राणायाम का सही तरीका जानें

नई दिल्ली मूल में हल्दी गर्मी, चिलचिलाती धूप और लू के थेपेडर्स ने लोगों की समस्याओं को प्रभावित किया है। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और दिमाग को शांत रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। इस स्थिति में शीतली प्राणायाम एक आसान और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है, जो बिना किसी औषधि के शरीर और मन को ठंडक प्रदान करता है। आयुष मंत्रालय भी आधिकारिक तौर पर कार्य करता हैभारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इस प्राणायाम के निषेध की सलाह देता है। यह योगिक श्वसन तकनीक समरलैण्ड में बेहद ही मजबूत मैनी बनाती है और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। ‘शीतली’ शब्द का अर्थ ही शीतलता प्रदान करना है, और यह अभ्यास गुण के लिए जाना जाता है। शीतली प्राणायाम कैसे काम करता हैशीतली प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका (ट्यूब) की तरह घुमाकर मुंह से अंदर हवा ली जाती है। यह अदृश्य हवा सीधे गले और शरीर में प्रवेश करती है, जिससे तुरंत ठंड लग जाती है। नियमित अभ्यास से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है। गर्मी में मिलने वाले जबरदस्त फायदेविशेषज्ञ के अनुसार, शीतली प्राणायाम कई स्वास्थ्य लाभ देता है। यह लू और हीट स्ट्रोक से बचाव में मदद करता है। साथ ही तनाव, चिंता और निराशा को कम कर मानसिक शांति प्रदान करता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद हानिकारक है। पेट की गर्मी को कम करके एसिडिटी, कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। हाई ब्लड वाले लोगों के लिए भी ऐसा माना जाता है, क्योंकि यह डांस को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इससे त्वचा को भी फायदा मिलता है। गर्मी से होने वाले रैशेज, जलन और त्वचा संबंधी चिंताओं से राहत मिलती है। रात को सोने से पहले इसका अभ्यास करने से नींद अच्छी और गहरी आती है। सही सूत्र जानना जरूरी हैशांत वातावरण में सुबह के समय शीतली प्राणायाम करना सबसे अच्छा माना जाता है। सुखासन या पद्मासन में लम्बी जीभ को बाहर की ओर झुकाएं और उसे नलिका के आकार में घुमाएं (यदि संभव न हो तो शरीर को गोल घुमाने का भी प्रयास किया जा सकता है)। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और कुछ सेकंड तक रोकें। फिर नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट का अभ्यास साम्य होता है। इन लोगों को कलाकारों से सावधान रहना चाहिएवैसे तो शीतली प्राणायाम बहुत अच्छा है, लेकिन ठंड-जुकाम, सांस या गले से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसे पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह से जरूर लेना चाहिए।
गर्मियों में इन 5 पत्तियों का सेवन, शरीर रहेगा स्वस्थ और बीमारियां रहेंगी दूर

नई दिल्ली। भारत में प्राचीन समय से ही जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद के ज़रिए रोगों का उपचार किया जाता रहा है। आज भले ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने इलाज को आसान बना दिया हो, लेकिन आयुर्वेद न सिर्फ़ बीमारियों को जड़ से खत्म करने की बात करता है, बल्कि शरीर को रोगों से दूर रखने के उपाय भी बताता है। गर्मी में बढ़ती समस्याएं और प्राकृतिक समाधानगर्मी के मौसम में अक्सर ब्लड प्रेशर, मुंहासे, फोड़े-फुंसी और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। खासकर कुछ पत्तियां ऐसी हैं, जिनका सेवन करने से कई समस्याओं से राहत मिल सकती है। नीम के पत्ते: प्राकृतिक एंटीबायोटिकनीम की पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। इनमें प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो खून को साफ करने में मदद करते हैं। शुगर, बुखार, मुंहासे और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में नीम बहुत लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में नीम की कोमल सब्जियों को चबाना या उनका जूस पीना शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। सहजन के पत्ते: पोषण का भंडारमोरिंगा यानी सहजन के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये शरीर में खून की कमी दूर करने, कमजोरी कम करने और पाचन क्रिया सुधारने में मदद करते हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहजन फायदेमंद है। सहजन के पत्तों का सूप या जूस गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देता है। शीशम के पत्ते: महिलाओं के लिए लाभकारीशीशम के पत्ते विशेष रूप से महिलाओं के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं, मासिक धर्म की अनियमितता और सफेद पानी जैसी परेशानियों में इनका उपयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करने से लाभ मिल सकता है। बरगद के पत्ते: त्वचा के लिए बाध्यबरगद के पेड़ के पत्ते त्वचा रोगों में बेहद असरदार होते हैं। फंगल इंफेक्शन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में बरगद के पत्तों को उगलकर उसका सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। पीपल के पत्ते: आयुर्वेदिक औषधिपीपल के पेड़ के पत्तों को आयुर्वेद में विशेष औषधि माना गया है। पथरी, सिस्ट और अन्य आंतरिक समस्याओं में इसके रस का सेवन लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों को मजबूत करने में सहायक होता है। सेवन से पहले बरतें सावधानीहालांकि ये सभी पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर हैं, लेकिन इनके सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए सही मात्रा और तरीका जानना जरूरी है।