हेल्दी लाइफ का सीक्रेट: मूंग स्प्राउट्स से बढ़ाएं ताकत और घटाएं वजन

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति फिट और हेल्दी रहने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में खानपान में पौष्टिक और प्राकृतिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मूंग दाल के स्प्राउट्स यानी अंकुरित मूंग एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे सेहत के लिए लाभकारी मानते हैं। जैसे ही मूंग दाल अंकुरित होती है, इसके पोषक तत्वों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे अंकुर शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मूंग स्प्राउट्स का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी मूंग स्प्राउट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन सही रहता है, तो शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। अच्छे पाचन का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और मुंहासों व दाग-धब्बों में कमी देखी जा सकती है। वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। मूंग स्प्राउट्स में कैलोरी कम होती है, लेकिन यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनावश्यक खाने से बचाव होता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को टोन रखने में सहायक होता है। दिल की सेहत के लिए भी मूंग स्प्राउट्स लाभकारी हैं। इनमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। आयरन और फोलेट की पर्याप्त मात्रा रक्त की गुणवत्ता को सुधारती है और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए भी यह फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। साथ ही यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है। मूंग स्प्राउट्स को अपने आहार में शामिल करना बेहद आसान है। आप इसे सलाद में मिलाकर, सूप में डालकर, सब्जी के रूप में या हल्का भूनकर भी खा सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और आप खुद को ज्यादा ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करते हैं।
सुबह के नाश्ते में झटपट बनाएं सूजी का चीला आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता

नई दिल्ली । सुबह की भागदौड़ में अगर आपको तेजी से बनने वाला स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता चाहिए तो सूजी का चीला बढ़िया ऑप्शन है। यह नाश्ता सिर्फ जल्दी तैयार नहीं होता बल्कि सब्जियों के साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी बनता है। सूजी चीला खासतौर पर सुबह के लिए उत्तम विकल्प है क्योंकि यह ऊर्जा देता है पेट भरा रखता है और आप इसमें अपनी पसंद की सब्जियाँ भी मिला सकते हैं जिससे इसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाता है। सबसे पहले एक बड़े बाउल में 1 कप सूजी और आधा कप दही डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए गाढ़ा चिपचिपा घोल तैयार करें और इसे लगभग 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि सूजी घूमकर थोड़ी फूल जाए। अब घोल में बारीक कटी प्याज शिमला मिर्च कद्दूकस किया हुआ गाजर हरी मिर्च हरा धनिया स्वादानुसार नमक हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। यह मिश्रण स्वाद और पोषण दोनों को बेहतर बनाता है क्योंकि सब्जियाँ विटामिन और फाइबर प्रदान करती हैं। एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और उस पर थोड़ा तेल या घी लगाएँ। तैयार मिश्रण में से एक कलछी भरकर तवे पर डालें और हल्के हाथ से गोल आकार में फैलाएँ। मध्यम आंच पर इसे दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक सेकें। चीले को क्रिस्पी किनारों और सॉफ्ट अंदरूनी टेक्सचर के साथ पकाना चाहिए। जब चीला दोनों तरफ से अच्छे से हल्का ब्राउन हो जाए तो इसे गरमागरम उतार लें और अपनी पसंद की हरी चटनी टमाटर सॉस या दही के साथ परोसें। स्वादिष्ट सूजी चीला न सिर्फ सुबह की भूख शांत करेगा बल्कि पोषण और स्वाद का बेहतरीन मेल भी देगा। सूजी का चीला सिर्फ स्वादिष्ट नाश्ता ही नहीं है बल्कि यह पोषक तत्वों जैसे आयरन विटामिन B और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है जो सुबह की ऊर्जा और सक्रियता को बनाए रखने में मदद करता है। इस आसान रेसिपी के साथ आप रोज़ के नाश्ते को स्वाद और हेल्थ का बेहतरीन संयोजन बना सकते हैं चाहे आप ऑफिस जाने वाले हों बच्चों का टिफिन तैयार कर रहे हों या सप्ताहांत के नाश्ते का प्लान बना रहे हों।
काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे

नई दिल्ली ।होली का त्योहार आते ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है। रंग, परिधान और सजावट के साथ-साथ महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है उनके गहनों की चमक। खासकर पायल और बिछिया, जिन्हें महिलाएं अक्सर रोज पहनती हैं, समय के साथ काली पड़ जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि होली पर आपके गहने फिर से चमकदार दिखें, तो कुछ आसान घरेलू नुस्खों से इन्हें आप मिनटों में चमका सकते हैं। सबसे पहले बेकिंग सोडा और नींबू का तरीका बहुत कारगर है। एक कटोरी में थोड़ी बेकिंग सोडा लें और उसमें कुछ बूंदें नींबू का रस डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे पायल या बिछिया पर हल्के हाथों से रगड़ें और कुछ मिनट बाद साफ पानी से धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे चांदी की काली परत हटकर गहने फिर से चमकने लगेंगे। दूसरा तरीका है टूथपेस्ट का। इसके लिए गहनों पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाएं और मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से साफ करें। इसके बाद गहनों को पानी से धोकर सुखा लें। यह तरीका जल्दी और आसान होने के साथ ही चांदी को खरोंच से भी बचाता है। तीसरा तरीका है सिरका और बेकिंग सोडा का मिश्रण। एक कप सफेद सिरके में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें और गहनों को इसमें 10–15 मिनट तक भिगो दें। भिगोने के बाद साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें। इस तरीके से गहनों की काली परत आसानी से हट जाती है और चमक लौट आती है। चौथा तरीका है इमली के पानी का। इमली में प्राकृतिक एसिड होता है जो चांदी की काली परत हटाने में मदद करता है। थोड़ी सी इमली को गुनगुने पानी में भिगो दें और जब पानी गाढ़ा हो जाए, उसमें गहनों को 10 मिनट के लिए डुबोकर रखें। इसके बाद मुलायम ब्रश या कपड़े से हल्के हाथों से रगड़कर गहनों को साफ करें। पाँचवां और अंतिम आसान तरीका है गर्म पानी और नमक का। एक कटोरी में गर्म पानी लें और उसमें एक चम्मच नमक डालकर घोल बनाएं। इसमें गहनों को 10 मिनट तक भिगोकर, मुलायम ब्रश से साफ करें। इसके बाद पानी से धोकर सुखाएं। यह तरीका भी चांदी की चमक बढ़ाने में बेहद प्रभावी है। इन सरल तरीकों से आप अपने पायल और बिछिया को होली से पहले चमकदार और नए जैसे बना सकते हैं। याद रखें कि सफाई करते समय ज्यादा जोर न लगाएं, क्योंकि इससे गहनों पर खरोंच आ सकती है। होली पर रंगों के साथ-साथ अपने गहनों की चमक भी बनाए रखें और इन आसान टिप्स के जरिए त्योहार को और भी खास बनाएं।
किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है

नई दिल्ली । आज के समय में किडनी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और इसे अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे जैसे किडनी की कार्यक्षमता घटती है शरीर की त्वचा और नाखून कई संकेत देने लगते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम संकेतों में से एक है त्वचा का अत्यधिक रूखा होना। त्वचा खुरदुरी पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है कई बार इसमें दरारें भी पड़ जाती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है। लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है। यह खुजली कभी शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहती है और कभी पूरे शरीर में फैल जाती है। अगर यह लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान उभरने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। किडनी सही से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई देता है जो पीली धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा पर मोटी और पीली परत भी बन जाती है। इसके अलावा नाखूनों में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है। कभी कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों टखनों हाथों या चेहरे पर सूजन आ सकती है और त्वचा तनी या चमकदार दिख सकती है। खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर छोटे दाने या रैशेज भी उभर सकते हैं जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी यह दोबारा उभर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ पैर या चेहरे पर दिखाई देते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं। पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है। इसलिए अगर त्वचा में लगातार रूखापन खुजली दाने नाखूनों में बदलाव सूजन या किसी भी तरह की असामान्य गांठ नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर किडनी समस्याओं और फेलियर को रोका जा सकता है। अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही अपने शरीर के छोटे छोटे संकेतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार

नई दिल्ली ।होली के त्योहार में रंगों की मस्ती तभी फीकी पड़ने लगती है जब स्किन एलर्जी या जिद्दी केमिकल वाले रंगों का डर सताने लगता है। अक्सर लोग अपनी त्वचा के खराब होने के खौफ से खुद को घर के अंदर कैद कर लेते हैं, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप सही Pre-Holi और Post-Holi स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो आप बिना किसी फिक्र के गुलाल और पानी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं वे प्रभावी टिप्स जो आपकी त्वचा को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाकर उसे रेशमी और चमकदार बनाए रखेंगे।होली से पहले: सुरक्षा की ढाल तैयार करेंहोली के मैदान में उतरने से पहले अपनी त्वचा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाना जरूरी है, ताकि रंग रोमछिद्रों के अंदर न समा सकें। इसके लिए सबसे पहला कदम है “त्वचा को डीप मॉइस्चराइज करना”। घर से बाहर निकलने से पहले स्किन को अच्छे से हाइड्रेट करें। आप लाइट वेट मॉइस्चराइजर या हाइलूरोनिक एसिड वाले सीरम का उपयोग कर सकते हैं। यह त्वचा और रंगों के बीच एक फिजिकल बैरियर बना देता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है, तो तेल आधारित मॉइस्चराइजर लगाना सबसे बेहतर विकल्प है। दूसरा महत्वपूर्ण टिप है “एक्सफोलिएशन से दूरी”। होली से कम से कम दो दिन पहले किसी भी तरह के स्क्रब या फेस पीलिंग ट्रीटमेंट से बचें। एक्सफोलिएशन से डेड स्किन हट जाती है, जिससे नई त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है और रंगों के केमिकल उस पर तुरंत जलन या रैशेज पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने नाखूनों की सुरक्षा करना न भूलें। नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश या बेस कोट की एक परत लगाएं, ताकि रंग अंदर तक न फंसे और बाद में आसानी से साफ हो जाए। अंत में एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। धूप में घंटों होली खेलने से होने वाली टैनिंग और UV किरणों के नुकसान से बचने के लिए इसे चेहरे, गर्दन और बाहों पर जरूर लगाएं। होली के बाद: ऐसे लौटाएं अपनी खोई हुई रौनकरंगों से सराबोर होने के बाद बारी आती है उन्हें सही तरीके से साफ करने की। यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग “गर्म पानी” का इस्तेमाल करके करते हैं। हमेशा याद रखें कि रंगों को ठंडे पानी से ही धोना चाहिए। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और अधिक पक्का कर देता है, जिससे उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है। त्वचा से रंग हटाने के लिए किसी कठोर साबुन के बजाय “जेंटल और हाइड्रेटिंग फेस क्लींजर” का चुनाव करें। इसे सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से रगड़ें और फिर पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चेहरा सुखाते समय तौलिए से रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से थपथपाकर Pat dry सुखाएं। एक बार रंग निकल जाने के बाद, नमी को लॉक करना सबसे जरूरी है। त्वचा के नेचुरल हाइड्रेशन लेवल को बहाल करने के लिए रिपेयरिंग सीरम और एक हैवी मॉइस्चराइजर लगाएं। अंत में भले ही होली खत्म हो गई हो, लेकिन अगले कुछ दिनों तक सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखें, क्योंकि रंगों के संपर्क में आने के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है और सूरज की रोशनी उसे जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है।
रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि नियमित वेतन बंद होने के बाद घर का खर्च कैसे चलेगा। जिन लोगों ने पहले से पेंशन या निवेश की ठोस योजना नहीं बनाई होती, उनके लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार की एक लोकप्रिय और सुरक्षित योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आती हैसीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम। यह योजना खासतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित आय मिलती रहे और पूंजी भी सुरक्षित रहे। एक सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आकर्षक ब्याज दर के साथ हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है। यही तिमाही ब्याज वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी नियमित आय का काम करता है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित योजना है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जिससे यह और अधिक आकर्षक बन जाती है। इस योजना में निवेश करने के लिए सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु होना आवश्यक है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के वे लोग भी निवेश कर सकते हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली हो, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश करें। खाता व्यक्तिगत रूप से या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है, लेकिन प्राथमिक खाताधारक की आयु पात्रता के अनुरूप होनी चाहिए। निवेश सीमा की बात करें तो SCSS में न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है और राशि 1,000 के गुणांक में ही जमा करनी होती है। अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपए है। यदि पति और पत्नी दोनों अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक निवेश संभव है। ध्यान रहे कि इस योजना में निवेश एकमुश्त करना होता है, किस्तों में जमा करने का विकल्प नहीं है। कई लोग रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पीएफ, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की राशि को इसमें लगाकर सुरक्षित और नियमित आय सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तिमाही आधार पर खाते में जमा होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 30 लाख रुपए निवेश करता है, तो उसे सालाना लगभग 2.46 लाख रुपए ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपए और औसतन लगभग 20,500 रुपए प्रतिमाह के बराबर नियमित आय प्राप्त होगी। यह राशि रिटायरमेंट के बाद घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है। खाता देश के अधिकृत बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पहचान पत्र, पैन कार्ड और निवेश राशि के साथ आवेदन करना होता है। कुल मिलाकर, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम उन लोगों के लिए मजबूत विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के साथ नियमित और सुनिश्चित आय चाहते हैं।
होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…

नई दिल्ली।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा है सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस ब्रेक और शाम की थकान तक कई लोग दिन में तीन से चार बार या उससे भी अधिक चाय पीते हैं ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब नहीं है चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन हल्का दाग छोड़ सकते हैं खासकर दांतों पर लेकिन ये तत्व सीधे तौर पर होंठों को स्थायी रूप से काला नहीं करते असली समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक गर्म चाय बार बार पीता है गर्म पेय का लगातार संपर्क होंठों की नाजुक त्वचा को प्रभावित करता है इससे त्वचा की ऊपरी परत सूखने लगती है और धीरे धीरे पपड़ी बनती है लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है विशेषज्ञ बताते हैं कि होंठों के कालेपन के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ा कारण है जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो होंठ सूखकर बेजान हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक गुलाबी रंग फीका पड़ने लगता है धूम्रपान या तंबाकू सेवन भी होंठों की रंगत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निकोटीन और अन्य रसायन पिगमेंटेशन को बढ़ाते हैं जिससे होंठ धीरे धीरे काले हो सकते हैं इसी तरह बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना भी हानिकारक है सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ा सकती हैं जिससे होंठों का रंग गहरा हो जाता है लिप केयर की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है बार बार होंठ चाटना सस्ते या घटिया गुणवत्ता वाले लिप प्रोडक्ट्स का उपयोग करना या रात में मॉइस्चराइज न करना होंठों की सेहत पर असर डालता है कुछ मामलों में एलर्जी या हार्मोनल बदलाव भी रंग में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है वैश्विक स्तर पर भी त्वचा और होंठों की सुरक्षा को दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा माना गया है जैसा कि World Health Organization अपने स्वास्थ्य संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों में त्वचा सुरक्षा पर जोर देता है अगर आप होंठों की प्राकृतिक रंगत बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं दिनभर पर्याप्त पानी पिएं SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करें अत्यधिक गर्म चाय या कॉफी से बचें धूम्रपान से दूरी रखें और सोने से पहले होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं यदि होंठों का रंग अचानक बहुत ज्यादा गहरा हो जाए जलन सूजन या दर्द महसूस हो तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है क्योंकि कभी कभी यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है
रिश्तों से पहले खुद से रिश्ता, क्यों बढ़ रहा है सिंगल रहने और सेल्फ केयर का ट्रेंड
लीजिये आ गया घूमने के लिये परफेक्ट मौसम, जानिए दिल्ली में घूमने लायक जगहों के नाम

नई दिल्ली । दिल्ली की सर्दियां और हल्की बसंत की हवा घूमने का ऐसा समय है जब राजधानी की खूबसूरती अपने पूरे रंग में दिखाई देती है. ऐतिहासिक इमारतों से लेकर आधुनिक पार्कों तक, दिल्ली में घूमने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है. नीचे दिल्ली की कुछ चुनिंदा और सबसे लोकप्रिय जगहों की जानकारी दी गई है. इंडिया गेट – देशभक्ति का प्रतीक राजपथ अब कर्तव्यपथ पर स्थित इंडिया गेट दिल्ली का हमेशा पसंद किया जाने वाला घूमने का स्थान है. यह विशाल वार मेमोरियल प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बनाया गया था. यहां के हरे-भरे लॉन पिकनिक और शाम की सैर के लिए आदर्श हैं. लाल किला – इतिहास का शानदार अध्याय लाल किला, दिल्ली का सबसे भव्य किला और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है. शाहजहां द्वारा निर्मित इस किले में कई सुंदर महल, संग्रहालय और विशाल उद्यान हैं. यह दिल्ली की पहचान और इतिहास प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा स्थान है. क़ुतुब मीनार – दिल्ली का आसमान छूता आकर्षण 12वीं सदी में बनी क़ुतुब मीनार 73 मीटर ऊंची ऐतिहासिक मीनार है, जो अपनी जटिल नक्काशी और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. इसके आसपास का क़ुतुब परिसर भी उतना ही खूबसूरत है. यह फोटो खींचने और इतिहास जानने के शौकीनों के लिए बेस्ट जगह है. अक्षरधाम मंदिर – कला, संस्कृति और भव्यता दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक मंदिरों में से एक अक्षरधाम मंदिर दिल्ली की शान है. यहां की भव्य पत्थर नक्काशी, संगीतमय फाउंटेन शो और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. लोटस टेंपल – शांत वातावरण के साथ खूबसूरत वास्तुकला सफेद संगमरमर से बना लोटस टेंपल अपनी कमल आकार की डिजाइन के लिए विश्वप्रसिद्ध है. यह बहाई उपासना स्थल है और यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है. ध्यान और शांति पसंद करने वालों के लिए यह आदर्श स्थान है. हुमायूं का मकबरा – मुगल कला का उत्कृष्ट नमूना हुमायूं का मकबरा दिल्ली का पहला गार्डन टॉम्ब माना जाता है और यह ताजमहल का प्रेरणास्रोत भी माना जाता है. चारों तरफ फैले हरे उद्यान इसे और आकर्षक बनाते हैं. सर्दी के मौसम में यहां घूमना बेहद सुखद अनुभव होता है. दिल्ली में मौसम सुहाना हो तो घूमने का मज़ा दोगुना हो जाता है. ऐतिहासिक धरोहरें, आधुनिक वास्तुकला, पार्क, मंदिर, यह शहर हर तरह के यात्री के लिए कुछ खास रखता है. इसलिए इस मौसम में दिल्ली को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें.
गाजर जल्दी हो जाती है काली और सूखी? जानिए स्टोर करने का सही तरीका वरना होगा नुकसान

नई दिल्ली।सर्दियों के मौसम में बाजार में गाजर की भरमार रहती है लोग सलाद सब्जी जूस और हलवे के लिए एक साथ ज्यादा मात्रा में गाजर खरीद लेते हैं लेकिन कुछ ही दिनों में गाजर सूखने लगती है काली पड़ जाती है या गलकर खराब हो जाती है कई बार फ्रिज में रखने के बावजूद भी इसकी ताजगी बरकरार नहीं रहती ऐसे में जरूरत है सही स्टोरेज तकनीक अपनाने की ताकि गाजर कई हफ्तों तक कड़क और लाल बनी रहे सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि गाजर खरीदते ही उसके ऊपर लगे हरे पत्तों को अलग कर दें ये पत्ते गाजर की नमी को तेजी से खींचते हैं जिससे गाजर जल्दी मुरझा जाती है अगर आप चाहते हैं कि गाजर ज्यादा दिनों तक ताजा रहे तो पत्तों को काटकर अलग कर दें और केवल जड़ वाला हिस्सा ही स्टोर करें दूसरा तरीका है गाजर को पानी में स्टोर करना गाजर को पहले साफ पानी से धो लें फिर एक एयरटाइट कंटेनर या कांच के जार में रखें उसमें इतना पानी भरें कि गाजर पूरी तरह डूब जाए इसके बाद जार को फ्रिज में रख दें ध्यान रहे कि हर दो से तीन दिन में पानी बदलते रहें इससे गाजर अपनी नमी बनाए रखती है और कई हफ्तों तक कड़क बनी रहती है अगर आप गाजर को सूखे तरीके से स्टोर करना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें फिर पेपर टॉवल या अखबार में लपेटकर जिप लॉक बैग में रखें यह तरीका अतिरिक्त नमी को सोख लेता है जिससे सड़न की संभावना कम हो जाती है ध्यान रखें कि गाजर बिल्कुल सूखी हो क्योंकि हल्की सी नमी भी फ्रिज में फफूंद और सड़न को बढ़ावा दे सकती है लंबे समय के लिए गाजर सुरक्षित रखना हो तो ब्लांचिंग और फ्रीजिंग का तरीका अपनाया जा सकता है गाजर को छोटे टुकड़ों में काट लें फिर उन्हें दो मिनट के लिए उबलते पानी में डालें इसके तुरंत बाद बर्फ वाले ठंडे पानी में डालकर ठंडा करें फिर अच्छी तरह सुखाकर फ्रीजर बैग में पैक कर दें इस तरीके से गाजर लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और जरूरत पड़ने पर सीधे इस्तेमाल की जा सकती है एक और जरूरी बात यह है कि गाजर को सेब या केले जैसे फलों के साथ न रखें ये फल एथिलीन गैस छोड़ते हैं जिससे गाजर जल्दी पककर खराब हो सकती है इसलिए फ्रिज में अलग ड्रॉअर या अलग कंटेनर में स्टोर करना बेहतर रहता है अगर इन आसान और प्रभावी तरीकों को अपनाया जाए तो गाजर कई हफ्तों तक ताजी बनी रह सकती है इससे न केवल स्वाद और पोषण बरकरार रहता है बल्कि बार बार सब्जी खराब होने से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बचाया जा सकता है