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क्या आपकी त्वचा भी पड़ रही है काली? मेलानिन को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स!

नई दिल्ली। हमारी त्वचा का प्राकृतिक रंग ‘मेलानिन’ नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है। हालाँकि मेलानिन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से हमारी रक्षा करता है, लेकिन शरीर में इसकी अधिकता चेहरे पर काले धब्बे, झाइयां और असमान रंगत (पिगमेंटेशन) का कारण बन सकती है। अगर आप भी अपनी त्वचा को एक समान, साफ और चमकदार बनाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान और असरदार उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं। 1. सूर्य की किरणों से सुरक्षा सनस्क्रीन का जादूसूरज की यूवी किरणें मेलानिन के उत्पादन को सबसे ज्यादा उत्तेजित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे खिड़की से आने वाली धूप हो या बादलों वाला मौसम, SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन रोज लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा, बाहर निकलते समय टोपी, छाता और हल्के सूती कपड़ों का उपयोग त्वचा को सीधी धूप से बचाने में मदद करता है। 2. विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स का सेवनविटामिन C मेलानिन को रोकने का एक पावरहाउस है। यह न केवल त्वचा को अंदर से साफ करता है बल्कि टायरोसिनेस (Tyrosinase) एंजाइम को रोककर मेलानिन उत्पादन धीमा करता है। अपने आहार में संतरा, आंवला, स्ट्रॉबेरी और अंगूर शामिल करें। इसके साथ ही, चेहरे पर अच्छी गुणवत्ता वाला विटामिन C सीरम लगाना भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। ग्रीन टी और बेरीज भी इसमें काफी सहायक होते हैं। 3. नियमित एक्सफोलिएशनत्वचा की ऊपरी मृत कोशिकाओं (Dead Cells) में मेलानिन जमा हो जाता है, जिससे त्वचा डार्क दिखने लगती है। साप्ताहिक स्क्रबिंग या कोमल केमिकल एक्सफोलिएशन से इन मृत कोशिकाओं को हटाया जा सकता है, जिससे नीचे की साफ और नई त्वचा बाहर आती है। ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा कठोर न हो, वरना त्वचा छिल सकती है। 4. नींबू और प्राकृतिक फेस पैकनींबू में प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग गुण होते हैं। लेकिन इसे सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय दही या शहद के साथ मिलाकर लगाना ज्यादा सुरक्षित है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और नींबू का विटामिन C मिलकर पिगमेंटेशन को कम करते हैं और त्वचा को हाइड्रेटेड रखते हैं। 5. लाइफस्टाइल में बदलावआपकी त्वचा आपके अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे), भरपूर पानी पीना और तनाव मुक्त रहना मेलानिन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। तनाव से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जो मेलानिन बढ़ा सकता है। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब से परहेज करना भी त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए जरूरी है। डर्मेटोलॉजिस्ट की राय: विशेषज्ञों का मानना है कि मेलानिन को पूरी तरह खत्म करना न तो संभव है और न ही सही, क्योंकि यह त्वचा का सुरक्षा कवच है। लेकिन सही सनस्क्रीन, संतुलित आहार और स्किनकेयर रूटीन के जरिए डार्क स्पॉट्स और असमान पिगमेंटेशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कब्ज और अपच से राहत दिलाए खीरे का यह नुस्खा, चेहरे को भी दे प्राकृतिक चमक

नई दिल्ली में आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोगों को समय पर और व्यवस्थित भोजन करने का अवसर नहीं मिल पाता। कई बार व्यक्ति संतुलित आहार तो लेता है, लेकिन इसके बावजूद शरीर में कमजोरी, सुस्ती और भारीपन की शिकायत बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण खराब पाचन तंत्र हो सकता है। यदि भोजन ठीक से नहीं पचता, तो उसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह नहीं मिल पाते। ऐसे में भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है और शरीर को अपेक्षित ऊर्जा और पोषण नहीं मिलता। इसलिए केवल संतुलित आहार लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पचना भी उतना ही जरूरी है। जब पाचन प्रक्रिया कमजोर हो जाती है, तो पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं। गैस, अपच और कब्ज जैसी परेशानियां न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती हैं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। आयुर्वेद में पेट से जुड़े रोगों के लिए कई रामबाण उपाय बताए गए हैं, लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि बिना दवा के भी पेट की पाचन अग्नि को सुधारा जा सकता है। इसके लिए एक सरल और असरदार उपाय है खीरे की सलाद। अधिकांश लोग खीरे की सलाद खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका नियमित सेवन पेट की कई समस्याओं से राहत दिला सकता है। रोज़ एक कटोरी ताजा खीरे की सलाद खाना पाचन सुधारने में बेहद सहायक माना जाता है। खीरे में भरपूर पानी, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये पेट को साफ करने, कब्ज को तोड़ने और आंतों को लुब्रिकेट करने में मदद करते हैं। खीरे का पानी शरीर की शुष्कता कम करता है और मल त्यागने में आसानी होती है। खीरे की सलाद का सेवन करने का सबसे अच्छा समय दोपहर के भोजन के साथ माना जाता है। आप चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू और काला नमक मिला सकते हैं। इसे हफ्ते में चार दिन आहार में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। ध्यान रखें कि ज्यादा नमक न डालें और यदि खीरा फ्रिज में रखा था तो सामान्य तापमान पर आने के बाद ही इसका सेवन करें। खीरे का लाभ केवल पाचन तक ही सीमित नहीं है। यह त्वचा और बालों को भी स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करता है। गर्मियों के मौसम में त्वचा की ड्राईनेस कम करने के लिए खीरे का सेवन और लेपन भी फायदेमंद है। खीरे का नियमित सेवन चेहरे को प्राकृतिक ग्लो देता है और थकान भी कम करता है। इस प्रकार रोज़ाना खीरे की सलाद न केवल पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती है, बल्कि त्वचा और बालों की सुंदरता में भी सुधार लाती है। यह एक सरल, प्राकृतिक और असरदार नुस्खा है, जिसे आप अपने दैनिक आहार में आसानी से शामिल कर सकते हैं।

इंडियाएआई मिशन का असर, सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर इलाज

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को रणनीतिक रूप से शामिल किया है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना, बीमारी की जल्द पहचान सुनिश्चित करना और दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर इलाज पहुंचाना है। आधिकारिक बयान में बताया गया कि एआई टूल्स का उपयोग अब कई प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किया जा रहा है। National TB Elimination Programme के तहत एआई आधारित स्क्रीनिंग और विश्लेषण से टीबी के गंभीर मामलों में 27 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इसी तरह National Diabetic Retinopathy Screening Programme में एआई की मदद से गैर-विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मी भी शुरुआती जांच कर पा रहे हैं। बीमारी निगरानी प्रणाली में एआई के इस्तेमाल से अब तक 4,500 से अधिक संभावित प्रकोपों के अलर्ट समय रहते मिल चुके हैं, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी। इससे संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिली है। डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म eSanjeevani ने इस बदलाव को और मजबूती दी है। इस ऑनलाइन परामर्श सेवा के जरिए अब तक 28.2 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सलाह मिल चुकी है। एआई आधारित टूल्स डॉक्टरों को बीमारी की पहचान और उपचार निर्णय में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। सरकार ने कुपोषण की निगरानी के लिए भी एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग शुरू किया है। इससे बच्चों और माताओं में पोषण संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है। अब भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं रहा। कैंसर के उपचार, आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण और National One Health Programme के तहत मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित दृष्टिकोण में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी कड़ी में 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ के पहले अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जहां नीति, शोध, उद्योग और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने IndiaAI Mission को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य एआई के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देना है।इसी मिशन के तहत ‘इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव’ भी चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश की प्रमुख समस्याओं के समाधान हेतु स्वदेशी एआई समाधान विकसित करना है। बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं इस पहल का एक महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही हैं। सरकार का दावा है कि एआई के इस्तेमाल से दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुधर रही है, उपचार की लागत घट रही है और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंच रही हैं। यदि यह पहल इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र डिजिटल और तकनीकी दृष्टि से और अधिक सशक्त हो सकता है।

नींद कम, सिर दर्द ज्यादा: आंखों और भौंहों के बीच दर्द में आयुर्वेद के असरदार नुस्खे

नई दिल्ली। अक्सर लोग लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने के बाद सिर में दर्द और आंखों में तनाव की शिकायत करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिर दर्द केवल स्क्रीन टाइम की वजह से नहीं होता। कुछ लोगों को सुबह उठते ही भौंहों और आंखों के ऊपर भारीपन और दर्द महसूस होता है। इसका कारण अधूरी नींद और उससे प्रभावित न्यूरो-हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंखों के ऊपर भौंहों वाला क्षेत्र frontal sinus और trigeminal nerve से जुड़ा होता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो भौंहों के बीच तेज दर्द होता है। इससे मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सिर दर्द के साथ-साथ आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को शरीर में वात की वृद्धि और नींद की कमी से जोड़ा गया है। वात बढ़ने पर नींद प्रभावित होती है और पूरे तंत्रिका तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। इसके चलते सिर में दर्द, आंखों में भारीपन और मानसिक थकान महसूस होती है। आयुर्वेद में इसके लिए कई सरल और प्रभावकारी उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय है नस्य विधि। रात में सोने से पहले नाक में कुछ बूंदें देसी घी की डालने से नाक का रुखापन कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है। इससे सिर और आंखों पर दबाव घटता है और नींद भी अच्छी आती है। दूसरा उपाय है तलवों की मालिश। तलवों पर कई प्रेशर पॉइंट्स मौजूद हैं जो शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं और नींद लाने में मदद करते हैं। दिनभर की थकान और शरीर में जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने के लिए रात में तलवों की हल्की मालिश लाभकारी है। इसके अलावा, सिर दर्द और मानसिक थकान कम करने के लिए ब्राह्मी और जटामांसी का सेवन आयुर्वेद में बहुत प्रभावी माना गया है। ये हर्ब्स मन को शांत करते हैं, नींद में सुधार लाते हैं और मानसिक तनाव कम करते हैं। आंखों की थकान कम करने के लिए त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन भी कारगर है। ठंडे जल में त्रिफला पाउडर मिलाकर आंखें धोने से आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और आंखों की रोशनी में सुधार होता है। रात के समय हल्दी, काली मिर्च और जायफल वाला दूध पीने से भी नींद बेहतर आती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है। इस तरह, आयुर्वेद में सुझाए गए ये उपाय न सिर्फ सिर दर्द और आंखों की थकान को कम करते हैं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखते हैं। नियमित रूप से इन विधियों को अपनाकर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में मानसिक और शारीरिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है।

Valentine Day 2026: दिल्ली-NCR के इन 7 रोमांटिक ठिकानों पर सजाएं प्यार की शाम, कपल्स के लिए परफेक्ट डेट स्पॉट्स

नई दिल्ली। वैलेंटाइन डे आते ही कपल्स ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं, जहां वे भीड़भाड़ से दूर सुकून भरे पल बिता सकें या फिर शानदार डिनर और म्यूजिक के साथ अपनी डेट को खास बना सकें। दिल्ली-एनसीआर में ऐसे कई लोकेशन हैं जो हर तरह के कपलनेचर लवर, हिस्ट्री प्रेमी या पार्टी एंथूज़ियास्टके लिए बेहतरीन विकल्प देते हैं। आइए जानते हैं 7 ऐसी लोकप्रिय जगहों के बारे में, जहां आप इस वैलेंटाइन डे को खास बना सकते हैं। 1. हरियाली के बीच सुकून भरी डेटअगर आप शांत और प्राकृतिक माहौल में समय बिताना चाहते हैं, तो लोधी गार्डन और Garden of Five Senses बेहतरीन विकल्प हैं। ऐतिहासिक मकबरों के बीच फैली हरियाली और खुले लॉन यहां रोमांटिक वॉक और लंबी बातचीत के लिए आदर्श माहौल बनाते हैं। 2. इतिहास की खूबसूरती के साथ रोमांसदिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें भी डेट के लिए शानदार बैकड्रॉप देती हैं। हुमायूं का मकबरा, कुतुब मीनार और लाल किला जैसी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स पर आप इतिहास और रोमांस का अनोखा संगम महसूस कर सकते हैं। 3. हौज खास विलेज का ट्रेंडी माहौलझील किनारे की शाम और कैफे कल्चर का आनंद लेना हो तो हौज खास विलेज बढ़िया ऑप्शन है। यहां रूफटॉप रेस्टोरेंट, लाइव म्यूजिक और आर्टिस्टिक वाइब्स आपकी डेट को स्टाइलिश टच देते हैं। 4. साइबर हब, गुरुग्राम में मॉडर्न डेटअगर आप इंटरनेशनल फूड, थीम कैफे और हाई-एनर्जी म्यूजिक का मजा लेना चाहते हैं, तो DLF Cyber Hub पर जा सकते हैं। यहां की नाइटलाइफ और प्रीमियम रेस्टोरेंट्स कपल्स के बीच काफी लोकप्रिय हैं। 5. कनॉट प्लेस की क्लासिक रोमांटिक शामदिल्ली का दिल कहे जाने वाला कनॉट प्लेस आज भी कपल्स की पहली पसंद में शामिल है। यहां के कैफे, रेस्टोरेंट और सेंट्रल पार्क का खुला माहौल डेट के लिए शानदार अनुभव देता है। 6. नोएडा का गार्डन गैलेरियानोएडा में रहने वाले कपल्स के लिए गार्डन गैलेरिया मॉल एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यहां क्लब, लाइव म्यूजिक और मल्टी-क्यूज़ीन रेस्टोरेंट्स के साथ आप डिनर डेट को यादगार बना सकते हैं। 7. गुरुग्राम सेक्टर-29 की पार्टी वाइबअगर आप डांस, म्यूजिक और पार्टी के शौकीन हैं, तो सेक्टर 29 जाएं। यहां कई पॉपुलर क्लब और रेस्टोरेंट एक ही जगह पर मौजूद हैं, जिससे आपकी वैलेंटाइन नाइट और भी खास बन सकती है। दिल्ली-एनसीआर में वैलेंटाइन डे मनाने के लिए विकल्पों की कोई कमी नहीं है। चाहे आप शांत गार्डन में सुकून चाहते हों, ऐतिहासिक इमारतों के बीच यादगार तस्वीरें लेना चाहते हों या फिर मॉडर्न कैफे और क्लब में पार्टी करना चाहते होंहर कपल के लिए यहां एक परफेक्ट स्पॉट मौजूद है। बस अपनी पसंद चुनिए और इस वैलेंटाइन डे को बनाइए बेहद खास।

छात्रों के लिए वरदान उत्थित पद्मासन, मांसपेशियों के साथ मानसिक शक्ति भी बढ़ाए

नई दिल्ली। भागदौड़ और तनाव से भरी आधुनिक जीवनशैली में योग एक ऐसा साधन बनकर उभरा है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है। अनेक योगासनों में उत्थित पद्मासन को विशेष रूप से शक्तिशाली और प्रभावी माना जाता है। नियमित अभ्यास से यह न केवल शारीरिक मजबूती देता है बल्कि मानसिक एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार योग अनुशासन और शारीरिक मानसिक सामर्थ्य को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उत्थित पद्मासन इसी क्रम में एक उन्नत आसन है जिसमें साधक पद्मासन की स्थिति में बैठकर हाथों के बल पर पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाता है। यह देखने में सरल लग सकता है लेकिन इसके लिए संतुलन ताकत और नियंत्रित श्वास की आवश्यकता होती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठें। एक पैर को विपरीत जांघ पर और दूसरा पैर पहली जांघ पर रखें। रीढ़ सीधी रखें और शरीर को स्थिर करें। इसके बाद दोनों हथेलियों को शरीर के पास जमीन पर टिकाएं। गहरी सांस लेते हुए हाथों पर दबाव डालें और पूरे शरीर को धीरे धीरे जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान गर्दन और सिर सीधा रखें तथा नजर सामने या हल्का नीचे की ओर रखें। सांस सामान्य रखते हुए कुछ सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें और फिर धीरे से वापस जमीन पर आ जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्थित पद्मासन हाथों कलाइयों और कंधों को मजबूती देता है। इसके साथ ही कोर मसल्स यानी पेट और पीठ की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं जिससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में भी लाभ मिल सकता है। यह आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया दिमाग को केंद्रित करती है और ध्यान की क्षमता को बढ़ाती है। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि इससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार हो सकता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक स्थिरता बनाए रखने में भी यह सहायक हो सकता है। रक्त संचार को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने में भी यह आसन सहायक माना जाता है। छाती कंधों और बाहों में रक्त प्रवाह सुधरता है जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का अनुभव भी बढ़ता है। हालांकि जिन लोगों को घुटनों कूल्हों या कलाइयों में दर्द या चोट की समस्या हो उन्हें यह आसन करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग गुरु से सलाह लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास से उत्थित पद्मासन शरीर और मन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

इनट्यूशन थॉट की ताकत कैसे अंदर की आवाज बदल सकती है आपकी किस्मत और फैसलों की दिशा

नई दिल्ली। जिंदगी में हम अक्सर ऐसे लोगों को देखते हैं जो बिना ज्यादा सोचे समझे भी बिल्कुल सटीक फैसला ले लेते हैं। खेल के मैदान से लेकर बिजनेस और कला की दुनिया तक कई सफल लोग कहते हैं कि वे अपनी अंदर की आवाज यानी इनट्यूशन थॉट पर भरोसा करते हैं। यही इनट्यूशन उन्हें सही समय पर सही निर्णय लेने की ताकत देती है। कई बार फैसले लेने के लिए हमारे पास कुछ सेकंड भी नहीं होते और वही पल हमारी दिशा तय कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इनट्यूशन थॉट होता क्या है और यह हमारी जिंदगी को कैसे बदल सकता है। इनट्यूशन थॉट दरअसल दिमाग की वह क्षमता है जो अनुभव और भावनाओं के आधार पर तुरंत निर्णय लेने में मदद करती है। खेल जगत में इसका बेहतरीन उदाहरण बेसबॉल खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। मेजर लीग बेसबॉल में गेंद की रफ्तार 90 मील प्रति घंटे से ज्यादा होती है और बल्लेबाज के पास केवल करीब 150 मिलीसेकेंड का समय होता है यह तय करने के लिए कि शॉट खेलना है या नहीं। उस समय सोचने का मौका नहीं होता वहां सिर्फ अनुभव और इनट्यूशन काम करती है। यही वजह है कि टॉप खिलाड़ियों के फैसले हमें सहज और नेचुरल लगते हैं। लेकिन इनट्यूशन कोई जादुई शक्ति नहीं है जो केवल महान खिलाड़ियों या सफल लोगों के पास हो। शोध बताते हैं कि यह क्षमता हर इंसान में मौजूद होती है। 2016 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इनट्यूशन को अभ्यास और जागरूकता से मजबूत किया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के मुताबिक हमारा दिमाग दो तरह की सोच पर काम करता है एनालिटिकल और इनट्यूटिव। एनालिटिकल सोच तर्क आंकड़ों और योजना पर आधारित होती है जबकि इनट्यूटिव सोच भावनाओं अनुभव और बड़ी तस्वीर को समझने पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति घर खरीदने का फैसला ले रहा है तो एनालिटिकल सोच वाला व्यक्ति बजट स्कूल दूरी और सुविधाओं पर ध्यान देगा जबकि इनट्यूटिव सोच वाला यह महसूस करेगा कि उस जगह पर उसे कैसा लग रहा है क्या वह वहां खुद को सहज और खुश महसूस कर पा रहा है। दोनों सोच जरूरी हैं लेकिन कई बार तेजी से निर्णय लेने के लिए इनट्यूशन अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनट्यूशन को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा। जब हम अपनी अंदर की आवाज को सुनना सीखते हैं और फैसलों के नतीजों पर विचार करते हैं तो हमारी निर्णय क्षमता बेहतर होती जाती है। अक्सर हमारे भीतर दो तरह की आवाजें होती हैं एक डर और घबराहट से जुड़ी और दूसरी शांत और स्थिर। जो आवाज आपको भीतर से शांति देती है वही सच्ची इनट्यूशन होती है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी कह चुके हैं कि इनट्यूशन हमारे पुराने बौद्धिक अनुभवों का परिणाम होती है। नियमित अभ्यास ध्यान सांस पर फोकस रचनात्मक गतिविधियां और तनाव में भी शांत रहने की आदत इनट्यूशन को मजबूत बनाती हैं। आखिरकार इनट्यूशन थॉट कोई रहस्य नहीं बल्कि हमारे अनुभव और आत्मविश्वास का निचोड़ है। जब हम खुद को समझते हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं तो यही अंदर की आवाज हमें सही दिशा में आगे बढ़ने का साहस देती है और यही सफलता की असली कुंजी बन सकती है।

Mahashivratri 2026: दिल्ली का वो चमत्कारी शिवधाम, जहां एक साथ होते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन!

दिल्लीः महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अगर आप दिल्ली में रहकर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहते हैं, तो चांदनी चौक स्थित प्राचीन गौरी शंकर मंदिर आपके लिए सबसे खास जगह बन सकता है. इस ऐतिहासिक शिवालय में श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है. महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगता है. मेट्रो स्टेशन से लेकर मंदिर परिसर तक पैर रखने तक की जगह नहीं होती है. मंदिर को फूलों, बेलपत्र और रोशनी से सजाया जाता है. सुबह से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष आरती का सिलसिला शुरू हो जाता है. देर रात तक ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा चांदनी चौक इलाका शिवमय हो उठता है. एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मंदिर परिसर में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन विधि-विधान के साथ कराए जाते हैं. खास बात यह है कि हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी मान्यताओं और कथाओं को भी यहां विस्तार से बताया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो जाता है. मंदिर का स्थान और स्थापनामंदिर के पुजारी सुशील शुक्ला जी ने बताया कि इस विशेष 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना 27 जुलाई 2024 को की गई थी. उन्होंने बताया कि देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा हर भक्त के लिए संभव नहीं हो पाती, ऐसे में यह मंदिर श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर महादेव के सभी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का अवसर देता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंग स्थलों से लाए गए शिवलिंग विधि-विधान के साथ स्थापित किए गए हैं. जिससे भक्तों को वास्तविक तीर्थ दर्शन जैसा अनुभव मिलता है.इतना ही नहीं है अब मंदिर में 1 जनवरी 2026 से भस्म आरती भी स्टार्ट हो गई है. जहां पर बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती की जाती है, आरती प्रत्येक सोमवार को सुबह 6:00 होती है. दर्शन का समय और सुरक्षा व्यवस्थागौरी शंकर मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और इसके बाद शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं.मंदिर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है. दर्शन के लिए बनाए गए बेसमेंट हिस्से में एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं भव्य झूमरों और आकर्षक सजावट से मंदिर की भव्यता और भी बढ़ जाती है.

UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य मानकों और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में एक और दो फरवरी को मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले परिवारों के लिए यह ऑपरेशन किसी भयावह दुस्वप्न में बदल गया है। अस्पताल में सर्जरी कराने वाले कुल 42 मरीजों में से 22 की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें आनन-फानन में दिल्ली के एम्स अस्पताल रेफर करना पड़ा। संक्रमण की तीव्रता इतनी घातक थी कि अब तक चार मरीजों की आंखें सर्जरी कर निकालनी पड़ी हैं, जबकि छह अन्य की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए बुझ चुकी है। यह पूरी घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रमण नियंत्रण की पोल खोलती नजर आ रही है। एम्स के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे इस उपचार के दौरान कई दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सात मरीजों को भर्ती कराया गया था, लेकिन संक्रमण की गंभीरता के चलते मंगलवार और बुधवार के बीच 15 और मरीज दिल्ली पहुंच गए। इन सभी की आंखों में संक्रमण फैल चुका है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। जिन 12 मरीजों में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर थी, उनमें से चार की आंखें निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण दिमाग तक न पहुंचे। तीन अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर एक से दो दिन में आगे की सर्जरी या उपचार को लेकर निर्णय लेंगे। बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली 60 वर्षीय महिला बहाउद्दीन का इलाज एम्स में चल रहा है। उनकी बेटी के अनुसार संक्रमण के कारण उनकी मां की आंखों की रोशनी चली गई। इसी तरह बारी गांव की देवराजी की आंख में संक्रमण इतना बढ़ गया कि मवाद और खून आने लगा। जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि रोशनी पूरी तरह जा चुकी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आंख निकालनी पड़ी। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया कि देरी होती तो संक्रमण का असर दिमाग तक पहुंच सकता था। इन्नडीह के अर्जुन सिंह और बेलीपार के रामदरश सहित अन्य मरीजों की भी आंखें निकालनी पड़ी हैं या अतिरिक्त सर्जरी की तैयारी चल रही है। इन घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। मामले की जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन थियेटर और अन्य स्थानों से 10 से अधिक सैंपल लिए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के अनुसार जांच रिपोर्ट गुरुवार तक आने की संभावना है। रिपोर्ट से संक्रमण के असली कारणों का पता चल सकेगा। अस्पताल संचालक राजेश राय का कहना है कि उनके यहां वर्षों से मोतियाबिंद की सर्जरी की जा रही है और पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। एसीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया है और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल पीड़ित परिवारों की उम्मीद एम्स के डॉक्टरों पर टिकी है।

सब्जियों से पाएं घर पर ही चमकती और स्वस्थ त्वचा, जानिए कैसे करें इस्‍तेमाल?

नई दिल्‍ली । आज के समय में बाजार में स्किन केयर के लिए कई महंगे प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं लेकिन असली खूबसूरती आपकी त्वचा को मिलने वाले पोषण पर निर्भर करती है। सब्जियां विटामिन और मिनरल्स का खजाना होती हैं और यही आपकी त्वचा की प्राकृतिक चमक का राज हैं। अपनी डाइट में भरपूर सब्जियों को शामिल करना पहला कदम है लेकिन कुछ सब्जियों का रस सीधे चेहरे पर लगाने से भी अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं। त्वचा के लिए विटामिन A C और E बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं। उदाहरण के तौर पर टमाटर का रस दाग-धब्बों पिगमेंटेशन और सूर्य की वजह से टैनिंग में राहत देता है। टमाटर में लाइकोपीन विटामिन C और अन्य शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो त्वचा को अंदर तक साफ और ताजगी भरी बनाते हैं। आप पके हुए टमाटर का रस निकालकर उसमें दही और शहद मिलाकर चेहरे पर 15–20 मिनट तक लगा सकते हैं। इसके अलावा टमाटर के फ्रीज किए हुए स्लाइस से हल्की मसाज करने पर खुले पोर्स कसने और त्वचा में ताजगी लाने में मदद मिलती है। आलू का रस भी चेहरे की प्राकृतिक चमक के लिए फायदेमंद है। आलू त्वचा को अंदर से पोषण देता है और रंगत को सुधारने में मदद करता है। इसे सीधे चेहरे पर लगाना या चावल का आटा हल्दी टमाटर का रस और गुलाबजल के साथ फेस पैक बनाकर इस्तेमाल करना प्रभावी होता है। हफ्ते में दो बार इसका प्रयोग करने से त्वचा में निखार आता है। बीटरूट यानी चुकंदर त्वचा में गुलाबी और ताजगी भरी चमक लाने में कारगर है। इसके रस को सीधे चेहरे पर हल्की मसाज के लिए लगाया जा सकता है या नारियल तेल के साथ मिलाकर लिप बाम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। चुकंदर दही बेसन और नींबू के साथ फेस पैक बनाकर 15–20 मिनट तक चेहरे पर लगाने से स्किन रेडिएंट बनती है। खीरा त्वचा को प्राकृतिक हाइड्रेशन देने के लिए अच्छा है। गर्मियों में खीरे का कद्दूकस करके पलकों पर 10–15 मिनट रखने से आंखों के नीचे पफीनेस और थकान कम होती है। खीरे का रस सीधे चेहरे पर लगाने या टमाटर के रस के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा क्लीन और ग्लोइंग बनती है। सर्दियों में गाजर का रस भी त्वचा के लिए बेहतरीन है। यह विटामिन A का खजाना है और एक्ने कम करने त्वचा को रेडिएंट बनाने और पोर्स को कसाव देने में मदद करता है। गाजर का रस सीधे चेहरे पर लगाना या बेसन हल्दी और शहद के साथ फेस पैक बनाकर इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।