Eid Ul Fitr 2026 डेट कन्फर्म चांद दिखने के बाद भारत में इस दिन मनाई जाएगी ईद

नई दिल्ली: Eid ul-Fitr 2026 को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है, खासकर चांद दिखने के समय और तारीख को लेकर। रमजान के पावन महीने के समापन के बाद मनाया जाने वाला यह त्योहार खुशियों, मिठास और भाईचारे का प्रतीक होता है। इस साल सऊदी अरब में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई है कि ईद 20 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। वहां शव्वाल का चांद 18 मार्च को नजर नहीं आया, जिसके बाद रमजान के रोजे 30 पूरे किए गए। इसके बाद 19 मार्च की शाम चांद दिखने की संभावना जताई गई और उसी के आधार पर 20 मार्च को ईद मनाने का फैसला लिया गया। यूएई और अन्य खाड़ी देशों में भी इसी तारीख को ईद मनाई जाएगी। भारत समेत दक्षिण एशिया के देशों में ईद आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद मनाई जाती है। ऐसे में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 20 मार्च की शाम को चांद देखने की कोशिश की जाएगी। अगर उस दिन चांद दिखाई देता है, तो भारत में 21 मार्च 2026 को ईद मनाई जाएगी। चांद देखने का सही समय सूर्यास्त के बाद का होता है। भारत में आमतौर पर शाम लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच चांद दिखने की संभावना रहती है, हालांकि यह समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। इसके लिए स्थानीय मस्जिदों और चांद देखने वाली समितियों की घोषणा को अंतिम माना जाता है। ईद उल फितर को रोजा खोलने का त्योहार भी कहा जाता है, क्योंकि यह रमजान के खत्म होने के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, एक दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और मिठाइयों के साथ खुशियां बांटते हैं। ईद की तैयारी कैसे करेंईद से पहले घरों की साफ सफाई की जाती है और नए कपड़े खरीदे जाते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए खास पकवान तैयार करते हैं। सेवइयां और अन्य मीठे व्यंजन इस त्योहार की खास पहचान होते हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों को जकात और फितरा देना भी इस दिन का अहम हिस्सा होता है, ताकि हर कोई इस खुशी में शामिल हो सके। ईद उल फितर 2026 को लेकर तारीख लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय चांद दिखने पर ही निर्भर करेगा। ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय घोषणाओं पर नजर बनाए रखें और उसी के अनुसार त्योहार की तैयारी करें
बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और अत्यधिक मसालेदार भोजन ने शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या को आम बना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है, जिनमें पित्त अग्नि और जल का मिश्रण है। जब यह असंतुलित हो जाता है, तो पाचन खराब होना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में समय रहते खानपान और जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पित्त को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले आहार को अपनाना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं हल्के और सुपाच्य अनाज जैसे जौ, चावल और गेहूं। ये न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। इसके विपरीत उड़द दाल और कुलथी जैसी गरम तासीर वाली चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर होता है, क्योंकि ये पित्त को और बढ़ा सकती हैं। फलों में मीठे और रसीले विकल्प पित्त संतुलन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पाचन को सुधारते हैं। हालांकि आमतौर पर खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन आंवला और अनार सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं क्योंकि ये शरीर को पोषण देने के साथ पित्त को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी ठंडी या कड़वी तासीर वाली सब्जियां पित्त को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी गरम प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर की गर्मी को बढ़ा सकती हैं। किचन में मौजूद कुछ मसाले भी पित्त नियंत्रण में सहायक होते हैं। सौंफ, धनिया, इलायची और केसर जैसे मसाले शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इसके उलट हींग और काली मिर्च का अधिक सेवन जलन और एसिडिटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित मात्रा में करना ही बेहतर है। डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि पाचन को भी मजबूत बनाते हैं। हालांकि केवल डाइट ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पित्त बढ़ने पर तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे वातावरण में समय बिताना लाभकारी होता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए हल्का संगीत सुनना और पानी के पास समय बिताना भी फायदेमंद होता है। कुल मिलाकर, अगर आप अपने शरीर के पित्त को संतुलित रखना चाहते हैं, तो सही खानपान और संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा, बल्कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।
अब आप घर पर ही बना सकते हैं हेयर कलर, अपनाएं ये ट्रिक

नई दिल्ली। आज के समय में लोगों के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं। यह बाहरी खान-पान और पॉल्युशन के कारण से हो सकता है। हालांकि इसे ठीक करने के लिए लोग बाहर से बालों को कलर करवा लेते हैं। लेकिन कई बार यह कलर आपके बालों को भी डैमेज कर सकते हैं बार-बार अगर अधिकतर मात्रा में से उगाया जाए तो। इसके साथ ही आपको इन कलर में कई ज़्यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि कुछ ऐसा हाथ लग जाए जो नेचरली हो और बाल भी कलर हो जाए। तो हम आपके लिए ऐसा ही कुछ लेकर आए हैं। घर पर बना सकते हैं हेयर कलरअब आप घर पर ही हेयर कलर बन सकते हैं और उसका इस्तेमाल घर पर ही कर सकते हैं। आप इस रंग को घर पर बनाकर बालों में अप्लाई कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके बाल भी घुंघराले रहेंगे। इसके साथ ही आपके बाल अमोनिया और ब्लीच के इस्तेमाल से बच जाएंगे। आइए आपको बताते हैं कि कैसे घर पर ही अपने बालों का कलर करें। रंग बनाने के लिए सामग्रीचुकंदर का रस- 3 से 4 चम्मचमेहंदी- 4 चम्मचकॉफी पाउडर – 1 चम्मच इस प्रकार बनाए हेयर कलरसबसे पहले आप फ्रेश चुकंदर लें। अब इसका रस निकालना है और इसे एक कटोरी में रख दें। इसके बाद एक कटोरी में मेहंदी को डालें। इसमें चुकंदर का रस और कॉफी पाउडर को पानी में घोलकर डालें। फिर इस मिश्रण अच्छे से घोल लें। जरूरतों के हिसाब से इसमें पानी को मिक्स करें। जब घोल तैयार हो जाए, तो इसे 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। लगाने का सही तरीकासबसे पहले बालों में कंघी कर लें। इस बात का ध्यान रखें कि आपके बाल उलझे नहीं। अब इसे ब्रश की मदद से सिर पर लगाएं। पूरे बालों के कवर करने के बाद वाले कैप पहन लें। इसको आप कम से कम 3 से 4 घंटे तक लगा रहने दें। इसके बाद बालों को सिर्फ उपजाऊ पानी से लगाएं, उस दिन कोमल का इस्तेमाल करें। इसलिए कलर को सेट होने के लिए 24 से 48 घंटे का समय दें, उसके बाद ही हल्के कोमल से बाल लगाएं।
Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और तनाव से भरी जिंदगी में शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में योग एक ऐसा प्रभावी उपाय है, जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि मन को भी शांत और स्थिर करता है। खासतौर पर वृक्षासन एक ऐसा आसान लेकिन बेहद असरदार योगासन है, जिसे रोजाना सिर्फ 5 मिनट करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। वृक्षासन का अर्थ ही है पेड़ की तरह स्थिर और मजबूत खड़े रहना। यह आसन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी कैसे संतुलन बनाए रखा जाए। जब आप एक पैर पर खड़े होकर शरीर को संतुलित करते हैं, तो यह न केवल आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी मजबूत करता है। नियमित अभ्यास से दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल बेहतर होता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है। इस योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही पैरों की मांसपेशियां टोन होती हैं और शरीर का संतुलन सुधरता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है। एक पैर पर संतुलन बनाने की प्रक्रिया फोकस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे काम में एकाग्रता भी बेहतर होती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वृक्षासन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के वात दोष को संतुलित करता है, जिससे तनाव, घबराहट और मानसिक अस्थिरता में कमी आती है। नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है। इस आसन को करने का सबसे सही समय सुबह का होता है, जब पेट खाली हो। अगर आप इसे शाम के समय करना चाहते हैं, तो भोजन और योग के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर रखना जरूरी है। अभ्यास शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए हल्के वार्म-अप जैसे स्ट्रेचिंग या अन्य योगासन करना फायदेमंद रहता है। हालांकि, इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, किसी प्रकार की गंभीर चोट या माइग्रेन की समस्या है, उन्हें इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। बिना मार्गदर्शन के अभ्यास करने से बचना बेहतर होता है। कुल मिलाकर, वृक्षासन केवल एक योगासन नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने का एक सरल विज्ञान है। अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर फोकस, मजबूत हड्डियां और मानसिक शांति चाहते हैं, तो इस आसान आसन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।
माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है लेकिन हर सिरदर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं होता क्योंकि यह माइग्रेन भी हो सकता है यह एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन को पहचानने के लिए 5-4-3-2-1 का एक आसान फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे आम व्यक्ति भी समझ सकता है इस फॉर्मूले के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कम से कम 5 बार तेज सिरदर्द का अटैक आया हो और यह दर्द 4 घंटे से लेकर 3 दिन तक बना रहता हो तो यह एक संकेत हो सकता है इसके अलावा दर्द की 4 खासियतों में से कम से कम 2 मौजूद हों जैसे सिर के एक तरफ दर्द होना धड़कन जैसा दर्द होना दर्द बहुत तेज होना या रोजमर्रा के काम में बाधा आना तो माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है साथ ही 2 में से 1 लक्षण जैसे मतली उल्टी या तेज रोशनी और आवाज से परेशानी भी इसका अहम संकेत माना जाता है माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारण भी काफी अहम होते हैं तेज धूप चमकदार रोशनी और शोर इस समस्या को बढ़ा सकते हैं वहीं कुछ खाने की चीजें जैसे चीज चॉकलेट कॉफी और चाइनीज फूड भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं तेज परफ्यूम या गंध भी कई लोगों में माइग्रेन का कारण बनती है महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान डॉक्टरों का मानना है कि माइग्रेन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसका असर याददाश्त और ध्यान क्षमता पर पड़ सकता है लंबे समय में यह स्ट्रेस और डिप्रेशन का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ा सकता है इससे बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें स्क्रीन टाइम कम करें और उन फूड्स से दूरी बनाए रखें जो माइग्रेन को बढ़ाते हैं नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर सकती है अगर सिरदर्द बार बार हो रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि सही समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है
मौसम बदलते ही क्यों रखा जाता है नवरात्रि व्रत जानिए इसके पीछे का आयुर्वेदिक कारण
नई दिल्ली। Navratri में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरा आयुर्वेदिक विज्ञान भी छिपा हुआ है। अक्सर लोग इसे पूजा पाठ और श्रद्धा से जोड़कर देखते हैं लेकिन अगर इसे Ayurveda के नजरिए से समझें तो यह शरीर और मन दोनों के लिए एक प्राकृतिक रीसेट प्रक्रिया की तरह काम करता है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है। यह परिवर्तन सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में व्रत रखने और हल्का सात्विक भोजन लेने से शरीर को संतुलन में लाने में मदद मिलती है। व्रत के दौरान लोग फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले आहार लेते हैं। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और रोजाना के भारी तले भुने और मसालेदार भोजन से जो दबाव बनता है वह कम हो जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर को खुद को सुधारने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति यानी अग्नि को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि मजबूत होती है तो शरीर स्वस्थ रहता है। व्रत रखने से यह अग्नि पुनः सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस दौरान ध्यान पूजा और संयम का पालन किया जाता है जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह एक तरह का मानसिक शुद्धिकरण है जो व्यक्ति को भीतर से संतुलित और शांत बनाता है। इसके अलावा नवरात्रि में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं। ये भोजन शरीर को हल्का रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होता है। इस तरह नवरात्रि का व्रत आस्था और स्वास्थ्य दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है।
नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन

नई दिल्ली। नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी आयुर्वेदिक सोच भी जुड़ी हुई है। अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ और परंपरा से जोड़कर देखते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को अंदर से रीसेट करने और संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है। यह संक्रमण काल शरीर के लिए संवेदनशील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्रत रखने से शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। नवरात्रि के व्रत में लोग हल्का और सात्विक भोजन जैसे फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना लेते हैं। यह भोजन पचने में आसान होता है और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालता। रोजमर्रा के तले-भुने और मसालेदार खाने से जो अतिरिक्त बोझ शरीर पर पड़ता है वह इस दौरान कम हो जाता है। इससे शरीर को खुद को ठीक करने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति जिसे अग्नि कहा जाता है को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि कमजोर होती है तो शरीर में अपच और विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। व्रत रखने से यह अग्नि दोबारा सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद होता है। इस दौरान लोग ध्यान पूजा और संयम का पालन करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स बन जाता है जहां व्यक्ति खुद को थोड़ा धीमा करके अंदर से संतुलित करता है। इसके अलावा व्रत में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल हल्के होते हैं बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह परंपरा हमें न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी साबित होती है।
SOLO TRIP PLACE: सोलो घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहाँ मिलेगा सुकून

SOLO TRIP PLACE: नई दिल्ली। आज के समय में ज़्यादातर लोग अकेले ही घूमना पसंद करते हैं। अगर आप सोलो ट्रिप के लिए कोई प्लान बनाना चाहते हैं लेकिन आपको उसमें काफी टिकत आ रही हैं और जगह नहीं चुन पा रहे हैं? तो हम आपके लिए लाए हैं, भारत की कुछ ऐसी जगह जहाँ जाने पर आपको सुकून, नेचर की खूबसूरती और बहुत कुछ देखने को मिलेगा।आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में। अकेले घूमने के लिए खास जगहें अगर आप पहली बार अकेले घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मन में थोड़ा डर और बहुत सारी उम्मीदें होती हैं। अकेले घूमना सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि खुद को समझना, अपनी ज़िंदगी जीने और सुकून हासिल करने का मौका देता है। ऋषिकेश हिमालय की गोद में गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश अकेले घूमने के लिए एक खास जगह है। यहां का शांत वातावरण, योग और ध्यान आपको खुद से जोड़ने का मौका देता है। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो रिवर लिफ्टिंग, नेचर वॉक और पहाड़ी ट्रेल्स आपको रोमांच से भर देंगे। ये जगह घूमने के लिए काफी खास मानी जाती है। गोवा गोवा सिर्फ पार्टी और नाइटलाइफ़ के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि, साउथ गोवा के पालोलेम और अगोंडा जैसे बीच शांत माहौल और खूबसूरत सनसेट के लिए जाने जाते हैं। यहां स्कूटर पर घूमना, समुद्र किनारे तैरते आसमान में पक्षियों को उड़ता देखना बहुत सुकून देता है। गोवा का फ्रेंडली माहौल और आसान ट्रांसपोर्टेशन इसे अकेले घूमने वालों के लिए सबसे अच्छा बनाता है। कामला अगर आप समुद्र किनारे सुकून की तलाश है तो कामला आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अरब सागर के ऊपर ऊंची चट्टानों पर बसा यह शहर सुकून भरा अनुभव देता है। वहीं क्लिफ कैफे से सनसेट देखना या योग सीखना कामला सोलो ट्रैवलिंग के लिए परफेक्ट माना जाता है। आप यहां पर आकर आप अपना खास समय घूम सकते हैं।
HOME MADE SCRUB: चेहरे पर जमी टैनिंग की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक

HOME MADE SCRUB: नई दिल्ली। आज के समय में देखा जाता है कि महिलाएं अपने चेहरे को सुंदर और ग्लोइंग बनाने के लिए मार्केट से कई सारे प्रोडक्ट बेचती हैं, जबकि उनका उतना अच्छा रिस्पॉन्स उन्हें नहीं मिल पाता है। कई बार बार-बार धूप में जाना काम करना इसके साथ ही घर पर भी स्किन केयर को ज्यादा अच्छे से फॉलो ना कर पाने की वजह से आपके चेहरे को काफी डैमेज हो जाते हैं कई तरह की स्किन प्रॉब्लम आपको होने लगती है। सबसे छुटकारा पाने के लिए आपके घर में ही एक खास स्क्रब बनाना चाहिए तो भरोसे उसके बारे में बताते हैं।घर में ही बना सकती हैं होममेड स्क्रब अगर आप भी अपने चेहरे की खूबसूरती बढ़ाना चाहती हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप घर में आसानी से डी टैन स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसे बनाने के लिए कुछ सामग्री की ज़रूरत पड़ेगी। बनाने के लिए उसकी सामग्री शहद चावल का आटा ग्लिसरीन नारियल तेल स्क्रब बनाने का तरीका इसे बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा चावल का आटा लें। फिर इसमें थोड़ा सा शहद और ग्लिसरीन मिला लें। अब सभी को अच्छे से मिक्स कर लें और नारियल तेल मिक्स करें। इन सभी चीज़ों को तब तक फेंटे, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। अब इसको स्क्रब को मिक्स कर लें, और इसको एयर टाइट डिश में भरकर रख दें। इस स्क्रब को आप रात में सोने से पहले फेस पर 30-40 मिनट के लिए लगाएं। अब कच्चा दूध हाथ में लेकर हल्के हाथों से फेस की मसाज करें। इन बातों का ध्यान रखें अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रही हैं, तो पहले स्क्रब टेस्ट जरूर करें। इस स्क्रब को लगाने के बाद आपके चेहरे में कई तरह के बदलाव आए ना शुरू हो जाएंगे हफ्ते में दो-तीन बार अगर आपको इस स्क्रब को लगते हैं तब धीरे-धीरे आपका चेहरा साफ होने लगेगा और काफी निखरने लगेगा हालांकि इसके साथ-साथ आपको अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका चेहरा हमेशा अच्छा और ताजगी भरा रहे ताकि आपको मार्केट के बड़े प्रोडक्ट की जरूरत ना पड़े।
घर पर बनाएं रेस्टोरेंट स्टाइल पनीर लबाबदार, अपनाएं ये शाही सीक्रेट रेसिपी

नई दिल्ली । ईद 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं और त्योहार का असली मज़ा तभी आता है जब मेज़ पर स्वाद का वैरायटी हो। अगर आप शाकाहारी व्यंजन पसंद करते हैं या मेहमानों के लिए कुछ खास बनाना चाहते हैं तो पनीर लबाबदार एक बेहतरीन विकल्प है। इसका नाम ही “लबाबदार” यह दर्शाता है कि पनीर और मसाले इतनी खूबसूरती से मिलते हैं कि स्वाद सीधे दिल तक पहुंचता है।पनीर लबाबदार का असली राज इस डिश की रेस्टोरेंट जैसी रिच ग्रेवी का रहस्य है काजू और मगज खरबूजे के बीज का पेस्ट। इन्हें गरम पानी में भिगोकर बारीक पीस लें। यही ग्रेवी को शाही बनावट देता है जिससे हर क्यूब स्वाद में घुल-मिल जाता है। विधि एक कड़ाही में थोड़ा तेल और मक्खन गरम करें। खड़े मसाले तेजपत्ता दालचीनी इलायची डालकर खुशबू आने तक भूनें। बारीक कटा प्याज सुनहरा होने तक भूनें। अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और फिर टमाटर की प्यूरी मिलाएं। हल्दी कश्मीरी लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न हो जाए। काजू और मगज का पेस्ट डालें और लगातार चलाते रहें।थोड़ी मात्रा में कद्दूकस किया पनीर मिलाएं जिससे ग्रेवी और गाढ़ी हो जाएगी अंत में पनीर के क्यूब्स कसूरी मेथी और फ्रेश क्रीम डालें। गरम मसाला छिड़ककर धीमी आंच पर 2-3 मिनट पकाएं। प्रो टिप्स पनीर को हमेशा 5 मिनट गरम पानी में भिगोकर रखें ताकि वह सॉफ्ट और रसदार बने।ग्रेवी में थोड़ा शहद या चीनी डालें इससे टमाटर की खटास बैलेंस होती है।पनीर लबाबदार को गरमा-गरम बटर नान या शीरमाल के साथ सर्व करें। इस ईद इस शाही डिश के साथ आपकी दावत में चार चाँद लग जाएंगे। हर बाइट में रेस्टोरेंट जैसी क्रीमी और मसालेदार ग्रेवी का मज़ा आएगा और आपके मेहमान आपकी कुकिंग स्किल्स के कायल हो जाएंगे।