विश्व महासागर दिवस विशेष: धरती के नीले फेफड़े दबाव में, गहराता समुद्री संकट..

विश्व महासागर दिवस विशेष सागर प्रकृति का वह अद्भुत शिक्षक है, जो गंभीरता, सामर्थ्य, मर्यादा और स्थिरता का पाठ पढ़ाता है। अपार शक्ति होते हुए भी वह अपनी सीमाएं नहीं लांघता। उसकी गहराई जितनी अधिक होती है, उसका स्वभाव उतना ही शांत दिखाई देता है, लेकिन आज इसी महासागर को समर्थन की जरूरत है। विडंबना यह है कि इंसान पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर चंद्रमा पर पानी की तलाश कर रहा है, जबकि पृथ्वी पर मौजूद विशाल जलसंपदा को अपनी महत्वाकांक्षाओं और अनियंत्रित दोहन की भेंट चढ़ा रहा है। इसका असर केवल महासागरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री जैव विविधता भी तेजी से प्रभावित हो रही है। अनेक समुद्री जीव और पारिस्थितिक तंत्र मानवजनित प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और जलवायु परिवर्तन के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बड़ी मछलियों की 90 प्रतिशत आबादी खत्म हो चुकी है और 50 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां नष्ट हो चुकी हैं। हम समुद्र से इतना कुछ ले रहे हैं जितना उसकी भरपाई नहीं हो पा रही है। महासागर पृथ्वी के 70 प्रतिशत से अधिक भाग को कवर करता है। यह हमारे जीवन का स्रोत है, जो मानवता और पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव के जीवनयापन का आधार है। महासागर पृथ्वी की कम से कम 50 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, यह पृथ्वी की अधिकांश जैव विविधता का घर है और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। इसके अलावा, महासागर हमारी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और अनुमान है कि 2030 तक महासागर आधारित उद्योगों में 4 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा। इतने व्यापक योगदान के बावजूद आज महासागर स्वयं संरक्षण और समर्थन की अपेक्षा कर रहा है। वर्तमान में प्लास्टिक कचरा पृथ्वी के लगभग हर हिस्से में अपनी जगह बना चुका है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो 2040 तक हर साल सागर में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक की मात्रा 3.7 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है। हालांकि, अब समय है कि महासागर के साथ हमारा संबंध केवल दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण और पुनर्जीवन का बने। इसके लिए वैश्विक स्तर पर संतुलित और टिकाऊ प्रयासों की जरूरत है, इसीलिए समुद्री संसाधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 8 जून 2009 में पहला विश्व सागर दिवस मनाया गया। इतिहास पर नजर डालें तो विश्व महासागर दिवस की अवधारणा पहली बार 8 जून 1992 को रियो डी जनेरियो में आयोजित ग्लोबल फोरम के दौरान सामने आई थी। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (यूएनसीईडी) के समानांतर आयोजित किया गया था, जहां गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज को पर्यावरणीय मुद्दों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। इसके बाद साल 2008 में कनाडा के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर 8 जून को आधिकारिक रूप से ‘विश्व महासागर दिवस’ के रूप में मान्यता दे दी। परिणामस्वरूप साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहला आधिकारिक ‘विश्व महासागर दिवस’ मनाया गया। साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से विश्व महासागर दिवस के पहले आयोजन का विषय ‘हमारे महासागर, हमारी जिम्मेदारी’ था। परंपरागत रूप से यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित किया जाता है, लेकिन कोविड-19 के कारण संयुक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस 2020 पहली बार डिजिटल रूप में आयोजित किया गया, जो वैश्विक जनता के लिए सुलभ था। संयुक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस 2022 वार्षिक आयोजन का पहला हाइब्रिड उत्सव था, जिसमें न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रत्यक्ष कार्यक्रम और वैश्विक जनता की पहुंच के लिए आभासी घटक दोनों शामिल थे।
णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ और वर्सेटाइल अभिनेता रणवीर सिंह अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपने सतरंगी, अनूठे और अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके इस जुदा अंदाज पर जहां लाखों फैंस फिदा रहते हैं, वहीं कई बार उन्हें सोशल मीडिया और इंडस्ट्री के भीतर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। अब इस फेहरिस्त में नब्बे के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु का नाम भी जुड़ गया है। मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि वह भी एक वक्त पर रणवीर सिंह के पहनावे और उनके फैशन चॉइस पर जमकर हंसती थीं और उन्हें ट्रोल किया करती थीं। अभिनेत्री मधु ने अपने पुराने दिनों और विचारों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में रणवीर सिंह को पब्लिक अपीयरेंस और अवॉर्ड फंक्शन्स में लीक से हटकर कपड़े पहने हुए देखा था, तो उन्हें यह काफी अजीब लगा था। मधु के अनुसार, वह अक्सर रणवीर के लुक को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं और सोचती थीं कि कोई अभिनेता ऐसे अजीब कपड़े पहनकर बाहर कैसे आ सकता है। उन्होंने माना कि वह भी उन लोगों में शामिल थीं जो रणवीर सिंह के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे और उनके स्टाइल स्टेटमेंट को समझ नहीं पाती थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह के प्रति मधु की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। मधु ने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्मों को देखा और पर्दे पर उनके दमदार अभिनय को महसूस किया, वैसे-वैसे कपड़ों को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि रणवीर सिंह सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि अपनी असाधारण अभिनय क्षमता से इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने मधु को प्रभावित किया। अपने इस बदले हुए नजरिए के बाद, अब अभिनेत्री मधु ने रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह रणवीर सिंह की अभिनय कला की बहुत बड़ी प्रशंसक बन चुकी हैं और भविष्य में यदि मौका मिले, तो वह उनके साथ एक फिल्म में काम करना पसंद करेंगी। मधु ने रणवीर सिंह को मौजूदा दौर का एक बेहद प्रभावशाली और ऊर्जावान कलाकार बताया, जो किसी भी किरदार में पूरी तरह जान फूंकने का दम रखता है। गौरतलब है कि रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली ‘डॉन 3’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा वह इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, ‘रोजा’ और ‘जेंटलमैन’ जैसी कल्ट फिल्मों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु भी इन दिनों विभिन्न प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यूज के जरिए लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनका यह बयान यह साफ तौर पर दिखाता है कि कला और टैलेंट के आगे अंततः हर तरह की रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह घुटने टेक देते हैं।
बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के ग्लोबल सुपरस्टार राम चरण और बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की हालिया रिलीज फिल्म ‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी धुआंधार कमाई और टिकटों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री से तहलका मचा दिया है। फिल्म समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बावजूद, इस एक्शन-ड्रामा फिल्म को देखने के लिए थिएटर्स में दर्शकों का हुजूम उमड़ रहा है। आलम यह है कि टिकट बुकिंग के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुकमाईशो पर इस फिल्म ने कमाई और बुकिंग के कई पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतिहास रच दिया है। फिल्म ने महज ढाई दिनों के भीतर अपनी सफलता का जो परचम लहराया है, उसने ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है। रिलीज के साथ ही ‘पेद्दी’ ने टिकटों की रफ्तार के मामले में राम चरण की ही ऑस्कर विजेता और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘RRR’ की बराबरी कर ली है। बुकमाईशो पर सबसे तेजी से 20 लाख टिकट बेचने वाली फिल्मों की सूची में ‘पेद्दी’ अब ‘RRR’ के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर आ गई है। इस ऐतिहासिक लिस्ट में केवल प्री-रिलीज के जरिए सबसे आगे रहने वाली ‘पुष्पा 2: द रूल’ पहले नंबर पर है, जबकि ‘कल्कि 2898 AD’ डेढ़ दिन के साथ दूसरे और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूज़न’ दो दिन के रिकॉर्ड के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। ‘पेद्दी’ ने महज 2.5 दिनों में 20 लाख का आंकड़ा पार कर इस सूची में अपनी जगह पक्की की है। फिल्म की इस तूफानी रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अपनी रिलीज से पहले ही भारी बज के कारण फिल्म के प्री-सेल में रिकॉर्ड 8,74,900 टिकट बिक चुके थे। इसके बाद गुरुवार को ओपनिंग डे पर जनता ने इस पर खूब प्यार लुटाया और पहले दिन 6,51,040 टिकटों की बुकिंग हुई। यह सिलसिला शुक्रवार को भी थमा नहीं और उस दिन भी 3,87,780 टिकट बिक गए। शनिवार की सुबह तक कुल बिक्री का ग्राफ 19,13,720 तक पहुंच चुका था, जो वीकेंड की छुट्टी शुरू होते ही कुछ ही घंटों में 20 लाख के पार चला गया। इस जबरदस्त रिस्पॉन्स के दम पर फिल्म ने केवल दो दिनों में ही दुनिया भर से लगभग 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है। बात सिर्फ कुल टिकटों की संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘पेद्दी’ ने पीक आवर्स यानी सबसे व्यस्त घंटों के दौरान प्रति घंटा टिकट बिक्री में भी एक नया बेंचमार्क सेट किया है। बुकमाईशो पर इस फिल्म ने अपने सबसे व्यस्ततम समय में एक घंटे के भीतर 47,330 टिकट बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। इस मामले में राम चरण की इस फिल्म ने जूनियर एनटीआर की ‘देवरा’ और खुद राम चरण की ही बहुचर्चित फिल्म ‘गेम चेंजर’ को बहुत पीछे छोड़ दिया है। ‘देवरा’ जहां पीक आवर्स में 38.02K टिकटों के साथ छठे और ‘गेम चेंजर’ 36.74K टिकटों के साथ सातवें नंबर पर है, वहीं ‘पेद्दी’ ने चौथे स्थान पर छलांग लगाई है। पीक आवर्स की इस विशिष्ट टॉप 10 सूची में भी अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ (107.65K) शीर्ष पर है, प्रभास की ‘कल्कि 2898 AD’ (95.71K) दूसरे और ‘सालार’ (54.76K) तीसरे स्थान पर बनी हुई है। ‘पेद्दी’ के बाद इस सूची में ‘राजा साहब’, ‘एमएसजी’, ‘दे कॉल हिम ओजी’ और ‘एसकेवी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि कई फिल्म समीक्षकों ने ‘पेद्दी’ की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर कुछ कमजोर कड़ियां गिनाई थीं, लेकिन थिएटर्स की तरफ खिंची चली आ रही आम जनता के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि राम चरण का स्क्रीन प्रेजेंस और जाह्नवी कपूर के साथ उनकी नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह कामयाब रही है।
"हिम्मत है तो शाहरुख खान से कहकर दिखाओ…" रोमांटिक फिल्मों के लिए अभिनेत्रियों की उम्र पर उठने वाले सवालों पर भड़कीं तापसी पन्नू

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों के करियर की उम्र और उनके किरदारों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब इस गंभीर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के दोहरे रवैये को उजागर किया है। तापसी पन्नू ने खुलासा किया है कि जैसे ही कोई अभिनेत्री 30 वर्ष की उम्र पार करती है, फिल्म गलियारों में उसे रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों के लिए अनुपयुक्त या ‘बड़ी उम्र’ का माना जाने लगता है। अभिनेत्री ने साफ किया कि यह रूढ़िवादी सोच सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा (साउथ इंडस्ट्री) में भी पैर पसारे हुए है। एक हालिया इंटरव्यू में अपने संघर्ष और कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए तापसी पन्नू ने कहा कि वह अपने ‘मिड 20’ (25-26 साल की उम्र) में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनी थीं। इसके बाद किसी भी कलाकार को खुद को साबित करने और एक मजबूत मुकाम हासिल करने में कम से कम तीन से चार साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब तक एक अभिनेत्री इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाती है और एक स्थापित पोजीशन पर पहुंचती है, तब तक उसकी उम्र 30 वर्ष को पार कर जाती है। इसके ठीक बाद मेकर्स और आलोचकों का यह कहना शुरू हो जाता है कि आप अब इतनी यंग नहीं बची हैं कि किसी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा सकें। तापसी पन्नू ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि पर्दे पर रोमांटिक किरदारों को निभाने के लिए हमेशा बहुत कम उम्र की ही लड़की की जरूरत क्यों समझी जाती है। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के बीच होने वाले इस उम्र के भेदभाव (एजिस्म) पर उंगली उठाते हुए कहा कि यह नियम केवल अभिनेत्रियों पर ही लागू होता है, पुरुष कलाकारों पर नहीं। उन्होंने समाज और इंडस्ट्री के इस सच को सामने रखते हुए कहा कि बड़ी उम्र के पुरुष अभिनेता पर्दे पर बेहद कम उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस करते हैं, जिसे सहजता से स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन अभिनेत्रियों के मामले में नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। इस दौरान तापसी ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री का एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वहां के कुछ सीनियर सुपरस्टार्स के साथ फिल्में कीं, तो उसके बाद वहां के युवा अभिनेताओं ने उनके साथ काम करने से साफ मना कर दिया। युवा अभिनेताओं का मानना था कि सीनियर एक्टर्स के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने के बाद तापसी उनके अपोजिट फिट नहीं बैठेंगी। इसी बात पर तीखा पलटवार करते हुए तापसी ने कहा कि क्या किसी में इतनी हिम्मत है कि वह यही बात सुपरस्टार शाहरुख खान से जाकर बोल सके? उन्होंने कहा कि शाहरुख खान जैसे महानायक के साथ काम करने के बाद किसी भी अभिनेत्री का करियर और जीवन पूरी तरह बदल जाता है, वहां उम्र का कोई टैबू नहीं होता, लेकिन अन्य स्तरों पर अभिनेत्रियों को इस रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ता है। इंटरव्यू के दौरान तापसी ने सोशल मीडिया से करीब एक साल लंबे ब्रेक के बाद अपनी वापसी पर भी बात की। उन्होंने बताया कि वह वर्चुअल दुनिया में समय बर्बाद करने के बजाय अपनी वास्तविक जिंदगी का आनंद लेना चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में ब्रांड्स की यह अनिवार्य शर्त होती है कि वे केवल उन्हीं चेहरों के साथ काम करना चाहते हैं जो सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय और दिखाई देते हैं। काम की बात करें तो तापसी आखिरी बार फिल्म ‘अस्सी’ में एक वकील की भूमिका में नजर आई थीं और आने वाले समय में वह ‘वो लड़की है कहां’ और ‘गांधारी’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाती नजर आएंगी।
शिल्पा शिंदे के समर्थन में उतरीं अर्शी खान ने हिना खान पर निकाला पुराना गुस्सा, बीमारी के वक्त मैसेज का जवाब न देने पर लगाया गंभीर आरो

नई दिल्ली। टेलीविजन जगत के सबसे विवादित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ की पुरानी प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सतह पर आ गई है। अभिनेत्री शिल्पा शिंदे द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान किए गए चौंकाने वाले खुलासे के बाद से ही मनोरंजन जगत में एक नई बहस छिड़ गई है। इस पूरे मामले में जब ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ फेम अभिनेत्री हिना खान ने शिल्पा शिंदे के रुख की आलोचना करते हुए उन पर निशाना साधा, तो दोनों अभिनेत्रियों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। अब इस हाई-प्रोफाइल विवाद में उनकी पूर्व सह-प्रतियोगी अर्शी खान भी शामिल हो गई हैं, जिन्होंने हिना खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिल्पा शिंदे ने भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के टॉक शो में यह स्वीकार किया कि उन्होंने ‘भाभी जी घर पर हैं’ के शो मेकर्स पर जो सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का आरोप लगाया था, वह पूरी तरह से सच नहीं था बल्कि एक रणनीति का हिस्सा था। शिल्पा ने कहा कि उनके दिल पर यह एक बहुत बड़ा बोझ था, जिसे वह अब उतारना चाहती थीं। शिल्पा के इस कबूलनामे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया। इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर उंगली उठाई, जिसके बाद शिल्पा ने भी हिना पर पलटवार करते हुए उन पर पब्लिसिटी के लिए अपनी बीमारी का इस्तेमाल करने का ताना मार दिया। अब हिना और शिल्पा की इस आपसी जंग में अर्शी खान ने सीधे तौर पर एंट्री ली है और उन्होंने हिना खान पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी तीखी भड़ास निकाली है। अर्शी खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी साझा करते हुए हिना खान के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। अर्शी ने लिखा कि जब कुछ समय पहले हिना खान बीमार थीं, तो उन्हें बहुत बुरा लगा था और उन्होंने हिना की सेहत के लिए बाकायदा दुआएं भी मांगी थीं। अर्शी के मुताबिक, उन्होंने हिना को सहानुभूति का एक संदेश भी भेजा था, लेकिन हिना खान ने पलटकर यह बताने के लिए एक साधारण सा रिप्लाई तक नहीं किया कि वह अब कैसी हैं। अर्शी खान ने हिना खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि इस महिला की हर एक चीज केवल और केवल पब्लिसिटी बटोरने के लिए होती है। अर्शी ने हिना के पुराने रियलिटी शो के सफर का जिक्र करते हुए उन्हें ‘काले दिल वाली’ तक कह डाला और दावा किया कि वह जो ‘बिग बॉस’ के घर के अंदर थीं, आज भी बिल्कुल वैसी ही हैं। इसके साथ ही अर्शी खान ने शिल्पा शिंदे की सराहना करते हुए लिखा कि शाबाश शिल्पा, हम इस पूरे मामले में सिर्फ तुम्हारे साथ खड़े हैं। शिल्पा शिंदे ने भी अर्शी खान के इस खुले समर्थन को हाथों-हाथ लिया और अर्शी की इस इंस्टाग्राम स्टोरी को अपने अकाउंट पर दोबारा शेयर करते हुए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। गौरतलब है कि ‘बिग बॉस 11’ के दौरान भी अर्शी खान और शिल्पा शिंदे के बीच काफी अच्छा तालमेल देखा गया था और उस वक्त भी यह दोनों कंटेस्टेंट्स घर के भीतर हिना खान की रणनीतियों और उनके व्यवहार के खिलाफ लगातार मुखर रही थीं। शो खत्म होने के बरसों बाद भी इन अभिनेत्रियों के बीच का मनमुटाव कम नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, अपने ऊपर हो रही भारी ट्रोलिंग को लेकर शिल्पा शिंदे ने एक वीडियो जारी कर साफ कहा है कि उन्हें लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। शिल्पा का कहना है कि जब वह अतीत में मुश्किल दौर से गुजर रही थीं, तब भी इंडस्ट्री में किसी ने उनका साथ नहीं दिया था और आज भी उन्हें किसी से किसी तरह के समर्थन की उम्मीद नहीं है। बहरहाल, अर्शी खान के इस विवाद में कूदने के बाद से सोशल मीडिया पर हिना खान और शिल्पा शिंदे के फैंस के बीच भी जंग और तेज हो गई है।
जब मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत पर अड़ गए थे शम्मी कपूर: राज कपूर के दखल के बाद रिलीज हुआ गाना, प्रीमियर पर खड़े होकर तालियां बजाने लगे थे देव आनंद और आरडी बर्मन

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मोहम्मद रफी और शम्मी कपूर की जोड़ी को संगीत की दुनिया की सबसे कामयाब जोड़ियों में से एक माना जाता है। रफी साहब की बुलंद आवाज और शम्मी कपूर के अनूठे डांसिंग स्टाइल ने मिलकर बॉलीवुड को दर्जनों सदाबहार गाने दिए हैं। हालांकि, संगीत के इस सुनहरे सफर के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया था जब शम्मी कपूर खुद मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के एक प्रतिष्ठित गाने के पूरी तरह खिलाफ हो गए थे। वह इस गाने को फिल्म से हटवाना या बदलवाना चाहते थे, लेकिन बाद में इसी गाने ने सिनेमाघरों में ऐसा तूफान लाया कि हर कोई देखता रह गया। यह पूरा विवाद साल 1962 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘प्रोफेसर’ के एक बेहद लोकप्रिय गीत से जुड़ा हुआ है। इस फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के कंधों पर थी। उन्होंने फिल्म के लिए एक बेहद खूबसूरत और रूहानी धुन तैयार की थी, जिसके बोल थे ‘आवाज देके हमें तुम बुलाओ’। इस रूमानी गीत को सुर कोकिला लता मंगेशकर और संगीत के सरताज मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। रिकॉर्डिंग के बाद संगीत से जुड़े सभी लोग इस गाने की तारीफ कर रहे थे, लेकिन जैसे ही फिल्म के मुख्य अभिनेता शम्मी कपूर ने इसे सुना, उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जता दी। अभिनेता शम्मी कपूर को असल में इस बात से गहरी दिक्कत थी कि गाने की शुरुआत मुख्य अभिनेत्री की आवाज से हो रही थी और पूरे दृश्य में उनका खुद का स्क्रीन टाइम बहुत कम नजर आ रहा था। उनका मानना था कि एक मुख्य अभिनेता के तौर पर इस गाने में उनकी मौजूदगी को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया है और वह इसमें नाममात्र के लिए ही दिखाई दे रहे हैं। शम्मी कपूर इस बात पर अड़ गए कि इस गाने को फिल्म से बदल दिया जाए। जब यह विवाद काफी बढ़ गया और मेकर्स असमंजस की स्थिति में आ गए, तब फिल्म इंडस्ट्री के ‘शोमैन’ राज कपूर को इस मामले में बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा। राज कपूर ने शम्मी कपूर के गुस्से को शांत करते हुए उन्हें समझाया कि वह इस कंपोजिशन और गाने के मिजाज पर भरोसा रखें। उन्होंने शम्मी को सलाह दी कि गाने को बिना किसी बदलाव के फिल्म में वैसे ही रहने दिया जाए जैसा इसे रिकॉर्ड किया गया है। राज कपूर के दखल और उनके विजन पर भरोसा करते हुए शम्मी कपूर आखिरकार मान गए। इसके बाद जब फिल्म बनकर तैयार हुई, तो उद्योग के तमाम दिग्गजों के लिए फिल्म का एक भव्य प्रीमियर शो आयोजित किया गया। इस प्रीमियर में देव आनंद, आरडी बर्मन और महमूद जैसी सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां मौजूद थीं। थिएटर के भीतर जब फिल्म के दौरान यह गाना बजना शुरू हुआ, तो शुरुआत में लता मंगेशकर की सुरीली आवाज को हॉल में बैठे सभी दिग्गज बेहद शांति और एकाग्रता से सुन रहे थे। जैसे ही गाने के बीच में मोहम्मद रफी की जादुई लाइनें गूंजी, थिएटर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रफी साहब की आवाज का जादू ऐसा चला कि वहां बैठे संगीतकार आरडी बर्मन, सदाबहार अभिनेता देव आनंद और मशहूर कॉमेडियन महमूद अपनी सीटों से खड़े हो गए और उत्साह में आकर लगातार तालियां बजाने लगे। थिएटर के अंदर मौजूद दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का यह अद्भुत रिस्पॉन्स देखकर खुद शम्मी कपूर भी पूरी तरह हैरान रह गए थे। इस घटना के बाद शम्मी कपूर को भी अहसास हो गया कि स्क्रीन टाइम से ज्यादा गाने की आत्मा और उसकी गायकी मायने रखती है। बाद में यह गाना न केवल चार्टबस्टर साबित हुआ, बल्कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन गानों की फेहरिस्त में शामिल किया गया। मोहम्मद रफी ने इसके बाद भी शम्मी कपूर के लिए ‘चाहें कोई मुझे जंगली कहे’, ‘बदन पे सितारे’, ‘तारीफ करूं क्या उसकी’, और ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’ जैसे अनगिनत कल्ट गाने गाए, जिन्होंने शम्मी कपूर को इंडस्ट्री का ‘एल्विस प्रेस्ली’ बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में कलाकारों के आपसी तालमेल और अभिनय के तौर-तरीकों को लेकर अक्सर कई तरह के किस्से सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मधु ने किया है। उन्होंने नब्बे के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान का एक ऐसा वाकया साझा किया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मधु के अनुसार, एक बेहद संवेदनशील दृश्य की शूटिंग के दौरान उनके और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बीच सेट पर ही थप्पड़बाजी की नौबत आ गई थी। यह घटना फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के दौरान घटी थी, जिसके लिए निर्देशक अनिल मात्तू ने पूरा एक दिन निर्धारित किया था। मधु ने एक साक्षात्कार में बताया कि वह एक ऐसी अभिनेत्री रही हैं जो ‘स्विच ऑन और स्विच ऑफ’ पद्धति पर काम करती हैं, यानी कैमरे के सामने आते ही किरदार में आना और कट बोलते ही बाहर निकल जाना। इस सीन में उन्हें रोना था और इसके लिए वह आंखों में ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन उनके सह-कलाकार नाना पाटेकर इसके पूरी तरह खिलाफ थे। नाना पाटेकर फिल्म जगत में अपनी सजीव और ‘मेथड एक्टिंग’ के लिए जाने जाते हैं और वह चाहते थे कि दृश्य पूरी तरह वास्तविक लगे। अभिनेत्री के मुताबिक, कई बार रिहर्सल करने के बावजूद जब वह स्वाभाविक रूप से रोने में असमर्थ रहीं, तो नाना पाटेकर ने अचानक उन्हें बेहद जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के अचानक पड़े इस तमाचे से मधु अवाक रह गईं और दर्द तथा गुस्से के कारण उनकी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। नाना पाटेकर के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने मधु को इतना क्रोधित कर दिया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे तुरंत पलटवार किया और सेट पर मौजूद पूरी टीम के सामने नाना पाटेकर को भी एक करारा थप्पड़ रसीद कर दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सेट पर कुछ समय के लिए सन्नाटा पसर गया था, लेकिन इसके कारण दृश्य में जो वास्तविक भावनाएं और गुस्सा उभरकर आया, उसने पूरे शॉट को एक ही टेक में जीवंत कर दिया। स्वाभाविक और वास्तविक प्रतिक्रिया होने के कारण निर्देशक को वह शॉट बेहद पसंद आया। नतीजा यह हुआ कि जिस महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया गया था, वह महज आधे दिन में ही पूरी तरह से संपन्न हो गया। इस शॉट के पूरा होते ही नाना पाटेकर ने भी स्थिति को संभालते हुए पैकअप की घोषणा कर दी। बरसों पुराने इस वाकये को याद करते हुए मधु ने स्पष्ट किया कि इस तीखी नोकझोंक के बावजूद नाना पाटेकर का इरादा कभी भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने का नहीं था। वह केवल पर्दे पर अभिनय के स्तर को उत्कृष्ट बनाना चाहते थे। जब भी वह सेट पर ग्लिसरीन का उपयोग करती थीं या अपने किरदार से भटकती थीं, तो नाना पाटेकर थोड़े असहज और नाखुश दिखाई देते थे। मधु ने माना कि नाना पाटेकर चाहते थे कि सह-कलाकार केवल अभिनय न करें, बल्कि उस किरदार को पूरी शिद्दत से जिएं, और यही वजह थी कि उस दिन उन्होंने अनजाने में मधु को भी एक ‘मेथड एक्टर’ बना दिया था। बॉलीवुड में नाना पाटेकर के कड़क मिजाज और काम के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर पहले भी कई किस्से सामने आते रहे हैं। इससे पहले दिग्गज फिल्ममेकर सई परांजपे ने भी फिल्म ‘दिशा’ की शूटिंग के दौरान चप्पल के एक सीन को लेकर नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी तीखी बहस का जिक्र किया था। बहरहाल, मधु द्वारा साझा किया गया यह संस्मरण यह दिखाता है कि सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाले बेहतरीन दृश्यों के पीछे कलाकारों को कभी-कभी किस तरह की शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।
16 जून को त्रिपुष्कर योग से इन राशियों के लिए बन रहे धन लाभ और सफलता के योग

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 16 जून को एक विशेष शुभ संयोग बन रहा है, जिसे त्रिपुष्कर योग कहा जाता है। मान्यता है कि यह योग तब बनता है जब विशेष तिथि, वार और नक्षत्र का संयोग एक साथ होता है। इसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है, विशेषकर नए कार्य शुरू करने, निवेश करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए। इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आर्थिक लाभ के संकेत बताए जा रहे हैं। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से लाभकारी हो सकता है। निवेश से लाभ मिलने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। मानसिक रूप से भी सकारात्मकता बनी रहेगी। सिंह राशिसिंह राशि के लिए यह योग करियर में प्रगति के संकेत दे रहा है। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होगी और पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। कन्या राशिकन्या राशि वालों के लिए नए अवसरों का निर्माण हो सकता है। शिक्षा, लेखन और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। मकर राशिमकर राशि के लिए यह समय रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और धन संबंधी स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ के योग भी बन सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार के योगों का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए परिणाम भिन्न हो सकते हैं।
सूर्य गोचर से बना भद्र राजयोग, मिथुन सहित 5 राशियों के लिए धन लाभ और तरक्की के प्रबल योग

नई दिल्ली। सूर्य गोचर के प्रभाव से इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसमें भद्र राजयोग का निर्माण माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार 16 जून को सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही बुध ग्रह विराजमान हैं। इस स्थिति से बुधादित्य राजयोग भी बनेगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ योग माना जाता है। इस ग्रह स्थिति का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार पांच राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। इन जातकों के जीवन में धन लाभ, करियर में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन रहे हैं। मिथुन राशिसूर्य का गोचर आपकी ही राशि में होने से आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में वृद्धि होगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में साझेदारी से लाभ के संकेत हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सिंह राशिसूर्य आपकी राशि के स्वामी होकर लाभ स्थान में गोचर करेंगे। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। सरकारी क्षेत्र या राजनीति से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। कन्या राशिबुध ग्रह की राशि में यह गोचर करियर के दसवें भाव में होगा, जिससे कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिलने के संकेत हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और व्यापार में प्रगति होगी। तुला राशिभाग्य भाव में सूर्य का गोचर रुके हुए कार्यों को गति देगा। यात्राएं लाभकारी साबित हो सकती हैं और विदेश से जुड़े कामों में प्रगति के संकेत हैं। सामाजिक संपर्क भी मजबूत होंगे। कुंभ राशिपांचवें भाव में यह योग विद्यार्थियों और निवेशकों के लिए शुभ माना जा रहा है। शिक्षा में सफलता, संतान पक्ष से शुभ समाचार और आकस्मिक धन लाभ के संकेत हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिवर्तन लेकर आ सकता है, हालांकि परिणाम व्यक्ति की कुंडली और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं।
गरुड़ पुराण का रहस्य: मृत्यु के बाद गहनों और सामान को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?

नई दिल्ली । सनातन धर्म में जीवन और मृत्यु दोनों को प्रकृति का शाश्वत सत्य माना गया है। जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों का भी धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं ग्रंथों में एक प्रमुख ग्रंथ गरुड़ पुराण है, जिसमें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, कर्मों के फल और अंतिम संस्कार से जुड़े अनेक नियमों का उल्लेख किया गया है। जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तब उसके अंतिम संस्कार के दौरान उपयोग में आने वाले कपड़े, बिस्तर और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं को प्रायः घर से बाहर कर दिया जाता है या दान कर दिया जाता है। हालांकि एक बात अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा करती है कि मृतक के गहनों को आमतौर पर सुरक्षित क्यों रखा जाता है। गरुड़ पुराण में इसके पीछे एक विशेष मान्यता का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक आत्मा का अपने जीवन से जुड़ी वस्तुओं और प्रिय लोगों के प्रति मोह बना रह सकता है। माना जाता है कि आभूषण ऐसी वस्तुएं होती हैं जिनसे व्यक्ति का भावनात्मक और व्यक्तिगत जुड़ाव अधिक होता है। इसी कारण गरुड़ पुराण में सलाह दी गई है कि मृतक के गहनों का तुरंत नियमित उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे आत्मा का उन वस्तुओं के प्रति मोह बढ़ सकता है, जो उसकी आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसी वजह से कई परिवार मृतक के गहनों को संभालकर रखते हैं और उनका उपयोग लंबे समय तक नहीं करते। कुछ लोग धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें शुद्धिकरण के बाद परिवार में सुरक्षित रखते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें दान करना अधिक उचित मानते हैं। मान्यता है कि यदि किसी को इन गहनों को घर में रखने में असहजता महसूस हो, तो उनका दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। गरुड़ पुराण में केवल गहनों ही नहीं, बल्कि मृतक द्वारा उपयोग की गई अन्य वस्तुओं के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के कपड़े, चश्मा, हाथ की घड़ी, बिस्तर और दैनिक उपयोग की अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इन वस्तुओं को दान करना या उचित तरीके से अलग कर देना बेहतर माना गया है। इसके अलावा सामान्य पुस्तकों को भी घर में न रखने की सलाह दी गई है, यदि उनका नियमित उपयोग मृतक द्वारा किया जाता था। हालांकि धार्मिक ग्रंथों के मामले में अलग व्यवस्था बताई गई है। मान्यता है कि धार्मिक पुस्तकों पर गंगाजल का छिड़काव कर उन्हें पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। इसी प्रकार यदि मृतक की जन्म कुंडली मौजूद हो, तो उसे किसी पवित्र जल में प्रवाहित करने या पीपल के वृक्ष के नीचे मिट्टी में दबाने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ये मान्यताएं केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही नहीं बल्कि परिवार को मानसिक रूप से शोक से उबरने का अवसर देने का भी एक माध्यम हैं। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए इन विषयों में स्थानीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं का भी विशेष महत्व माना जाता है।