पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’

नई दिल्ली । अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। पति Peter Hag के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। अभिनेत्री ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी धमकी या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपने बच्चों तथा न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। हाल के दिनों में पति और ससुर की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनके परिवार से जुड़ी खबरें, इंटरव्यू और सार्वजनिक प्रस्तुतियां चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन जब उन्होंने अपने निजी संघर्षों और एक मां के रूप में अपनी चिंताओं को सामने रखा तो उन्हें कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब भी दे दिया है। सेलिना जेटली ने अपने बयान में बच्चों की कस्टडी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वह हमेशा संयुक्त अभिरक्षा और आपसी सहमति से समाधान के पक्ष में रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेशों के बावजूद बच्चों से संपर्क स्थापित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि एक मां के रूप में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बच्चों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों से बाहर ले जाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने को आवश्यक बताया। दूसरी ओर, पति और उनके परिवार की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कुछ आरोप उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सेलिना का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन्हें डराना, दबाव बनाना और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से रोकना है। फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहीं सेलिना जेटली सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। मौजूदा विवाद के बीच उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और प्रतिक्रियाओं ने इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अभिनेत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि वह अपने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगी। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक मां के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए वह अंत तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
SOCIAL MEDIA SECURITY: WhatsApp, Facebook और Instagram पर लॉगिन का बदलेगा तरीका, OTP के बिना होगा मोबाइल वेरिफिकेशन

SOCIAL MEDIA SECURITY: नई दिल्ली । डिजिटल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वोडाफोन आइडिया (Vi) और मेटा ने नई साझेदारी की घोषणा की है। इस सहयोग के तहत WhatsApp, Facebook और Instagram जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन सुविधा शुरू की जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के दौरान वन-टाइम पासवर्ड (OTP) दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी।कंपनियों के अनुसार यह नेटवर्क आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली उपयोगकर्ताओं की पहचान को मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से स्वतः सत्यापित करेगी। इससे रजिस्ट्रेशन, मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन, लॉगिन, री-लॉगिन, अकाउंट रिकवरी और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और सहज हो जाएंगी। पूरी प्रक्रिया बैकग्राउंड में पूरी होगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। MP PRE-MONSOON: MP में प्री-मानसून का असर, 40 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश; जानें आपके जिले का हाल! नई तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी मानी जा रही है जहां ओटीपी प्राप्त होने में देरी होती है या साइबर अपराधी फर्जी संदेशों और लिंक के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन प्रणाली में प्रमाणीकरण सीधे नेटवर्क स्तर पर होता है, जिससे फिशिंग, ओटीपी चोरी और डिजिटल पहचान से जुड़े कई जोखिम कम हो सकते हैं। कंपनियों ने बताया कि जब कोई Vi ग्राहक अपने मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से WhatsApp, Facebook या Instagram का उपयोग करेगा, तब सत्यापन अनुरोध स्वतः नेटवर्क द्वारा मान्य किया जाएगा। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा और विभिन्न सेवाओं तक पहुंचने में लगने वाला समय भी घटेगा। तकनीक का उद्देश्य सुरक्षा और सुविधा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है। भारत मेटा के प्लेटफॉर्म के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। करोड़ों भारतीय रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का उपयोग करते हैं। ऐसे में नई प्रमाणीकरण व्यवस्था का प्रभाव बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। अप्रैल 2026 तक वोडाफोन आइडिया के लगभग 19.85 करोड़ ग्राहक थे, जिन्हें इस नई सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित वोडाफोन आइडिया के मुख्य कार्य अधिकारी अभिजीत किशोर ने कहा कि मेटा के साथ यह साझेदारी उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित डिजिटल अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन तकनीक न केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करेगी। साथ ही उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के तेज और सुविधाजनक प्रमाणीकरण प्रक्रिया उपलब्ध कराएगी। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डिजिटल सेवाओं में पारंपरिक ओटीपी आधारित सत्यापन की जगह नेटवर्क आधारित और स्वचालित प्रमाणीकरण प्रणालियां अधिक लोकप्रिय हो सकती हैं। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा मानकों में भी सुधार आएगा। हालांकि यह सुविधा फिलहाल Vi नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं के लिए शुरू की जा रही है, लेकिन इसके सफल होने पर अन्य दूरसंचार कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसी प्रकार की तकनीकों को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। इससे भारत में डिजिटल सेवाओं के उपयोग का अनुभव और अधिक सुरक्षित, तेज तथा आधुनिक बनने की उम्मीद है।
Beauty Tips: ग्लोइंग स्किन पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और हेल्दी त्वचा चाहता है। लेकिन प्रदूषण, तनाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है। ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बजाय कुछ आसान और नियमित आदतें अपनाकर त्वचा को प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग बनाया जा सकता है। 1. पर्याप्त पानी पीना है सबसे जरूरी कदमत्वचा की चमक बनाए रखने के लिए शरीर का हाइड्रेट रहना बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और थकी हुई दिखने लगती है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीने की आदत जरूरी है। 2. दिन में दो बार चेहरा साफ करेंधूल, प्रदूषण और गंदगी चेहरे पर जमकर पिंपल्स और डलनेस का कारण बनती है। इसलिए सुबह और रात को हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे त्वचा फ्रेश रहती है और रोमछिद्र (pores) साफ बने रहते हैं। बहुत ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स से बचना भी जरूरी है। 3. सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करेंसूरज की हानिकारक UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे टैनिंग, पिगमेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों की समस्या हो सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाली सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, चाहे मौसम कोई भी हो। 4. हेल्दी डाइट अपनाएंत्वचा की असली चमक अंदर से आती है। ताजे फल, हरी सब्जियां और विटामिन युक्त भोजन त्वचा को जरूरी पोषण देते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को डैमेज से बचाते हैं और नेचुरल ग्लो बढ़ाते हैं। 5. पर्याप्त नींद लेंअच्छी और पूरी नींद त्वचा की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से त्वचा खुद को रिपेयर करती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, थकान और चेहरे की चमक कम हो सकती है। 6. छोटी आदतें बदल सकती हैं आपकी स्किनग्लोइंग स्किन पाने के लिए महंगे ट्रीटमेंट्स की जरूरत नहीं होती। नियमित स्किन केयर, सही खानपान, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद जैसी आदतें अपनाकर आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी और सुंदर बना सकते हैं। अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में इन आसान ब्यूटी टिप्स को अपनाते हैं, तो आपकी त्वचा प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग, साफ और स्वस्थ बनी रह सकती है।
इंतजार खत्म! WhatsApp ला रहा नया फीचर, निजी चैट्स होंगी पहले से ज्यादा सुरक्षित..

नई दिल्ली । लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक नया और महत्वपूर्ण प्राइवेसी फीचर लेकर आ रहा है। इस अपडेट का उद्देश्य निजी बातचीत को पहले से अधिक सुरक्षित बनाना और यूजर्स को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करना है। डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कंपनी लगातार ऐसे फीचर्स विकसित कर रही है जो यूजर्स की गोपनीयता को मजबूत करें। नया फीचर विशेष रूप से उन संदेशों और मीडिया फाइल्स के लिए उपयोगी होगा जिन्हें यूजर्स सीमित समय के लिए साझा करना चाहते हैं। यह सुविधा निजी बातचीत के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और संवेदनशील जानकारी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक उपलब्ध रहने से बचाने में मदद करेगी। इससे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों तरह की बातचीत अधिक सुरक्षित हो सकेगी। आज के समय में ऑनलाइन संचार लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े मुद्दे भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यूजर्स चाहते हैं कि उनकी निजी तस्वीरें, वीडियो और संदेश केवल निर्धारित व्यक्ति तक ही सीमित रहें। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए WhatsApp लगातार अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्लेटफॉर्म ने चैट लॉक, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, डिसअपीयरिंग मैसेज और अन्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इन फीचर्स ने यूजर्स को अपनी चैट्स और डेटा पर अधिक नियंत्रण दिया है। नया अपडेट इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे निजी संचार और अधिक सुरक्षित बन सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर खतरों और डेटा लीक की बढ़ती घटनाओं के बीच प्राइवेसी आधारित फीचर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है। WhatsApp का नया फीचर इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया माना जा रहा है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है जो नियमित रूप से संवेदनशील दस्तावेज, निजी तस्वीरें या गोपनीय जानकारी साझा करते हैं। अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से डेटा के दुरुपयोग और अनधिकृत पहुंच की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यूजर्स का भरोसा भी मजबूत होगा और डिजिटल संचार का अनुभव बेहतर बनेगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में प्राइवेसी-केंद्रित फीचर्स मैसेजिंग सेवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाएंगे। यूजर्स अब केवल तेज और आसान संचार नहीं चाहते, बल्कि अपने डेटा की सुरक्षा को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही कारण है कि तकनीकी कंपनियां लगातार नए सुरक्षा समाधान विकसित कर रही हैं। WhatsApp का यह नया फीचर भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके व्यापक रूप से उपलब्ध होने के बाद यूजर्स को निजी चैटिंग के दौरान अधिक सुरक्षा और सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित संचार को बढ़ावा मिलेगा और प्राइवेसी को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।
ज्येष्ठ कालाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां: काल भैरव की नाराजगी से बढ़ सकती हैं जीवन में परेशानियां, जानें शुभ-अशुभ नियम

नई दिल्ली । सनातन धर्म में आध्यात्मिक साधना और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कालाष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाली मासिक कालाष्टमी 8 जून, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 जून को तड़के सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 9 जून को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस विशेष दिन पर भगवान शिव के रौद्र रूप और अंशावतार भगवान काल भैरव की प्राकट्य पूजा और व्रत का विधान है, जो जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की आराधना करने से जीवन में व्याप्त किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का प्रभाव और मानसिक भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा राहु और केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे हों, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित घोषित किया गया है, जिन्हें करने से साधक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कालाष्टमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण नियम पशु सेवा से जुड़ा है। सनातन परंपरा में श्वान (कुत्ते) को भगवान काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी कुत्ते को मारना, डांटना या उसे जूते-चप्पल दिखाना महापाप की श्रेणी में आता है। ऐसा करने से काल भैरव तत्काल रुष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही, इस दिन कुत्ते को कभी भी जूठा भोजन या अपवित्र अन्न नहीं देना चाहिए। इसके विपरीत, इस शुभ तिथि पर काले कुत्ते को ताजी एवं मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, उनके लिए खान-पान के कड़े नियम निर्धारित हैं। कालाष्टमी के व्रत में सामान्य नमक या समुद्री नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे व्रत खंडित होने का दोष लगता है जिसके परिणाम जीवन में कष्टकारी हो सकते हैं। व्रत न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस दिन पूरी तरह सात्विकता का पालन करना चाहिए। इस तिथि पर मदिरापान और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से पूर्ण दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि अनजाने में किया गया ऐसा कृत्य भी गंभीर दोष का कारण बनता है। शास्त्रों में भगवान काल भैरव को ‘दंडपाणि’ भी कहा गया है, जिसका अर्थ है अन्याय और अधर्म के मार्ग पर चलने वालों को कड़ा दंड देने वाला। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य, झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या छल-कपट करने से बचना चाहिए। इस दिन किए गए गलत कार्यों का परिणाम बेहद कष्टप्रद हो सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कम से कम सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक इन कड़े नियमों और मर्यादाओं का अक्षुण्ण पालन करना अनिवार्य बताया गया है। नकारात्मकता को दूर करने और पुण्य फल की प्राप्ति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं। कालाष्टमी के पावन अवसर पर किसी भी काल भैरव मंदिर में जाकर उनके सम्मुख सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके अलावा, मंदिर में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करने से पितृदोष और ग्रह बाधाओं से शांति मिलती है। इस दिन छोटे बालकों को उनकी प्रिय वस्तुएं या मिष्ठान भेंट करना भी पारिवारिक समृद्धि और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
'गुड बॉय' के किरदारों से ऊब चुके हैं ऋतिक रोशन: सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द, ग्रे शेड भूमिकाओं में काम करने की जताई इच्छा

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में पिछले 26 वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी स्थापित और लोकप्रिय ‘गुड बॉय’ वाली छवि से अब कुछ अलग करने का मन बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक होलिया पोस्ट ने फिल्म गलियारों और प्रशंसकों के बीच कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि फिल्म निर्देशक उन्हें लगातार एक आदर्श और सीधे-सादे इंसान के किरदारों में ही देखना चाहते हैं, जबकि वे अब जटिल और नकारात्मक रंगत वाले चरित्रों को पर्दे पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब ऋतिक रोशन ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टावर के सामने से अपनी एक बेहद आकर्षक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा की। इस तस्वीर के साथ लिखे गए उनके विस्तृत कैप्शन ने सबका ध्यान आकर्षित किया। अभिनेता ने लिखा कि हाल ही में उनसे जब यह पूछा गया कि वे वर्तमान में किस तरह की भूमिका की तलाश कर रहे हैं, तो उनका अपना ही उत्तर उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने दर्शकों से फिल्म ‘लक बाय चांस’ के स्वार्थी और घमंडी स्टार ‘जफर’ के किरदार को याद करने को कहा। ऋतिक रोशन के अनुसार, वे ‘जफर’ जैसे यथार्थवादी और ग्रे शेड वाले किरदारों को पर्दे पर दोबारा जीने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज उन्हें ऐसा कोई चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव मिलता है, तो वे बिना समय गंवाए उसे तुरंत स्वीकार कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने फिल्म उद्योग की वर्तमान प्रशासनिक और रचनात्मक सीमाओं पर तंज कसते हुए कहा कि निर्देशकों की मानसिकता उन्हें केवल एक ‘अच्छे नायक’ के रूप में ही भुनाने की है, जो उनके रचनात्मक विकास के दृष्टिकोण से एक दुखद स्थिति है। अभिनेता की इस स्पष्टवादी पोस्ट पर बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘चलो फिर’। इस प्रतिक्रिया के सामने आते ही सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है। कूटनीतिक स्तर पर इसे दोनों के बीच आगामी समय में एक बड़े एक्शन या थ्रिलर प्रोजेक्ट के सहयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संभवतः ऋतिक रोशन एक मुख्य विलेन या डार्क प्रोटागोनिस्ट के रूप में नजर आ सकते हैं। इससे पहले ऋतिक रोशन की फिल्म ‘वॉर 2’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, जिसके बाद वे अपनी अभिनय शैली में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। यदि ऋतिक रोशन के आगामी व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स की बात करें, तो वे इस समय अपनी सबसे बड़ी सुपरहीरो फ्रेंचाइजी फिल्म ‘कृष 4’ के निर्माण और लेखन कार्य में व्यस्त हैं। इस बार वे अभिनय के साथ-साथ खुद ही इस महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्देशन की कमान भी संभाल रहे हैं, जो उनके करियर का एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ है। इसके अतिरिक्त उनके पास ‘स्टोर्म’ नामक एक और बड़ी फिल्म है, जिसे लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। साल 2000 में आई अपनी पहली ही ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाले ऋतिक रोशन ने ‘कोई मिल गया’, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’ और ‘वॉर’ जैसी कई मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्में दी हैं। यद्यपि उन्होंने ‘धूम 2’ में एक शातिर चोर का किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय पहले भी दिया है, लेकिन साल 2026 तक के अपने 26 साल लंबे फिल्मी सफर के इस मोड़ पर वे अब पूरी तरह से लीक से हटकर काम करने की योजना बना रहे हैं।
शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे। किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था। ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’ ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी। एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था। 15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।
पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान

नई दिल्ली। राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह तो था, लेकिन रिलीज के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अच्चियम्मा’ के चित्रण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में पुरुष नायक को जहां मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि दी गई है, वहीं महिला किरदार को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री के किरदार को केवल ग्लैमर तक सीमित कर दिया गया है। वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहसएक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार के साथ न्याय नहीं किया गया। पोस्ट में कहा गया कि कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में पुरुष किरदार को विकास और उद्देश्य दिया गया, जबकि महिला किरदार को सीमित और सतही तरीके से प्रस्तुत किया गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि फिल्म के अंतिम संस्करण में अभिनेत्री के किरदार की गहराई और प्रभाव को कम कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस तेज हो गई है। जाह्नवी कपूर के एक ‘लाइक’ ने बढ़ाई अटकलेंविवाद उस समय और गहरा गया जब लोगों ने नोटिस किया कि जाह्नवी कपूर ने इस आलोचनात्मक पोस्ट को लाइक किया है। अभिनेत्री ने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पोस्ट को लाइक करने को कई लोग उनकी अप्रत्यक्ष सहमति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसी पोस्ट को लाइक करना हमेशा उसके हर दावे का समर्थन माना जाए, यह जरूरी नहीं है। फिर भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। निर्देशक पर भी उठे सवालपोस्ट में फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana पर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का आरोप है कि महिला किरदार के विकास और प्रस्तुति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि फिल्म की टीम या निर्देशक की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बड़ी स्टारकास्ट, बड़ी उम्मीदें‘पेड्डी’ का निर्देशन बुच्ची बाबू सना ने किया है। फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर के अलावा Shiva Rajkumar और Divyenndu Sharma भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक तरफ इसके तकनीकी पक्ष और प्रदर्शन की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ महिला किरदारों के चित्रण को लेकर उठे सवाल भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।
शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती

नई दिल्ली। टीवी जगत में इन दिनों शिल्पा शिंदे और हिना खान के बीच बयानबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने वर्षों पहले लोकप्रिय धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता पर लगाया गया यौन उत्पीड़न का आरोप झूठा था। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और कई कलाकारों ने भी उनके बयान पर नाराजगी जताई। इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के बयान को शर्मनाक बताते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हिना का कहना था कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उस व्यक्ति को हुआ, जिस पर आरोप लगाए गए थे। उनके इस बयान के बाद अब शिल्पा शिंदे ने भी तीखा जवाब दिया है। एक बातचीत के दौरान शिल्पा ने कहा कि लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर सुर्खियां बटोरना बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग अपनी बीमारी, निजी परेशानियों और परिवार के सदस्यों की मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर सहानुभूति और पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि शिल्पा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हिना खान की ओर इशारा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में हिना खान ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और निजी जीवन के कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है, जिसके चलते शिल्पा की टिप्पणी को सीधे उन्हीं से जोड़कर देखा जा रहा है। शिल्पा शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अब जाकर पुराने मामले की सच्चाई इसलिए बताई क्योंकि वह इस बात का बोझ और नहीं उठाना चाहती थीं। उनके मुताबिक, उस समय वह कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान से जुड़े विवादों में फंसी हुई थीं और उन्हें लगा था कि उस परिस्थिति से निकलने का यही रास्ता है। उन्होंने कहा कि यदि उस मामले में गलत कानूनी कार्रवाई होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। दूसरी ओर, हिना खान पहले ही शिल्पा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया था। ऐसे में दोनों अभिनेत्रियों के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गई है। फिलहाल, इस विवाद ने टीवी इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए पुराने आरोपों और बाद में उनके खंडन का असर संबंधित लोगों की प्रतिष्ठा और करियर पर कितना गहरा पड़ सकता है।
क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था। उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था। ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं। राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था। विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है। इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो। प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।