पैक्ड फूड पर बड़ा खुलासा: भारत के 80% उत्पादों में ज्यादा शुगर और फ्लेवर

नई दिल्ली। नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 80% से ज्यादा पैक्ड फूड में अतिरिक्त शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और हानिकारक एडिटिव्स पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। भारत में पैक्ड फूड की बढ़ती खपत के बीच एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है, जिसने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में बिकने वाले 80% से अधिक पैक्ड फूड उत्पादों में अतिरिक्त शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कई तरह के एडिटिव्स मौजूद हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। यह रिपोर्ट Natfirst और इसके कंज्यूमर न्यूट्रिशन प्लेटफॉर्म ट्रुथइन के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें करीब 23,000 फूड प्रोडक्ट्स की 25 से अधिक श्रेणियों के लेबल का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स, रेडी-टू-ईट फूड और मीठे स्नैक्स में सबसे ज्यादा समस्या पाई गई है। करीब 80% बिस्कुट में आर्टिफिशियल फ्लेवर और सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल देखा गया, जबकि लगभग 98% कोल्ड ड्रिंक्स में हानिकारक एडिटिव्स मौजूद पाए गए। इसी तरह रेडी-टू-ईट फूड में भी उच्च मात्रा में नमक और रसायनों का उपयोग सामने आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैटर्न दर्शाता है कि पैक्ड फूड में स्वाद बढ़ाने और शेल्फ लाइफ लंबी करने के लिए बड़ी मात्रा में चीनी, नमक और रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकांश उपभोक्ता पैकेट पर लगे लेबल को पढ़ने का दावा करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही सामग्री की पूरी जानकारी ध्यान से देखते हैं। इसी लापरवाही का फायदा कंपनियां उठाती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोगों को पैक्ड फूड का सीमित उपयोग करना चाहिए और ताजे व घरेलू भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। रिपोर्ट का संदेश साफ है पैक्ड फूड का बढ़ता सेवन भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।
मीन राशिफल (20 मई 2026): मिला-जुला रहेगा दिन, सेहत और खर्च पर रखें ध्यान

नई दिल्ली। मीन राशि के जातकों के लिए 20 मई 2026 का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आ सकता है। दिन की शुरुआत थोड़ी सामान्य रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, कामकाज में अतिरिक्त दबाव महसूस हो सकता है। Pisces वालों को आज अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत होगी। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन काम की अधिकता के कारण थकान भी महसूस हो सकती है। आर्थिक मामलों में किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-विचार करना जरूरी होगा। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है, इसलिए बजट पर नियंत्रण रखें। निवेश या लेन-देन में जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है। सेहत को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बदलते मौसम या तनाव के कारण हल्की परेशानी हो सकती है, इसलिए आराम और संतुलित दिनचर्या अपनाएं। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी और दिन के तनाव में कमी आएगी। मीन राशि वालों के लिए यह दिन न तो बहुत अच्छा और न ही बहुत खराब रहेगा। धैर्य और संतुलन से दिन को बेहतर बनाया जा सकता है।
नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम

नई दिल्ली। नारद पुराण में जीवन, मृत्यु और परलोक से जुड़े गहरे रहस्यों का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार यमलोक की यात्रा करती है और वहीं उसे पाप और पुण्य का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार यह यात्रा साधारण नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह व्यक्ति के जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करती है। नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग अत्यंत लंबा बताया गया है, जिसे छियासी हजार योजन तक फैला हुआ कहा गया है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर होता है, ऐसे में यह दूरी अत्यंत विशाल मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, दान और पुण्य कर्म करता है, उसकी यह यात्रा सरल और सुखद होती है, जबकि पाप कर्म करने वालों को इस मार्ग में कठिनाइयों और कष्टों का सामना करना पड़ता है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि यमलोक के मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं, कहीं कीचड़, कहीं अग्नि, कहीं तीखी धार वाली शिलाएं और कहीं कांटों से भरे मार्ग मिलते हैं। पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं के बीच यमलोक तक ले जाते हैं। वे भय और कष्ट के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं और अपने जीवन के पापों का फल भोगते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपने जीवन में दान-पुण्य और धर्म का पालन करते हैं, उन्हें इस मार्ग में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे जीवों को उत्तम भोजन, वस्त्र, आभूषण और सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अन्न दान करने वाले को उत्तम भोजन, जल दान करने वाले को शीतल पेय, वस्त्र दान करने वाले को दिव्य वस्त्र और गोदान करने वाले को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों का सम्मान करता है, धर्म का पालन करता है और सदैव ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है, उसे यमलोक की यात्रा में विशेष सम्मान मिलता है और वह सुखपूर्वक धर्मराज के लोक तक पहुंचता है। अंत में धर्मराज जीवों को उनके कर्मों के अनुसार निर्णय देते हैं। पुण्यात्माओं को स्वर्ग और सुखमय लोक प्राप्त होता है, जबकि पापियों को उनके कर्मों के अनुसार कष्टदायक फल भोगना पड़ता है। पुराणों में यह संदेश दिया गया है कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे धर्म, सत्य, दान और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए, क्योंकि अंततः हर जीव को अपने कर्मों का ही फल प्राप्त होता है।
X पर बिना ब्लू टिक यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव, अब एक दिन में सिर्फ सीमित पोस्ट कर पाएंगे यूजर्स

नई दिल्ली। नई नीति के बाद X (Twitter) पर बिना ब्लू टिक वाले यूजर्स के लिए पोस्टिंग लिमिट लागू होने से सोशल मीडिया यूजर्स के बीच हलचल बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब बिना वेरिफिकेशन अकाउंट एक दिन में केवल तय संख्या में ही पोस्ट और रिप्लाई कर सकेंगे, जिससे लगातार एक्टिव रहने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं। प्लेटफॉर्म का कहना है कि यह कदम स्पैम और बॉट गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है, जबकि आलोचक इसे पेड सब्सक्रिप्शन की ओर धकेलने की रणनीति बता रहे हैं। नई व्यवस्था के बाद लिमिट पार करते ही यूजर को एरर मैसेज दिखाई देगा और आगे पोस्ट करने पर रोक लग सकती है। इस बदलाव ने ब्लू टिक को सिर्फ पहचान का नहीं बल्कि जरूरी फीचर का हिस्सा बना दिया है, जिससे X पर फ्री यूजर्स की आजादी सीमित होती नजर आ रही है। X (Twitter) पर अब बिना ब्लू टिक वाले यूज़र्स के लिए नई पोस्टिंग लिमिट लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अनवेरिफाइड अकाउंट्स अब एक दिन में सीमित संख्या में ही पोस्ट और रिप्लाई कर पाएंगे, जिससे एक्टिव यूज़र्स और लाइव अपडेट देने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। प्लेटफॉर्म की तरफ से इस बदलाव को स्पैम और बॉट एक्टिविटी पर रोक लगाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन यूज़र्स का एक बड़ा वर्ग इसे फ्री एक्सप्रेशन पर रोक मान रहा है। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही यूजर तय लिमिट पार करेगा, उसे पोस्ट करने से रोक दिया जाएगा और स्क्रीन पर एरर मैसेज दिखाई देगा। इससे लगातार कंटेंट शेयर करने वाले यूज़र्स को अपनी गतिविधि सीमित करनी पड़ेगी या फिर प्रीमियम सब्सक्रिप्शन की ओर जाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव X के बिजनेस मॉडल को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, जहां ब्लू टिक और प्रीमियम सर्विसेज को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरी तरफ, आलोचकों का कहना है कि इससे प्लेटफॉर्म की ओपन बातचीत और रियल-टाइम अपडेट की पहचान कमजोर हो सकती है।
लग्जरी घड़ी के लिए दुनिया में मचा बवाल, 40 हजार की वॉच पर टूटी भीड़, पुलिस तक को करना पड़ा दखल

नई दिल्ली। दिल्ली से लंदन और दुबई से न्यूयॉर्क तक 40-45 हजार रुपये की एक लग्जरी घड़ी ने ऐसा क्रेज पैदा कर दिया कि कई देशों में स्टोर्स के बाहर भीड़ बेकाबू हो गई और हालात संभालने के लिए पुलिस तक को दखल देना पड़ा। यह कोई करोड़ों की घड़ी नहीं थी, लेकिन इसके लिए लोगों की दीवानगी ऐसी थी कि कई जगह बैरिकेड टूट गए और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। दरअसल, स्विस लग्जरी वॉच ब्रांड Audemars Piguet और पॉपुलर वॉच कंपनी Swatch ने मिलकर एक खास कलेक्शन लॉन्च किया, जिसमें ऑडेमार्स पिगे के हाई-एंड डिजाइन को किफायती कीमत में पेश किया गया। इसी वजह से इसे खरीदने के लिए दुनिया भर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कंपनी ने इस वॉच की बिक्री सिर्फ चुनिंदा स्टोर्स तक सीमित रखी और ऑनलाइन सेल नहीं की, जिससे “पहले आओ पहले पाओ” की स्थिति बन गई। इसी रणनीति ने लोगों के बीच हाइप और बढ़ा दी और लॉन्च के दिन स्टोर्स के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। भारत में भी दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में लोग रातभर स्टोर्स के बाहर खड़े रहे। कई जगहों पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि बैरिकेडिंग टूट गई और स्टोर स्टाफ को स्थिति संभालनी मुश्किल हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग स्टोर्स में घुसने की कोशिश करते नजर आए। दुबई और यूरोप के कई शहरों में भी हालात बिगड़ गए। फ्रांस में तो भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस तक का इस्तेमाल करना पड़ा, जबकि लंदन और न्यूयॉर्क में भी भीड़ के चलते कुछ स्टोर्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका “लक्जरी ब्रांड” कनेक्शन माना जा रहा है। आम तौर पर ऑडेमार्स पिगे की घड़ियां बेहद महंगी होती हैं, लेकिन इस किफायती वर्जन ने लोगों को पहली बार उस ब्रांड का हिस्सा बनने का मौका दिया, जिससे इसका क्रेज और बढ़ गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस दीवानगी के पीछे सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है, जहां भीड़ और लाइन के वीडियो वायरल होते ही और ज्यादा लोग इसे खरीदने के लिए स्टोर्स की ओर दौड़ पड़े। इसके अलावा रिसेल मार्केट भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है, क्योंकि लॉन्च के तुरंत बाद ही यह घड़ी कई जगहों पर ज्यादा कीमत में बिकने लगी, जिससे इसे खरीदने वालों में मुनाफे की उम्मीद भी बढ़ गई।
Paytm का बड़ा धमाका: अब बिना बैंक अकाउंट भी बच्चे करेंगे UPI पेमेंट, पैरेंट्स रखेंगे हर खर्च पर नजर

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के दौर में अब बच्चों और किशोरों के लिए भी ऑनलाइन भुगतान करना आसान होने वाला है। देश की बड़ी फिनटेक कंपनी Paytm ने नया ‘Pocket Money’ फीचर लॉन्च किया है, जिसकी मदद से अब टीन्स बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले भी सुरक्षित तरीके से UPI पेमेंट कर सकेंगे। खास बात यह है कि इस पूरे सिस्टम का कंट्रोल माता-पिता के पास रहेगा और वे हर खर्च पर नजर रख सकेंगे। आज के समय में स्कूल, कोचिंग, कैंटीन, मेट्रो, मोबाइल रिचार्ज और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट आम हो चुका है। लेकिन ज्यादातर किशोरों के पास अपना बैंक अकाउंट नहीं होता, जिसकी वजह से उन्हें हर बार माता-पिता का फोन, OTP या QR कोड लेना पड़ता है। कई बार समय पर OTP न मिलने या फोन उपलब्ध न होने से परेशानी भी होती है। इसी दिक्कत को खत्म करने के लिए Paytm ने यह नया फीचर पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर NPCI के UPI Circle फ्रेमवर्क पर आधारित है। इसके जरिए माता-पिता अपने बैंक अकाउंट से बच्चों को सीमित और सुरक्षित UPI एक्सेस दे सकते हैं। यानी बच्चा अपने मोबाइल से सीधे QR स्कैन कर पेमेंट कर सकेगा, लेकिन खर्च की सीमा और कंट्रोल पूरी तरह पैरेंट्स के हाथ में रहेगा। इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत इसका पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम है। माता-पिता बच्चों के लिए मासिक खर्च सीमा तय कर सकते हैं। हर ट्रांजेक्शन की जानकारी रियल टाइम में उनके पास पहुंचेगी। जरूरत पड़ने पर वे तुरंत लिमिट बदल सकते हैं या UPI एक्सेस बंद भी कर सकते हैं। इससे बच्चों को डिजिटल पेमेंट की आजादी मिलेगी, लेकिन सुरक्षा और नियंत्रण बना रहेगा। Paytm ने इसमें ‘Spend Summary’ फीचर भी जोड़ा है। यह सिस्टम खर्च को अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर दिखाएगा कि पैसा सबसे ज्यादा कहां खर्च हो रहा है। इससे पैरेंट्स आसानी से समझ पाएंगे कि बच्चा फूड, ट्रांसपोर्ट, गेमिंग, रिचार्ज या शॉपिंग पर कितना खर्च कर रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने कई लिमिट्स भी तय की हैं। सेटअप के शुरुआती 30 मिनट में खर्च की अधिकतम सीमा 500 रुपये रहेगी। पहले 24 घंटे में कुल खर्च 5 हजार रुपये तक सीमित होगा। वहीं एक बार में अधिकतम 5 हजार रुपये का ही पेमेंट किया जा सकेगा। पूरे महीने में UPI खर्च की सीमा 15 हजार रुपये तय की गई है। इसके अलावा इंटरनेशनल पेमेंट और कैश निकासी जैसी सुविधाओं को पूरी तरह बंद रखा गया है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए बच्चे के फोन में स्क्रीन लॉक होना जरूरी होगा। माता-पिता अपने Paytm ऐप से कुछ ही मिनटों में Pocket Money फीचर सेटअप कर सकते हैं। इसके बाद बच्चा सीधे अपने फोन से UPI पेमेंट कर पाएगा। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के बीच यह फीचर परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इससे किशोर कम उम्र से ही जिम्मेदारी के साथ डिजिटल मनी मैनेजमेंट सीख पाएंगे और कैश पर निर्भरता भी कम होगी।
Google I/O 2026: सुंदर पिचाई के ऐलानों पर टिकी दुनिया की नजर, AI और Android में बड़े बदलाव की उम्मीद

नई दिल्ली। गूगल की सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस Google I/O 2026 को लेकर टेक दुनिया में जबरदस्त उत्साह है। यह इवेंट 19 और 20 मई 2026 को आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 30 मिनट पर होगी। पहले दिन की कीनोट स्पीच कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित Shoreline Amphitheatre में होगी, जिसे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई संबोधित करेंगे। इस इवेंट में कंपनी अपने आने वाले सॉफ्टवेयर, AI और हार्डवेयर से जुड़े कई बड़े अपडेट्स पेश कर सकती है। इस बार सबसे ज्यादा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Android इकोसिस्टम पर रहने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि गूगल अपने AI मॉडल Gemini को और ज्यादा एडवांस बनाकर नए फीचर्स के साथ पेश कर सकता है। यह भी चर्चा है कि कंपनी Gemini को सिर्फ एक AI टूल नहीं बल्कि पूरे Google इकोसिस्टम जैसे Android, Chrome, Gmail और Workspace में गहराई से इंटीग्रेट कर सकती है, जिससे यूजर्स का स्मार्टफोन और कंप्यूटर इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। Google के इस इवेंट में Android 17 को लेकर भी बड़े अपडेट्स की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अब तक का सबसे AI-सेंट्रिक Android वर्जन हो सकता है, जिसमें सिस्टम लेवल पर Gemini AI का गहरा इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है। इससे फोन सिर्फ कमांड फॉलो करने वाला डिवाइस नहीं रहेगा, बल्कि यूजर की आदतों को समझकर खुद भी काम करने में सक्षम हो सकता है। इसके साथ ही ChromeOS और Android के बीच बेहतर इंटीग्रेशन पर भी गूगल काम कर रहा है, ताकि लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन के बीच एक स्मूद और यूनिफाइड एक्सपीरियंस मिल सके। माना जा रहा है कि अगले-जेनरेशन हाइब्रिड डिवाइसेज के लिए नए सॉफ्टवेयर टूल्स भी इस इवेंट में पेश किए जा सकते हैं। हार्डवेयर सेगमेंट में भी कुछ सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि गूगल XR स्मार्ट ग्लासेस पर काम कर रहा है, जिन्हें Samsung और Xreal जैसी कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। इन डिवाइसेज में Gemini AI का सपोर्ट होने से रियल-टाइम जानकारी, नेविगेशन और ऑगमेंटेड रियलिटी एक्सपीरियंस और भी एडवांस हो सकता है। पिछले साल के Google I/O में AI Overviews और कई नए AI टूल्स ने सर्च और इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को बदल दिया था। इस बार उम्मीद है कि गूगल AI को एक कदम आगे ले जाकर “एजेंटिक AI सिस्टम” पेश कर सकता है, जो मल्टी-स्टेप टास्क खुद पूरा करने में सक्षम होगा। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि Google I/O मुख्य रूप से एक प्रेजेंटेशन इवेंट होता है, जिसमें दिखाए गए कई फीचर्स बाद में धीरे-धीरे या पूरी तरह प्रोडक्ट्स में शामिल किए जाते हैं। ऐसे में इस बार के बड़े ऐलान भी आने वाले महीनों या सालों में ही यूजर्स तक पहुंच सकते हैं। कुल मिलाकर Google I/O 2026 टेक दुनिया के लिए एक बड़ा इवेंट साबित हो सकता है, जहां AI, Android और भविष्य की कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी की दिशा तय होती दिखेगी
Zoho ने वर्क फ्रॉम होम पर क्यों लगाया पूर्ण विराम, श्रीधर वेम्बु ने बताए तकनीकी कारण!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पीएम मोदी ने हाल ही में नागरिकों और कंपनियों से ईंधन की बचत और यात्रा कम करने के लिए ऑनलाइन मीटिंग और रिमोट वर्क को बढ़ावा देने की सलाह दी थी। लेकिन इसी बीच टेक कंपनी Zoho ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्क फ्रॉम होम मॉडल को आगे नहीं बढ़ाएगी। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने अपने बयान में कहा कि कंपनी का फोकस पूरी तरह से ऑफिस-बेस्ड वर्क मॉडल पर रहेगा। उन्होंने बताया कि खासकर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) जैसे जटिल कामों में टीम का एक साथ, आमने-सामने बैठकर काम करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है। क्यों लिया गया यह फैसला? सामने आए तकनीकी कारणश्रीधर वेम्बु के अनुसार, जब टीमें एक ही स्थान पर बैठकर काम करती हैं तो समस्या-समाधान तेजी से होता है और विचारों का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से हो पाता है। उन्होंने कहा कि रिमोट वर्क के दौरान कई बार कम्युनिकेशन गैप बढ़ जाता है, जिससे किसी तकनीकी समस्या को हल करने में अधिक समय लगता है। वेम्बु ने यह भी बताया कि उनके अनुभव में ऑन-साइट टीमवर्क से इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी दोनों में सुधार देखने को मिला है। इसी वजह से कंपनी ने निर्णय लिया है कि वह पूर्ण रूप से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाने की योजना नहीं रखती। पीएम मोदी की अपील क्या थी?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग यात्रा कम करें, वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा दें और कोविड काल जैसी आदतों को फिर से अपनाएं, ताकि देश की ऊर्जा खपत और आयात पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि Zoho का यह फैसला दिखाता है कि अलग-अलग कंपनियां अपने कामकाज के हिसाब से वर्क मॉडल चुन रही हैं, और हर सेक्टर में रिमोट वर्क पूरी तरह प्रभावी नहीं माना जा रहा है, खासकर तकनीकी और डेवलपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में।
Apple ने आखिर क्यों बंद किए iPhone बॉक्स में मिलने वाले फ्री स्टिकर? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली। Apple iPhone Sticker Policy: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple ने अपने प्रोडक्ट्स के साथ लंबे समय से दी जाने वाली फ्री स्टिकर्स की परंपरा को अब खत्म कर दिया है। यह स्टिकर दशकों तक Apple की ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अहम हिस्सा रहे, लेकिन अब कंपनी ने इन्हें हटाकर पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया है। आइए समझते हैं कि आखिर Apple ने यह फैसला क्यों लिया। 1970 के दशक से शुरू हुई थी स्टिकर की कहानीApple ने अपने शुरुआती प्रोडक्ट Apple II के साथ 1970 के दशक में पहली बार रेनबो Apple लोगो वाले स्टिकर देना शुरू किया था। बाद में 1988 के आसपास कंपनी ने इन्हें सॉलिड कलर लोगो में बदल दिया। धीरे-धीरे ये स्टिकर MacBook, iPod, iPhone और iPad जैसे हर प्रोडक्ट का हिस्सा बन गए। यूजर्स इन्हें लैपटॉप, कार और बैग पर लगाकर Apple ब्रांड को प्रमोट करने लगे। Apple के लिए क्यों थे ये स्टिकर इतने खास?Apple के लिए ये सिर्फ स्टिकर नहीं बल्कि एक सस्ते लेकिन बेहद प्रभावी मार्केटिंग टूल थे। कंपनी ने बिना किसी अतिरिक्त विज्ञापन खर्च के अपने यूजर्स को ही ब्रांड एंबेसडर बना दिया था। जहां भी ये स्टिकर लगाए जाते, वहीं Apple का लोगो खुद-ब-खुद प्रमोशन करता। साथ ही, बॉक्स खोलते समय मिलने वाला यह छोटा गिफ्ट यूजर्स के लिए एक प्रीमियम एक्सपीरियंस भी बन गया था। अब क्यों बंद कर दिए गए फ्री स्टिकर?रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने 2024 के बाद से धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट बॉक्स से फ्री स्टिकर हटाने शुरू कर दिए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी का ‘कार्बन न्यूट्रल’ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी वाला लक्ष्य बताया जा रहा है। Apple अब पूरी तरह फाइबर-बेस्ड और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की ओर बढ़ रहा है। चूंकि पुराने स्टिकर प्लास्टिक आधारित थे, इसलिए इन्हें हटाना इस नई ग्रीन पॉलिसी का हिस्सा है। कुल मिलाकर, Apple का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे एक छोटे लेकिन लोकप्रिय फीचर का अंत भी हो गया है।
Earbuds का एक साइड क्यों नहीं करता काम? जानिए वजह और घर बैठे आसान तरीके से कैसे करें ठीक

नई दिल्ली। आजकल वायरलेस ईयरबड्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन कई यूजर्स एक आम समस्या से परेशान रहते हैं कि ईयरबड्स का एक साइड काम करना बंद कर देता है या जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है। अक्सर लोग इसे खराबी समझकर नया ईयरबड खरीदने की सोच लेते हैं, लेकिन कई बार इसकी वजह बहुत सामान्य होती है और इसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है। टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर वायरलेस ईयरबड्स में एक साइड “मेन ईयरबड” की तरह काम करता है, जो सीधे फोन से कनेक्शन बनाए रखता है। यही साइड कॉलिंग, माइक्रोफोन और कंट्रोल का ज्यादा इस्तेमाल संभालता है, जिससे उस पर ज्यादा लोड पड़ता है और उसकी बैटरी दूसरे ईयरबड की तुलना में जल्दी खत्म होने लगती है। इसके अलावा अगर कोई यूजर अक्सर सिर्फ एक ही ईयरबड का इस्तेमाल करता है, तो उस साइड की बैटरी समय के साथ जल्दी कमजोर हो सकती है। इसके अलावा एक और बड़ी वजह बैटरी की उम्र भी होती है। जैसे-जैसे ईयरबड्स पुरानी होते जाते हैं, उनकी छोटी बैटरियों की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे एक साइड पहले डिस्चार्ज होने लगता है या ठीक से काम नहीं करता। कई बार समस्या ईयरबड में नहीं बल्कि उसकी चार्जिंग में भी होती है। ईयरबड के चार्जिंग पिन या केस में धूल, गंदगी या ईयरवैक्स जमा हो जाता है, जिससे एक ईयरबड ठीक से चार्ज नहीं हो पाता। ऐसे में वह डेड दिखने लगता है। इस स्थिति में ईयरबड और चार्जिंग केस को साफ, सूखे और मुलायम कपड़े या कॉटन स्वैब से हल्के हाथों से साफ करना चाहिए। ध्यान रखना जरूरी है कि पानी का इस्तेमाल न किया जाए। इसके बाद दोनों ईयरबड्स को चार्जिंग केस में रखकर रीसेट करना भी एक असरदार तरीका है। कई कंपनियों के ईयरबड्स में रीसेट या री-पेयरिंग का ऑप्शन होता है, जिससे कनेक्शन और सिंकिंग से जुड़ी समस्याएं ठीक हो जाती हैं। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स को चेक करना जरूरी है। कई बार फोन में ईयरबड को “Forget Device” करके दोबारा पेयर करने से ऑडियो और बैटरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म हो जाती हैं। साथ ही फोन और ईयरबड दोनों के सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर अपडेट करना भी फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईयरबड्स की बैटरी लाइफ को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ गलतियों से बचना चाहिए, जैसे उन्हें पूरी रात चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना, बहुत गर्म जगह पर इस्तेमाल करना या हमेशा एक ही ईयरबड का लगातार उपयोग करना। दोनों ईयरबड्स का बराबर इस्तेमाल करने से उनकी बैटरी बैलेंस बनी रहती है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है। इस तरह थोड़ी सावधानी और आसान ट्रिक्स अपनाकर ईयरबड्स की ज्यादातर आम समस्याओं को घर बैठे ही ठीक किया जा सकता है और नए खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।