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सुर्खियों की होड़ पर भड़कीं मीनाक्षी शेषाद्रि, एक्टर्स को दी सलाह-सिर्फ मेहनत से मिलेगी असली पहचान

नई दिल्ली । मुंबई में अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने मौजूदा फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते पीआर कल्चर और पब्लिसिटी स्टंट को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई कलाकार अपने काम की बजाय सुर्खियों में बने रहने के लिए अलग-अलग तरीकों का सहारा लेते हैं, जबकि असली पहचान हमेशा मेहनत और कला से ही मिलती है। उनके इस बयान ने एक बार फिर मनोरंजन जगत में पीआर और पब्लिसिटी की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है। मीनाक्षी शेषाद्रि ने कहा कि कुछ कलाकार बिना ठोस काम किए केवल मीडिया में बने रहने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हैं, जिसमें अतरंगी स्टाइल, विवादित बयान और लगातार सुर्खियों में बने रहने की कोशिश शामिल होती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस तरह की सोच से सहमत नहीं हैं और उनका मानना है कि कलाकार की असली पहचान उसके काम से बननी चाहिए, न कि प्रचार के तरीकों से। उन्होंने एक पुरानी फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि मनोरंजन की दुनिया में हमेशा से यह धारणा रही है कि यहां केवल वही टिकता है जो दर्शकों को कुछ वास्तविक और प्रभावशाली देता है। उनके अनुसार, अगर कोई कलाकार अपने काम पर ध्यान दे और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़े, तो सफलता अपने आप उसके दरवाजे तक पहुंचती है। उन्होंने यह भी कहा कि मेहनत और प्रतिभा ही वह आधार है जिस पर लंबे समय तक करियर खड़ा रहता है। अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि वह केवल उस प्रवृत्ति पर अपनी राय दे रही हैं जो आज के समय में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और पीआर के बढ़ते प्रभाव ने मनोरंजन जगत में प्रतिस्पर्धा का तरीका बदल दिया है, लेकिन इससे कलाकार की वास्तविक प्रतिभा पीछे नहीं छिपनी चाहिए। इस बीच फिल्म इंडस्ट्री में पीआर और ट्रोलिंग कल्चर को लेकर पहले भी कई कलाकार अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। कई लोगों का मानना है कि डिजिटल दौर में पहचान बनाने के तरीके बदल गए हैं, लेकिन कुछ कलाकार अब भी मानते हैं कि असली सफलता केवल और केवल काम के दम पर ही हासिल की जा सकती है। मीनाक्षी शेषाद्रि के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के दौर में लोकप्रियता का पैमाना केवल पब्लिसिटी है या फिर अब भी प्रतिभा और मेहनत ही सबसे बड़ी पहचान है।

गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म

नई दिल्ली(New Delhi)।  ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व Ganga Dussehra इस वर्ष 2026 में 24 मई की शाम से शुरू होकर 25 मई की दोपहर तक रहेगा। इसी कारण इसकी सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि पर्व 24 मई को मनाया जाए या 25 मई को। पंचांग गणना के अनुसार उदया तिथि को महत्व देते हुए इस बार गंगा दशहरा 25 मई 2026, सोमवार को मनाना ही शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और इसी कारण इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसी वजह से देशभर में प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस वर्ष गंगा स्नान के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:40 से 05:23 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 से 01:10 बजे तक। इसके अलावा सूर्योदय के समय 06:06 बजे स्नान और सूर्य अर्घ्य देना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार हस्त नक्षत्र और रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि यह पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है। वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

OTT पर फ्री टीवी चैनलों पर रोक लगेगी? TRAI की समीक्षा से केबल–DTH और डिजिटल प्लेटफॉर्म में टकराव तेज

नई  दिल्ली। भारत में फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) और OTT प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे लाइव टीवी चैनलों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केबल और DTH ऑपरेटर्स का कहना है कि Tata Play, Airtel Digital TV और अन्य पारंपरिक सेवाओं के ग्राहक तेजी से कम हो रहे हैं क्योंकि वही टीवी चैनल और कंटेंट अब इंटरनेट पर फ्री में उपलब्ध हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2022 में जहां DTH ग्राहकों की संख्या 6.66 करोड़ थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर लगभग 5.09 करोड़ रह गई। कंपनियों का आरोप है कि OTT प्लेटफॉर्म्स बिना भारी लाइसेंस फीस के वही कंटेंट दे रहे हैं, जो केबल और DTH पर भुगतान के साथ मिलता है। इसी वजह से वे मांग कर रहे हैं कि इंटरनेट टीवी प्लेटफॉर्म्स पर भी करीब 10 करोड़ रुपये तक की लाइसेंसिंग फीस और समान नियम लागू किए जाएं। वहीं दूसरी तरफ OTT और डिजिटल कंपनियों का तर्क है कि यह प्लेटफॉर्म टीवी ब्रॉडकास्ट नहीं बल्कि इंटरनेट आधारित सेवाएं हैं। Jio Platforms, JioStar और अन्य डिजिटल इकाइयों का कहना है कि पुराने केबल नियमों को इंटरनेट युग पर लागू करना गलत होगा। उनके अनुसार FAST चैनल्स टीवी नहीं बल्कि ऐप-आधारित स्ट्रीमिंग हैं, जिन्हें अलग कानूनी ढांचे में देखा जाना चाहिए। इसी विवाद में अब टीवी निर्माता कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ स्मार्ट टीवी में ऐप्स उपलब्ध कराते हैं, कंटेंट की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। भारत में करोड़ों लोग कनेक्टेड टीवी और मोबाइल पर फ्री लाइव चैनल देखते हैं, ऐसे में अगर TRAI केबल कंपनियों के पक्ष में फैसला देता है, तो कई फ्री OTT लाइव टीवी चैनल और स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है या उन्हें पेड मॉडल में बदलना पड़ सकता है। अब सबकी नजर TRAI के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भारत में डिजिटल टीवी और पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

सलमान खान की ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर मचा हंगामा, मां ने पूछा- क्या हुआ बेटा? अभिनेता ने दी सफाई

मुंबई। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने फैंस के बीच हलचल पैदा कर दी। अभिनेता ने कुछ दिन पहले अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए अकेलेपन और तन्हाई को लेकर एक संदेश लिखा था, जिसके बाद सोशल media पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। फैंस उनके भावनात्मक हालात को लेकर चिंता जताने लगे। अब सलमान ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर सफाई दी है। सलमान खान ने देर रात इंस्टाग्राम पर नई पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनका संदेश उनके निजी जीवन से जुड़ा नहीं था। उन्होंने लिखा कि इतने बड़े परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के बीच वह खुद को अकेला महसूस नहीं कर सकते। अभिनेता ने कहा, “जब मेरे पास परिवार, दोस्त और आप सभी का प्यार व दुआएं हैं, तो मैं अकेला कैसे हो सकता हूं? अगर ऐसा कहूं तो मैं सबसे बड़ा नाशुक्रा इंसान होऊंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पोस्ट पढ़कर उनकी मां सलमा खान भी परेशान हो गई थीं। सलमान ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि इस बार बिना किसी फोटो के ही पोस्ट ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बन गई और उनकी मां ने उनसे पूछा, “क्या हुआ बेटा?” अभिनेता ने आगे कहा कि कभी-कभी लोगों के बीच रहकर थकान महसूस होती है, इसलिए उन्हें थोड़ा अकेले समय की जरूरत पड़ती है। दरअसल, इससे पहले सलमान खान ने अपनी शर्टलेस तस्वीर के साथ एक क्रिप्टिक कैप्शन साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि “अकेला होना और तन्हा होना दोनों अलग बातें हैं। अकेलापन अपनी पसंद से होता है, जबकि तन्हाई तब महसूस होती है जब कोई आपके साथ नहीं रहना चाहता।” इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अलग-अलग अंदाजे लगा रहे थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान के पास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। उनकी आगामी फिल्म मातृभूमि पहले ‘बैटल ऑफ गलवां’ नाम से चर्चा में थी, लेकिन बाद में इसका टाइटल बदल दिया गया। इसके अलावा वह निर्देशक वामशी पेडिपल्ली की फिल्म ‘SVC63’ की शूटिंग में भी व्यस्त हैं, जिसमें उनके साथ नयनतारा नजर आएंगी। वहीं राज निदिमोरु और कृष्ण डी.के. के साथ भी उनके नए प्रोजेक्ट की चर्चाएं जारी हैं।

शरीर पर छिपकली गिरना शुभ या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में जानें हर अंग का संकेत

नई दिल्ली। प्राचीन मान्यताओं और ज्योतिषीय ग्रंथ Samudrik Shastra में शरीर पर छिपकली गिरने को केवल एक सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संकेत के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर छिपकली गिरने का अर्थ अलग-अलग फल देता है, जो व्यक्ति के जीवन में शुभ या अशुभ घटनाओं की ओर इशारा कर सकता है। सिर पर छिपकली गिरना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे धन, सम्मान या बड़े अवसर की प्राप्ति का संकेत बताया गया है। वहीं माथे पर गिरना किसी पुराने परिचित से मुलाकात या सामाजिक मान-सम्मान बढ़ने का संकेत देता है। नाक पर छिपकली गिरने को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें रोग से राहत मिलने की संभावना बताई जाती है। कान पर छिपकली गिरना शुभ समाचार या लाभ का संकेत माना जाता है, जबकि आंख पर गिरना मानसिक तनाव से मुक्ति का प्रतीक बताया जाता है। होंठों पर इसके प्रभाव को आर्थिक स्थिति से जोड़ा गया है, जिसमें ऊपर के होंठ पर गिरना नुकसान और नीचे के होंठ पर गिरना लाभ का संकेत माना जाता है। हाथों पर छिपकली गिरने के भी अलग अर्थ बताए गए हैं—दाहिने हाथ पर गिरना सफलता और सम्मान का संकेत है, जबकि बाएं हाथ पर इसे सावधानी का संकेत माना गया है। पेट और नाभि क्षेत्र पर गिरना सुख-समृद्धि और संतान सुख से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है। पीठ पर छिपकली गिरना आमतौर पर अशुभ माना जाता है, जबकि पैर या जांघ पर इसका गिरना यात्रा, स्थान परिवर्तन या वाहन सुख से जुड़ा संकेत बताया जाता है। हालांकि यह सभी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी लोग इन्हें लोक आस्था और ज्योतिषीय संकेत के रूप में देखते हैं।

वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

नई दिल्ली ।  Shakun Apshakun: अधिकांश घर में लोग जगह की बचाने के लिए दरवाजे के पीछे, बैग, कपड़े, इत्यादि सामान लटाका देते हैं. वैसे तो लोग इस आदत पर बहुत ध्यान नहीं देते, लेकिन शास्त्रों में इसके बड़े नुकसान बताए गए हैं. शास्त्रों की मानें तो दरवाजे के पीछे सामान लटकाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. मान्यता है कि कुछ चीजों को दरवाजे के पीछे लटकाने से निगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है. साथ ही परिवार की आर्थिक तरक्की में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होने लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को बेहद साफ-सुथरा रखना चाहिए. आइए, अब जानते हैं कि दरवाजे के पीछे किन चीजों की लटकाना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे ना लटकाएं कपड़ेशास्त्र-पुराणों के अनुसार, दरवाजे के पीछे कभी भी सूखे या भींगे कपड़े नहीं लटकाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे टंगे भींगे कपड़े भयानक वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. कहा जाता है कि लगातार ऐसा करने से तनाव, कलह और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ऐसा करने से राहु दोष भी उत्पन्न हो सकता है. पुराने बैग और दवाइयांवास्तु शास्त्र की मानें तो दरवाजे के पीछे दवाइयों का थैला, पुराने बैग इत्यादि टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से परिवार के सदस्य बीमारियों से घिरे रहते हैं. कमाई का अधिकांश हिस्सा इलाज पर खर्च होता है. इसके अलावा दरवाजे के पीछे पुराने कैलेंडर को भी लटकाने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे करियर में तरक्की रुक जाती है जूते और चप्पलशकुन शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल इत्यादि के थैले को भी नहीं टांगना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होने लगता है. इस स्थिति में अच्छी कमाई के बावजूद भी धन नहीं टिकता है. इसलिए, दरवाजे के पीछे भूलकर भी जूते-चप्पल ना लटकाएं कैसे दूर होगी निगेटिव एनर्जी?वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे का हिस्सा बिल्कुल साफ और खाली रखना चाहिए. इसके साथ ही वास्तु दोष को दूर करने के लिए वहां स्वास्तिक का चिह्न बनाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होने लगती है.

राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

नई दिल्ली । राज कुमार सबको जानी कहकर बात करते थे। आपने फिल्मों में भी कई बार देखा होगा कि वह सामने वाले किरदार को जानी बोलते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज, जानी क्यों बोलते थे। इसके पीछे की वजह काफी अलग है और खास भी। फिल्ममेकर केसी बोकादिया ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज कुमार को हैंडल करना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल होता था। क्यों सबको जानी बोलते थे राज कुमारकेसी ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा, ‘उनके कुत्ते का नाम जानी था, यही वजह है कि वह सबको जानी कहते थे। अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी मुझे इस नाम से नहीं बुलाया और मुझे सिर्फ बोकादिया साब बोलते थे।’ हालांकि उन्होंने यह भी क्लीयर किया कि राज के इरादे इसके पीछे नेगेटिव नहीं थे। वह अपने डॉग को काफी प्यार करते थे और उन्हें ये शब्द काफी पसंद था इसलिए वे सबको जानी बोलते थे। राज कुमार को कैसे अपनी फिल्म के लिए मनायाकेसी ने आगे बताया कि कैसे उनकी फिल्म पुलिस और मुजरिम के लिए उन्होंने राज कुमार को लिया था। वह बोले, मैंने उन्हें एक शाम को फोन किया। हमने फिर अगले दिन मुहर्रत शॉट प्लान किया। अगर वह किसी इंसान का चेहरा नहीं जानते तो वह फिल्म नहीं करते। फिल्म की स्टोरी उनके लिए दूसरे नंबर पर होती थी। अब जैसे ही उन्होंने फोन उठाया मैंने कहा राज साहब, मैं आपको एक लाइन कहना चाहता हूं। वह मान गए। उन्हें हैंडल करना, अमिताभ बच्चन को हैंडल करने से काफी मुश्किल होता था। बच्चन कैलकुलेटिव इंसान हैं और राज साहब मूडी थे। अमिताभ बच्चन से ज्यादा मुश्किल था राज कुमार को हैंडल करनावह आगे बोले, ‘कैलकुलेटिव इंसान को समझाना आसान होता है, लेकिन जब बात मूडी इंसान की आती है तो ये उनकी मूड पर डिपेंड करता है जो हर समय बदलता रहता है। एक गाय भी तभी दूध देती है जब उसका मन हो, नहीं तो नहीं। तो मेरे सीन के डिसक्रिप्शन को पढ़कर उन्होंने कहा कि ये अच्छा है। मैंने फिर उनसे तुरंत मूवी करने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ना नहीं कह सकते हैं।’ राज कुमार को ज्यादा पैसे किए ऑफरकेसी ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कितना पैसा चाहिए तो उन्होंने कहा लास्ट टाइम तुमने कितना दिया था? मैंने कहा 21 लाख तो उन्होंने मुझे ज्यादा अमाउंट देने को कहा तो मैंने 24 लाख कहा और फिर तुरंत मैंने 25 लाख का ऑफर दिया। इसके साथ मैंने उनसे एक और फेवर मांगा और रिक्वेस्ट किया कि आप अगली सुबह ही मुझे ज्वाइन करोगे क्योंकि मुहूर्त अगले दिन का शेड्यूल है।’ पुराना आउटफिट पहन दिया था मुहूर्त शॉटराज ने फिर पूछा कि इतनी जल्दी कॉस्ट्यूम कैसे तैयार होंगे तो मैंने उन्हें कहा कि आप पिछले 25-30 साल से वैसे ही लग रहे हो तो न्यू कॉस्ट्यूम की क्या जरूरत। मुझे बस आपसे मुहूर्त शॉट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि राज फिर आए और उन्होंने वही येलो कलर का कोट पहना है जो उन्होंने नीले गगन के तले पहना था, हमराज फिल्म में।

फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप

नई दिल्ली। बॉलीवुड में आज भले ही VFX और CGI ने फिल्मों की दुनिया को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बना दिया हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब कलाकारों को असली खतरे के बीच शूटिंग करनी पड़ती थी। ऐसा ही एक खौफनाक और चर्चित किस्सा 1982 में आई फिल्म ‘अशांति’ से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। इस फिल्म में एक ऐसा सीन फिल्माया गया था, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे जोखिम भरे दृश्यों में गिना जाता है। कहानी के मुताबिक, फिल्म में विलेन का किरदार निभा रहे अभिनेता को एक जिंदा कोबरा सांप के साथ सीन करना था। दृश्य यह था कि वह सांप को अपने हाथ में उठाकर उसकी मौजूदगी को अपने चेहरे के बेहद करीब लाएगा और अपनी जीभ बाहर निकालकर ऐसा दिखाएगा कि सांप उसे काट रहा है। सेट पर असली कोबरा मौजूद था और पूरी यूनिट इस सीन को बेहद सतर्कता के साथ शूट कर रही थी। जैसे ही अभिनेता ने सांप को उठाकर अपने चेहरे के करीब लाया और अभिनय शुरू किया, तभी अचानक एक अप्रत्याशित घटना हुई सांप ने उसकी जीभ के बेहद पास डसने की कोशिश की और उसे काट लिया। इस घटना के बाद सेट पर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। हर कोई घबरा गया, लेकिन बाद में पता चला कि सांप का जहर पहले ही निकाला जा चुका था, इसलिए किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया। यह खतरनाक सीन फिल्म में अमरीश पुरी द्वारा निभाए गए राजा भीष्म बहादुर सिंह के किरदार का हिस्सा था। उनके इस किरदार को और भी अधिक डरावना और प्रभावशाली दिखाने के लिए यह दृश्य फिल्माया गया था, जिसमें वे खुद को इतना निर्दयी दिखाते हैं कि सांप के जहर का भी उन पर कोई असर नहीं होता। फिल्म रिलीज होने के बाद यह सीन इतना चर्चित हुआ कि कई दर्शकों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह वास्तविक शूटिंग थी। अमरीश पुरी की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और इस खतरनाक स्टंट ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में और भी मजबूत जगह दिलाई। आज भी ‘अशांति’ का यह सीन भारतीय फिल्म इतिहास के उन दुर्लभ दृश्यों में गिना जाता है, जिन्हें देखकर दर्शक हैरान भी होते हैं और उस दौर की फिल्ममेकिंग के साहस को सलाम भी करते हैं।

कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना

नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी को इंडस्ट्री की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है। अपनी अदाकारी, एक्सप्रेशन और डांस के दम पर उन्होंने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन हाल ही में सामने आए एक पुराने किस्से ने उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू फिर चर्चा में ला दिया है। यह दावा किया है एक इंटरव्यू में श्रीदेवी के साथ बैकग्राउंड डांसर रह चुकी रुबीना खान ने, जिन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एक गाने की शूटिंग को लेकर बड़ा बदलाव करना पड़ा। मामला फिल्म ‘चांद का टुकड़ा’ के टाइटल ट्रैक ‘तू लगे चांद का टुकड़ा’ से जुड़ा बताया जाता है। इस गाने की कोरियोग्राफी मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान द्वारा की जा रही थी। सेट पर श्रीदेवी को सफेद ड्रेस में एक खास थीम के तहत शूट किया गया था, जबकि करीब 10 बैकग्राउंड डांसर्स को अलग-अलग आउटफिट्स में रखा गया था ताकि गाने को भव्य रूप दिया जा सके। हालांकि, शूटिंग के बाद जब गाने का फाइनल वर्जन तैयार हुआ, तो कथित तौर पर श्रीदेवी इससे संतुष्ट नहीं थीं। दावा किया जाता है कि उन्हें लगा कि बैकग्राउंड डांसर्स के बीच उनका लुक अपेक्षाकृत फीका पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने गाने को लेकर असंतोष जताया और पूरे सीन को दोबारा बनाने की बात सामने आई। इसके बाद गाने में बड़ा बदलाव किया गया। पहले जहां सरोज खान इसकी कोरियोग्राफी संभाल रही थीं, वहीं बाद में इसे दोबारा तैयार करने के लिए कोरियोग्राफर चुन्नी प्रकाश को जिम्मेदारी दी गई। नए वर्जन में सबसे बड़ा बदलाव यह था कि गाने को बिना किसी बैकग्राउंड डांसर्स के शूट किया गया, जिससे पूरा फोकस केवल श्रीदेवी पर रहा। इस किस्से को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा होती रही है। हालांकि यह पूरी तरह से एक पुराना दावा और इंटरव्यू पर आधारित कहानी है, जिसे लेकर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आती रही है। फिर भी यह घटना उस दौर की फिल्म मेकिंग और स्टार पावर को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण मानी जाती है, जहां एक कलाकार की स्क्रीन प्रेजेंस पूरी फिल्म की दिशा बदल सकती थी।