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भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था

नई दिल्ली। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को भारत का “टेंपल सिटी ऑफ इंडिया” कहा जाता है, जहां हर मोड़ पर आस्था और इतिहास की झलक देखने को मिलती है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है, और यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिलता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, एक समय भुवनेश्वर में 2000 से भी अधिक मंदिर हुआ करते थे, हालांकि समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, लेकिन आज भी यहां 700 से ज्यादा प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में सबसे प्रमुख लिंगराज मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर कलिंग शैली की अद्भुत वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी ऊंची मीनारें और पत्थरों पर की गई नक्काशी लोगों को आकर्षित करती है। भुवनेश्वर सिर्फ मंदिरों का शहर ही नहीं, बल्कि यहां की रोजमर्रा की जिंदगी भी धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। सुबह की शुरुआत मंदिरों की घंटियों और भजनों से होती है, जबकि फूल, दीपक और पूजा सामग्री से जुड़ा स्थानीय कारोबार भी इसी आस्था पर आधारित है। यहां के त्योहार पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग देते हैं और ओडिया व्यंजनों में भी धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। आज भुवनेश्वर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां नई इमारतें और बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं, लेकिन इसके बीच सदियों पुराने मंदिर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यही परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम भुवनेश्वर को एक खास और अद्वितीय शहर बनाता है, जहां हर आगंतुक इतिहास, संस्कृति और भक्ति का अनुभव एक साथ करता है।

भगवान शिव के गले में क्यों रहता है नाग, जानिए इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक कथा?

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की छवि जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही गहरी उनके प्रतीकों की भी मान्यता है। उनके गले में लिपटा हुआ नाग अक्सर लोगों के मन में सवाल खड़ा करता है कि आखिर भोलेनाथ ने डर और विष के प्रतीक माने जाने वाले सांप को अपने आभूषण के रूप में क्यों धारण किया। इसके पीछे केवल एक नहीं, बल्कि कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण बताए जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब वासुकी नाग को रस्सी बनाकर देवताओं और दानवों ने मिलकर मंथन किया था, तब यह घटना शिव और नागों के बीच गहरे संबंध की शुरुआत मानी जाती है। मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो पूरी सृष्टि संकट में आ गई। ऐसे समय में भगवान शिव ने उस विष को पीकर संसार की रक्षा की और उसे अपने कंठ में रोक लिया। इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। माना जाता है कि इसी घटना के बाद नागों की भक्ति और समर्पण शिव के प्रति और मजबूत हो गया। धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि भगवान शिव ने नाग को अपने गले में स्थान देकर यह संदेश दिया कि सृष्टि का हर जीव समान है, चाहे वह डरावना ही क्यों न लगे। सांप सामान्यतः भय और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है, लेकिन शिव ने उसे अपनाकर यह सिद्ध किया कि सच्चा योगी वही है जो भय पर विजय पा ले। उनके लिए जीवन और मृत्यु दोनों समान हैं, इसलिए नाग उनके लिए आभूषण बन गया। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नाग को ऊर्जा और जागृति का प्रतीक माना जाता है। योग परंपरा में कुंडलिनी शक्ति को सर्प के रूप में दर्शाया जाता है, जो मानव शरीर में सुप्त अवस्था में रहती है। भगवान शिव को योग और ध्यान का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है, इसलिए उनके गले में नाग इस बात का संकेत है कि वे जाग्रत चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्वामी हैं। आज भी शिवभक्त सावन, महाशिवरात्रि और नाग पंचमी जैसे पर्वों पर शिव और नाग देवता की एक साथ पूजा करते हैं। शिव मंदिरों में शिवलिंग पर नाग की आकृति इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव अपने भक्तों को हर प्रकार के भय और संकट से मुक्ति दिलाते हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, संतुलन और निडरता का संदेश देता है, जो जीवन के हर पहलू में प्रेरणा बनकर सामने आता है।

गुजरात कोर्ट का बड़ा आदेश: ब्राह्मण समुदाय पर टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश

नई दिल्ली। फिल्म निर्माता और अभिनेता अनुराग कश्यप एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में फंस गए हैं। गुजरात के सूरत की एक अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिस पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्ति जताई थी। सूरत की JMFC (जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) अदालत ने स्थानीय वकील और विश्व हिंदू परिषद के नेता कमलेश रावल द्वारा दायर निजी शिकायत पर आंशिक रूप से सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने माना कि शुरुआती स्तर पर यह पर्याप्त आधार दिखाई देता है कि कश्यप की पोस्ट से किसी विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में तनाव फैलने की स्थिति बन सकती है। कोर्ट ने आदेश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज करने को कहा है, जिनमें धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करना) और धारा 353(2) (भ्रामक या गलत जानकारी फैलाना) शामिल हैं। यह पूरा विवाद फिल्म ‘फुले’ के ट्रेलर रिलीज से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि 16 अप्रैल को ‘ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज’ ने ट्रेलर पर आपत्ति जताई थी, जिसके जवाब में अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टिप्पणी की थी, जिसे समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक माना गया। शिकायतकर्ता कमलेश रावल का दावा है कि कश्यप ने एक बार नहीं, बल्कि दो बार ऐसी टिप्पणियां कीं, जिससे ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मी हस्तियों की बातों का समाज पर बड़ा असर पड़ता है, इसलिए इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले 2020 में भी कश्यप के खिलाफ इसी तरह की आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें उन्हें कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए थे। इसके चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की भी बात सामने आई है। इस आदेश के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अनुराग कश्यप को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।

‘त्रिदेव’ के ‘ओए ओए’ गाने पर क्यों मची थी हलचल? 36 साल पुरानी फिल्म से जुड़ा है हैरान करने वाला किस्सा

नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई फिल्में अपनी कहानी और गानों की वजह से याद की जाती हैं, लेकिन 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘त्रिदेव’ से जुड़ा एक किस्सा आज भी हैरान कर देता है। इस फिल्म के एक गाने की वजह से उस दौर में देश के कई हिस्सों में विवाद की स्थिति बन गई थी और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां तक होने की खबरें सामने आई थीं। साल 1989 में रिलीज हुई इस मल्टी-स्टारर फिल्म ‘त्रिदेव’ को राजीव राय ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, सनी देओल, जैकी श्रॉफ, माधुरी दीक्षित, संगीता बिजलानी, सोनम, अनुपम खेर और अमरीश पुरी जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया था। यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही और इसने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई के साथ 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी अपने नाम किए थे। हालांकि, इस फिल्म की सफलता के बीच इसका एक गाना ‘ओए ओए’ काफी चर्चा में आ गया था। यह गाना युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ, लेकिन बाद में इसके इस्तेमाल को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। निर्देशक राजीव राय ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह गाना रेडियो नशा पर काफी हिट रहा, लेकिन धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल गलत संदर्भों में होने लगा। रिपोर्ट्स और उस समय की चर्चाओं के मुताबिक, कुछ जगहों पर लोग इस गाने के बोलों का इस्तेमाल छेड़खानी जैसी घटनाओं में करने लगे थे, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की बातें भी सामने आईं और कई मामलों में लोगों पर कार्रवाई हुई। हालांकि, गाने पर आधिकारिक रूप से कोई बैन नहीं लगाया गया था, लेकिन यह सामाजिक स्तर पर विवाद का विषय जरूर बन गया था। ‘ओए ओए’ गाना ग्लोबल हिट गाने ‘Rhythm Is Gonna Get You’ से प्रेरित बताया जाता है, जिसे कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने कंपोज किया था। इस गाने को कविता कृष्णमूर्ति और सुरेश वाडकर ने अपनी आवाज दी थी। समय के साथ यह गाना पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया, लेकिन इसके साथ जुड़ा यह विवाद आज भी लोगों को चौंका देता है। इस तरह ‘त्रिदेव’ सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म ही नहीं रही, बल्कि अपने गाने की वजह से चर्चा और विवाद दोनों का हिस्सा बन गई, जिसकी गूंज 36 साल बाद भी लोगों के बीच सुनाई देती है।

अजय देवगन ने टाली ‘धमाल 4’ की रिलीज, अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ को मिला बड़ा फायदा

नई दिल्ली ।  अक्सर देखा जाता है कि कई फिल्में एक ही वक्त पर सिनेमाघरों में रिलीज हो जाती हैं, इससे दोनों ही फिल्मों के बिजनेस पर गहरा असर पड़ता है। यही नहीं मेकर्स फिल्मों के क्लैश को लेकर आलोचना का सामना भी करते हैं। इसलिए जब ऐसी टक्करों से बचा जाता है, तो यह सभी लोगों के लिए खुशी की बात होती है। इसका ताजा उदाहरण अजय देवगन की कॉमेडी फिल्म ‘धमाल 4’ और अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ है। बदल गई ‘धमाल 4’ की रिलीज डेटट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट कर जानकारी दी है कि अजय देवगन ने अपनी फिल्म ‘धमाल 4′ की रिलीज डेट बदल दी है। तरण ने अपने ट्वीट में लिखा, ”धमाल 4’ – ‘वेलकम टू द जंगल’: अजय देवगन – अक्षय कुमार का क्लैश टल गया… आपसी सम्मान और स्मार्ट बिजनेस प्लानिंग के तहत, अजय देवगन ने ‘धमाल 4′ की रिलीज डेट 17 जुलाई 2026 जो [पहले 3 जुलाई, 2026 को तय थी] उसे बदलने का फैसला किया है।’ अजय के फैसले से मिलेगा अक्षय को फायदातरण ने आगे लिखा, ‘खबर है कि अजय देवगन और अक्षय कुमार ने बात की और आपसी सहमति से दोनों फिल्मों – ‘धमाल 4’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ को उतना ही थिएटर में चलने दिया, जितना वे डिजर्व करती हैं। साथ ही यह भी पक्का किया कि ऑडियंस को दो फुल-स्केल मैडकैप एंटरटेनर उसी तरह देखने को मिलें, जैसा उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का मकसद है। जहां ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून, 2026 को सिनेमाघरों में आएगी, वहीं ‘धमाल 4′ अब 17 जुलाई 2026 को रिलीज होगी, जिससे WTTJ को बॉक्स ऑफिस पर तीन हफ्ते का अच्छा विंडो मिलेगा।’ अब ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘धमाल 4’ दोनों को लेकर ऑडियंस के बीच एक्साइटमेंट और बढ़ गई है। दोनों फ्रेंचाइजी पहले भी ऑडियंस को एंटरटेन कर चुकी हैं और इस बार भी मेकर्स बड़े लेवल पर फिल्मों को तैयार कर रहे हैं। ‘भूत बंगला’ से चर्चा में हैं अक्षय कुमारअक्षय कुमार इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर खबरों में बने हुए हैं। इस फिल्म के साथ अक्षय ने एक बार फिल्ममेकर प्रियदर्शन के साथ हाथ मिलाया है। इनकी जोड़ी ने हमेशा ही पर्दे पर कमाल किया है। ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने 29 दिनों में भारत में करीब 165 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ परेश रावल, राजपाल यादव, असरानी, तब्बू और वामिका गब्बी जैसे कलाकारों ने अहम रोल अदा किया है।

अकेले फिल्म देखने पर मिलते थे 10 हजार रुपये, फिर भी कोई नहीं जुटा पाया हिम्मत

नई दिल्ली ।  बॉलीवुड में जब भी हॉरर फिल्मों की बात होती है, रामसे ब्रदर्स का नाम जरूर लिया जाता है। दो भाइयों की जोड़ी ने बॉलीवुड की बहुत सारी हॉरर फिल्में दीं। रामसे ब्रदर्स की पहली फिल्म हॉरर फिल्म थी दो गज जमीन के नीचे। पर आज हम आपको इस फिल्म के बारे में नहीं बता रहे हैं। हम आपको रामसे ब्रदर्स की उस फिल्म के बारे में बता रहे हैं जो इतनी डरावनी थी कि थिएटर्स के बाहर एंबुलेंस खड़ी रहती थी। सिनेमाहॉल के बाहर रहती थी एंबुलेंसतुलसी रामसे के बेटे दीपक रामसे ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बताया कि ये बात सच है कि जब फिल्म रिलीज हुई थी तो सिनेमाहॉल के बाहर एंबुलेंस रहती थी कि अगर कोई बहुत ज्यादा डर जाए फिल्म देखकर तो उसे अस्पताल ले जाया जा सके। अकेले देखने वाले को मिलते 10 हजार रुपयेहिंदी रश से खास बातचीत में दीपक से सवाल हुआ कि क्या ये बात सच है कि रामसे ब्रदर्स की एक ऐसी फिल्म थी जिसके लिए कहा गया था कि अकेले देखने वाले को 10 हजार रुपये मिलेंगे? इसपर दीपक ने हां में जवाब दिया। फिल्म के बारे में बात करते हुए दीपक ने बताया कि जो फिल्म के ट्रायल शोज हुए थे, उसमें फिल्म देखकर बहुत से लोग घबरा गए थे। फिल्म की पब्लिसिटी के लिए तुलसी रामसे ने निकाला था ये तोड़ दीपक ने बताया फिल्म की पब्लिसिटी के लिए तुलसी रामसे का आइडिया था कि एक चैलेंज रखा जाएगा कि जो भी दीवार को सिनेमाघर में अकेले बैठकर देखेगा, उसे 10 हजार रुपये मिलेंगे। दीपक ने बताया कि उन लोगों ने एक एंबुलेस भी हॉल के बाहर रखी थी कि अगर आप देख रहे हैं फिल्म और आप घबरा जाते हैं, और आपको कुछ हो जाता है तो सुरक्षा के लिए एंबुलेंस बाहर रहे। हालांकि, दीपक ने बताया किसी ने भी दरवाजा को अकेले देखने का प्रयास नहीं किया। फिल्म में नजर आए थे ये कलाकार दरवाजा आज से 48 साल पहले रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अनिल धवन, श्यामली, इम्तियाज खान, अंजू महेंद्रू, शक्ति कपूर, त्रिलोक कपूर और कृष्ण धवन जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म को श्याम रामसे और तुलसी रामसे ने डायरेक्ट किया था।दरवाजा अपने समय की सबसे डरावनी फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म का बहुत तगड़ा बज बन गया था और फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी। दरवाजा एक क्रिएचर हॉरर फिल्म थी।

Google ने फ्री स्टोरेज विवाद पर दी सफाई, 15GB खत्म नहीं, 5GB प्लान टेस्टिंग का हिस्‍सा

नई दिल्ली । Google अकाउंट पर मिलने वाली मुफ्त 15GB स्टोरेज को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और टेक जगत में चर्चाएं तेज थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि कुछ नए यूजर्स को केवल 5GB फ्री स्टोरेज दी जा रही है। अब इस पूरे मामले पर गूगल ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है। चुनिंदा क्षेत्रों में चल रही टेस्टिंगटेक वेबसाइट एंड्रॉयड अथॉरिटी को दिए बयान में गूगल के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी फिलहाल कुछ चुनिंदा रीजन में नई स्टोरेज पॉलिसी की टेस्टिंग कर रही है। इसका मकसद यूजर्स को बेहतर स्टोरेज क्वालिटी और सुरक्षित सर्विस उपलब्ध कराना है। हालांकि कंपनी ने उन क्षेत्रों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जहां यह प्रयोग चल रहा है। सिक्योरिटी और डेटा रिकवरी पर फोकसगूगल के अनुसार नई टेस्टिंग का उद्देश्य केवल स्टोरेज सीमित करना नहीं, बल्कि अकाउंट सिक्योरिटी और डेटा रिकवरी सिस्टम को और मजबूत बनाना भी है। कंपनी चाहती है कि यूजर्स अपने अकाउंट में मोबाइल नंबर और अन्य सुरक्षा फीचर्स को सक्रिय करें। पुराने यूजर्स को मिलेगा पहले जैसा फायदाकंपनी ने साफ किया है कि मौजूदा यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिन यूजर्स के अकाउंट पहले से सक्रिय हैं और मोबाइल नंबर लिंक है, उन्हें Gmail, Google Drive और Google Photos के लिए पहले की तरह 15GB फ्री स्टोरेज मिलती रहेगी। सपोर्ट पेज में भी किया बदलावगूगल ने अपने सपोर्ट पेज की भाषा में भी बदलाव किया है। पहले वहां लिखा था कि हर Google अकाउंट में 15GB स्टोरेज शामिल है, लेकिन अब इसे बदलकर “अधिकतम 15GB तक स्टोरेज” कर दिया गया है। इसी बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर अटकलों का दौर शुरू हो गया था। कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?दरअसल, कुछ दिन पहले कई यूजर्स ने दावा किया था कि नया Google अकाउंट बनाते समय उन्हें केवल 5GB फ्री स्टोरेज दिखाई दी। बाद में मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के बाद 15GB स्टोरेज देने का मैसेज मिला। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि गूगल भविष्य में मुफ्त स्टोरेज लिमिट कम कर सकता है। हालांकि कंपनी के ताजा बयान के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल 15GB फ्री स्टोरेज खत्म नहीं की जा रही है और 5GB स्टोरेज सिर्फ सीमित स्तर पर की जा रही टेस्टिंग का हिस्सा है।

17 मई: नॉर्वे का राष्ट्रीय दिवस (Norwegian Constitution Day)

17 मई को हर साल नॉर्वे का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है, जिसे Constitution Day (संविधान दिवस) भी कहा जाता है। यह दिन नॉर्वे के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन साल 1814 में नॉर्वे का संविधान अपनाया गया था। यह दिन क्यों मनाया जाता है?17 मई 1814 को नॉर्वे ने अपना संविधान अपनाया और स्वतंत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव रखी। यह दिन नॉर्वे की आजादी, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इतिहास क्या है?1814 में नॉर्वे ने अपना संविधान तैयार किया यह संविधान ईड्सवोल (Eidsvoll) नामक स्थान पर अपनाया गया इसी के बाद नॉर्वे ने अपनी स्वतंत्र राष्ट्रीय पहचान मजबूत की कैसे मनाया जाता है यह दिन?नॉर्वे में यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है: बच्चों की परेड (Children’s Parades) निकाली जाती हैं लोग पारंपरिक पोशाक “बुनाद” पहनते हैं स्कूल, शहर और गांवों में झंडे फहराए जाते हैं संगीत, झंडा यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं राजधानी ओस्लो में शाही परिवार लोगों का अभिवादन करता है इस दिन का महत्वयह नॉर्वे की आजादी और लोकतंत्र का प्रतीक है यह देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है बच्चों की भागीदारी इसे और खास बनाती है यह दुनिया के सबसे खुशहाल राष्ट्रीय समारोहों में से एक माना जाता है 17 मई का दिन नॉर्वे के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, संविधान और लोकतंत्र का उत्सव है। यह दिन नॉर्वे के लोगों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ता है। -17 मई नॉर्वे का राष्ट्रीय दिवस

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day): क्यों मनाया जाता है, इतिहास, महत्व और पूरी जानकारी

हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (BP) के बारे में जागरूक करना है, क्योंकि यह एक “साइलेंट किलर” बीमारी है जो बिना लक्षण दिखाए दिल, किडनी और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस क्यों मनाया जाता है?इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि: उच्च रक्तचाप एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है समय पर जांच और इलाज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम किया जा सकता है लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें जैसे सही खान-पान, व्यायाम और तनाव कम करना नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना जरूरी है उच्च रक्तचाप क्या है?जब किसी व्यक्ति की धमनियों (arteries) में खून का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है।सामान्य BP: लगभग 120/80 mmHgहाई BP: 140/90 mmHg या उससे अधिकयह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और अक्सर लोगों को पता भी नहीं चलता। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की शुरुआत कब और किसने की?इस दिवस की शुरुआत World Hypertension League (WHL) ने की थीपहली बार इसे 2005 में मनाया गया थाबाद में इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलीइसका उद्देश्य दुनिया भर में हाई BP के प्रति जागरूकता फैलाना था इस दिन का महत्व क्या है?विश्व उच्च रक्तचाप दिवस का महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि: दुनिया में हर 3 में से 1 व्यक्ति उच्च रक्तचाप से प्रभावित है यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का प्रमुख कारण है कई लोग इसकी जांच ही नहीं कराते समय पर पहचान से जीवन बचाया जा सकता है इस दिन अस्पतालों, स्वास्थ्य संगठनों और सरकारों द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। उच्च रक्तचाप के कारणज्यादा नमक का सेवन तनाव और चिंता मोटापा शारीरिक गतिविधि की कमी धूम्रपान और शराब अनियमित जीवनशैली लक्षण (Symptoms)अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ मामलों में: सिरदर्द चक्कर आना सांस फूलना छाती में दर्द नजर धुंधली होना बचाव और नियंत्रण कैसे करें?नमक कम खाएं रोजाना व्यायाम करें (कम से कम 30 मिनट) वजन नियंत्रित रखें तनाव कम करें (योग/ध्यान) धूम्रपान और शराब से बचें नियमित BP जांच कराएंविश्व उच्च रक्तचाप दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम इस “साइलेंट किलर” से बच सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। -विश्व उच्च रक्तचाप दिवस

बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत

नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच कई लोग लगातार थकान, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। अक्सर इसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह केवल गर्मी की वजह नहीं, बल्कि शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। डिहाइड्रेशन बन रहा सबसे बड़ा कारणगर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी न पिया जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और लगातार थकान महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नारियल पानी या नींबू पानी लेते रहें। खून की कमी यानी एनीमिया भी वजहलगातार थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया भी हो सकता है। खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसमें ऑक्सीजन शरीर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे जल्दी थकान, चक्कर आना, चेहरे पर पीलापन और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। डायबिटीज और थायरॉयड का संकेत भी संभडॉक्टरों के अनुसार अगर थकान के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। वहीं थायरॉयड की समस्या में शरीर सुस्त रहता है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है। नींद और तनाव भी बढ़ा रहे समस्यालगातार मोबाइल का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और 6–7 घंटे से कम नींद लेना भी शरीर की ऊर्जा को कम करता है। इसके साथ तनाव और मानसिक दबाव शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है। गलत खानपान भी बड़ी वजहगर्मियों में जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और मीठे ड्रिंक्स शरीर को अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन पोषण नहीं देते। इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक आहार जैसे फल, दही, सलाद और घर का खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। कब हो जाएं सतर्क?अगर कई दिनों तक लगातार थकान बनी रहे, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।