नजर दोष से परेशान? परिवार और व्यापार की नकारात्मकता दूर करने के 5 असरदार उपाय

नई दिल्ली। अक्सर देखा जाता है कि सबकुछ सही चलने के बाद अचानक काम बिगड़ने लगते हैं, घर में तनाव बढ़ जाता है या व्यापार में रुकावट आने लगती है। लोक मान्यताओं और ज्योतिष के अनुसार इसे नजर दोष का प्रभाव माना जाता है। हालांकि इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन परंपराओं में बताए गए कुछ उपाय लोग लंबे समय से अपनाते आ रहे हैं, जो मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ाने में मदद करते हैं। 1. नमक, राई और लाल मिर्च का उपायमंगलवार या रविवार के दिन नमक की 7 डली, राई और 7 साबुत लाल मिर्च लेकर नजर लगे व्यक्ति पर सिर से पांव तक 7 बार उतारें और फिर चूल्हे या आग में जला दें। इस उपाय को बिना कुछ बोले करना चाहिए। 2. हनुमान चालीसा का पाठअगर आप घर से दूर हैं या खुद पर नजर लगने का एहसास हो रहा है, तो रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें। साथ ही सुंदरकांड का पाठ भी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है। 3. दुकान या ऑफिस के लिए नींबू-मिर्चकार्यस्थल या दुकान के मुख्य दरवाजे पर नींबू-मिर्च लटकाना एक आम उपाय है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और व्यापार पर लगी नजर कम होती है। 4. बच्चों की नजर उतारने का उपायअगर बच्चा चिड़चिड़ा हो गया है या बार-बार बीमार हो रहा है, तो फिटकरी और सरसों लेकर 7 बार उतारकर जला दें। छोटे बच्चों के लिए तांबे के पात्र में जल और फूल लेकर 11 बार वारकर पानी पौधों में डाल दें। 5. व्यापार में रुकावट दूर करने का उपायकाले कपड़े में फिटकरी बांधकर दुकान या ऑफिस में टांग दें। मान्यता है कि इससे बुरी नजर का प्रभाव कम होता है और व्यापार में सकारात्मकता आती है। ध्यान रखें, ये उपाय लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें अपनाने के साथ-साथ वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
शाम की ये गलतियां बना सकती हैं आपको कंगाल! वास्तु के अनुसार तुरंत बदलें आदतें

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में संध्या काल यानी शाम के समय को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि सूर्यास्त के आसपास का समय सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के संतुलन का समय होता है। इसलिए इस दौरान किए गए कार्यों का प्रभाव सीधे घर की सुख-शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि शाम के समय कुछ विशेष सावधानियां न बरती जाएं तो घर में दरिद्रता, तनाव और आर्थिक नुकसान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वास्तु शास्त्र में सबसे पहले शाम के समय झाड़ू लगाने से मना किया गया है। कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से घर की मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और इससे धन हानि की स्थिति बनती है। यही कारण है कि पुराने समय से ही शाम के बाद घर में सफाई करने या कूड़ा बाहर फेंकने से बचने की सलाह दी जाती रही है। इसके अलावा, शाम के समय किसी को पैसे उधार देना भी शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि संध्या के समय धन का लेन-देन आर्थिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है। विशेष रूप से यदि नियमित रूप से सूर्यास्त के बाद पैसे उधार दिए जाएं तो घर की बचत प्रभावित होने लगती है। वास्तु में यह भी कहा गया है कि सूर्यास्त के बाद घर को अंधेरे में नहीं रखना चाहिए। जैसे ही शाम हो, घर में दीपक या रोशनी अवश्य करनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। कई लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाते हैं, जिसे बेहद शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। शाम के समय सोना भी वास्तु के अनुसार ठीक नहीं माना जाता। माना जाता है कि संध्या के समय सोने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और मानसिक आलस्य बढ़ता है। यह आदत धीरे-धीरे कार्यक्षमता और आर्थिक प्रगति को भी प्रभावित कर सकती है। तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं और घर में आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसके बजाय सुबह और शाम तुलसी के सामने दीपक जलाना शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र में बताए गए ये नियम धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। कई लोग इन्हें सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासित जीवनशैली से जोड़कर भी देखते हैं। यदि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो घर का वातावरण सुखद और सकारात्मक बना रह सकता है।
आज का राशिफल 7 मई 2026: नौकरी, व्यापार और परिवार में कैसा रहेगा आपका दिन

नई दिल्ली। गुरुवार, 7 मई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल जहां कुछ राशियों के लिए भाग्य वृद्धि और आर्थिक उन्नति के संकेत दे रही है, वहीं कुछ लोगों को धैर्य, सावधानी और संयम बरतने की सलाह भी दी गई है। विशेष रूप से तुला राशि के जातकों के साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी तथा सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता बढ़ेगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का आज का विस्तृत राशिफल। मेष राशि के जातकों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। कार्यक्षेत्र में उत्साह बना रहेगा और व्यापार में अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा तथा परिवार के साथ सुखद समय बिताने का अवसर मिलेगा। वृष राशि वालों को कामकाज में थोड़ी धीमी गति का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन धैर्य और समझदारी से परिस्थितियां नियंत्रण में रहेंगी। यात्रा और विरोधियों से सतर्क रहने की जरूरत है। मिथुन राशि के लिए दिन लाभकारी रहेगा। व्यापार में प्रगति और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। साझेदारी से फायदा होगा और मधुर वाणी सफलता दिलाएगी। कर्क राशि वालों को अनुशासन और गंभीरता बनाए रखने की सलाह दी गई है। छोटी लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है। वरिष्ठों से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। सिंह राशि के जातकों के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी। निर्णय क्षमता मजबूत होगी और करियर में स्पष्टता आएगी। सम्मान बढ़ेगा और धन लाभ के योग बन रहे हैं। कन्या राशि वालों को पारिवारिक संबंधों में मजबूती मिलेगी और कार्यक्षेत्र में संतुलन बना रहेगा। हालांकि अतिउत्साह से बचने की सलाह दी गई है। तुला राशि के लोगों के लिए आज का दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के साथ सामाजिक सक्रियता भी बढ़ेगी। संवाद कौशल से लाभ मिलेगा और लोगों के बीच प्रभाव मजबूत होगा। वृश्चिक राशि वालों के घर-परिवार में खुशियां बनी रहेंगी। नए अवसर मिलेंगे और रिश्तों में मधुरता आएगी। धनु राशि के जातकों के लिए सकारात्मकता और जीवन स्तर में सुधार के संकेत हैं। नए प्रयोग लाभ देंगे। मकर राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने और रिश्तों में संवेदनशीलता बनाए रखने की सलाह दी गई है। कुंभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में उम्मीद से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता और सम्मान बढ़ेगा। वहीं मीन राशि के जातकों के लिए पेशेवर जीवन में सफलता और योजनाओं के सफल होने के प्रबल संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना, पीली वस्तुओं का दान देना और सकारात्मक सोच बनाए रखना शुभ फलदायी रहेगा।
शश पंचमहापुरुष योग: जब शनि देता है ऊंचाई, मेहनत को मिलती है बड़ी सफलता और सम्मान

नई दिल्ली। ज्योतिष में शनि ग्रह को लेकर लोगों के बीच अक्सर एक डर और सावधानी की भावना देखी जाती है, लेकिन इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि यही ग्रह व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। शनि केवल कठिनाइयों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार परिणाम देता है। जब शनि शुभ स्थिति में होता है, तो यह जीवन को पूरी तरह बदल सकता है। इन्हीं शुभ स्थितियों में एक विशेष योग शश पंचमहापुरुष राजयोग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब शनि अपनी राशि, उच्च स्थिति या विशेष अनुकूल भाव में केंद्र स्थान में स्थित होता है। इस स्थिति में शनि अत्यंत शक्तिशाली प्रभाव देता है और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और सम्मान का मार्ग खोलता है। ज्योतिष में इसे अत्यंत प्रभावशाली योगों में गिना जाता है। इस योग की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि यह व्यक्ति को साधारण से असाधारण बना सकता है। ऐसे लोग अपने जीवन में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, लेकिन एक समय के बाद अचानक उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है। संघर्ष के बाद मिलने वाली सफलता इन्हें और भी मजबूत बनाती है। ये लोग अपने कार्यक्षेत्र में एक अलग पहचान बनाते हैं और समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। शश योग वाले व्यक्तियों में नेतृत्व क्षमता स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। ये लोग निर्णय लेने में सक्षम होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं। इनका व्यक्तित्व गंभीर, अनुशासित और जिम्मेदार माना जाता है। यही कारण है कि ऐसे लोग अक्सर प्रशासन, राजनीति या बड़े पदों पर सफलता प्राप्त करते हैं। ज्योतिष के अनुसार इस योग का प्रभाव केवल ग्रहों की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्मों पर भी निर्भर करता है। यदि व्यक्ति मेहनत, धैर्य और सही दिशा में प्रयास करता है, तो शनि की सकारात्मक ऊर्जा और अधिक प्रभावी हो जाती है। यही कारण है कि शनि को “धीरे परिणाम देने वाला लेकिन स्थायी सफलता देने वाला ग्रह” कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि हर व्यक्ति की कुंडली में यह योग नहीं बनता, लेकिन शनि की शुभ स्थिति किसी भी व्यक्ति के जीवन में सुधार ला सकती है। सही कर्म और अनुशासन के साथ व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है, भले ही ग्रहों की स्थिति सामान्य क्यों न हो। कुल मिलाकर शश राजयोग यह संदेश देता है कि शनि से डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उसे समझने और सही तरीके से अपनाने की जरूरत है। यह योग इस बात का प्रतीक है कि मेहनत, धैर्य और समय का सही संतुलन किसी भी व्यक्ति को बड़ी सफलता तक पहुंचा सकता है और साधारण जीवन को भी असाधारण बना सकता है।
समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा

नई दिल्ली । हिंदू पौराणिक मान्यताओं में जहां मां लक्ष्मी को धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं उनकी बड़ी बहन देवी अलक्ष्मी को दरिद्रता, कलह और अशुभता का प्रतीक बताया गया है। मान्यता है कि दोनों देवियां समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, लेकिन स्वभाव और प्रभाव में एक-दूसरे के विपरीत हैं। अलक्ष्मी का प्राकट्य और स्वरूप पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले देवी अलक्ष्मी प्रकट हुईं, जिनके हाथ में मदिरा थी। उनका स्वरूप दुर्बल, लाल आंखों वाला और अस्वच्छ बताया गया है। कहा जाता है कि जहां गंदगी, झगड़ा, अधर्म और नकारात्मकता होती है, वहीं उनका वास होता है। लक्ष्मी-विवाह से जुड़ी शर्त इसके बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने की इच्छा जताई। विष्णु भी इस विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन एक शर्त आ गई—लक्ष्मी ने कहा कि पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह होगा, तभी वे स्वयं विवाह करेंगी। अलक्ष्मी का विवाह किससे हुआ? अलक्ष्मी के स्वरूप और स्वभाव के कारण कोई भी उनसे विवाह को तैयार नहीं था। तब विष्णु के आदेश पर उद्दालक ऋषि ने अलक्ष्मी से विवाह किया। विवाह के बाद जब ऋषि उन्हें अपने आश्रम ले गए, तो अलक्ष्मी ने वहां रहने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहां अत्यधिक पवित्रता और यज्ञ की सुगंध थी। कहां करती हैं निवास? अलक्ष्मी ने स्वयं बताया कि उन्हें वही स्थान प्रिय है जहां गंदगी, कलह, अधर्म, झूठ और मांस-मदिरा का सेवन होता हो। इसके बाद उद्दालक ऋषि उन्हें अस्थायी रूप से पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उचित स्थान खोजने चले गए, लेकिन लौटकर नहीं आए। कथा के अनुसार, तब भगवान विष्णु ने कहा कि पीपल वृक्ष उनका ही स्वरूप है, इसलिए अलक्ष्मी वहां निवास कर सकती हैं। तभी से माना जाता है कि अलक्ष्मी पीपल के पेड़ के नीचे रहती हैं। मान्यता और संदेश ऐसी मान्यता है कि जो लोग पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं, उन्हें अलक्ष्मी के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। यह कथा प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देती है कि जहां स्वच्छता, सत्य और सदाचार होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है, जबकि गंदगी और अधर्म अलक्ष्मी को आकर्षित करते हैं।
कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है। शुभ मुहूर्तद्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा। पूजा विधिशनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।– पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।– शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।– पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।– जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। क्या रखें ध्यान?इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।
गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मई का महीना विशेष महत्व रखता है। इस माह के मध्य में चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 18 मई को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही देवगुरु बृहस्पति स्थित हैं। इस प्रकार चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से पुराने तनाव कम हो सकते हैं, प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं और जीवन में मानसिक शांति के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा। वृषभ राशिइस राशि के लोगों को राहत महसूस हो सकती है। पुराने विवाद सुलझने लगेंगे और पारिवारिक माहौल बेहतर होगा। युवाओं की मानसिक उलझनें कम होंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। कर्क राशिकर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय में वृद्धि से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। इस दौरान यात्रा के योग भी बन सकते हैं। युवाओं को आत्मचिंतन का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बेहतर होगा। कन्या राशिकन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और रिश्तों दोनों में सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है। अविवाहित लोगों के लिए नए संबंध बनने की संभावना है। नौकरी और व्यवसाय में आय बढ़ने के संकेत हैं। निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं, जो भविष्य में लाभदायक रहेंगे। तुला राशितुला राशि वालों के जीवन में स्थिरता आने के संकेत हैं। लंबे समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होंगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। यह समय संतुलन और शांति का अनुभव कराएगा। मीन राशिमीन राशि के लोगों के लिए यह समय आत्मविश्लेषण और समझ को बढ़ाने वाला रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और मानसिक हल्कापन महसूस होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
गुण और कर्म से बनता है इंसान श्रेष्ठ: चाणक्य नीति में छिपा जीवन का मूल मंत्र

नई दिल्ली। प्राचीन भारतीय दर्शन और नीति शास्त्र में चाणक्य नीति को जीवन को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इस ग्रंथ में आचार्य चाणक्य ने इंसान के व्यवहार, सोच और कर्मों के आधार पर यह समझाया है कि एक अच्छा इंसान कौन होता है। चाणक्य के अनुसार, किसी व्यक्ति की श्रेष्ठता उसके बाहरी स्वरूप से नहीं बल्कि उसके अंदर मौजूद गुणों और उसके कार्यों से तय होती है। जो व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, कर्तव्य और नैतिकता को समझकर आगे बढ़ता है, वही वास्तव में अच्छा इंसान कहलाता है। इस नीति शास्त्र में यह स्पष्ट किया गया है कि ज्ञान केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारना जरूरी है। जो व्यक्ति सही और गलत के अंतर को समझकर निर्णय लेता है और उसी के अनुसार व्यवहार करता है, वह समाज में सम्मान प्राप्त करता है। चाणक्य ने यह भी बताया है कि हर इंसान का एक निश्चित कर्तव्य होता है, जिसे निभाना उसका धर्म है। जिस प्रकार प्रकृति में हर तत्व का अपना स्वभाव होता है, उसी तरह मनुष्य का स्वभाव भी उसके कर्मों और जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। जब कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझकर कार्य करता है, तभी उसका जीवन संतुलित और सफल बनता है। इसके अलावा चाणक्य नीति यह भी सिखाती है कि सही निर्णय लेने के लिए विवेक और अनुभव दोनों जरूरी हैं। जो व्यक्ति अपने कर्मों के परिणाम को समझकर आगे बढ़ता है, वही जीवन में स्थिरता और सफलता प्राप्त करता है। इस ग्रंथ में यह भी संदेश दिया गया है कि कर्तव्य से पीछे हटना कमजोरी है, जबकि अपने दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाना ही सच्ची मानवता है। इस प्रकार चाणक्य नीति के अनुसार अच्छा इंसान वही है जो अपने विचारों में स्पष्ट हो, कर्मों में ईमानदार हो और जीवन में धर्म तथा कर्तव्य को सर्वोपरि रखता हो। यही गुण उसे समाज में सम्मान और श्रेष्ठ स्थान दिलाते हैं।
आज का राशिफल 6 मई 2026: जोश, संयम और समझदारी का दिन-इन राशियों पर बरसेगी किस्मत, कुछ को रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली आज का दिन ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण जीवन में संतुलन, आत्मविश्लेषण और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। चंद्रमा का धनु राशि में गोचर अधिकांश लोगों में आशावाद और कुछ नया सीखने की इच्छा जगाएगा। वहीं सूर्य मेष राशि में रहकर ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता को बढ़ा रहा है, लेकिन बुध के अस्त होने से संवाद में सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है। मंगल और शनि की युति कुछ राशियों के लिए अनुशासन की परीक्षा ले सकती है। मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए आज का दिन खासतौर पर सकारात्मक है। मेष राशि के लोगों में नई चीजें सीखने का उत्साह रहेगा और आत्मविश्वास उन्हें आगे बढ़ाएगा, हालांकि खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। सिंह राशि वालों के लिए यह दिन रचनात्मकता और प्रेम संबंधों में मजबूती लेकर आएगा, लेकिन जोखिम से बचना होगा। धनु राशि के जातक ऊर्जा और आकर्षण से भरपूर रहेंगे, जिससे वे अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं। वृषभ, कन्या और मकर राशि वालों के लिए आज आत्मचिंतन और धैर्य का दिन है। वृषभ राशि के लोग भावनात्मक रूप से संवेदनशील रह सकते हैं, इसलिए हठ छोड़कर समझदारी से निर्णय लेना बेहतर होगा। कन्या राशि को घरेलू मामलों और रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। मकर राशि के लिए दिन थोड़ा शांत और आत्मविश्लेषण वाला रहेगा, जहां धैर्य ही सफलता की कुंजी बनेगा। मिथुन, तुला और कुंभ राशि के लिए आज का दिन सामाजिक संबंधों और संवाद के जरिए आगे बढ़ने का है। मिथुन राशि वालों को टीमवर्क से सफलता मिल सकती है, जबकि तुला राशि के लोग अधूरे काम पूरे करने में सफल रहेंगे। कुंभ राशि के लिए नेटवर्किंग और नए अवसरों की संभावनाएं बनेंगी, लेकिन आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है। कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को आज जिम्मेदारियों और आर्थिक मामलों पर खास ध्यान देना होगा। कर्क राशि के लिए काम और सेहत प्राथमिकता में रहेंगे। वृश्चिक राशि वालों को अचानक बदलावों और खर्चों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। वहीं मीन राशि के लिए करियर में उन्नति के अवसर बनेंगे, लेकिन पैसों के लेन-देन में लापरवाही नुकसान दे सकती है। कुल मिलाकर, आज का दिन हर राशि के लिए कुछ न कुछ खास संदेश लेकर आया है—कहीं उत्साह, कहीं सावधानी, तो कहीं आत्ममंथन। अगर आप संतुलन और समझदारी से काम लेते हैं, तो दिन को अपने पक्ष में कर सकते हैं।
क्षौर कर्म के नियम: भद्रा, श्राद्ध और आयु से जुड़ी मान्यताओं का सच, जानिए क्या है परंपरा

नई दिल्ली। हिंदू परंपरा में क्षौर कर्म को केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि एक शुद्धिकरण और अनुशासन से जुड़ी धार्मिक क्रिया माना गया है। इसमें बाल कटवाना, दाढ़ी-मूंछ बनवाना और नाखून काटना शामिल होता है। शास्त्रों और परंपराओं में इससे जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें लोग आस्था के आधार पर मानते हैं। क्या है क्षौर कर्म?क्षौर कर्म का अर्थ है शरीर की स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियाँ जैसे बाल कटवाना या मुंडन कराना दाढ़ी और मूंछ बनवाना नाखून काटना धार्मिक दृष्टि से इसे शुद्धता और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। किन दिनों में इसे टालने की परंपरा है?परंपरागत मान्यताओं में कुछ तिथियों और दिनों को क्षौर कर्म के लिए कम शुभ माना गया है, जैसे— एकादशी, अमावस्या और पूर्णिमा कुछ धार्मिक पर्व और व्रत के दिन संक्रांति के समय कुछ परंपराओं में मंगलवार और शनिवार को भी इसे टालने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह सभी जगह समान नहीं है और क्षेत्रीय परंपराओं पर निर्भर करता है। भद्रा और मुहूर्त का महत्वशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य, जिसमें क्षौर कर्म भी शामिल है, करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसलिए कई लोग शुभ मुहूर्त देखकर ही यह कार्य करते हैं। श्राद्ध से जुड़ी परंपराश्राद्ध कर्म के समय शुद्धता और नियमों का विशेष महत्व माना गया है। इसी कारण श्राद्ध करने से पहले शरीर की स्वच्छता पर ध्यान देने की परंपरा रही है, जिसमें क्षौर कर्म को भी शामिल किया जाता है। आयु से जुड़ी मान्यताएंकुछ परंपराओं में अलग-अलग दिनों में क्षौर कर्म करने को लेकर आयु बढ़ने या घटने जैसी मान्यताएं प्रचलित हैं। लेकिन यह पूरी तरह धार्मिक आस्था और लोकविश्वास पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।