वास्तु टिप्स: थाली में 3 रोटी परोसना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इसके पीछे की मान्यताएं और नियम

नई दिल्ली । भारतीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं में भोजन को केवल शरीर की आवश्यकता नहीं बल्कि ऊर्जा और संस्कार से भी जुड़ा माना गया है। इसी संदर्भ में Vastu Shastra में भोजन से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनमें सबसे चर्चित नियम थाली में तीन रोटियों को लेकर है। आमतौर पर घरों में बड़े-बुजुर्ग यह कहते सुनाई देते हैं कि एक साथ तीन रोटियां परोसना शुभ नहीं माना जाता। इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह बताई जाती है कि तीन रोटियों की थाली मृतक के लिए किए जाने वाले भोजन से जुड़ी होती है। ऐसी परंपरा में त्रयोदशी संस्कार से पहले मृत व्यक्ति के नाम की थाली में तीन रोटियां रखी जाती हैं, जिसके कारण यह संख्या सामान्य जीवन में वर्जित मानी जाने लगी। मान्यता यह भी कहती है कि भोजन की थाली में तीन रोटियां परोसने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। कुछ परंपराओं में इसे मानसिक असंतुलन या अशुभ संकेत से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भोजन हमेशा संतुलित और व्यवस्थित तरीके से परोसा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन में संख्या का संतुलन ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करता है। इसलिए अक्सर 2 या 4 के रूप में रोटियां परोसने की सलाह दी जाती है, जिसे सकारात्मकता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को अधिक रोटियों की आवश्यकता हो, तो उन्हें एक साथ परोसने के बजाय धीरे-धीरे एक-एक करके देना बेहतर होता है। इससे परंपरा का पालन भी होता है और भोजन भी ताजा बना रहता है। भोजन करते समय दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। साथ ही भोजन स्थल की साफ-सफाई भी सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुल मिलाकर, तीन रोटी से जुड़ा यह नियम मुख्य रूप से परंपरा और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित है, जिसे आज भी कई परिवार अपनाते हैं। हालांकि आधुनिक समय में इसे लोग आस्था और आदत के रूप में देखते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य भोजन में अनुशासन और संतुलन बनाए रखना बताया जाता है।
आज का राशिफल: 6 जून को कई राशियों के करियर और वित्त में बड़े बदलाव के संकेत, कुछ रहें सतर्क

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार 6 जून 2026, शनिवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर कई राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। कुछ राशियों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी, जबकि कुछ को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मेष राशि – नौकरी में तरक्की के योग हैं, लेकिन अनावश्यक खर्च और वाणी पर नियंत्रण जरूरी है। पारिवारिक तनाव भी हो सकता है। वृषभ राशि – आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यापार में उन्नति होगी, लेकिन शत्रुओं से सतर्क रहें। मिथुन राशि – मान-सम्मान बढ़ेगा। नए व्यापारिक सौदे मिल सकते हैं और आर्थिक योजनाएं सफल होंगी। कर्क राशि – आर्थिक लाभ के योग हैं, लेकिन विवाद और कानूनी मामलों से बचना जरूरी है। सिंह राशि – सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन प्रेम जीवन और धन मामलों में सावधानी रखें। कन्या राशि – जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। कामकाज में सुधार होगा और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। तुला राशि – करियर में बड़े बदलाव संभव हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और यात्रा के योग बन सकते हैं। वृश्चिक राशि – शुभ समाचार मिल सकता है। आय में वृद्धि होगी, लेकिन धन लेन-देन में सतर्क रहें। धनु राशि – भागदौड़ बढ़ सकती है। मानसिक तनाव और अनजान लोगों से लेन-देन से बचें। मकर राशि – यात्रा के योग हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी, लेकिन सेहत का ध्यान रखें। कुंभ राशि – आय में वृद्धि होगी। परिवार से शुभ समाचार मिल सकता है, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। मीन राशि – आकस्मिक धन लाभ के योग हैं। नौकरी और व्यापार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 6 जून का दिन कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर में उन्नति लेकर आ सकता है, जबकि कुछ को स्वास्थ्य, धन और संबंधों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
शनिवार के लिए वास्तु टिप्स: शनि दोष से बचाव और सुख-समृद्धि के आसान उपाय

नई दिल्ली । शनिवार का दिन हिंदू मान्यताओं में विशेष महत्व रखता है, खासकर Shani Dev से जुड़ी परंपराओं के कारण। इस दिन किए गए छोटे-छोटे वास्तु उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक माने जाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। शनिवार के दिन कुछ विशेष उपाय अपनाकर नकारात्मक ऊर्जा को कम किया जा सकता है और सकारात्मक वातावरण को बढ़ाया जा सकता है। कहा जाता है कि इस दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के उत्तर-पश्चिम दिशा को साफ और व्यवस्थित रखने से मानसिक शांति और नए अवसरों के संकेत मिलते हैं। वहीं, पुराने और टूटे-फूटे सामान को घर से हटाना भी शुभ माना जाता है। शनिवार को तेल से जुड़े उपाय भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दीपक जलाना और घर के मुख्य द्वार पर साफ-सफाई रखना सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसके साथ ही लोहे से जुड़े दान या जरूरतमंदों की मदद करने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर में हल्के और शांत रंगों का उपयोग मानसिक स्थिरता को बढ़ाता है। वहीं, भारी और अव्यवस्थित स्थान ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकते हैं। शनिवार के दिन संयम और अनुशासन का पालन करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह दिन आत्मचिंतन और सुधार का अवसर देता है, जिससे जीवन में संतुलन स्थापित होता है। कुल मिलाकर, शनिवार के छोटे-छोटे वास्तु उपाय न केवल घर के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं, बल्कि जीवन में स्थिरता और प्रगति के संकेत भी मजबूत करते हैं।
ज्येष्ठ कालाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां: काल भैरव की नाराजगी से बढ़ सकती हैं जीवन में परेशानियां, जानें शुभ-अशुभ नियम

नई दिल्ली । सनातन धर्म में आध्यात्मिक साधना और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कालाष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाली मासिक कालाष्टमी 8 जून, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 जून को तड़के सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 9 जून को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस विशेष दिन पर भगवान शिव के रौद्र रूप और अंशावतार भगवान काल भैरव की प्राकट्य पूजा और व्रत का विधान है, जो जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की आराधना करने से जीवन में व्याप्त किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का प्रभाव और मानसिक भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा राहु और केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे हों, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित घोषित किया गया है, जिन्हें करने से साधक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कालाष्टमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण नियम पशु सेवा से जुड़ा है। सनातन परंपरा में श्वान (कुत्ते) को भगवान काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी कुत्ते को मारना, डांटना या उसे जूते-चप्पल दिखाना महापाप की श्रेणी में आता है। ऐसा करने से काल भैरव तत्काल रुष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही, इस दिन कुत्ते को कभी भी जूठा भोजन या अपवित्र अन्न नहीं देना चाहिए। इसके विपरीत, इस शुभ तिथि पर काले कुत्ते को ताजी एवं मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, उनके लिए खान-पान के कड़े नियम निर्धारित हैं। कालाष्टमी के व्रत में सामान्य नमक या समुद्री नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे व्रत खंडित होने का दोष लगता है जिसके परिणाम जीवन में कष्टकारी हो सकते हैं। व्रत न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस दिन पूरी तरह सात्विकता का पालन करना चाहिए। इस तिथि पर मदिरापान और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से पूर्ण दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि अनजाने में किया गया ऐसा कृत्य भी गंभीर दोष का कारण बनता है। शास्त्रों में भगवान काल भैरव को ‘दंडपाणि’ भी कहा गया है, जिसका अर्थ है अन्याय और अधर्म के मार्ग पर चलने वालों को कड़ा दंड देने वाला। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य, झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या छल-कपट करने से बचना चाहिए। इस दिन किए गए गलत कार्यों का परिणाम बेहद कष्टप्रद हो सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कम से कम सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक इन कड़े नियमों और मर्यादाओं का अक्षुण्ण पालन करना अनिवार्य बताया गया है। नकारात्मकता को दूर करने और पुण्य फल की प्राप्ति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं। कालाष्टमी के पावन अवसर पर किसी भी काल भैरव मंदिर में जाकर उनके सम्मुख सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके अलावा, मंदिर में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करने से पितृदोष और ग्रह बाधाओं से शांति मिलती है। इस दिन छोटे बालकों को उनकी प्रिय वस्तुएं या मिष्ठान भेंट करना भी पारिवारिक समृद्धि और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
शुक्रवार को अपनाएं ये आसान उपाय, धन लाभ और समृद्धि के बन सकते हैं योग

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन विधिवत पूजा और कुछ सरल उपाय करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जीवन में आर्थिक प्रगति और सुख-शांति का संचार होता है। मां लक्ष्मी को चढ़ाएं एक रूपए का सिक्काशुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के सामने एक रूपए का सिक्का रखकर पूजा करना शुभ माना गया है। पूजा और आरती के बाद अगले दिन इस सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से धन संबंधी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और सौभाग्य का योग बनता है। नीम के पेड़ में जल अर्पित करेंनीम के पेड़ को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ में जल चढ़ाने से ग्रह दोषों में कमी आती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। यह उपाय मानसिक शांति भी प्रदान करता है। मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा और मंत्र जापशुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा के साथ लक्ष्मी चालीसा या विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ माना गया है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। कमल का फूल अर्पित करना है शुभमां लक्ष्मी को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। शुक्रवार के दिन सफेद या गुलाबी कमल अर्पित करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। चींटियों को चीनी खिलाने का उपायकाली चींटियों को चीनी खिलाना शुक्रवार के दिन शुभ माना गया है। इससे रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं। सफेद वस्तुओं का दान करेंशुक्रवार को दूध, दही, चीनी और आटे जैसी सफेद वस्तुओं का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और शुक्र ग्रह मजबूत होता है। शुक्र मंत्र का जाप है अत्यंत प्रभावशुक्रवार के दिन इस मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है: “ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्।” यह मंत्र जीवन में स्थिरता, सौभाग्य और आर्थिक उन्नति लाने वाला माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ यदि शुक्रवार के इन सरल उपायों को अपनाया जाए, तो जीवन में आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
ज्योतिषाचार्य की सलाह: शुक्रवार के उपाय से बदल सकती है किस्मत, दूर होंगे आर्थिक संकट

नई दिल्ली: सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, इन उपायों से न केवल आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। झाड़ू का दान: दरिद्रता दूर करने का सरल उपायज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार के दिन मंदिर में झाड़ू का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे गुप्त दान की श्रेणी में रखा गया है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। शिवलिंग पर गुलाब अर्पित करेंशुक्रवार को शिवलिंग पर गुलाब का फूल चढ़ाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुलाब में माता पार्वती का वास होता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। कौड़ियां और गोमती चक्र से बढ़ेगा धन योगमां लक्ष्मी को कौड़ियां और गोमती चक्र अर्पित करना भी शुभ माना गया है। ज्योतिष के अनुसार इससे आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और धन प्राप्ति के नए योग बनते हैं। यह उपाय समृद्धि बढ़ाने में सहायक माना जाता है। चावल और गन्ने के रस का उपायशुक्रवार को दोनों हाथों में चावल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होने की मान्यता है। वहीं शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती आने की बात कही जाती है। अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ है बेहद प्रभावीज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार के दिन अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। नियमित पाठ से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में धन, वैभव तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ इन सरल उपायों को अपनाया जाए, तो जीवन में आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से समृद्धि के नए रास्ते खुल सकते हैं।
तुला राशि का आज का राशिफल: मिला-जुला दिन, कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी

नई दिल्ली । तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव के चलते मिला-जुला रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है, जिससे कामकाज में थोड़ी अस्थिरता महसूस हो सकती है। ऐसे में किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में लेने से बचने की सलाह दी गई है। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार आज का दिन धैर्य और संतुलन बनाए रखने का है। नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय फिलहाल टालना बेहतर रहेगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके। कार्यस्थल पर सोच-समझकर उठाएं कदमतुला राशि के जातकों को आज अपने कार्यक्षेत्र में पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना और किसी भी विवाद से दूर रहना लाभकारी होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को निवेश या नए सौदों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। आज का दिन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठीक है, लेकिन उन्हें अंतिम रूप देने से पहले दोबारा विचार करना जरूरी रहेगा। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी आर्थिक या मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। सेहत और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरतआज तुला राशि वालों को अपनी सेहत और खानपान पर खास ध्यान देना होगा। अनियमित दिनचर्या या लापरवाही से शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही मानसिक तनाव से बचने के लिए खुद को शांत रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज का दिन संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और सकारात्मक सोच के साथ बेहतर बनाया जा सकता है। अत्यधिक भागदौड़ या तनावपूर्ण परिस्थितियों से दूरी बनाए रखना ही सही रहेगा। मानसिक संतुलन और संयम से मिलेगा लाभतुला राशि के जातकों के लिए आज का सबसे बड़ा मंत्र धैर्य और संयम है। भावनाओं में बहकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक बहस या विवाद से दूरी बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। दिन के दूसरे हिस्से में स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है, लेकिन इसके लिए सकारात्मक सोच और शांत व्यवहार जरूरी होगा। यदि आप संतुलन बनाए रखते हैं तो दिन सामान्य रूप से सफल और स्थिर रह सकता है। आज का दिन तुला राशि के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी है, वहीं दूसरी ओर संयम और धैर्य से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। सेहत और मानसिक शांति पर ध्यान देकर ही दिन को सफल बनाया जा सकता है।
आज का राशिफल 5 जून 2026: कन्या राशि वालों के लिए बड़ी सफलता के संकेत, जानें सभी राशियों का हाल

नई दिल्ली । 5 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार मिश्रित परिणाम लेकर आ रहा है। कुछ राशियों के लिए यह दिन तरक्की और लाभ का संकेत दे रहा है, वहीं कुछ के लिए संयम और सतर्कता जरूरी होगी। मेष से कर्क राशिफल: आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का दिनमेष राशि: अधिकारों की रक्षा में सफलता मिलेगी। सरकारी कामों में प्रगति संभव है।वृष राशि: भाग्य का साथ मिलेगा, करियर में सकारात्मकता बनी रहेगी।मिथुन राशि: सेहत और नियमों पर ध्यान दें, खर्च बढ़ सकता है।कर्क राशि: घर में खुशियों का माहौल रहेगा और आर्थिक कार्यों में सुधार होगा। सिंह से वृश्चिक राशिफल: सावधानी और अवसर दोनोंसिंह राशि: करियर में धैर्य रखें और खर्च पर नियंत्रण जरूरी है।कन्या राशि: मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा, व्यापार में लाभ के योग हैं और मनोबल ऊंचा रहेगा।तुला राशि: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खरीदारी के अवसर मिलेंगे, लेकिन विवाद से बचें।वृश्चिक राशि: व्यापार में तेजी आएगी और प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलेगी। धनु से मीन राशिफल: प्रगति और संतुलन का समयधनु राशि: पारिवारिक और आर्थिक जीवन में सुधार होगा।मकर राशि: रचनात्मक कार्यों में सफलता और नए अवसर मिलेंगे।कुंभ राशि: धैर्य और अनुशासन से आगे बढ़ें, खर्च नियंत्रित रखें।मीन राशि: आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। 5 जून 2026 का दिन कई राशियों के लिए शुभ संकेत दे रहा है, खासकर कन्या, तुला और मीन राशि वालों के लिए यह दिन लाभदायक साबित हो सकता है। कुछ राशियों को संयम और सतर्कता के साथ निर्णय लेने की सलाह दी गई है।
15 जून से शुरू होंगे भीमाशंकर के दर्शन, उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखने वाले महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रसिद्ध भीमाशंकर मंदिर के कपाट आगामी 15 जून 2026 से श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाएंगे। विकास और जीर्णोद्धार कार्यों के चलते पिछले करीब पांच महीनों से इस ऐतिहासिक मंदिर में आम भक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करने और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के उद्देश्य से जनवरी महीने से ही मंदिर को बंद रखने का निर्णय लिया था। अब बुनियादी ढांचे के विकास का पहला चरण पूरा होने के बाद शिव भक्तों का लंबा इंतजार समाप्त होने जा रहा है और मंदिर परिसर एक बार फिर जय भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान होने के लिए तैयार है। इस धार्मिक स्थल को अस्थाई रूप से बंद किए जाने का मुख्य कारण आगामी वर्ष 2027 में नासिक के त्र्यंबकेश्वर तीर्थ में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला है। इस वैश्विक आयोजन के दौरान महाराष्ट्र के सभी प्रमुख और पौराणिक तीर्थस्थलों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने की संभावना है। इसी भविष्यगामी भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भीमाशंकर मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू करवाए गए थे। इन पांच महीनों की अवधि के दौरान मंदिर के मुख्य मुख्य मार्ग, प्रवेश व निकास द्वारों को चौड़ा करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के ठहरने और विश्राम करने के लिए विशेष बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है ताकि कुंभ मेले के समय किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भीमाशंकर मंदिर में दर्शन व्यवस्था को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कई कड़े और नए नियम भी लागू किए जा रहे हैं। अब यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्व ऑनलाइन पंजीकरण कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। दर्शन के लिए स्लॉट बुक करने की ऑनलाइन प्रक्रिया 5 जून 2026 से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दी जाएगी। मंदिर प्रबंधन समिति ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में प्रतिदिन केवल सीमित संख्या में ही पंजीकृत श्रद्धालुओं को गर्भगृह और मुख्य परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिससे कतार प्रबंधन को बेहतर ढंग से संभाला जा सके और वीआईपी व आम भक्तों के बीच संतुलन बना रहे। प्रशासन ने देश भर से आने वाले शिव भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के नए नियमों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग न केवल एक महान धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह अपने अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और वन्यजीव अभ्यारण्य के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों और ट्रैकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित होने के कारण यहां पहुंचने का मार्ग पहाड़ी और घुमावदार है। श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए पुणे जंक्शन और कर्जत रेलवे स्टेशन से राज्य परिवहन की विशेष बसों और टैक्सियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे जून के महीने में मानसून की शुरुआत के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परिवहन संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।
निर्जला एकादशी 2026: व्यापार में उन्नति और मानसिक शांति के लिए इस बार बेहद खास हैं ये ज्योतिषीय उपाय

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बेहद खास और पवित्र माना गया है। इस वर्ष निर्जला एकादशी का महापर्व 25 जून 2026 को मनाया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह केवल एक पारंपरिक उपवास नहीं है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक दिशा में ले जाने का एक बड़ा माध्यम है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए पूरी निष्ठा से व्रत का पालन करते हैं, उन्हें साल भर की सभी चौबीस एकादशियों के समान ही पुण्यफल प्राप्त होता है। ज्योतिषीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्रत व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ उसकी मानसिक क्षमताओं का विकास करने में भी सहायक सिद्ध होता है। इस पावन पर्व का संबंध महाभारत काल की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कथा से जुड़ा हुआ है। पांडव भाइयों में भीमसेन अपनी अत्यधिक भूख के कारण हर महीने आने वाली एकादशियों का नियमित व्रत रखने में असमर्थ थे। अपनी इस विवशता को लेकर जब वे महर्षि वेदव्यास जी के पास पहुंचे, तब व्यास जी ने उन्हें एक सरल किंतु बेहद कठिन मार्ग सुझाया। उन्होंने भीम को समझाया कि यदि वे ज्येष्ठ मास की इस मुख्य एकादशी पर बिना पानी पिए पूर्ण निष्ठा के साथ निर्जल उपवास रखें, तो उन्हें वर्ष भर की समस्त एकादशियों का लाभ एक साथ मिल जाएगा। भीम ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए इस कठिन व्रत को पूरा किया, जिसके बाद से ही सनातन समाज में इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्जला एकादशी का सीधा संबंध ब्रह्मांड में चंद्रमा की ऊर्जा से माना गया है। इस दिन किया जाने वाला मानसिक और शारीरिक संयम व्यक्ति के चित्त को स्थिर रखता है और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करता है। यह विशेष तिथि भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के तत्वों को अत्यधिक बल प्रदान करती है, जिसके कारण यह दिन केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रहता बल्कि कुंडली में ग्रहों के संतुलन को ठीक करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। यही वजह है कि करियर और व्यापार में लंबे समय से गतिरोध का सामना कर रहे जातकों के लिए इस दिन कुछ विशेष उपायों को आजमाना बेहद फलदायी माना जाता है। इस शुभ अवसर पर व्यापारिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का स्मरण करने का विधान है। सुबह या शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाकर ‘ओम् नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर हल्दी व केसर मिश्रित गंगाजल का छिड़काव करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और घरेलू कलह का नाश होता है। आर्थिक समृद्धि के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में ग्यारह पीली कौड़ियां रखकर उन पर हल्दी का तिलक लगाने और पूजा के बाद उन्हें तिजोरी में सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है, जिससे अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रहता है। विद्यार्थियों के लिए भी यह दिन एकाग्रता बढ़ाने का एक उत्तम अवसर लेकर आता है। जो छात्र पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, वे अपनी अध्ययन सामग्री पर हल्दी का छोटा तिलक लगाकर विष्णु सहस्त्रनाम का श्रवण कर सकते हैं, जिससे उनकी स्मरण शक्ति मजबूत होती है। सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से इस दिन स्वयं निर्जल रहकर बेजुबान पक्षियों के लिए स्वच्छ जल पात्र की व्यवस्था करना सूर्य और गुरु ग्रह को शुभ फल देने के लिए प्रेरित करता है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर शंखध्वनि करने से वातावरण शुद्ध होता है और व्यापारिक निर्णय लेने की क्षमता में स्पष्टता आती है। इस दिन परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर कम से कम आधा घंटा विष्णु कथा का पाठ करने से आपसी मतभेद दूर होते हैं। व्रत की पूर्णता के लिए केवल भूखा-प्यासा रहना ही काफी नहीं है, बल्कि इस दिन क्रोध, असत्य और किसी के अपमान की भावना का पूरी तरह त्याग कर मन को शुद्ध रखना अनिवार्य माना गया है।