महाशिवरात्रि 2026: महादेव क्यों पहनते हैं सांपों की माला? वासुकी नाग से जुड़ी कथा और ज्योतिषीय मान्यता

नई दिल्ली । सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए शुभ होता है और मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।भगवान शिव का स्वरूप रहस्यमयी और अलौकिक है। जहां अन्य देवता स्वर्ण आभूषण धारण करते हैं, वहीं महादेव भस्म, रुद्राक्ष और सांप को अपने आभूषण के रूप में अपनाते हैं। इसी कारण शिव को ‘नागेश्वर’ भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे। समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों ने समुद्र से अमृत और कई रत्नों के साथ-साथ हलाहल विष निकाला, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर भारी पड़ने लगा। इस विष को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में हलाहल विष पी लिया, जिससे उनका शरीर जलने लगा। इस संकट की घड़ी में वासुकी ने भी महादेव का साथ दिया और विष के प्रभाव को सहने में उनकी मदद की। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में धारण करने का वरदान दिया और तभी से वासुकी अमर हो गए। यही कारण है कि भगवान शिव अपने गले में सांपों की माला धारण करते हैं। शिव और नाग के इस संबंध का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इन ग्रंथों में शिव-नाग की कथा का विस्तार से वर्णन है और इसे भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शिव के साथ नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। खासकर महाशिवरात्रि या सोमवार के दिन चांदी के नाग-नागिन की जोड़ी अर्पित करने से राहु-केतु शांत होते हैं और जीवन में बाधाओं से मुक्ति मिलती है। महाशिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और बेलपत्र अर्पित करते हैं। वहीं नाग-नागिन की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। इस महापर्व के दिन भक्त विशेष व्रत रखते हैं और रात भर जागरण करके शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शिव-प्रसाद का आयोजन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
Aamlaki Ekadashi 2026 : फरवरी में आमलकी एकादशी कब? ये हर पाप से मुक्ति का दिन, काशी के पंडित से जानें तरीका

नई दिल्ली । इस एकादशी पर व्रत से सभी पापों का नाश होता है. आंवले के पेड़ की पूजा का विधान है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में काशी के पंडित संजय उपाध्याय से बात की. वे बताते हैं कि भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित मुराद पूरी होती है. आमलकी एकादशी व्रत विधि वाराणसी. सनातन धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्त्व है. हर महीने में दो एकादशी का व्रत होता है पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. फरवरी महीने में भी दो एकादशी के व्रत हैं . इसी महीने में आमलकी एकादशी भी पड़ रही है. इस एकादशी के व्रत से सभी पापों का नाश होता है. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जानते हैं. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है. इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा से भगवान विष्णु के पूजन का फल मिलता है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि 26 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. क्या है पूजा का शुभ समय आमलकी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 9 बजकर 40 मिनट तक का समय बेहद शुभ है. इस समय में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. बाघ को मनुष्य योनी पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से दैवत्य की प्राप्ति होती है. कथाओं के मुताबिक, इस व्रत के प्रभाव से ही व्याघ्र (बाघ) को मनुष्य की योनि प्राप्त हुई थी. इस व्रत से मनुष्य की आर्थिक समस्याएं भी दूर होती हैं और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है. रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गवना कराते हैं. इस दौरान बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों के साथ जमकर होली खेलते हैं. काशी में इस दिन से शुरू हुआ रंगोत्सव होली तक चलता है. सदियों से यह परम्परा चली आ रही है.
महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत
नई दिल्ली। फरवरी का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हमेशा खास माना जाता है। इस दौरान कई व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार करते हैं। इस बार भी महाशिवरात्रि के तुरंत बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण काल भी माना जाता है। सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी। फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है। कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके। कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।
शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन

उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव धूमधाम और श्रद्धा-उल्लास के साथ जारी है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सुबह श्री गणेश पूजन के साथ ही श्री कोटेश्वर महादेव का विशेष पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई। श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही। दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना। शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके। विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।
आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल

मेष राशि :- लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। शुभांक-3-6-8 वृष राशि :- अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। विद्यार्थियों को लाभ। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। शुभांक-6-7-9 मिथुन राशि :- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। महत्त्वपूर्ण कार्यों को आज ही निबटा लें उसके बाद समय व्ययकारी सिद्घ होगा। शुभांक-3-4-8 कर्क राशि :- मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। संतान की उन्नति के योग हैं। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। शुभांक-4-8-9 सिंह राशि :- संतान पक्ष की समस्या समाप्त होगी। महत्त्वपूर्ण निर्णय के लिए दूरदर्शिता से काम लें। भावनाओं का उद्वेग बढ़ेेगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-6-8-9 कन्या राशि :- पुराने मित्र से मिलन होगा। निर्मूल शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते है। व्यापार में वृद्घि होगी। यश-प्रतिष्ठा में वृद्घि होगी। स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान रहें। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। कुछ प्रतिकूल गोचर का क्षोभ दिन-भर रहेगा। शुभांक-4-2-9 तुला राशि :- माता पक्ष से विशेष लाभ होगा। रुपए पैसों की सुविधा नहीं मिल पाएगी। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। खान-पान में सावधानी रखें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। शुभांक-6-8-9 वृश्चिक राशि :- नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर बना रहेगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में सम्मान बढ़ेगा। शुभांक-2-6-7 धनु राशि :- कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते है। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। सभा-गोष्ठियों में सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। अपने काम को प्राथमिकता से करें। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ हो रहे हैं। शुभांक-3-7-9 मकर राशि :- कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। साथी अथवा यार दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। किसी कार्य विशेष के लिए यात्रा आवश्यक होगी। शुभांक-6-7-8 कुम्भ राशि :- शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते हैं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। आलस्य का त्याग करें। काम पर पैनी नजर रखिए। सब्र का फल मीठा होता है अत: धैर्य रखें व अच्छे समय इन्तजार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। शुभांक-2-5-7 मीन राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। सफलता मिलेगी। शुभांक-3-7-8
08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय
नई दिल्ली । आज 08 फरवरी 2026, रविवार को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पूजा-पाठ, जप-तप और व्रत-अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होती है, जिसे आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। वहीं शुभ कार्यों की योजना बनाते समय अभिजीत और अमृत काल को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है। आज के पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 7 बजकर 17 मिनट से 9 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान, योग और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम समय है। अशुभ काल की बात करें तो आज राहुकाल शाम 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। यम गण्ड दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से 2 बजकर 04 मिनट तक और कुलिक काल 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक तथा वर्ज्यम् काल सुबह 8 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य का उदय सुबह 7 बजकर 07 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय 9 फरवरी की रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 9 फरवरी को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर रहेगा। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मक फल प्रदान करते हैं, इसलिए दिन की योजना पंचांग के अनुसार बनाना लाभकारी माना जाता है। शुभ काल:अभिजीत मुहूर्त – 12:18 PM – 01:03 PMअमृत काल – 07:17 PM – 09:03 PMब्रह्म मुहूर्त – 05:30 AM – 06:18 AM अशुभ काल:राहुकाल – 04:51 PM – 06:14 PMयम गण्ड – 12:41 PM – 02:04 PMकुलिक – 03:27 PM – 04:51 PMदुर्मुहूर्त – 04:45 PM – 05:30 PMवर्ज्यम् – 08:40 AM – 10:26 AM सूर्य और चंद्रमा का समय:सूर्योदय – 07:07 AMसूर्यास्त – 06:14 PMचन्द्रोदय – 09 फरवरी, 12:18 AMचन्द्रास्त – 09 फरवरी, 11:23 AM
आज फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी, स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग

नई दिल्ली। 08 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि है। आज रविवार का दिन है और सप्तमी तिथि पर स्वाति नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त: 12:18 PM – 01:03 PM अमृत काल: 07:17 PM – 09:03 PM ब्रह्म मुहूर्त: 05:30 AM – 06:18 AM अशुभ मुहूर्त:राहू काल: 04:51 PM – 06:14 PM यम गण्ड: 12:41 PM – 02:04 PM कुलिक: 03:27 PM – 04:51 PM दुर्मुहूर्त: 04:45 PM – 05:30 PM वर्ज्यम्: 08:40 AM – 10:26 AM सूर्य और चंद्रमा का समय: सूर्योदय: 07:07 AM सूर्यास्त: 06:14 PM चन्द्रोदय: Feb 09, 12:18 AM चन्द्रास्त: Feb 09, 11:23 AM विशेष जानकारी:आज स्वाति और विशाखा नक्षत्र के संयोग के कारण नये कार्य, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए शुभ समय माना जाता है। अभिजीत और अमृत मुहूर्त में किए गए कार्य लाभकारी रहेंगे। वहीं, राहू काल और दुर्मुहूर्त में किए गए कार्य से बचना चाहिए क्योंकि ये अशुभ परिणाम दे सकते हैं। सूर्य और चंद्रमा के समय के अनुसार पूजा, उपासना और ध्यान के लिए भी सही समय का चुनाव किया जा सकता है। रविवार होने के कारण सूर्य देव की आराधना करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!

नई दिल्ली । Mahashivratri 2026 Date: भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भक्त उपवास रखकर शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक और पूजा करते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान शिव को क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है और किन चीजों को चढ़ाने से बचना चाहिए. महादेव को क्या अर्पित करें? शिवजी को सादगी प्रिय है. यदि आप पूरी श्रद्धा से ये चीजें अर्पित करते हैं, तो आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं.बेलपत्र: महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा न हो और उसमें तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों.धतूरा और भांग: ये चीजें शिवजी को नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में चढ़ाई जाती हैं.कच्चा दूध और गंगाजल: शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए शुद्ध कच्चा दूध और गंगाजल सबसे उत्तम माना जाता है.चंदन: शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं. इससे मन को शांति मिलती है अक्षत (चावल): पूजा में साबुत चावल का प्रयोग करें. टूटे हुए चावल खंडित कभी न चढ़ाएं भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें !केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था.तुलसी दल: भगवान शिव ने जालंधर असुर का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) थी. इसलिए तुलसी शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती.सिंदूर या कुमकुम: महादेव वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं.शंख से जल: शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख वर्जित माना जाता है. पूजा के दौरान न करें ये गलतियां कभी भी खंडित शिवलिंग की पूजा न करें. हालांकि, नर्मदेश्वर शिवलिंग को अपवाद माना जाता है. जल चढ़ाने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के लिए चांदी या स्टील के बर्तन का प्रयोग करें. शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. हमेशा आधी परिक्रमा करें और जहां से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी न लांघें. महाशिवरात्रि व्रत का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा करते हैं. महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह व्रत आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,जो भक्त सच्चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी

नई दिल्ली । देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव महाशिवरात्रि पर इस साल 12 दुर्लभ योग बनेंगे। तीन सौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब दस से अधिक योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है, इसलिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक खुला रहेगा। 15 फरवरी को भोर सवा दो बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात आरती के बाद बंद होंगे। 14 से 17 फरवरी तक स्पर्श और सुगम दर्शन पर रोक रहेगी। इस बार के 12 योगप्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव। इससे पहले 2024 में शिवरात्रि पर 11 योग बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर सृष्टि में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आदियोगी ने पार्वती के साथ गृहस्थ लीला रची थी। ज्योतिषीय लाभज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, तीन सौ वर्षों में दूसरी बार बनने वाले ये योग मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी होंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी शाम 05:35 बजे समाप्त होगी। योगों का क्रम:-सुबह 05:45 से शिवयोग06:43–09:37 सर्वार्थसिद्धि योग11:19–11:23 प्रीति योग12:17–13:54 आयुष्मान योग17:07–17:53 सौभाग्य योग19:47–20:34 शोभन योग20:54–22:02 साध्य योग22:42–23:58 शुक्ल योग00:54–02:54 राज योग02:57–05:53 ध्रुव योग प्रहरवार अभिषेक और मंत्र जप:-प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक, ऊँ ह्रीं ईशान्य नमःद्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, ऊँ ह्रीं अघोराय नमःतृतीय प्रहर: देशी घी से अभिषेक, ऊँ ह्रीं वामदेवाय नमःचतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक, ऊँ ह्रीं सध्योजाताय नमः तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ:-मेष: वित्तीय लाभ, पदोन्नति, नेतृत्व क्षमता में विकासमिथुन: पेशेवर जीवन में ऊँचाई, बड़े व्यापारिक अवसरसिंह: धनागमन, अचल संपत्ति में वृद्धि काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती का क्रम:-मंगला आरती: 02:15–03:15; 03:30 से दर्शनमध्याह्न भोग आरती: 11:40–12:20 चारों प्रहर की आरती:-प्रथम प्रहर: 21:00–00:30द्वितीय प्रहर: 01:30–02:30तृतीय प्रहर: 03:30–04:30चतुर्थ प्रहर: 05:00–06:15 इस बार की महाशिवरात्रि अपने दुर्लभ 12 योगों और विशेष प्रहरवार आरती के कारण श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।