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MP का चमत्कारी मंदिर, 111 साल से लगातार जल रही अखंड ज्योत, दर्शन करने से मनोकामना होती है पूरी

रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में 250 साल पुराने मां कंकाली मंदिर में 111 साल से अखंड ज्योत जल रही है। मंदिर से जुड़े कई चमत्कारी किस्से भक्तों द्वारा सुनाए जाते हैं। इनमें से एक है कि सामान्य समय में माता की गर्दन थोड़ी टेढ़ी रहती है लेकिन दशहरे के दिन हवन के बाद कुछ क्षणों के लिए उनकी गर्दन सीधी हो जाती है। मंदिर रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 28 किलोमीटर दूर भोजपुर विधानसभा के ग्राम गुदावल में स्थित है। यहां कहा जाता है कि मां कंकाली के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। सपने से मंदिर की स्थापना ग्रामीणों के अनुसार गांव के पटेल हरलाल मीणा को मां ने सपना दिखाया कि इस स्थान पर खुदाई करके उनकी मूर्ति निकाली जाए। सन 1731 में हरलाल मीणा ने खुदाई कराई जिसमें मां कंकाली के साथ ब्रह्मा विष्णु और महेश की मूर्तियाँ भी मिलीं। माता कंकाली की मूर्ति को उसी स्थान पर विराजमान किया गया और तब से यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करता आ रहा है। चोरों की आंखों की रोशनी चली गई कहा जाता है कि एक बार मंदिर में चोरी करने वाले चोरों की आंखों की रोशनी चली गई। जब उन्होंने मंदिर में आकर अपनी गलती मानी और मां कंकाली के दरबार में माफी मांगी तभी उनकी दृष्टि वापस आई। 111 साल से जलती अखंड ज्योत मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां आने वाली महिलाओं की गोद सूनी नहीं रहती। लोग अपने बिगड़े कामों की हाजिरी देने और मन्नत पूरी होने पर धन्यवाद देने भी यहां आते हैं। इस मंदिर में लगभग 111 साल से लगातार जल रही अखंड ज्योत इस स्थान की पवित्रता का प्रतीक मानी जाती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि चमत्कारी घटनाओं और भक्तों की आस्था के कारण भी प्रसिद्ध है।

चैत्र नवरात्रि 2026 दुर्गाष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा हर मनोकामना होगी पूर्ण

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है और इसके आठवें दिन आने वाली दुर्गाष्टमी या महाष्टमी का विशेष महत्व होता है यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित माना जाता है जो शुद्धता शांति और सौभाग्य की प्रतीक हैं इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है दृक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होगी और 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी उदय तिथि के अनुसार दुर्गाष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी इसलिए इस दिन पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व रहेगा दुर्गाष्टमी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पूजा के दौरान कुमकुम रोली अक्षत चंदन और पुष्प अर्पित करें तथा घी या कपूर का दीपक जलाएं इसके बाद पूरे श्रद्धा भाव से मां का ध्यान करते हुए उनके मूल मंत्र ॐ देवी महागौर्यै नमः का कम से कम 108 बार जाप करें साथ ही दुर्गा सप्तशती या महागौरी स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ पर विराजमान रहती हैं उनके चार हाथों में त्रिशूल और डमरू शोभा देते हैं उनकी पूजा करने से जीवन के पापों का नाश होता है मन की शुद्धि होती है और भय तथा नकारात्मकता दूर होती है इस दिन मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है जैसे खीर नारियल केले पंचामृत और अन्य सात्विक मिठाइयां भोग लगाते समय मंत्र जाप करना चाहिए और बाद में प्रसाद सभी में बांटना चाहिए इससे मां की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी अत्यधिक महत्व है इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और उन्हें चुनरी फूल मिठाई और दक्षिणा भेंट की जाती है ऐसा करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं इसके अलावा इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भी जीवन की बाधाएं दूर होती हैं पितृ दोष या कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए चांदी के नाग नागिन की पूजा कर उन्हें नदी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है साथ ही पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है दुर्गाष्टमी का यह पावन दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और आस्था का प्रतीक है यदि इस दिन पूरी श्रद्धा और नियम के साथ मां महागौरी की पूजा की जाए तो जीवन में शांति सफलता और खुशहाली का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है

नवरात्रि का 6वां दिन: मां कात्यायनी की पूजा से मिलेंगे विशेष लाभ, जानिए पूजा विधि और मंत्र

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि का आज मंगलवार को छठवां दिन है। मां कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन में साहस, धर्म और विजय की प्राप्ति होती है। देवी पुराणों और विशेष रूप से देवी भागवत पुराण में मां कात्यायनी को आदिशक्ति का अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है। मां कात्यायनी का स्वरूप मां कात्यायनी का वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला और उनका रूप अत्यंत तेज से परिपूर्ण है। उनका वाहन सिंह है और वे चार भुजाओं में तलवार और कमल धारण किए हुए हैं। एक हाथ अभय मुद्रा और दूसरा वर मुद्रा में है। देवी पुराणों में उनका स्वरूप दिव्य, तेजपूर्ण और युद्धशील बताया गया है। पूजा करने के लाभपौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, विवाह में बाधाएं समाप्त होती हैं और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह देवी शत्रुओं पर विजय, आत्मबल और साहस में वृद्धि का प्रतीक भी हैं। मां कात्यायनी की पूजा विधिसुबह स्नान कर नारंगी रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि मंगलवार को यह रंग शुभ माना जाता है। मां को नारंगी फूल जैसे गेंदा अर्पित करें, कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं। माता के समक्ष एक पान चढ़ाएं और अपनी मनोकामना कहकर देवी से प्रार्थना करें। माता की कथा पढ़ें और सुबह-शाम आरती करें। इस दिन दान में लोगों को संतरा, शहद, कपड़े और जूते-चप्पल आदि दान करें। विवाहितों को पूजा के बाद सुहाग की सामग्री भी दान करनी चाहिए। मां कात्यायनी का भोगमां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा हलवा या मीठा पान भी भोग में लगाया जा सकता है। मां कात्यायनी का मंत्रमूल बीज मंत्र है: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”। विवाह प्राप्ति के लिए विशेष मंत्र: “कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥”। तांत्रिक मंत्र है: “ॐ ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः”। मंत्र जाप का सबसे प्रभावी समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) माना गया है। नवरात्रि में किए गए जाप का प्रभाव कई गुना अधिक होता है। मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करना चाहिए। मां कात्यायनी की आरती जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,जय जगमाता, जग की महारानी।बैजनाथ स्थान तुम्हारा,वहां वरदाती नाम पुकारा।कई नाम हैं, कई धाम हैं,यह स्थान भी तो सुखधाम है।हर मंदिर में जोत तुम्हारी,कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।हर जगह उत्सव होते रहते,हर मंदिर में भक्त हैं कहते।कात्यायनी रक्षक काया की,ग्रंथि काटे मोह माया की।झूठे मोह से छुड़ाने वाली,जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।जय जगमाता, जग की महारानी,अपना नाम जपाने वाली।बृहस्पतिवार को पूजा करियो,ध्यान कात्यायनी का धरियो।हर संकट को दूर करेगी,भंडारे भरपूर करेगी।जो भी मां को भक्त पुकारे,कात्यायनी सब कष्ट निवारे।जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,जय जगमाता, जग की महारानी। (नोट- यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम किसी भी तरह की मान्यता व परिणाम की पुष्टि नहीं करते हैं।)

नवरात्रि का छठा दिन ऐसे करें मां कात्यायनी की आराधना हर बाधा होगी दूर और मनोकामना होगी पूर्ण

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है और वर्ष 2026 में यह पावन दिन 24 मार्च को मनाया जाएगा धार्मिक ग्रंथों में मां कात्यायनी को आदिशक्ति का तेजस्वी और पराक्रमी रूप बताया गया है इनकी उपासना करने से भक्तों को साहस शक्ति और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है साथ ही जीवन में विजय और सफलता का मार्ग भी प्रशस्त होता है मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और प्रभावशाली माना जाता है उनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला होता है और वे सिंह पर सवार रहती हैं उनके चार हाथों में तलवार कमल अभय मुद्रा और वर मुद्रा सुशोभित होती हैं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था इसी कारण उन्हें कात्यायनी कहा जाता है यह देवी दानवों का संहार करने वाली और धर्म की रक्षा करने वाली मानी जाती हैं नवरात्रि के इस दिन पूजा करने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पूजा में कुमकुम रोली अक्षत चंदन और गेंदा जैसे नारंगी फूल अर्पित करें एक पान चढ़ाकर अपनी मनोकामना मां के सामने व्यक्त करें और घी का दीपक तथा अगरबत्ती जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें इसके बाद मां की कथा सुनना या पढ़ना और आरती करना शुभ माना जाता है मां कात्यायनी को शहद विशेष रूप से प्रिय माना जाता है इसलिए इस दिन शहद का भोग अवश्य लगाना चाहिए इसके अलावा हलवा खीर मीठा पान और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं भोग हमेशा सात्विक होना चाहिए और लहसुन प्याज से परहेज करना चाहिए भोग लगाने के बाद प्रसाद को सभी में बांटना चाहिए इससे घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है मंत्र जाप का इस दिन विशेष महत्व होता है मां कात्यायनी के मूल मंत्र ॐ देवी कात्यायन्यै नमः का 108 या 1008 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है इसके साथ ही प्रार्थना और स्तुति मंत्रों का उच्चारण भी किया जा सकता है मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखना चाहिए और माला का उपयोग करना लाभकारी होता है इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से भय शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में साहस और आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं विवाहित महिलाओं के लिए यह पूजा सौभाग्य और सुख समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है इस दिन कुछ विशेष उपाय भी किए जा सकते हैं जैसे मां को नारंगी फूलों की माला अर्पित करना शहद का दान करना और पूरे दिन मां के मंत्रों का जाप करना इन उपायों से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं पूरी श्रद्धा और नियम के साथ मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शक्ति मिलती है बल्कि जीवन में सफलता और संतुलन भी प्राप्त होता है

विज्ञान भी हैरान ज्वाला देवी मंदिर में जलती प्राकृतिक ज्योतियों का अनोखा रहस्य

नई दिल्ली । भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है यहां स्थित देवी मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं बल्कि अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य भी समेटे हुए हैं इन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला देवी मंदिर जो भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी स्थल माना जाता है इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी देवी की मूर्ति नहीं है बल्कि चट्टानों के बीच से निकलती प्राकृतिक ज्वालाओं को ही देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के टुकड़े किए थे तब उनकी जीभ यहां गिरी थी इसी कारण यहां देवी ज्वाला के रूप में प्रकट हुईं और तभी से यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है मंदिर के गर्भगृह में चट्टानों के बीच से नौ अलग अलग ज्वालाएं निकलती हैं जो लगातार जलती रहती हैं इन ज्वालाओं को नौ दुर्गा का स्वरूप माना जाता है जिनमें महाकाली की ज्वाला सबसे प्रमुख और बड़ी मानी जाती है जबकि अन्य ज्वालाएं अन्नपूर्णा चंडी हिंगलाज विंध्यवासिनी महालक्ष्मी सरस्वती अंबिका और अंजनी के रूप में पूजी जाती हैं सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये ज्वालाएं सदियों से बिना किसी तेल बाती या घी के निरंतर जल रही हैं यही कारण है कि यह मंदिर आस्था के साथ साथ रहस्य का भी केंद्र बना हुआ है विज्ञान ने भी इस रहस्य को समझने की कई कोशिशें की हैं वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ज्वालाएं संभवतः धरती के भीतर से निकलने वाली प्राकृतिक गैस के कारण जलती हैं लेकिन कई वर्षों तक की गई जांच और गहराई तक खुदाई के बावजूद गैस का स्पष्ट स्रोत नहीं मिल पाया है जिससे यह रहस्य आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं सका है इतिहास में भी इस मंदिर से जुड़ी कई रोचक घटनाएं मिलती हैं कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने इन ज्वालाओं की सत्यता को परखने के लिए उन्हें बुझाने की कोशिश की थी उन्होंने लोहे की प्लेट और पानी का उपयोग किया लेकिन ज्वालाएं बुझ नहीं सकीं इस घटना के बाद उन्होंने देवी की शक्ति को स्वीकार करते हुए मंदिर में सोने का छाता अर्पित किया हालांकि मान्यता है कि वह छाता बाद में किसी अन्य धातु में परिवर्तित हो गया जिसने इस चमत्कार को और भी रहस्यमयी बना दिया मंदिर परिसर में स्थित एक और अनोखी जगह है जिसे गोरख डिब्बी कहा जाता है यह एक छोटा कुंड है जिसमें पानी देखने में उबलता हुआ प्रतीत होता है लेकिन जब कोई उसे छूता है तो वह ठंडा महसूस होता है यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य और आस्था का अनूठा अनुभव बन जाता हैज्वाला देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि विश्वास और रहस्य का अद्भुत संगम है यहां की प्राकृतिक ज्वालाएं आज भी लोगों के लिए आस्था का प्रतीक बनी हुई हैं और यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य स्थान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं

24 मार्च का राशिफल: आज कैसा रहेगा आपका दिन ? यहां पढ़े सभी राशियों का हाल

राशिफल। आज मंगलवार, 24 मार्च 2026 को ग्रहों की चाल के अनुसार कई राशियों के लिए दिन मिलाजुला रहेगा। कुछ जातकों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है, तो कुछ को संबंधों और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा। आइए जानते सभी 12 राशियों के बारे में… मेष राशि (Aries)आज मेष राशि के जातकों को खर्चों को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन रुका हुआ धन मिलने से राहत भी मिलेगी। परिवार और जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है। पुराने मित्र से मुलाकात मन हल्का करेगी और शिक्षा से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। कार्यक्षेत्र में सावधानी रखें क्योंकि जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। खर्च अधिक रहेंगे, लेकिन उधार दिया धन वापस मिल सकता है। जीवनसाथी से कहासुनी होने की संभावना है, इसलिए संयम बनाए रखें। मानसिक तनाव से बचें। शुभ रंग लाल और शुभ अंक 1 हैं। वृषभ राशि (Taurus)वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन थोड़ा उलझन भरा रहेगा, लेकिन भाग्य का साथ मिलने से काम पूरे होंगे। परिवार और भाइयों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव रह सकता है, इसलिए सतर्क रहें। धार्मिक गतिविधियों में मन लगेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता और सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। परिवार का साथ मिलेगा। मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। शुभ रंग सफेद और शुभ अंक 6 हैं। मिथुन राशि (Gemini)आज मिथुन राशि के जातकों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। जीवनसाथी के सहयोग से कार्य पूरे होंगे और आय में वृद्धि होगी। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। निवेश में लाभ मिलने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता और सम्मान मिलेगा। आय में वृद्धि होगी और निवेश से लाभ होगा। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग हरा और शुभ अंक 5 हैं। कर्क राशि (Cancer)कर्क राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशियों से भरा रहेगा। नई खुशखबरी मिल सकती है। वाहन खरीदने का योग है और कानूनी कार्य पूरे हो सकते हैं। माता का आशीर्वाद मिलेगा, लेकिन निर्णय लेने में थोड़ी दुविधा रह सकती है। कार्यों में सफलता और वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे। परिवार का सहयोग प्राप्त होगा और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग सफेद और शुभ अंक 2 हैं। सिंह राशि (Leo)सिंह राशि वालों के लिए आज साझेदारी में काम करने वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। किसी डील से लाभ मिलेगा, लेकिन भरोसा सोच-समझकर करना जरूरी है। परिवार के साथ घूमने का प्लान बन सकता है और रिश्तेदारों से सहयोग मिलेगा। साझेदारी में सफलता मिलेगी, सतर्क रहें। डील से अच्छा लाभ होगा। परिवार और रिश्तों में खुशी बनी रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। शुभ रंग सुनहरा और शुभ अंक 3 हैं। कन्या राशि (Virgo)कन्या राशि के जातकों के लिए आज का दिन अत्यंत लाभकारी रहेगा। ऑनलाइन काम करने वालों को बड़ा ऑर्डर मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में प्रशंसा मिलेगी और आय में वृद्धि होगी। रुके हुए काम पूरे होंगे और नौकरी बदलने के प्रयास सफल रहेंगे। नई जिम्मेदारियां और अवसर मिलेंगे। आय में वृद्धि और लाभ के योग हैं। प्रेम संबंधों में समझदारी जरूरी है और स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। शुभ रंग हरा और शुभ अंक 5 हैं। तुला राशि (Libra)तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण रहेगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और व्यापार में अच्छी डील हो सकती है। परिवार की उलझनें सुलझेंगी और वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता और नए अवसर मिलेंगे। आर्थिक लाभ होगा। जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग गुलाबी और शुभ अंक 6 हैं। वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिला-जुला रहेगा। काम का दबाव बढ़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव होगा। अचानक कई जिम्मेदारियां आ सकती हैं। परिवार से जुड़ी अच्छी खबर मिलेगी, लेकिन जीवनसाथी से तालमेल बनाए रखना जरूरी है। कार्यक्षेत्र में दबाव रहेगा, धैर्य रखें। आय सामान्य रहेगी। जीवनसाथी से मतभेद हो सकता है। मानसिक तनाव से बचें। शुभ रंग लाल और शुभ अंक 9 हैं। धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि के जातकों के लिए आज का दिन अनुकूल रहेगा। प्रेम जीवन में खुशियां रहेंगी और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी और नई योजनाओं की शुरुआत कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता और प्रगति होगी। निवेश के लिए दिन अच्छा है। प्रेम संबंध मजबूत होंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग पीला और शुभ अंक 3 हैं। मकर राशि (Capricorn)मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहतरीन रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में सम्मान मिलेगा और परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और नए अवसर मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में नए अवसर और सफलता मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। शुभ रंग नीला और शुभ अंक 8 हैं। कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशनुमा रहेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और व्यापार में यात्रा के योग बनेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है, खासकर खान-पान को लेकर सतर्क रहें। व्यापार में नए अवसर मिलेंगे। आय सामान्य रहेगी। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है। शुभ रंग आसमानी और शुभ अंक 8 हैं।मीन राशि (Pisces)मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन अनुकूल रहेगा। चिंताओं से मुक्ति मिलेगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और परिवार में रिश्ते सुधरेंगे। भविष्य के लिए बचत पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। बचत और निवेश के योग हैं। रिश्तों में सुधार होगा और स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। शुभ रंग पीला और शुभ अंक 7 हैं। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

Chaitra Ashtami Special: ऐसे बनाएं काला चना का प्रसाद, जानें आसान रेसिपी

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की अष्टमी के दिन अगर आप प्रसाद बना रहे हैं लेकिन इसकी रेसिपी को लेकर कुछ कन्फूशन हैं तब आपके के लिए ये खबरबहुत जरूरी हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा को भोग लगाने के लिए काले चने का प्रसाद बनाया जाता है।यह प्रसाद न केवल भक्तिभाव से भरपूर होता बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। तो चलिए इसकी खास रेसिपी जानते हैं। कन्या पूजन भोगकन्या पूजन भोग में देवी के पसंदीदा और पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इसमें खीर, बेसन का हलवा, शकरपारा, लड्डू, फल, मिठाई और काले चने का प्रसाद शामिल किए गए है। नवरात्रि में काले चने का प्रसाद रेसिपीसामग्री:काले चने – 1 कपपानी – 3 कप (भिगोने और उबालने के लिए)गुड़ – 1/2 कप (कद्दूकस किया हुआ)घी – 1–2 चम्मचकेसर – 2–3 धागे (वैकल्पिक)छोटी इलायची – 2–3 (पिसी हुई) काला चना उबालने की विधिइसे बनाने के लिए आपको सबसे पहले काले चनों को रात भर पानी में भिगो दें। उसके बाद कुकर में भिगोया हुआ काला चना, पानी, अदरक, तेज पत्ता, जीरा, नमक और घी डालें। तेज आंच पर 2 सीटी लगाएं और फिर धीमी आंच पर 5-6 सीटी आने तक पकाएं। बनाने की विधिकढ़ाई में घी गर्म करें. अब उसमें जीरा और हींग डालकर भूनें।उबले हुए चने को इसके साथ डालें और साथ ही बचा हुआ नमक डालकर ढककर पकाएं।जब पानी सूखने लगे तो इसमें गरम मसाला, अमचूर पाउडर, कसूरी मेथी और 1 चम्मच घी डालकर अच्छे से मिलाएं. इसे धनिया पत्ती से गार्निश करें और प्रसाद के रूप में मां दुर्गा को अर्पित करें। इस नवरात्रि, आप इस प्रकार काला चना प्रसाद बनाकर मां दुर्गा को भोग लगाएं इससे माता प्रसन्न होंगी और आपको और आपके घर परिवार पर अपनी कृपा बनाएं रहेंगी।

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा और कथा का महत्व

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का पांचवां दिन मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है और प्रत्येक दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व और फल माना जाता है। पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है, जो मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और जीवन को सुख-समृद्धि और आनंद से भर देती हैं। मान्यता है कि निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इसी लिए आज मां की पूजा करते समय इस पौराणिक कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और वरदान स्वरूप प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव होगी। उस समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे और माता सती का पुनर्जन्म नहीं हुआ था। इस कारण तारकासुर को विश्वास हो गया कि वह लगभग अमर है। वरदान के अहंकार में आकर तारकासुर ने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार शुरू कर दिया। उसके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें तपस्या से जगाने का प्रयास किया। इसी बीच माता सती का पुनर्जन्म हुआ और उन्होंने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। देवताओं के प्रयास और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसके बाद माता पार्वती ने स्वयं अपने पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को जन्म दिया और उन्हें युद्ध कौशल और ज्ञान की शिक्षा दी। भगवान कार्तिकेय ने बाद में तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। मां का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और संतुलन भी आता है। इसलिए पांचवे दिन माता की पूजा करते समय कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आज मां स्कंदमाता की पूजा करते समय भक्त कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। घर और मंदिरों में भजन-कीर्तन और कथा का आयोजन किया जाता है। यह दिन केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी है। व्रत कथा पढ़ने और ध्यानपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का संचार होता है। इसलिए आज के दिन माता स्कंदमाता की पूजा और कथा का पाठ अवश्य करें। इससे न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में समृद्धि, आनंद और संतुलन भी आता है। भक्तों के लिए यह अवसर अपने परिवार के लिए सुख और समृद्धि सुनिश्चित करने का भी संदेश है।

लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। इस दौरान आने वाला एक विशेष दिन है लक्ष्मी पंचमी, जिसे इस साल 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजन और लक्ष्मी चालीसा के पाठ से घर में धन धान्य, सुख समृद्धि और वैभव का वास होता है। लक्ष्मी पंचमी का यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मां स्कंदमाता के साथ साथ मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी, जो समृद्धि, धन और सुख समृद्धि की देवी हैं, इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। देवी की कृपा से व्यक्ति न केवल भौतिक संपन्नता पाता है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और विवेक की भी प्राप्ति होती है। इस अवसर पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की परंपरा होती है कि वे सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा अर्चना करें। घर में या मंदिर में कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही, लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी चालीसा के पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और घर में धन संपत्ति और सुख समृद्धि बनी रहती है। लक्ष्मी चालीसा का पाठ भक्तों के हृदय में विश्वास और भक्ति का संचार करता है। इसमें माता लक्ष्मी के गुणों और उनके दिव्य रूप का वर्णन है। चालीसा के माध्यम से यह विश्वास प्रकट होता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उसे सभी प्रकार की विपत्तियों और दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पुत्र, धन और संतान संपत्ति की प्राप्ति भी होती है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने वाले को माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। वे अपने भक्तों के घर में सुख शांति, स्वास्थ्य, वैभव और समृद्धि का वास करती हैं। इसके साथ ही, यह पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। भक्त चालीसा का ध्यानपूर्वक पाठ करें और इसे दूसरों को सुनाने की परंपरा अपनाएं, जिससे शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है। लक्ष्मी पंचमी और लक्ष्मी चालीसा का यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक भी है। इस दिन घर और मंदिरों में भक्तगण एकत्र होते हैं, भजन कीर्तन करते हैं, और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन किए गए उपाय और पाठ से वर्षभर सुख समृद्धि बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए आज के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न केवल धन वैभव और सुख की प्राप्ति का साधन है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है। भक्तगण इस दिन माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करें और अपने परिवार के लिए समृद्धि और सुख की कामना करें।

मां स्कंदमाता के दिव्य रूप के दर्शन से भक्तों में उमड़ी भक्ति और आस्था की लहर

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आता है। नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है जो पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है। इसी कारण उन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनमोहक माना जाता है। मां सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनके चार भुजाओं से उनका सौंदर्य और शक्ति झलकती है। उनकी एक भुजा में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं जबकि अन्य हाथों में कमल पुष्प और वरमुद्रा होती है। यह स्वरूप मातृत्व शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम दर्शाता है। मां स्कंदमाता को कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं के अनुसार उनके सच्चे मन से पूजन करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता की कृपा से संतान की उन्नति और सुख समृद्धि की कामना भी पूरी होती है। नवरात्र के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को ज्ञान बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह आशीर्वाद जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। इसलिए पांचवे दिन भक्त विशेष रूप से पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करते हैं और मां के लिए कमल पुष्प फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। कई भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं और भजन कीर्तन के माध्यम से मां की स्तुति करते हैं। मंदिरों में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं। भजन कीर्तन धार्मिक कार्यक्रम और कथा सरिता के माध्यम से भक्तों का मन आध्यात्मिक अनुभव से भर जाता है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मां स्कंदमाता की कृपा की कामना करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। मां स्कंदमाता की भक्ति से जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है। माता के आशीर्वाद से मानसिक शक्ति विवेक और ज्ञान की वृद्धि होती है जिससे जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन और सफलता मिलती है। इस दिन की पूजा से भक्त यह भी विश्वास रखते हैं कि मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और संतान से जुड़ी हर चिंता दूर होगी। चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह आस्था विश्वास और समाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां स्कंदमाता के पूजन से हर भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की आशा रखता है और मां की दिव्य कृपा को अनुभव करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु हर वर्ष की तरह इस साल भी पूरे मनोयोग और विश्वास के साथ मां स्कंदमाता के पूजन में शामिल हुए।