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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!

नई दिल्ली । Mahashivratri 2026 Date: भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भक्त उपवास रखकर शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक और पूजा करते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान शिव को क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है और किन चीजों को चढ़ाने से बचना चाहिए. महादेव को क्या अर्पित करें? शिवजी को सादगी प्रिय है. यदि आप पूरी श्रद्धा से ये चीजें अर्पित करते हैं, तो आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं.बेलपत्र: महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा न हो और उसमें तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों.धतूरा और भांग: ये चीजें शिवजी को नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में चढ़ाई जाती हैं.कच्चा दूध और गंगाजल: शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए शुद्ध कच्चा दूध और गंगाजल सबसे उत्तम माना जाता है.चंदन: शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं. इससे मन को शांति मिलती है अक्षत (चावल): पूजा में साबुत चावल का प्रयोग करें. टूटे हुए चावल खंडित कभी न चढ़ाएं भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें !केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था.तुलसी दल: भगवान शिव ने जालंधर असुर का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) थी. इसलिए तुलसी शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती.सिंदूर या कुमकुम: महादेव वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं.शंख से जल: शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख वर्जित माना जाता है. पूजा के दौरान न करें ये गलतियां कभी भी खंडित शिवलिंग की पूजा न करें. हालांकि, नर्मदेश्वर शिवलिंग को अपवाद माना जाता है. जल चढ़ाने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के लिए चांदी या स्टील के बर्तन का प्रयोग करें. शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. हमेशा आधी परिक्रमा करें और जहां से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी न लांघें. महाशिवरात्रि व्रत का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा करते हैं. महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह व्रत आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,जो भक्त सच्चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी

नई दिल्ली । देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव महाशिवरात्रि पर इस साल 12 दुर्लभ योग बनेंगे। तीन सौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब दस से अधिक योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है, इसलिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक खुला रहेगा। 15 फरवरी को भोर सवा दो बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात आरती के बाद बंद होंगे। 14 से 17 फरवरी तक स्पर्श और सुगम दर्शन पर रोक रहेगी। इस बार के 12 योगप्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव। इससे पहले 2024 में शिवरात्रि पर 11 योग बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर सृष्टि में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आदियोगी ने पार्वती के साथ गृहस्थ लीला रची थी। ज्योतिषीय लाभज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, तीन सौ वर्षों में दूसरी बार बनने वाले ये योग मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी होंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी शाम 05:35 बजे समाप्त होगी। योगों का क्रम:-सुबह 05:45 से शिवयोग06:43–09:37 सर्वार्थसिद्धि योग11:19–11:23 प्रीति योग12:17–13:54 आयुष्मान योग17:07–17:53 सौभाग्य योग19:47–20:34 शोभन योग20:54–22:02 साध्य योग22:42–23:58 शुक्ल योग00:54–02:54 राज योग02:57–05:53 ध्रुव योग प्रहरवार अभिषेक और मंत्र जप:-प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक, ऊँ ह्रीं ईशान्य नमःद्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, ऊँ ह्रीं अघोराय नमःतृतीय प्रहर: देशी घी से अभिषेक, ऊँ ह्रीं वामदेवाय नमःचतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक, ऊँ ह्रीं सध्योजाताय नमः तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ:-मेष: वित्तीय लाभ, पदोन्नति, नेतृत्व क्षमता में विकासमिथुन: पेशेवर जीवन में ऊँचाई, बड़े व्यापारिक अवसरसिंह: धनागमन, अचल संपत्ति में वृद्धि काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती का क्रम:-मंगला आरती: 02:15–03:15; 03:30 से दर्शनमध्याह्न भोग आरती: 11:40–12:20 चारों प्रहर की आरती:-प्रथम प्रहर: 21:00–00:30द्वितीय प्रहर: 01:30–02:30तृतीय प्रहर: 03:30–04:30चतुर्थ प्रहर: 05:00–06:15 इस बार की महाशिवरात्रि अपने दुर्लभ 12 योगों और विशेष प्रहरवार आरती के कारण श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।