चैत्र नवरात्रि 2026: जानिए 9 दिनों में किस दिन कौन सा रंग पहनना है शुभ, पूरी लिस्ट यहां देखें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बेहद श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं पूजा अर्चना करते हैं और मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन एक विशेष रंग पहनने की परंपरा भी है। माना जाता है कि उस दिन से जुड़े शुभ रंग को पहनने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि का पहला दिन सफेद नवरात्रि के पहले दिन का रंग सफेद माना जाता है। यह पवित्रता शांति और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं। दूसरा दिन लाल नवरात्रि के दूसरे दिन लाल रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग प्रेम शक्ति और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है जो तपस्या और भक्ति की देवी मानी जाती हैं।तीसरा दिन रॉयल ब्लू तीसरे दिन का रंग रॉयल ब्लू होता है। यह दिव्य ऊर्जा स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है जिनका स्वरूप साहस और वीरता का प्रतीक है। चौथा दिन पीला नवरात्रि के चौथे दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह उत्साह उल्लास और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है जिन्हें ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली देवी माना जाता है। पाँचवाँ दिन हरा पाँचवें दिन का रंग हरा होता है जो उर्वरता विकास और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं। छठवाँ दिन ग्रे छठे दिन स्लेटी यानी ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह संतुलन शक्ति और धैर्य का प्रतीक है। इस दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है जिन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। सातवाँ दिन नारंगी सातवें दिन का रंग नारंगी है जो ऊर्जा उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है जो दुर्गा का उग्र रूप मानी जाती हैं और बुराई का नाश करती हैं। आठवाँ दिन पीकॉक ग्रीन आठवें दिन का रंग पीकॉक ग्रीन यानी मोर हरा होता है। यह सुंदरता शालीनता और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है जिन्हें पवित्रता और शांति की देवी माना जाता है। नौवाँ दिन गुलाबी नवरात्रि के अंतिम दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह प्रेम करुणा और सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है जो भक्तों को ज्ञान सिद्धि और सफलता का आशीर्वाद देती हैं। इस प्रकार नवरात्रि के नौ दिनों में निर्धारित रंग पहनकर मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Vastu Tips: घर में नहीं रूक रहा धन, हरी इलायची से करें खास उपाय

नई दिल्ली। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख समृद्धि आए और चारों तरफ से तरक्की हो। लेकिन कई बार कुछ प्रयास करने के बाद भी हाथ असफलता ही लगती है। घर में सकारात्मक को बरकरार रखने के लिए आपको कई सारे उपाय करने चाहिए। वास्तु शास्त्र में नीचे इनके बारे में बताया गया है साथ ही इलायची से जुड़े कुछ खास उपाय बताए गए हैं जिनको करके आप अपना भाग्य परिवर्तन कर सकते हैं। वास्तु के खास उपायबहुत कोशिश करने के बाद भी आपके हाथ असफलता लग रही है। आपका कोई भी काम सफल नहीं हो रहा है। तब आपको इन बातों पर विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। कड़ी मेहनत और तपस्या के बाद भी लोग सफलता और धन प्राप्त करने में असफल रहते हैं। ऐसे में हरी इलायची का ये उपाय बहुत कारगार है. पैसे को जेब में रोकने के लिए 5 हरी इलायची को अपने पर्स में रख लें. ऐसा करने से व्यक्ति की आय में बढ़ोतरी होती है और पैसी भी ज्यादा खर्च नहीं होता। कई बार सालों मेहनत करने के बाद व्यक्ति को इच्छानुसार प्रगति नहीं मिल पाती।इसके लिए अगर आप नौकरी में प्रमोशन चाहते हैं तो एक हरा कपड़ा लें और इसमें 4-5 इलायची लेकर बांध लें। और इस पोटली को सोते समय तकीए के नीचे रख लें।अगले दिन उठने के बाद ये पोटली किसी दूसरे व्यक्ति को दे दें। अगर आपका बिजनेस में लाभ नहीं हो रहा है। आपको नौकरी नहीं मिल पा रही है। तब घर से बाहर जाते समय आप अपनी जेब में दो इलायची जरूर रखें साथ ही अपने पर्स में भी दो हरी इलायची डालें। ऐसा करने से आपकी बरकत तेजी से होती है और तरक्की आपके घर आते है। इन सभी उपायों को करके आप अपने घर में सुख समृद्धि ला सकते हैं।
Budhwar Mantra: बुधवार के दिन इन मंत्रों का करें जाप, गणेश भगवान की होगी अपार कृपा

नई दिल्ली। बुधवार का दिन गणेश भगवान की पूजा अर्चना के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन आप अगर उनकी पूजा अर्चना करेंगे उनका व्रत रहेंगे। तब आपके घर में सुख समृद्धि आएगी गणेश भगवान की कृपा आप पर बनी रहेगी। आपके सारे बिगड़े काम बनने लगेंगे नकारात्मक तभी आपके घर से को तो दूर हो जाएगी। गणेश भगवान का दूसरा नाम विघ्नहर्ता भी कहा जाता है वह आपके सारे विघ्न हर लेंगे। गणेश भगवान को प्रसन्न करने के लिए आप उनके कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करें। पूजा विधिभगवान की पूजा करने के लिए आप सुबह प्रातः काल उठे और स्नान करके भगवान की मंदिर के पास एक चौकी रखें। उसे पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान की मूर्ति की स्थापना करें। अगर आपके घर के मंदिर में भगवान पहले से ही है तो आप वहीं पर उनकी पूजा कर सकते हैं। पूजा करने के लिए आप अच्छा हल्दी दुर्वा का उपयोग करें और भगवान को भोग में बेसन अथवा मोदक के लड्डू चढ़ाएं।इन मंत्रों का करें जापॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा’ ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश। ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डा धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात” गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकः । नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।। धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायकः। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन आपको उनके अच्छे से पूजा अर्चना करनी चाहिए। साथ ही उन्हें मोदक का लड्डू आवश्यक चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा आप उन्हें दूर्वा और सुपाड़ी भी चढ़ाएं। इससे प्रश्न होकर भगवान आपके परिवार में सुख समृद्धि बनाए रखते हैं और आपको भी मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा आपकी ऊपर आ रही सारी विघ्न को भी हर लेते हैं। इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगक की
बुधवार का राशिफल

युगाब्ध-5126, विक्रम संवत 2082, राष्ट्रीय शक संवत-1947, सूर्योदय 06.44, सूर्यास्त 06.04, ऋतु – ग्रीष्मचैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी, बुधवार, 11 मार्च 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।मेष राशि :- खान-पान में सावधानी रखें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सवेरे ही निपटा लें। आगे से रुपये पैसों की सुविधा नहीं मिल पाएगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बनें। शुभांक-3-6-9वृष राशि :- प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की अपेक्षा रहेगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ रहेगा। शुभांक-3-5-7मिथुन राशि :- कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचे तो अच्छा है। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। दिमाग में निर्मूल तर्क-कुतर्क पैदा होंगे। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-4-6-7कर्क राशि :- आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ हो रहे है। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। सभा-गोष्ठियों में मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। शुभांक-2-5-6सिंह राशि :- शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मित्रों से सावधानी रखें तो ज्यादा उत्तम है। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। दैनिक सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-2-5-7कन्या राशि :- सुख-आनंद कारक समय है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य के लिए भाग-दौड़ रहेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होगी। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी। शुभांक-3-6-7तुला राशि :- शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। लाभ भी होगा और पुराने मित्रों से समागम होगा। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। शुभांक-5-7-9वृश्चिक राशि :- समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश सफल होगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। शुभांक-3-6-7धनु राशि :- नवीन जिम्मेदारी बढ़ने के आसार रहेंगे। सुविधाओं में शनै:-शनै: बाधा आएगी। अपने काम को प्राथमिकता से करें। कारोबारी काम में बाधा उभरने से मानसिक अशांति बनी रहेगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। शुभांक-3-5-6मकर राशि :- सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा। स्वास्थ्य लाभ में समय और धन व्यय होगा। परिवार में अशांति रहेगी। शुभांक-1-4-5कुंभ राशि :- समय पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने के प्रयास सफल होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। शुभांक-2-5-7मीन राशि :- यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। यश-प्रतिष्ठा में वृद्घि व शिक्षा में परेशानी आ सकती है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। व्यापार में वृद्घि होगी। शुभांक-2-4-6
aaj Ka Panchang 11 March 2026: अष्टमी तिथि, वृश्चिक राशि में चंद्रमा; जानें राहुकाल, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली। 11 मार्च 2026 वैदिक पंचांग के अनुसार आज का दिन कई ज्योतिषीय योगों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज बुधवार है और पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि चल रही है, जो 12 मार्च को सुबह 04:19 बजे तक रहेगी। धार्मिक कार्यों और दैनिक शुभ-अशुभ समय जानने के लिए पंचांग का विशेष महत्व होता है। यदि आप आज किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं तो राहुकाल का समय जरूर ध्यान रखें। पंचांग के मुताबिक आज सूर्योदय सुबह 06:36 बजे और सूर्यास्त शाम 06:27 बजे होगा। वहीं चंद्रमा आज वृश्चिक राशि में संचार करेंगे, जिसका प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। आज ज्येष्ठा नक्षत्र रात 10:00 बजे तक रहेगा, जबकि वज्र योग सुबह 09:12 बजे तक प्रभावी रहेगा। राहुकाल का समयआज बुधवार को राहुकाल दोपहर 12:31 बजे से 02:00 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। पंचांग के मुख्य तथ्यतिथि: कृष्ण पक्ष अष्टमी (12 मार्च सुबह 04:19 बजे तक) नक्षत्र: ज्येष्ठा (रात 10:00 बजे तक) योग: वज्र योग (सुबह 09:12 बजे तक) वार: बुधवार चंद्रमा: वृश्चिक राशि में सूर्योदय: 06:36 प्रातः सूर्यास्त: 06:27 सायं राहुकाल: 12:31 अपराह्न से 02:00 अपराह्न वाहन खरीदने का अगला शुभ मुहूर्तयदि आप नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 15 मार्च 2026 को वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त बन रहा है। इस दिन वाहन खरीदना शुभ माना गया है। घर खरीदने का अगला शुभ दिनज्योतिषीय गणना के अनुसार 13 मार्च 2026 घर खरीदने के लिए अगली शुभ तिथि मानी जा रही है। इस दिन संपत्ति से जुड़े कार्य करना लाभकारी माना जाता है। विवाह का अगला शुभ मुहूर्तअगर आप शादी के लिए शुभ मुहूर्त देख रहे हैं तो 15 अप्रैल 2026 विवाह के लिए अगला अनुकूल समय बताया गया है। निष्कर्ष:आज का दिन सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल है, लेकिन राहुकाल के समय किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। वहीं आने वाले दिनों में वाहन खरीद, घर खरीद और विवाह के लिए कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं।
Aaj Ka Ank Jyotish 11 March 2026: मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन? पढ़ें आज का अंक राशिफल

नई दिल्ली। 11 मार्च 2026। अंक ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति की जन्मतिथि से उसका मूलांक (Root Number) निकाला जाता है। यह मूलांक 1 से 9 के बीच होता है और इससे व्यक्ति के स्वभाव, करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और रिश्तों के बारे में कई संकेत मिलते हैं। आज 11 मार्च 2026 का दिन अलग-अलग मूलांक वाले लोगों के लिए अलग ऊर्जा और अवसर लेकर आया है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का जन्म किसी भी महीने की 11 तारीख को हुआ है, तो 1+1=2 होने के कारण उसका मूलांक 2 होगा।अगर आपको अपना मूलांक पता है, तो आइए जानते हैं कि आज का दिन आपके लिए क्या संदेश लेकर आया है। मूलांक 1आज का दिन मूलांक 1 वालों के लिए सकारात्मक रहने वाला है। कामकाज के क्षेत्र में आपकी प्रभावशाली छवि देखने को मिलेगी और लोग आपकी बातों को महत्व देंगे। नई ऊर्जा के साथ आप कई कार्यों को तेजी से पूरा कर सकते हैं। हालांकि कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले पूरी योजना जरूर बनाएं, क्योंकि जल्दबाजी छोटी गलतियों का कारण बन सकती है।टीमवर्क से बेहतर परिणाम मिलेंगे। मानसिक थकान से बचने के लिए बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें और खानपान का विशेष ध्यान रखें। मूलांक 2आज आपकी अंतरात्मा की आवाज काफी मजबूत रहेगी और आप कार्यस्थल की परिस्थितियों को गहराई से समझ पाएंगे। रिसर्च, काउंसलिंग या गंभीर चर्चा से जुड़े कामों में सफलता मिल सकती है।भावनात्मक रूप से थोड़ा उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए खुद को सकारात्मक माहौल में रखें। परिवार और करीबी लोगों के साथ समय बिताना अच्छा रहेगा। अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा संवेदनशील होने से बचें। मूलांक 3मूलांक 3 के लिए आज आत्मविश्वास से भरा दिन रहेगा। किसी नए प्रोजेक्ट या रचनात्मक काम की शुरुआत करने के लिए समय अनुकूल है। आपकी सकारात्मक सोच दूसरों को भी प्रभावित करेगी।हालांकि उत्साह में आकर जरूरत से ज्यादा वादे करने से बचें। खानपान और पानी पीने की आदतों का ध्यान रखें। प्रेम संबंधों में बातचीत सहज रहेगी, लेकिन गंभीर विषयों पर मजाक करने से बचें। मूलांक 4आज का दिन जीवन और काम को व्यवस्थित करने का संकेत दे रहा है। यह समय मजबूत नींव तैयार करने और लंबे लक्ष्यों पर काम शुरू करने के लिए अच्छा है।जरूरी कामों को प्राथमिकता देकर एक-एक करके पूरा करें। नियमितता और अनुशासन आपको भविष्य में बड़ी सफलता दिला सकते हैं।मानसिक तनाव से बचने के लिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें और पार्टनर के साथ संवाद बनाए रखें। मूलांक 5आज मूलांक 5 वालों के लिए अंतर्ज्ञान काफी मददगार साबित होगा। कई बार दिल की आवाज दिमाग से ज्यादा सही रास्ता दिखाती है। अचानक मिलने वाले अवसरों को पहचानने में आपकी समझ काम आएगी।आज जीवन में मिलने वाले छोटे-छोटे संकेतों पर ध्यान दें। ये आपको सही दिशा की ओर ले जा सकते हैं।स्वास्थ्य के लिए ताजे फल, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी का सेवन करें। मूलांक 6आज आपका अलग और रचनात्मक काम करने का तरीका पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है। टीम के साथ मिलकर काम करना फायदेमंद रहेगा।प्रेजेंटेशन या क्लाइंट मीटिंग्स में सफलता मिल सकती है। भावनात्मक संतुलन बनाए रखें और मन को शांत रखने के लिए हल्का संगीत सुनें।रिश्तों में रोमांस बढ़ेगा। अपने प्रियजनों की सराहना करें और छोटे-छोटे सरप्राइज रिश्तों को मजबूत बना सकते हैं। मूलांक 7आज की ऊर्जा मूलांक 7 वालों के पक्ष में रहेगी। आपकी गहरी सोच और योजनाएं आपको सफलता की ओर ले जा सकती हैं।हालांकि अपने विचारों को केवल मन में रखने के बजाय उन्हें दूसरों के सामने भी रखें। ताजी हवा में समय बिताने से मन शांत रहेगा।आज आप ज्ञानवर्धक चर्चाओं में रुचि ले सकते हैं और पार्टनर के साथ खुलकर संवाद करना बेहतर रहेगा। मूलांक 8आज का दिन भविष्य की योजना और आर्थिक मामलों पर ध्यान देने के लिए अच्छा है। आपकी व्यवहारिक सोच आपको सही फैसले लेने में मदद करेगी।हालांकि काम का तनाव खुद पर हावी न होने दें और जीवन में संतुलन बनाए रखें।रिश्तों में थोड़ी भावनात्मक बातचीत जरूरी है। अपनों के साथ अपनी सच्ची भावनाएं साझा करें। मूलांक 9आज आपका काम करने का अलग अंदाज दूसरों को प्रेरित कर सकता है। नेतृत्व क्षमता मजबूत रहेगी, लेकिन कोई बड़ा कदम उठाने से पहले तैयारी की जांच जरूर करें।ऊर्जा में थोड़ा उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी जरूरी है।पुरानी भावनाएं या विवाद सामने आ सकते हैं, इसलिए कड़वाहट रखने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालें। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का दिन कई मूलांक वालों के लिए नई संभावनाएं और आत्मचिंतन का अवसर लेकर आया है। सही योजना, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर आप दिन को और बेहतर बना सकते हैं।
आखिर क्यों महादेव ने काटा ब्रह्मा जी का पांचवां सिर? सृष्टि के रचयिता की एक भूल और पौराणिक कथा का रहस्य

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और शिव का विशेष महत्व माना जाता है। इनमें ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। आम तौर पर हम उन्हें चार मुखों वाले चतुर्मुख रूप में देखते हैं, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुरुआत में ब्रह्मा जी के पांच मुख हुआ करते थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार उनकी एक भूल के कारण भगवान शिव ने उनका पांचवां सिर कटवा दिया, जिसके बाद वे चतुर्मुख रूप में ही पूजे जाने लगे। इस कथा का उल्लेख Shiva Purana में मिलता है। इसके अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा जी ने Satarupa नाम की एक अत्यंत सुंदर स्त्री की रचना की। सतरूपा अत्यंत तेजस्वी और मनमोहक रूप वाली थीं। कथा के अनुसार उनके सौंदर्य को देखकर स्वयं ब्रह्मा जी भी आकर्षित हो गए। बताया जाता है कि जब सतरूपा को यह आभास हुआ कि ब्रह्मा जी की दृष्टि उन पर है, तो उन्होंने उनसे बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में जाना शुरू कर दिया। सतरूपा जब जिस दिशा में जातीं, ब्रह्मा जी उन्हें देखने के लिए उसी दिशा में अपना एक मुख प्रकट कर लेते। इस तरह उन्होंने चारों दिशाओं में देखने के लिए चार मुख बना लिए। लेकिन जब सतरूपा आकाश की ओर बढ़ीं, तब ब्रह्मा जी ने ऊपर की ओर देखने के लिए अपना पांचवां मुख भी प्रकट कर लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह आचरण मर्यादा के विरुद्ध माना गया, क्योंकि सतरूपा उनकी ही रचना थीं और उन्हें मानस पुत्री के समान माना जाता था। यह सब देखकर Shiva अत्यंत क्रोधित हो गए। धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए उन्होंने अपने उग्र स्वरूप Kala Bhairava को प्रकट किया और ब्रह्मा जी को दंड देने का आदेश दिया। महादेव के आदेश पर काल भैरव ने तुरंत ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को काट दिया, जो ऊपर की ओर था। इसी घटना के बाद से ब्रह्मा जी के केवल चार मुख ही रह गए और वे चतुर्मुख रूप में ही जाने जाने लगे। बाद में ब्रह्मा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस घटना का एक और प्रभाव यह भी माना जाता है कि ब्रह्मा जी की पूजा अन्य देवताओं की तुलना में बहुत कम होती है। कहा जाता है कि बाद में Saraswati के श्राप के कारण भी उनकी व्यापक पूजा नहीं हो पाई। हालांकि भारत में एक ऐसा स्थान है जहां ब्रह्मा जी का प्रमुख और प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा मंदिर में है, जो पुष्कर, राजस्थान में स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा जी के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस तरह यह पौराणिक कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग ही नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम और धर्म के महत्व का संदेश भी देती है।
शीतला अष्टमी 2026 कल: भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां शीतला की कृपा से मिलती है रोगों से रक्षा

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र माह की शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। साल 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु मां शीतला की पूजा अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य सुख और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि मौसम बदलने के समय कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में मां शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में अलग अलग प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार दाल भात पूरी दही लस्सी और हरी सब्जियां जैसे कई व्यंजन तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि इन सभी पकवानों को अगले दिन यानी शीतला अष्टमी के दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। इस दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार ठंडा और बासी भोजन मां शीतला को प्रिय होता है और इससे शरीर को ठंडक भी मिलती है। इसलिए अष्टमी के दिन सबसे पहले इन व्यंजनों का भोग मां शीतला को लगाया जाता है और उसके बाद परिवार के लोग प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं। शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और उसके बाद मां शीतला के मंदिर जाकर दर्शन करने चाहिए। पूजा के दौरान मां शीतला को हल्दी दही और बाजरे का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और यह कई रोगों से बचाने में सहायक होता है। इसलिए पूजा के दौरान नीम की पत्तियां चढ़ाने की भी परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व केवल पूजा अर्चना तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी देता है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन आखिरी बार बासी भोजन किया जाता है और इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक समय तक बासी भोजन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह पर्व हमें मौसम बदलने के समय साफ सफाई संतुलित भोजन और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सीख भी देता है। इसके अलावा शीतला अष्टमी के दिन घर में पूजा करने के साथ साथ शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कई जगहों पर इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से मां शीतला प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार व्रत कैसे करें: पुण्य और आध्यात्मिक लाभ के लिए जरूरी नियम

नई दिल्ली । धर्मग्रंथों में व्रत को तप का सरल और प्रभावी रूप बताया गया है। व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि मन, वाणी और कर्म को शुद्ध रखने का संकल्प भी है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे आत्मशुद्धि, संकल्प शक्ति की दृढ़ता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग माना। धर्म सिंधु में कहा गया है कि व्रत करते समय शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। गरुड़ पुराण में सत्य बोलने, क्रोध से दूर रहने और संयमित जीवन जीने की सलाह दी गई है। मनुस्मृति में उल्लिखित है कि हिंसा, झूठ, चोरी या चुगली व्रत को भंग कर देती हैं। स्कंद पुराण में व्रत के दिन केवल एक समय भोजन या फलाहार करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। पद्म पुराण में संकल्प, पूजा-विधि और मंत्र-जाप का महत्व बताया गया है। इस प्रकार श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया व्रत ही आध्यात्मिक लाभ और मनोकामना पूर्ति का कारण बनता है। व्रत के मुख्य नियम और सावधानियां भोजन और फलाहार: व्रत के दिन बार-बार अन्न या फलाहार करना उचित नहीं माना गया। सामान्यतः एक या दो बार फलाहार करना पर्याप्त है। सावधानी और संयम: दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इससे व्रत का पुण्यफल कम हो जाता है। मौन और ध्यान: व्रत के समय कम बोलना और अधिकतर मौन रहना श्रेष्ठ माना गया है। इससे मन जप और ध्यान में एकाग्र रहता है। स्वच्छता और संकल्प: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हाथ में जल, अक्षत, पुष्प, सुपारी और दक्षिणा लेकर व्रत का संकल्प करें। मन और कर्म की शुद्धि: व्रत के दौरान काम, क्रोध, लोभ, मोह और आलस्य से दूर रहें। झूठ बोलने या किसी की निंदा-चुगली करने से बचें। पूजा और अर्पण: शिव-पार्वती से जुड़े व्रतों में भगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मां गौरी को श्रृंगार अर्पित करने की परंपरा है। उद्यापन: यदि व्रत किसी निश्चित अवधि के लिए किया गया हो, तो उसके पूर्ण होने पर उद्यापन करना आवश्यक माना गया है। इस प्रकार, व्रत केवल आत्मसंयम का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और कर्म की शुद्धि के साथ आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य की प्राप्ति का मार्ग है। शास्त्रों के बताए नियमों का पालन कर श्रद्धा और संकल्प के साथ किया गया व्रत निश्चित रूप से फलदायी होता है।
Sheetala Ashtami 2026: कब है शीतला अष्टमी और क्यों लगाया जाता है माता को बासी भोजन का भोग

नई दिल्ली । भारत में होली के आठ दिन बाद, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसे बसौड़ा भी कहा जाता है। यह पर्व माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें संक्रामक और त्वचा रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने वाले व्यक्तियों को चेचक, खसरा और अन्य त्वचा रोगों से सुरक्षा मिलती है। कब है शीतला अष्टमी 2026 पंचांग के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 11 मार्च को प्रातः 01:54 बजे से शुरू होकर अगले दिन भोर 04:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत उसी दिन ही मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त माता शीतला की पूजा के लिए प्रातःकाल 06:36 बजे से सायंकाल 06:27 बजे तक का समय शुभ माना गया है। इसी अवधि में भक्त विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत का पालन करते हैं। पर्व का महत्व माता शीतला को रोगों से सुरक्षा देने वाली देवी माना जाता है। खासतौर पर चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला को ठंडी वस्तुओं का भोग अर्पित करने से वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों को रोगों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग बसौड़ा के दिन घर में चूल्हा जलाने और ताजा भोजन बनाने की परंपरा नहीं होती। इसलिए एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता शीतला को अर्पित किया जाता है। यह भोजन प्रसाद के रूप में बाद में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा या बासी भोजन प्रिय होता है। इससे शरीर में भी शीतलता बनी रहती है। यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में बसौड़ा और बासी भोजन की परंपरा निभाई जाती है, जिससे परिवार के सदस्य भी गर्मियों की बीमारियों और संक्रामक रोगों से सुरक्षित रहते हैं।