निर्जला एकादशी 2026: सबसे पवित्र व्रत का शुभ समय, पूजा विधि और भीमसेनी एकादशी का महत्व

नई दिल्ली। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म की सभी एकादशियों में सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। इस दिन बिना जल और अन्न ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एक व्रत को करने से पूरे वर्ष की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे पापों का नाश और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी 2026 कब है?हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 6:13 बजे होगी और इसका समापन 25 जून 2026 को शाम 8:10 बजे होगा।उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा। पूजा और व्रत का महत्वनिर्जला एकादशी के दिन भक्त पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस व्रत में तुलसी पत्र, पीले फूल, दीपक और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह व्रत आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है। निर्जला एकादशी 2026 पारण समयएकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।इस वर्ष व्रत का पारण 26 जून 2026 (शुक्रवार) को किया जाएगा।पारण का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक रहेगा। इसे भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों में भीमसेन अत्यधिक भूख के कारण अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेद व्यास ने उन्हें वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य पाने के लिए निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम और भक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा भी मानी जाती है। जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।
Surya Dev Puja: रविवार को इस तरह करें सूर्य देव की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

नई दिल्ली। Surya Dev Puja: हिंदू धर्म में सूर्य को न केवल देवता माना जाता है बल्कि वे नौ ग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। व्यक्ति पर सूर्य देव कृपा हो तो, व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने पर जीवन में सुख, संपत्ति और यश की प्राप्ति होती है। सूर्य देव पूजा विधिसूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय ॐ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। ऐसा करने से भगवान सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है, और आपके सभी कार्य संपन्न होने लगते हैं। सूर्य पूजन के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है। पूजा में लाल चंदन और लाल फूल जरूर शामिल करें। इसके बाद लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी लाल चंदन पाउडर और लाल फूल डालें। एक थाली में दीपक और लोटा रख लें। सूर्य देव को प्रणाम करें। ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इस तरह अर्पित करें जलअर्घ देते समय नजरे लोटे की जलधारा की ओर रखें। जल इस प्रकार अर्पित करें कि जल की धार में सूर्य का प्रतिबिंब एक बिंदु के रूप में दिखाई दे। इसके बाद हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें। ये मिलते हैं लाभसूर्योदय के समय सूर्य देव का दर्शन करने से व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। ऐसा करने से कारोबार में सफलता प्राप्त होती है। सूर्य को जल चढ़ाने के साथ मंत्र का जाप करने से बल, बुद्धि और विद्या प्राप्त होगी।
आज का राशिफल (10 मई 2026): कुछ राशियों पर बरसेगा भाग्य, तो कुछ को रहना होगा थोड़ा सावधान

नई दिल्ली। 10 मई 2026, रविवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव आज लोगों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। जहां कुछ जातकों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा, वहीं कुछ को अपने स्वास्थ्य और व्यवहार पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। मेष राशि के जातकों के लिए दिन पारिवारिक रूप से शुभ रहेगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और वैवाहिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी। व्यापार और नौकरी में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। वृषभ राशि के लिए घर का माहौल सुखद रहेगा और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। किस्मत का साथ मिलेगा और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। मिथुन राशि वालों को आज भागदौड़ करनी पड़ सकती है, लेकिन काम समय पर पूरे होंगे। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं, हालांकि बेवजह की बातों से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि के जातक कार्यस्थल पर व्यस्त रहेंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा। सिंह राशि के लिए दिन बेहद शुभ है। किसी खास काम में सफलता मिलेगी और माता-पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। व्यापार और सामाजिक कार्यों में भी लाभ के योग हैं। कन्या राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। कार्यक्षेत्र में तालमेल अच्छा रहेगा और पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है। कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है। तुला राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत होगी। हालांकि संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी होगा।वृश्चिक राशि के लिए दिन खुशियों से भरा रहेगा। रुका हुआ धन मिलने के योग हैं और धार्मिक यात्रा का भी अवसर बन सकता है। धनु राशि वालों के लिए दिन प्रगति और सफलता लेकर आएगा। परिवार में खुशखबरी मिल सकती है और शिक्षा क्षेत्र में सफलता के संकेत हैं। मकर राशि के जातकों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। नौकरी और व्यापार में सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। कुंभ राशि के लिए दिन मिश्रित फल देने वाला रहेगा। कार्यभार अधिक रहेगा जिससे तनाव बढ़ सकता है, लेकिन परिवार के साथ समय बिताने से राहत मिलेगी। मीन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। धन संबंधी समस्याएं हल होंगी लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा। धैर्य रखना आज सबसे जरूरी है। कुल मिलाकर यह रविवार कई राशियों के लिए नई उम्मीदें और अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ को संयम और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।
इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..

नई दिल्ली। चातुर्मास (Chaturmas 2026) देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से प्रारंभ होता है और देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है. इन 4 महीनों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, शारदीय नवरात्रि, दशहरा, दिवाली जैसे बड़े त्योहार पड़ेंगे. साथ ही सावन महीना भी आएगा। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा और 20 नवंबर 2026 देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) पर समाप्त होगा. देखिए चातुर्मास के 4 महीनों के सभी व्रत-त्योहार की लिस्ट। चातुर्मास 2026 व्रत-त्योहार लिस्ट – चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी – गुरु पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026 – सावन मास आरंभ – 30 जुलाई 2026 – कामिका एकादशी – 9 अगस्त 2026 – सावन शिवरात्रि – 12 अगस्त 2026 – हरियाली तीज – 15 अगस्त 2026 – नागपंचमी – 17 अगस्त 2026 – पुत्रदा एकादशी – 23 अगस्त 2026– रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा – 28 अगस्त 2026 (सावन महीना समाप्त) – कजरी तीज – 31 अगस्त 2025– जन्माष्टमी – 4 सितंबर 2026– अजा एकादशी – 7 सितंबर 2026 – गणेश चतुर्थी (गणेश स्थापना) – 14 सितंबर 2026– गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी – 25 सितंबर 2026– शारदीय नवरात्रि – 11 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ – नवरात्रि नवमी – 19 अक्टूबर 2026 – दशहरा – 20 अक्टूबर 2026– पापकुंशा एकादशी – 22 अक्टूबर 2026 – करवा चौथ – 29 अक्टूबर 2026 – रमा एकादशी – 5 नवंबर 2026 – धन तेरस – 6 नवंबर 2026 – नरक चतुर्दशी – 8 नवंबर 2026 (दिवाली की तारीख कुछ पंचांग में 8 नवंबर भी दी गई है) – दिवाली – 9 नवंबर 2026 – गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर 2026– भाई दूज – 11 नवंबर 2026– छठ पूजा – 15 नवंबर 2026– देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026
वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति

नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत 2026 इस वर्ष 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और वट वृक्ष की परिक्रमा करने से सौभाग्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री पूजा के दौरान यदि महिलाएं अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जाप करें तो इसका प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैवाहिक जीवन में स्थिरता मिलती है। इस दिन शिव, विष्णु और देवी से जुड़े मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना गया है। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं, जिनका जाप श्रद्धा भाव से करने पर जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानी जाती है और वर्षों से महिलाएं इसे श्रद्धापूर्वक निभाती आ रही हैं।
Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें

नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में घर की दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हर दिशा किसी न किसी ग्रह और ऊर्जा से जुड़ी होती है। घर की पश्चिम दिशा का संबंध न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव से माना जाता है। इसलिए इस दिशा को साफ, व्यवस्थित और संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यदि पश्चिम दिशा में गंदगी, टूटे सामान या अव्यवस्था हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर के सदस्यों के जीवन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम दिशा का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक संतुलन लेकर आता है। वहीं यदि यह दिशा दोषपूर्ण हो जाए तो आर्थिक परेशानियां, तनाव, मेहनत के बावजूद सफलता न मिलना और परिवार में कलह जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक पश्चिम दिशा में टूटे-फूटे फर्नीचर, कबाड़ या अनुपयोगी सामान नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। माना जाता है कि यह स्थिति शनिदेव के अशुभ प्रभाव को बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर घर से बेकार और टूटी वस्तुओं को हटाते रहना शुभ माना गया है। घर की पश्चिम दिशा में गंदगी या बदबू भी नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर कूड़ेदान को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी माना गया है। वास्तु मान्यता है कि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साफ-सफाई बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।पश्चिम दिशा में पुराने, फटे या गंदे पर्दे लगाना भी अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साफ और सुंदर पर्दे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं और मानसिक शांति बढ़ाते हैं। वहीं फटे पर्दे दुर्भाग्य और नकारात्मकता को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। रिश्तों और पारिवारिक स्थिरता के लिए भी पश्चिम दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम बनाना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा में शयनकक्ष बनाना शुभ माना जाता है। इससे पति-पत्नी के संबंध मजबूत होते हैं और करियर में स्थिरता आती है। वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि घर का मंदिर पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर के मुखिया की सेहत और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। मंदिर के लिए उत्तर, पूर्व या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु के छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। घर की पश्चिम दिशा को साफ, संतुलित और व्यवस्थित रखने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है और जीवन में स्थिरता, तरक्की और खुशहाली आती है।
शनिवार को खाएं ये खास चीजें, शनिदेव चमका देंगे किस्मत, मिलेगी तरक्की और सफलता

नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति चाहता है कि शनि की कृपा उस पर बनी रहे और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर हों। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को कुछ खास उपाय करने के साथ यदि खानपान में भी शनि से जुड़ी चीजों को शामिल किया जाए, तो शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में तरक्की, धन लाभ और सफलता के योग बनने लगते हैं। बहुत से लोग शनिवार को व्रत रखते हैं, लेकिन अगर कोई व्रत न कर पाए तो वह खानपान के जरिए भी शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकता है। माना जाता है कि शनिवार के दिन शनि से संबंधित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शनि के प्रतिकूल प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। शनिवार को खिचड़ी खाना बेहद शुभ माना गया है। खासतौर पर उड़द दाल की खिचड़ी शनिदेव को प्रिय मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि उड़द दाल से बनी खिचड़ी का भोग शनिदेव को लगाने और स्वयं सेवन करने से शनि दोष शांत होते हैं। यदि उड़द दाल उपलब्ध न हो, तो अन्य दालों की खिचड़ी भी लाभकारी मानी जाती है। यह उपाय न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता है। भुने हुए काले चने भी शनिवार के दिन विशेष महत्व रखते हैं। अक्सर लोग इस दिन बंदरों को काले चने खिलाते हैं, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यदि व्यक्ति स्वयं भी भुने हुए काले चनों का सेवन करे, तो शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। काले चने शनि ग्रह से जुड़े माने जाते हैं और इन्हें खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होने के साथ जीवन में स्थिरता और सफलता आने लगती है। शनिवार को काले तिल का सेवन भी बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, काले तिल भगवान विष्णु और शनिदेव दोनों को प्रिय हैं। शनिवार के दिन काले तिल से पूजा करना, पीपल के वृक्ष पर अर्पित करना और प्रसाद के रूप में सेवन करना पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। मान्यता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं और जीवन में तरक्की के रास्ते खोलते हैं। इसके अलावा शनिवार को काला जामुन खाना भी लाभकारी माना गया है। जामुन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ फल देने वाला माना जाता है। लाल किताब के अनुसार, काले जामुन का सेवन और इसे कौओं या कुत्तों को खिलाना ग्रह दोषों को कम करने में सहायक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शनिवार को श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। खानपान से जुड़े ये आसान उपाय न केवल शनिदेव की कृपा दिलाते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और तरक्की का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।
आज का ज्योतिषीय संकेत 9 मई 2026: सूर्य देव की कृपा से नौकरी और करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

नई दिल्ली। 9 मई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति संकेत दे रही है कि आज कुछ जातकों पर सूर्य देव की विशेष कृपा बनी रह सकती है, जिससे करियर और नौकरी से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। मेष राशि:आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत को सराहना मिल सकती है। किसी वरिष्ठ अधिकारी से सहयोग प्राप्त होगा और रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। वृषभ राशि:आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में प्रमोशन का मार्ग खोल सकती हैं। मिथुन राशि:आज सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत है। कामकाज में थोड़ी उलझन रह सकती है, लेकिन धैर्य से स्थिति संभल जाएगी। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। कर्क राशि:परिवार और कार्यस्थल दोनों जगह संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। आज कोई अच्छी खबर मिल सकती है, खासकर नौकरी या पदोन्नति से जुड़ी हुई। सिंह राशि:सूर्य देव की विशेष कृपा आपके ऊपर बनी रह सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। प्रमोशन के योग बन सकते हैं। कन्या राशि:काम में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। छोटी गलतियों से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें, लेकिन दिन अंत तक सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। तुला राशि:साझेदारी और टीमवर्क से लाभ होगा। किसी पुराने प्रोजेक्ट में सफलता मिल सकती है। नौकरी में तरक्की के संकेत हैं। वृश्चिक राशि:आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। मेहनत का फल देर से मिलेगा, लेकिन मिलेगा जरूर। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात फायदेमंद हो सकती है। धनु राशि:भाग्य आपका साथ देगा। नए अवसर मिल सकते हैं। विदेश या दूरस्थ स्थान से जुड़े कामों में सफलता के योग हैं। मकर राशि:कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छे से निभा लेंगे। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी और भविष्य की योजना मजबूत होगी। कुंभ राशि:नए विचार और योजनाएं आगे बढ़ेंगी। नौकरी में बदलाव या प्रमोशन की संभावना बन सकती है। मित्रों का सहयोग मिलेगा। मीन राशि:आज भावनात्मक रूप से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कार्यक्षेत्र में सुधार के संकेत हैं और रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। कुल मिलाकर 9 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए करियर और आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत दे रहा है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन तरक्की और नए अवसरों की संभावना लेकर आया है।
शनिवार को घर में तेल क्यों नहीं लाना चाहिए? जानिए इसके पीछे का ज्योतिषीय रहस्य

नई दिल्ली। शनिवार का दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन से जुड़ी कई धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक मान्यता यह भी है कि शनिवार को घर में तेल या लोहे की वस्तुएं नहीं लानी चाहिए। वर्षों से लोग इस नियम का पालन करते आ रहे हैं, लेकिन कई लोग इसे केवल अंधविश्वास मानते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शनिवार को तेल खरीदने से क्यों मना किया जाता है और इसके पीछे क्या ज्योतिषीय कारण बताए गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तेल को शनिदेव की प्रिय वस्तुओं में शामिल माना गया है। विशेष रूप से सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित किया जाता है और शनिवार के दिन तेल दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि शनिवार को तेल का दान करने से शनि दोष शांत होता है और व्यक्ति को शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है। इसी वजह से कई विद्वान इस दिन तेल खरीदकर घर लाने से बचने की सलाह देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति शनिवार को तेल घर लेकर आता है तो इसे प्रतीकात्मक रूप से “शनि को घर लाना” माना जाता है। कहा जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए यह स्थिति नकारात्मक प्रभाव बढ़ा सकती है। ऐसे लोगों को शनिवार के दिन तेल खरीदने की बजाय तेल का दान करना अधिक शुभ माना गया है। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का यह भी कहना है कि यह नियम हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू नहीं होता। जिन लोगों की जन्मकुंडली में शनि मजबूत स्थिति में हो, जैसे शनि उच्च राशि, स्वराशि या मूल त्रिकोण में स्थित हो, अथवा शनि शुभ भाव का स्वामी बनकर लाभकारी स्थिति में बैठा हो, उनके लिए शनिवार को तेल खरीदना अशुभ नहीं माना जाता। ऐसे लोग इस नियम के अपवाद माने जाते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की अशुभ दृष्टि हो या जो शनि पीड़ा से गुजर रहे हों, उन्हें शनिवार को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और जरूरतमंदों को तेल दान करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे शनि का नकारात्मक प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं। धार्मिक परंपराओं में कई नियम प्रतीकात्मक और आस्था से जुड़े होते हैं। इसलिए शनिवार को तेल खरीदने या न खरीदने का निर्णय व्यक्ति की आस्था, कुंडली की स्थिति और पारिवारिक मान्यताओं पर भी निर्भर करता है।
15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण

नई दिल्ली। मई महीने के मध्य के बाद उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, सूरज की तपिश और अधिक तीखी हो जाती है और वातावरण शुष्क होता जाता है। इसी समय को वृषभ संक्रांति से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस परिवर्तन के बाद गर्मी अपने अगले और अधिक तीव्र चरण में पहुंच जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश धरती के तापमान और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालता है। इस राशि का संबंध स्थिरता और तीव्र ऊर्जा से माना जाता है, और जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तो उसकी उष्मा का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी समय दिन लंबे होने लगते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता है। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी इस अवधि को और महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का संकेत माना गया है, जहां सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से प्रभावित करती हैं। ग्रामीण मान्यताओं में इस समय को ‘नौतपा’ से भी जोड़ा जाता है, जो भीषण गर्मी के चरम समय का संकेत देता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा सूर्य की ओर अधिक झुका होता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणें जमीन और वातावरण को तेजी से गर्म करती हैं और पहले से जमा गर्मी भी इसमें शामिल हो जाती है। यही कारण है कि मई के मध्य के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि देखने को मिलती है। इस अवधि में हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण अधिक शुष्क हो जाता है, जिससे दिन के समय तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं होता और वातावरण में ठंडक का अभाव महसूस होता है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को गर्मी के लगातार जमा होने का प्रभाव मानते हैं, जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंच जाता है।