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अमेज़न का ₹10 लाख करोड़ से ज्यादा का दांव, स्पेस रेस में मचा हलचल

नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Amazon ने अंतरिक्ष और सैटेलाइट इंटरनेट की दौड़ में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। कंपनी ने $11.57 अरब (करीब ₹1,07,838 करोड़) में सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Globalstar को खरीदने का ऐलान किया है। इस डील के बाद एलन मस्क की Starlink और जेफ बेजोस की Amazon के बीच स्पेस टेक्नोलॉजी में मुकाबला और तेज हो गया है। सैटेलाइट इंटरनेट में Amazon की बड़ी छलांगAmazon पहले से ही अपने प्रोजेक्ट ‘Kuiper’ के तहत सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क बना रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2029 तक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 3,200 सैटेलाइट्स तैनात किए जाएं। Globalstar की एंट्री के बाद Amazon का नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा, क्योंकि कंपनी के पास पहले से ही 200 से ज्यादा सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इस अधिग्रहण से Amazon को न सिर्फ टेक्नोलॉजी बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्लोबल स्तर पर अपनी पकड़ भी मजबूत करने का मौका मिलेगा। Direct-to-Device टेक्नोलॉजी से बदलेगा इंटरनेट का भविष्यGlobalstar की सबसे बड़ी ताकत उसकी Direct-to-Device (D2D) टेक्नोलॉजी है। इस तकनीक की मदद से मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकते हैं, यानी इसके लिए किसी टावर या ग्राउंड नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। यह तकनीक उन क्षेत्रों में बेहद उपयोगी है जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता या इमरजेंसी सेवाओं के लिए कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। Amazon का फोकस अब इसी तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करने पर है, जिसे कंपनी 2028 तक लॉन्च करने की योजना बना रही है। Apple के साथ साझेदारी रहेगी बरकरारGlobalstar पहले से ही Apple के साथ काम कर रही है। iPhone और Apple Watch में मिलने वाले Emergency SOS और Find My जैसे फीचर्स इसी सैटेलाइट नेटवर्क पर आधारित हैं। Amazon ने स्पष्ट किया है कि इस डील के बाद भी Apple के साथ साझेदारी जारी रहेगी।Apple ने 2024 में Globalstar में करीब $1.5 बिलियन का निवेश कर 20% हिस्सेदारी हासिल की थी, जिससे यह कंपनी पहले से ही तकनीकी रूप से मजबूत स्थिति में थी। Starlink की चुनौती और मस्क की बढ़तएलन मस्क की कंपनी SpaceX का Starlink फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में सबसे आगे है। कंपनी के पास करीब 10,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स का विशाल नेटवर्क है और यह 90 लाख से अधिक यूजर्स को सेवा दे रही है।Starlink हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के साथ-साथ अब D2D तकनीक पर भी तेजी से काम कर रही है। ऐसे में Amazon के लिए यह प्रतिस्पर्धा आसान नहीं होगी, लेकिन Globalstar की तकनीक से उसे नई मजबूती जरूर मिलेगी। स्पेस में नई ‘टेक वॉर’ की शुरुआतविशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल एक कंपनी अधिग्रहण नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में प्रभुत्व की नई जंग की शुरुआत है। जहां एक तरफ Elon Musk अपने Starlink नेटवर्क को विस्तार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ Jeff Bezos की Amazon अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है।Globalstar की टेक्नोलॉजी और Amazon की फाइनेंशियल ताकत मिलकर आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह बदल सकती है।

टाटा का बड़ा दांव: ₹1500 करोड़ निवेश से चीन को कड़ी टक्कर, बदलता मैन्युफैक्चरिंग गेम

नई दिल्ली।भारत की दिग्गज कंपनी Tata Group ने iPhone मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब ₹1,500 करोड़ का नया निवेश कर टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस निवेश के साथ कंपनी का लक्ष्य भारत को एप्पल का प्रमुख ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब Apple अपनी सप्लाई चेन को चीन से धीरे-धीरे बाहर निकालकर भारत जैसे देशों में शिफ्ट कर रहा है। iPhone मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती पकड़रिपोर्ट्स के अनुसार, अब अमेरिका में बिकने वाले 70% से ज्यादा iPhones भारत में तैयार हो रहे हैं। इसमें Tata Electronics और Foxconn जैसी कंपनियों की अहम भूमिका है।टाटा की एंट्री और लगातार बढ़ते निवेश ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मैप पर मजबूत स्थिति दिलाई है। ₹1,500 करोड़ निवेश से बड़ा विस्तारTata Sons ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट की अधिकृत पूंजी बढ़ाकर ₹6,250 करोड़ कर दी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है।इसके अलावा, टाटा ने पहले ही Pegatron की भारत यूनिट में 60% हिस्सेदारी खरीदकर iPhone सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। लगातार बढ़ रहा निवेश और उत्पादन क्षमताFY26 में Tata Group ने लगभग ₹3,000 करोड़ का निवेश Tata Electronics में किया है।पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार का तेजी से विस्तार किया है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है।FY25 में कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर ₹66,206 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना वृद्धि दर्शाती है। सेमीकंडक्टर में भी बड़ा दांवटाटा सिर्फ iPhone मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारी निवेश कर रही है।गुजरात में लगभग $14 बिलियन का फेब्रिकेशन प्लांटअसम में चिप असेंबली और टेस्टिंग यूनिटये दोनों प्रोजेक्ट भारत को टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत करेंगे। भारत बन सकता है ग्लोबल टेक हबविशेषज्ञों का मानना है कि टाटा और Apple की साझेदारी भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बना सकती है।चीन के दबदबे को चुनौती देते हुए भारत तेजी से नई सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनता जा रहा है।

पेट्रोल-डीजल से राहत: भारत में लॉन्च होंगी 6 नई इलेक्ट्रिक कारें, 500KM+ रेंज

नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बाजार और भी बड़ा होने वाला है। Tata Motors, Maruti Suzuki, Toyota और Kia जैसी बड़ी कंपनियां अगले दो सालों में नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन कारों की खास बात यह होगी कि इनमें से कई मॉडल 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने में सक्षम होंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे सरकार की नीतियां, चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार और बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतें अहम कारण हैं। ऐसे में अब कंपनियां बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक नई EVs लॉन्च करने पर जोर दे रही हैं। Toyota eBella और Kia Syros EVइस सूची में सबसे पहले नाम Toyota eBella का आता है, जो 543 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा करती है और इसे प्रीमियम डिजाइन के साथ पेश किया जाएगा। वहीं Kia Syros EV को शहर के उपयोग के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 369 किलोमीटर हो सकती है। Tata Sierra EV और VinFast VF3इसी कड़ी में Tata Sierra EV की भी वापसी हो रही है, जो 90 के दशक की मशहूर SUV का इलेक्ट्रिक अवतार होगी। यह कार 2026 में लॉन्च हो सकती है और इसमें दमदार परफॉर्मेंस देखने को मिलेगी। इसके अलावा वियतनाम की कंपनी VinFast भी भारत में अपनी VinFast VF3 के साथ एंट्री करने जा रही है, जो खासतौर पर शहरों के लिए डिजाइन की गई छोटी इलेक्ट्रिक कार होगी। Tata Safari EV और Maruti YMC MPVटाटा मोटर्स अपनी लोकप्रिय SUV Tata Safari EV को भी इलेक्ट्रिक अवतार में लाने की तैयारी में है, जिसमें बड़ी बैटरी और नए फीचर्स देखने को मिलेंगे। वहीं Maruti Suzuki एक नई इलेक्ट्रिक MPV Maruti YMC MPV पर काम कर रही है, जो बड़े परिवारों के लिए किफायती विकल्प बन सकती है। आने वाले समय में भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की भरमार होने वाली है। लंबी रेंज, कम खर्च और बेहतर तकनीक के साथ ये गाड़ियां पेट्रोल-डीजल वाहनों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।

दवाइयों की खोज में AI का बढ़ता दखल, एक्सपर्ट्स ने बताया गेमचेंजर

नई दिल्ली। दवाइयों की खोज और विकास के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभाने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई के उपयोग से सटीक और प्रभावी दवाइयों का विकास संभव होगा, जिससे मरीजों को बेहतर और पर्सनलाइज्ड इलाज मिल सकेगा। ‘इंडिया फार्मा 2026’ में भविष्य की रणनीति पर मंथनइंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन आयोजित चार प्रमुख सत्रों में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने फार्मा सेक्टर के भविष्य पर चर्चा की। इस दौरान हेल्थकेयर इकोसिस्टम को इनोवेशन आधारित बनाने पर जोर दिया गया। सिर्फ डिजिटलीकरण नहीं, सिस्टम को नए सिरे से सोचने की जरूरतफार्मा सेक्टर के विशेषज्ञों ने कहा कि केवल मौजूदा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण काफी नहीं है, बल्कि उन्हें पूरी तरह नए तरीके से डिजाइन करना होगा। इसके लिए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीकी आधार जरूरी है। नीतियों और क्रियान्वयन के बीच गैप कम करने पर जोरउद्घाटन सत्र में नीतिगत उद्देश्यों और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच मौजूद अंतर को कम करने की जरूरत बताई गई। मनोज जोशी ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले मॉडल और मजबूत सरकारी लैब नेटवर्क की वकालत की। भारत-आधारित रिसर्च मॉडल की आवश्यकताराजीव बहल ने कहा कि रिसर्च फंडिंग बढ़ने के बावजूद भारत को अपने खुद के रिसर्च मॉडल को मजबूत करना होगा, जिसमें उद्योग और शिक्षा जगत के बीच विश्वास और सहयोग बढ़े। रेगुलेटरी सिस्टम को बनाना होगा ग्लोबल स्तर काएक सत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप कुशल और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया।डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि बेहतर रेगुलेशन के लिए सभी हितधारकों की भागीदारी जरूरी है। फार्मा वैल्यू चेन में एआई की बढ़ती भूमिकातीसरे सत्र में यह सामने आया कि एआई दवा खोज से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन को बदल सकता है। इससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी और नई दवाइयों की खोज तेज होगी। CRDMO सेक्टर में भारत की मजबूत पकड़चौथे सत्र में CRDMO सेक्टर में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर का यह उद्योग 10-12% की दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक आउटसोर्सिंग की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

Android यूजर्स के लिए खुशखबरी, मिलेगा iPhone जैसा फीचर, गूगल जल्द करेगा लॉन्च

नई दिल्ली। Android स्मार्टफोन यूजर्स को जल्द ही iPhone जैसा आसान और तेज फाइल शेयरिंग अनुभव मिलने वाला है। Google एक नए फीचर ‘Tap to Share’ पर काम कर रहा है, जिससे सिर्फ दो फोन को पास लाकर तुरंत डेटा शेयर किया जा सकेगा। यह फीचर काफी हद तक NameDrop जैसा बताया जा रहा है। कैसे काम करेगा नया फीचर? Tap to Share का इस्तेमाल बेहद सरल होगा। यूजर्स को अपने दोनों Android फोन अनलॉक करके एक-दूसरे के करीब लाना होगा जैसे स्क्रीन-टू-स्क्रीन या किनारे मिलाकर। कनेक्शन बनते ही स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा, जो डेटा ट्रांसफर शुरू होने का संकेत देगा। अगर पहली बार में कनेक्शन नहीं बनता, तो यूजर्स फोन को अलग तरीके से जैसे बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग कंपनियों के फोन में NFC सेंसर की पोजिशन अलग होती है। क्या-क्या कर सकेंगे शेयर? इस फीचर के जरिए सिर्फ फोटो और वीडियो ही नहीं, बल्कि कॉन्टैक्ट, लिंक, लोकेशन और अन्य डेटा भी आसानी से शेयर किया जा सकेगा। यानी यह एक ऑल-इन-वन फाइल शेयरिंग टूल की तरह काम करेगा। शुरुआत में कनेक्शन NFC के जरिए होगा, लेकिन बड़ी फाइल्स ट्रांसफर करने के लिए यह ऑटोमैटिकली Wi-Fi या Bluetooth जैसे तेज माध्यमों का इस्तेमाल करेगा। मौजूदा सिस्टम से होगा इंटीग्रेशन Tap to Share, Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा। खासतौर पर इसे Quick Share के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे यूजर्स को और स्मूथ अनुभव मिलेगा। प्राइवेसी पर भी फोकस इस फीचर में यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलेगा कि वे कौन-सी जानकारी शेयर करना चाहते हैं जैसे फोन नंबर, ईमेल या प्रोफाइल फोटो। इससे डेटा सुरक्षा बेहतर होगी। कब तक होगा लॉन्च? हालांकि Google ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फीचर Android 17 के साथ इस साल लॉन्च हो सकता है। शुरुआती टेस्टिंग Samsung के डिवाइसेज पर देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि इसका रोलआउट जल्द शुरू हो सकता है।

बजट सेगमेंट में धमाका: Realme का नया 5G फोन शानदार फीचर्स के साथ लॉन्च

नई दिल्ली। Realme आज भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन Realme Narzo 100 Lite 5G लॉन्च करने जा रहा है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए लाया जा रहा है जो कम कीमत में बड़ी बैटरी और स्मूद परफॉर्मेंस चाहते हैं। 7000mAh बैटरी बनेगी सबसे बड़ी ताकतइस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7000mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल का भरोसा देती है। कंपनी इसमें बायपास चार्जिंग फीचर भी दे रही है, जिससे गेमिंग के दौरान फोन ज्यादा गर्म नहीं होगा। 144Hz डिस्प्ले के साथ स्मूद एक्सपीरियंसफोन में 6.8 इंच की बड़ी डिस्प्ले दी गई है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 180Hz टच सैंपलिंग रेट सपोर्ट करती है। इसके अलावा 900 निट्स की पीक ब्राइटनेस से धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देगी। दमदार प्रोसेसर और कूलिंग सिस्टमRealme Narzo 100 Lite 5G में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए बेहतर परफॉर्मेंस देगा। साथ ही इसमें एयरफ्लो वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी मिलेगा, जिससे फोन ओवरहीट नहीं होगा। कैमरा और AI फीचर्सफोन में 13 मेगापिक्सल का AI रियर कैमरा दिया गया है। इसके अलावा स्मार्ट टच 2.0 और कई AI फीचर्स भी इस डिवाइस में मिलेंगे, जो यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाएंगे। यह स्मार्टफोन IP64 रेटिंग के साथ आएगा, जिससे यह धूल और पानी से कुछ हद तक सुरक्षित रहेगा। फोन एंड्रॉयड 16 पर आधारित Realme UI 7.0 पर काम करेगा। कीमत और मुकाबलारिपोर्ट्स के अनुसार, इस फोन की कीमत ₹10,000 से ₹12,000 के बीच रखी जा सकती है। इस रेंज में यह फोन Redmi 15C 5G, POCO M7 5G और Samsung Galaxy F70e को कड़ी टक्कर दे सकता है। Realme Narzo 100 Lite 5G बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और 5G सपोर्ट के साथ बजट सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। अब यूजर्स को इसके लॉन्च के बाद कीमत और परफॉर्मेंस का इंतजार है।

Google Pixel 10 डिस्काउंट में उपलब्ध: शानदार ऑफर के साथ मिल रहा प्रीमियम स्मार्टफोन

नई दिल्ली।  अगर आप नया प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा मौका है। Google का फ्लैगशिप फोन Pixel 10 अब पहले से सस्ता मिल रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Flipkart पर इस फोन पर शानदार डिस्काउंट दिया जा रहा है, जिससे ग्राहक हजारों रुपये बचा सकते हैं। कितनी कम हुई कीमत?भारत में यह फोन ₹79,999 में लॉन्च हुआ था, लेकिन अब ₹5,000 के फ्लैट डिस्काउंट के बाद कीमत ₹74,999 हो गई है HDFC बैंक क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर ₹4,000 की अतिरिक्त छूट मिल रही है। इसके अलावा एक्सचेंज ऑफर और ₹5,000 तक का बोनस भी दिया जा रहा है यानी कुल मिलाकर इस फोन पर अच्छी-खासी बचत की जा सकती है। जानें Pixel 10 के फीचर्सGoogle Pixel 10 में दमदार फीचर्स दिए गए हैं 6.3 इंच OLED डिस्प्ले (120Hz रिफ्रेश रेट)Gorilla Glass Victus 2 प्रोटेक्शनGoogle Tensor G5 प्रोसेसरAndroid 16 ऑपरेटिंग सिस्टम7 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा कैमरा और बैटरी पैककैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 48MP का प्राइमरी लेंस, 13MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा लगा हुआ है। फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 10.5MP का सेंसर दिया गया है। इस फोन का बैटरी पैक 4970mAh का है। Apple प्रोडक्ट्स पर भी मिल रही छूटसिर्फ Google ही नहीं, Apple के प्रोडक्ट्स पर भी ऑफर चल रहा है। Vijay Sales की Apple Days 2026 सेल में iPhone, MacBook, iPad और AirPods पर डिस्काउंट सेल 11 अप्रैल से 16 अप्रैल तक चलेगी iPhone 17 की कीमत ₹78,790 से शुरू iPhone 17e ₹60,490 से उपलब्ध कुछ प्रोडक्ट्स पर ₹10,000 तक का एक्सचेंज बोनस अगर आप एक प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, तो यह सही समय हो सकता है। Pixel 10 पर मिल रहे डिस्काउंट और एक्स्ट्रा ऑफर्स इसे और भी किफायती बना रहे हैं।

नैनोफाइबर तकनीक से लैस यह नवाचार आर्द्रता और नमी को पहचानने में होगा सबसे सटीक।

नई दिल्ली।भारत के वैज्ञानिक अनुसंधान क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए शोधकर्ताओं ने एक ऐसे अत्याधुनिक न्यूरोमॉर्फिक सेंसर का विकास किया है जो मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और मेंढक की त्वचा की संवेदनशीलता से प्रेरित है। नैनोफाइबर तकनीक पर आधारित यह नवाचार भविष्य की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट उपकरणों के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इस तकनीक को विशेष रूप से आर्द्रता और पर्यावरणीय परिवर्तनों को बिजली की गति से महसूस करने के लिए डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिकों की इस सफलता ने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है और यह दर्शाया है कि किस तरह प्रकृति से प्रेरणा लेकर जटिल समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। इस सेंसर का मुख्य आधार मेंढक की त्वचा की वह अद्भुत विशेषता है जो उसे आसपास की नमी को तुरंत भांपने में मदद करती है। वैज्ञानिकों ने नैनो तकनीक का उपयोग करते हुए एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जो मानव मस्तिष्क के न्यूरॉन्स की तरह काम करता है। यह सेंसर न केवल डेटा को तेजी से इकट्ठा करता है बल्कि उसे प्रोसेस करने की क्षमता भी रखता है जिससे बिजली की खपत काफी कम हो जाती है। मौजूदा सेंसरों के मुकाबले यह तकनीक कहीं अधिक सटीक और संवेदनशील है जो मौसम के पूर्वानुमान से लेकर औद्योगिक सुरक्षा तक के क्षेत्रों में बड़े बदलाव लाने का दम रखती है। न्यूरोमॉर्फिक इंजीनियरिंग का यह सफल प्रयोग भविष्य के रोबोटिक्स और वियरेबल डिवाइसेस यानी शरीर पर पहने जाने वाले उपकरणों के लिए नए मार्ग खोलेगा। यह सेंसर नमी के सूक्ष्म स्तर को पहचान कर तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम है जो स्वास्थ्य सेवाओं में रोगियों की निगरानी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ इसकी कम ऊर्जा खपत और उच्च प्रसंस्करण क्षमता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस दौर में जहां डेटा की गति सबसे महत्वपूर्ण है वहां यह स्वदेशी तकनीक एक गेम चेंजर साबित हो सकती है जो पूरी तरह से स्वायत्त प्रणालियों को ऊर्जा प्रदान करेगी।प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान इस सेंसर ने चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी अपनी सटीकता को प्रमाणित किया है। मेंढक की जैविक संरचना को नैनोफाइबर के कृत्रिम ढांचे में ढालना एक जटिल प्रक्रिया थी जिसे भारतीय विशेषज्ञों ने अपनी निरंतर मेहनत से सफल बनाया है। यह तकनीक विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी देने और स्मार्ट शहरों में जल प्रबंधन प्रणालियों को बेहतर बनाने में सहायक होगी। इस नवाचार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मशीनों के बजाय अधिक मानवीय और जैविक अनुभव की ओर ले जाने की क्षमता रखता है। आगामी वर्षों में इस तकनीक के व्यावसायिक उत्पादन और विभिन्न उद्योगों में इसके एकीकरण की प्रबल संभावनाएं हैं। विज्ञान और तकनीक के संगम से विकसित यह न्यूरोमॉर्फिक सेंसर भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।प्रकृति और इंजीनियरिंग के इस मेल ने यह साबित कर दिया है कि जैविक प्रेरणा से निर्मित तकनीकें न केवल प्रभावी होती हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होती हैं। जैसे जैसे स्मार्ट डिवाइसेस की मांग बढ़ रही है इस प्रकार के उच्च क्षमता वाले सेंसरों की भूमिका आने वाले समय में अनिवार्य हो जाएगी जो मानव जीवन को अधिक सुरक्षित और सरल बनाएंगे।

नासा ने रच दिया इतिहास, चांद से धरती पर आर्टेमिस-2 की 'फायरिंग' लैंडिंग

वाशिंगटन। अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी। करीब 50 से अधिक वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चंद्रमा के करीब जाकर सुरक्षित वापस लौट आया है। नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन पृथ्वी से 4,06,778 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी तय कर वापस लौटे हैं। यह अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा है। ओरियन अंतरिक्ष यान की वापसी बेहद रोमांचक और दिल दहला देने वाली थी। जब यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तो इसकी गति 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक थी। वायुमंडल के घर्षण के कारण यान के चारों ओर आग का गोला बन गया और तापमान चरम पर पहुंच गया। भीषण गर्मी और दबाव को सहते हुए ओरियन के हीट शील्ड ने अपना काम किया। कुछ ही देर में प्रशांत महासागर के ऊपर विशाल पैराशूट खुले और यान ने पानी में सुरक्षित गोता लगाया। अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी। क्या खास था इस मिशन में? आर्टेमिस II नासा के चंद्रमा पर फिर से पैर जमाने के महात्वाकांक्षी कार्यक्रम का दूसरा चरण है। इससे पहले आर्टेमिस I बिना किसी क्रू के गया था, लेकिन इस बार इंसानों ने चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाया। मिशन का मुख्य उद्देश्य गहरे अंतरिक्ष में लाइफ-सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और संचार प्रणालियों की क्षमता को जांचना था। अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह और क्षितिज से ऊपर उठती ‘अर्थराइज’ की अद्भुत तस्वीरें लीं, जो भविष्य के शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस मिशन की सफलता ने आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ कर दिया है, जिसका लक्ष्य पांच दशकों के बाद पहली बार इंसानों को वास्तव में चंद्रमा की सतह पर उतारना है। भारत के लिए भी यह पल खास है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग लगातार बढ़ रहा है। आर्टेमिस II की सफलता भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी नए रास्ते खोल सकती है, क्योंकि भारत पहले ही आर्टेमिस समझौते का हिस्सा बन चुका है। मानवता के लिए एक नई सुबह नासा के अधिकारियों ने इसे मानवता के लिए एक विशाल छलांग बताया है। इस मिशन ने साबित कर दिया है कि ओरियन कैप्सूल और इसके सुरक्षा उपकरण गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियों को झेलने में सक्षम हैं। अब दुनिया की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं जब आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत पहली महिला और पहला अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा की धूल पर अपने पदचिह्न छोड़ेगा। यह मिशन केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है; यह उस ‘डीप स्पेस’ आर्किटेक्चर की नींव है जो भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह (Mars) तक ले जाने का माद्दा रखती है।

इंस्टाग्राम में बड़ा अपडेट! अब पोस्ट के बाद भी एडिट होंगे कमेंट, जानिए नया फीचर कैसे करेगा काम

नई दिल्ली।  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram ने अपने यूजर्स के लिए एक नया और बेहद उपयोगी फीचर लॉन्च किया है। अब यूजर्स किसी भी पोस्ट पर किए गए कमेंट को पोस्ट करने के बाद भी एडिट कर सकेंगे। इस फीचर का मकसद यूजर एक्सपीरियंस को आसान और बेहतर बनाना है। 15 मिनट में कर सकेंगे बदलावInstagram के इस नए अपडेट के तहत यूजर्स को कमेंट एडिट करने के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा। इस दौरान वे अपनी गलती सुधार सकते हैं या अपनी बात को बदल सकते हैं। खास बात यह है कि इस समय सीमा के भीतर कमेंट को कई बार एडिट किया जा सकता है। पहले क्या थी परेशानी?पहले अगर कोई यूजर कमेंट में गलती कर देता था, तो उसे पूरा कमेंट डिलीट करके दोबारा लिखना पड़ता था। यह प्रक्रिया थोड़ी झंझट भरी थी, लेकिन अब नए फीचर के आने के बाद यह समस्या खत्म हो गई है। ऐसे करें कमेंट एडिटInstagram पर कमेंट एडिट करना बहुत आसान है। इसके लिए यूजर को अपने कमेंट को कुछ देर दबाकर रखना होगा। इसके बाद “Edit” ऑप्शन पर टैप करके वह कमेंट में बदलाव कर सकता है। एडिट किए गए कमेंट के नीचे “Edited” लिखा दिखाई देगा, जिससे यह पता चलता है कि उसमें बदलाव किया गया है। क्या नहीं कर सकते एडिट?इस फीचर के तहत यूजर्स सिर्फ टेक्स्ट को ही एडिट कर सकते हैं। अगर कमेंट में कोई फोटो या अन्य मीडिया जुड़ा है, तो उसे बदला नहीं जा सकेगा। WhatsApp में पहले से मौजूद सुविधाWhatsApp पर यह फीचर पहले से उपलब्ध है, जहां यूजर्स 15 मिनट के अंदर अपने भेजे गए मैसेज को एडिट कर सकते हैं। सेफ्टी फीचर्स पर भी फोकसInstagram की पैरेंट कंपनी Meta ने हाल ही में युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए फीचर्स भी लॉन्च किए हैं। इसमें Teen Accounts जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो कम उम्र के यूजर्स के लिए कंटेंट को फिल्टर करते हैं और पैरेंट्स को कंट्रोल देते हैं। Instagram का यह नया फीचर यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। अब छोटी-छोटी गलतियों के लिए कमेंट डिलीट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यूजर्स को अपने कंटेंट पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा।