मैसेजिंग ऐप्स यूजर्स को बड़ी राहत…. SIM Binding नियम लागू होने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ी

नई दिल्ली। डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal के लिए SIM Binding नियम बनाया है। पहले सरकार का इस नियम को 1 मार्च से लागू करने का प्लान था लेकिन दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत दी है। सरकार ने SIM Binding नियम को लागू करने की आखिरी तारीख को अब साल के अंत तक 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। दरअसल, इन प्लेटफॉर्म्स ने सरकार को बताया कि इस नियम को लागू करने में उन्हें कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने ज्यादा समय मांगा था। इस पर सरकार ने उनकी बात मानते हुए डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। मनीकंट्रोल के सूत्रों के मुताबिक, DoT ने 30 मार्च से कंपनियों को अलग-अलग इस फैसले की जानकारी देना शुरू कर दिया था। सिर्फ मैसेजिंग ऐप्स ही नहीं, बल्कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां जैसे Google और Apple ने भी इस नियम को लागू करने के लिए ज्यादा समय मांगा था। खासतौर पर Apple ने कहा कि उसके iOS सिस्टम में कुछ तकनीकी सीमाएं हैं, जिनकी वजह से इस नियम को तुरंत लागू करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी इस पर काम कर रही है और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। इस नियम के तहत अब इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वे तभी काम करें जब यूजर का रजिस्टर्ड SIM उसी फोन में मौजूद हो। यानी अगर SIM निकाल दिया गया या बदल दिया गया, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। ऐसे काम करता है यह नियमSIM Binding नियम को इस तरह तैयार किया गया है कि मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal यूजर के मोबाइल में मौजूद SIM कार्ड से जुड़े रहें। आसानी से समझें तो अगर आपने जिस नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में होना चाहिए। अगर SIM हटा दिया गया, बदल दिया गया या बंद हो गया, तो ऐप का एक्सेस सीमित हो सकता है या अकाउंट काम करना बंद कर सकता है। इस नियम का मकसद यह कन्फर्म करना है कि हर अकाउंट किसी असली और एक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ा रहे, जिससे फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड को रोका जा सके। जरूरी है यह नियमदरअसल, इस नियम की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि हाल के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी WhatsApp अकाउंट और साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोग बिना एक्टिव SIM के भी मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे उनकी पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में SIM Binding नियम से हर अकाउंट को एक असली मोबाइल नंबर से जोड़ना आसान होगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।
ईरान की धमकी से टेक जगत में खलबली, Intel ने कर्मचारियों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता, उठाए जरूरी कदम

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिलिकॉन वैली तक पहुंच गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने हाल ही में अमेरिका की 18 बड़ी टेक कंपनियों को वैध सैन्य लक्ष्य घोषित किया है, जिसमें Apple, Google, Microsoft, Intel और अन्य शामिल हैं। इस धमकी के बाद ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है। Intel ने उठाया सुरक्षा कदमईरान की धमकी के तुरंत बाद Intel ने बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मिडिल ईस्ट में अपने कर्मचारियों और ऑपरेशंस की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। Intel इस मामले में प्रतिक्रिया देने वाली पहली बड़ी अमेरिकी टेक कंपनी बन गई है। ईरान की नाराजगी का कारणIRGC ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट कर अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान की धरती पर शामिल रही हैं। गार्ड्स ने कहा कि हर हत्या के बदले एक अमेरिकी कंपनी को तबाह किया जाएगा। कंपनियों को कार्यालय खाली करने का निर्देश भी दिया गया। निशाने पर कौन-कौनईरान की लिस्ट में दुनिया की प्रमुख टेक और अन्य कंपनियां शामिल हैं। टेक कंपनियों में Apple, Google, Microsoft, Nvidia, Intel, Cisco, HP, Oracle, IBM, Dell, Palantir और Boeing शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग, ईवी और AI क्षेत्र की कंपनियां जैसे JPMorgan, Tesla, GE और UAE की AI फर्म G42 भी शामिल हैं। डेटा सेंटर्स पर बढ़ता खतरामार्च में Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर्स पर हमला हुआ था, जिससे UAE में बड़े स्तर पर डिजिटल आउटेज हुआ। खाड़ी देश अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्लोबल हब बन रहे हैं। ऐसे में डेटा सेंटर्स पर हमले का खतरा पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। बता दें कि Intel के मुख्य ऑफिस अमेरिका में हैं, लेकिन इनके ऑपरेशंस और डेटा सेंटर्स इजरायल और UAE में हैं। इन जगहों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यही खतरा अन्य अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भी बना हुआ है, क्योंकि उनका मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन और डेटा सेंटर मौजूद है।
Realme आज लांच करेगी देश का पहला ‘सेल्फी मिरर’ फोन, जानिए इसके फीचर्स

नई दिल्ली। स्मार्टफोन कंपनी Realme आज भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन Realme 16 5G लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने इसे देश का पहला “सेल्फी मिरर फोन” बताया है। इसके साथ ही इसमें डुअल 50 मेगापिक्सल पोर्ट्रेट कैमरा सेटअप मिलने का दावा किया गया है। जानिए खासियत इस फोन की खासियत इसका यूनिक “सेल्फी मिरर” फीचर है। कंपनी ने बैक पैनल पर कैमरा मॉड्यूल के पास एक छोटा गोल मिरर दिया है, जिससे यूजर्स रियर कैमरे से ही हाई-रेजोल्यूशन सेल्फी ले सकेंगे। यह मिरर फोटो लेते समय यूजर को अपनी पोजिशन देखने में मदद करेगा। कंपनी ने Realme 16 5G के लिए अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर माइक्रोसाइट भी जारी की है, जहां इसके कई फीचर्स सामने आए हैं। फोन में 6.57 इंच का बड़ा डिस्प्ले दिया जाएगा और इसे मजबूत बनाने के लिए IP69 रेटिंग दी गई है, जिससे यह धूल और पानी से सुरक्षित रहेगा। पावरफुल बैटरी बैटरी के मामले में भी यह स्मार्टफोन काफी पावरफुल बताया जा रहा है। इसमें 7000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि यह दो दिन तक चल सकती है। हालांकि चार्जिंग स्पीड से जुड़ी जानकारी लॉन्च के समय सामने आएगी। ट्रिपल रियर कैमरा कैमरा सेटअप की बात करें तो Realme 16 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का सेल्फी कैमरा दिया गया है। कीमत कीमत को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लीक्स के अनुसार इसकी कीमत 25,000 से 30,000 रुपये के बीच हो सकती है। लॉन्च इवेंट में बैंक ऑफर्स और अन्य वेरिएंट्स की जानकारी भी दी जाएगी। फोन के प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज जैसे कई अहम फीचर्स का खुलासा कंपनी आज लॉन्चिंग के दौरान करेगी।
स्पेस नेटवर्क: कैसे काम करता है अंतरिक्ष का ‘सेल टावर’ और डेटा पहुंचाता है पृथ्वी तक

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स और पृथ्वी पर मिशन कंट्रोल टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक ‘स्पेस नेटवर्क’ नामक एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं। यह नेटवर्क अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और पृथ्वी से जुड़े रहने में मदद करता है, ताकि डेटा, वीडियो और आवाज तुरंत ट्रांसमिट हो सके। स्पेस नेटवर्क क्या है?स्पेस नेटवर्क में ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट्स (TDRS) का समूह शामिल है। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी से लगभग 35,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा में घूमते हैं और अंतरिक्ष में ‘सेल टावर’ की तरह काम करते हैं। इसका मतलब है कि स्पेस स्टेशन अपनी कक्षा में कहीं भी हो, टीडीआरएस सैटेलाइट से संपर्क बनाए रख सकता है। डेटा कैसे ट्रांसमिट होता है?जब स्पेस स्टेशन पर कोई अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल को डेटा, वीडियो या आवाज भेजता है, तो स्टेशन का कंप्यूटर इसे रेडियो सिग्नल में बदल देता है। यह सिग्नल स्टेशन के एंटीना के जरिए टीडीआरएस सैटेलाइट तक पहुंचता है। फिर टीडीआरएस इसे न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स कॉम्प्लेक्स तक रिले करता है, जहां से लैंडलाइन के जरिए ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल तक सिग्नल जाता है। पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड में पूरी होती है, इसलिए बातचीत में कोई noticeable देरी नहीं होती। वैज्ञानिक डेटा का पृथ्वी पर ट्रांसमिशनस्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स भौतिकी, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान जैसे कई प्रयोग करते हैं। इन प्रयोगों से मिलने वाला डेटा भी उसी स्पेस नेटवर्क के जरिए पृथ्वी पर भेजा जाता है। डेटा रेडियो सिग्नल में बदलकर टीडीआरएस सैटेलाइट तक भेजा जाता है, फिर व्हाइट सैंड्स और ह्यूस्टन होते हुए वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण वैज्ञानिक लगभग रीयल टाइम में डेटा प्राप्त कर पाते हैं। शिक्षा और संपर्क में सुधारनासा इस नेटवर्क का इस्तेमाल शिक्षा कार्यक्रमों के लिए भी करता है। अंतरिक्ष यात्री वीडियो और वॉइस कॉल के जरिए स्कूलों के बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं। पहले, जब यह नेटवर्क नहीं था, तो संपर्क सिर्फ 15 मिनट तक सीमित था। अब लगभग हर समय अंतरिक्ष यात्री और पृथ्वी की टीम के बीच सतत संपर्क रहता है। प्रबंधन और निगरानीस्पेस नेटवर्क का प्रबंधन नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (मैरीलैंड) द्वारा किया जाता है। इसके रणनीतिक संचालन की देखरेख स्कैन प्रोग्राम ऑफिस करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच डेटा और आवाज का आदान-प्रदान लगातार और सुरक्षित रहे।
डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज 5G यूजर्स में भारत बना नंबर 2 हर महीने रिकॉर्ड डेटा खपत

नई दिल्ली । भारत में डिजिटल क्रांति अब एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है जहां मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। Nokia की हालिया रिपोर्ट Nokia Mobile Broadband Index 2026 के मुताबिक देश में हर मोबाइल यूजर एक महीने में औसतन 31GB से ज्यादा डेटा खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा न सिर्फ भारत में इंटरनेट की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि लोग अब डिजिटल सेवाओं पर कितने ज्यादा निर्भर हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 5G टेक्नोलॉजी का विस्तार बेहद तेजी से हो रहा है। साल दर साल 5G ट्रैफिक में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं अब देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा 5G से आ रहा है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि यूजर्स तेजी से नई और तेज नेटवर्क तकनीक को अपना रहे हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस बन चुका है। इसका मतलब है कि केवल एक देश ही भारत से आगे है जबकि बाकी दुनिया भारत से पीछे है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ साल पहले तक 4G ही मुख्य नेटवर्क था और अब 5G तेजी से उसकी जगह ले रहा है। डेटा खपत में इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। आजकल लोग 4K वीडियो स्ट्रीमिंग का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे डेटा की खपत तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा AI आधारित एप्लिकेशन और क्लाउड गेमिंग जैसे नए ट्रेंड भी डेटा उपयोग को बढ़ा रहे हैं। मनोरंजन से लेकर कामकाज तक लगभग हर चीज अब इंटरनेट पर निर्भर हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेट्रो शहर 5G उपयोग में सबसे आगे हैं जहां कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का 58 प्रतिशत हिस्सा 5G का है। इसका मतलब है कि बड़े शहरों में लोग तेजी से हाई स्पीड इंटरनेट अपना रहे हैं और उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। अगर डिवाइस की बात करें तो 2025 तक देश में 892 मिलियन से ज्यादा 4G डिवाइस एक्टिव थे जिनमें से 383 मिलियन डिवाइस 5G सपोर्ट के साथ आ चुके हैं। खास बात यह है कि हाल ही में लॉन्च हुए 90 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ आ रहे हैं जो इस टेक्नोलॉजी के भविष्य को और मजबूत बनाता है। आने वाले समय में यह आंकड़े और भी तेजी से बढ़ने वाले हैं। अनुमान है कि 2031 तक भारत में 5G यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि देश की डिजिटल इकोनॉमी और भी मजबूत होगी और इंटरनेट का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में और गहराई से जुड़ जाएगा। यह पूरा परिदृश्य दिखाता है कि भारत अब सिर्फ इंटरनेट यूजर वाला देश नहीं रहा बल्कि वह एक डिजिटल पावरहाउस बनता जा रहा है जहां डेटा ही नई ताकत है और 5G उसकी सबसे बड़ी गति बनकर उभर रहा है
अंतरिक्ष में खेती का कमाल: जानिए ‘वेजी’ सिस्टम कैसे उगाता है पौधे

नई दिल्ली जैसे-जैसे इंसान गहरे अंतरिक्ष मिशनों की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहां लंबे समय तक रहने की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों में एक बड़ी जरूरत है ताजा और पौष्टिक भोजन की। इसी को ध्यान में रखते हुए NASA ने अंतरिक्ष में खेती का अनोखा प्रयोग शुरू किया है, जिसे ‘वेजी’ (Veggie) सिस्टम कहा जाता है। यह सिस्टम International Space Station (आईएसएस) पर स्थापित है और अंतरिक्ष यात्रियों को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ पौधों की वृद्धि पर शोध करने में मदद कर रहा है। क्या है ‘वेजी’ सिस्टम?‘वेजी’ एक छोटे स्पेस गार्डन की तरह काम करता है, जिसका आकार लगभग एक कैरी-ऑन बैग जितना होता है। इसमें एक समय में करीब छह पौधे उगाए जा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधों की वृद्धि को समझना और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ताजा भोजन उपलब्ध कराना है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कैसे काम करता है यह स्पेस गार्डन?वेजी सिस्टम में पौधों को मिट्टी के बजाय खास “प्लांट पिलो” (तकिए) में उगाया जाता है, जिनमें उर्वरक और जरूरी पोषक तत्व पहले से भरे होते हैं। ये पिलो जड़ों तक पानी, हवा और पोषण का संतुलन बनाए रखते हैं। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण पानी बूंदों या बुलबुलों के रूप में तैरता है, जिससे पौधों को पानी देना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।इस समस्या से निपटने के लिए वेजी में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को ऊपर से एलईडी लाइट्स द्वारा रोशनी दी जाती है, जिसमें लाल और नीली किरणें प्रमुख होती हैं। यही कारण है कि वेजी चैंबर अक्सर गुलाबी या लाल रंग में चमकता दिखाई देता है। अंतरिक्ष में उगीं ये फसलेंअब तक इस सिस्टम में कई प्रकार की फसलें सफलतापूर्वक उगाई जा चुकी हैं। इनमें लेट्यूस की अलग-अलग किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, लाल रशियन केल और जिनिया जैसे फूल शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ फसलों को अंतरिक्ष यात्रियों ने वहीं खाया भी, जबकि कुछ नमूनों को पृथ्वी पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भेजा गया। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंदअंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पौधों की देखभाल करना अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तनाव कम करने का एक तरीका बनता है। NASA का मानना है कि पौधे उगाने से उन्हें पृथ्वी से जुड़ाव महसूस होता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’: अगली पीढ़ी की तकनीकवेजी के अलावा NASA ने ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’ (APH) नामक एक और उन्नत सिस्टम विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वचालित है और इसमें 180 से अधिक सेंसर लगे हैं, जो लगातार डेटा पृथ्वी पर भेजते हैं। इस सिस्टम में बौनी गेहूं जैसी फसलों का परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, मिर्च और बेरी जैसे पौधे उगाने की योजना है, जो पोषण के साथ-साथ अंतरिक्ष विकिरण से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं। भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की नींवस्पेस में खेती सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य के मंगल और चंद्रमा मिशनों की तैयारी है। अगर इंसान को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना है, तो उसे भोजन के लिए पृथ्वी पर निर्भरता कम करनी होगी। ‘वेजी’ सिस्टम इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।
बॉम्बे IIT की खोज बनी वरदान, एलपीजी संकट के दौर में खूब आ रही काम; जानिए कैसे है खास

नई दिल्ली इन दिनों एलपीजी सिलिंडर क्राइसिस की परेशानी से सभी जूझ रहे हैं। लेकिन आईआईटी बॉम्बे, इस मुश्किल हालात में एलपीजी की कमी को बिल्कुल भी महसूस नहीं कर रहा है। इस खोज की बदौलत बॉम्बे आईआईटी के कैंपस में किचन के चूल्हे लगातार जल रहे हैं। यह खोज, बायोमास गैसिफिकेशन टेक्नोलॉजी, जिसमें गिरी हुई पत्तियों का इस्तेमाल करके कुकिंग गैस बनाई जाती है। बता दें आईआईटी बॉम्बे ने इस तकनीक को पेंटेंट भी करा रखा है। 2014 से चल रहा शोधसंस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस बारे में पोस्ट भी किया गया है। इसके मुताबिक यह इनोवेशन दशकों के रिसर्च का परिणाम है। यह रिसर्च साल 2014 में, केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के नेतृत्व में शुरू हुई थी। महाजनी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि तब आईआईटी बॉम्बे के हरे-भरे मैदान में काफी ज्यादा सूखी पत्तियां गिरी रहती थीं। इन पत्तियों को डिस्पोज करना एक बड़ा टास्क हुआ करता था। इन सूखी पत्तियों को ठिकाने लगाने का रास्ता ढूंढते-ढूंढते हम गैसिफायर तक पहुंच गए। आसान नहीं था सफरइस पोस्ट में आगे बताया गया है कि यह यात्रा इतनी आसान नहीं है। शुरुआती ट्रायल्स में काफी ज्यादा धुआं हो रहा था। इसके चलते किचन स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसके मुताबिक एक बड़ी बाधा, क्लिंकर बनाने की थी। ठोस अवशेष के चलते ट्रैडिशन सिस्टम जाम हो जाते थे। इन असंतुलनों के बावजूद, टीम ने टेक्नोलॉजी पर काम करना जारी रखा। 2016 तक, उन्होंने एक पेटेंट प्राप्त गैसीफायर विकसित कर लिया। इसके बाद चीजें काफी आसान हो गईं। अब सफलतापूर्वक लागूसाल 2017 में, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संदीप कुमार इस प्रोजेक्ट में शामिल हुए और एक बेहतर बर्नर डिजाइन पर काम किया। संस्थान की लिविंग लैब पहल ने कैंपस में टेस्टिंग की अनुमति दी। इससे टीम को सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सही करने और यूजर्स के बीच भरोसे को फिर से स्थापित करने में मदद मिली। निरंतर परीक्षण और सुधार के एक साल के बाद और आगे कुछ काम के बाद, 2024 तक यह सिस्टम स्टाफ कैंटीन में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया। अब मेस में भी लगाने का प्लानआज आलम यह है कि कैंटीन में एलपीजी का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी तक कम हो चुका है। इसकी थर्मल एफिशिएंसी 60 फीसदी तक है और उत्सर्जन बहुत कम होता है। इस तकनीक ने न केवल ईंधन की लागत घटाई है बल्कि यह सुनिश्चित भी किया है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो जाए, तो खाना पकाने का काम सहज रूप से जारी रह सके। इस सिस्टम से सालाना करीब आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है। पोस्ट में कहा गया है कि हॉस्टल की मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे एलपीजी की खपत में काफी कमी आ सकती है। इससे सालाना 50 लाख तक की बचत हो सकती है।
अब नहीं होगी बैटरी की टेंशन! 20000mAh के ये 5 दमदार Power Bank रखेंगे फोन फुल चार्ज

नई दिल्ली आज के डिजिटल दौर में टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई है, लेकिन बैटरी खत्म हो जाना सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। ऐसे में 20000mAh पावर बैंक एक शानदार सॉल्यूशन है, जो आपके फोन को कई बार चार्ज कर सकता है और स्टोर के दौरान भी आप चिंता मुक्त हो जाते हैं। 1. Xiaomi Power Bank 4iXiaomi पावर बैंक 4i 20000mAh 33Wयह पावर बैंक 33W फास्ट चार्जिंग के साथ आता है और एक बार फुल चार्ज करने पर 4-5 बार तक चार्ज किया जा सकता है। इसमें मल्टी-लेयर हाउसिंग और ट्रिपल पोर्ट सपोर्ट मिलता है, जिससे एक साथ कई चार्ज चार्ज किए जा सकते हैं। 2. एम्ब्रेन 20000mAh पावर बैंकएम्ब्रेन 20000mAh पावर बैंकयह बजट फ्रेंडली प्लेसमेंट है, जो 22.5W फास्ट रिजर्वेशन और स्ट्रांग बिल्डिंग के साथ आता है। लंबे समय तक चलने वाला यह पावर बैंक स्टोर के लिए पसंदीदा माना जाता है। 3. boAt एनर्जीशूरूम PB400 प्रोboAt एनर्जीशूरूम PB400 प्रोस्टाइलिश डिजाइन और मल्टी-डिवाइस रिजर्व के साथ यह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। फ़ास्ट बंधक सपोर्ट इसे बेहतरीन निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 4. पोर्ट्रोनिक्स पावर बैंकपोर्ट्रोनिक्स 20000mAh पावर बैंकइसमें अलग-अलग आकृतियाँ और एलईडी डिस्प्ले जैसे फीचर्स मौजूद हैं। कुछ मॉडलों में बिल्ट-इन केबल भी होता है, जिससे इसका उपयोग करना और आसान हो जाता है। 5. URBN 20000mAh पावर बैंकURBN 20000mAh फास्ट चार्जिंग पावर बैंकयह चित्र और संयोजित है, जिससे इसे आसानी से कैरी किया जा सकता है। कम कीमत में आदर्श आइडिया वाला यह स्टोर के लिए शानदार विकल्प है।स्टोर के लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों हैं एक बार चार्ज करने पर फोन पर कई बार चार्ज किया जा सकता हैफ़्लाइट में ले जाने की मात्रा (सामान्य सीमा के अंदर)मल्टी-डिवाइस डेटाबेस सपोर्टओवरचार्ज और ओवरहीट प्रोटेक्शन जैसे कि आशियामी फीचर्स ⚠समय-समय पर ध्यान फास्ट डिजायन (पीडी/क्यूसी) सपोर्ट जरूर देखेंओरिजिनल और ब्रांडेड उत्पाद ही प्रस्तुतिकरणबाज़ार और बैटरी समीक्षा की जाँच करेंपोर्ट और वज़न अपनी ज़रूरत के हिसाब से चुनें
अंतरिक्ष का अनोखा तरीका: बिना गुरुत्वाकर्षण के ऐसे पानी पीते हैं अंतरिक्ष यात्री

नई दिल्ली अंतरिक्ष में, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर, माइक्रोग्रेविटी होती है। अर्थात गुरूत्व बहुत काम होता है। ऐसे तूफ़ान में पानी नीचे गिरा की जगह छोटे-छोटे सोने के पत्तों में तूफ़ान जैसा दिखता है। यही कारण है कि सामान्य कप के रूप में पृथ्वी वहां लाभदायक साबित होती है पानी कप में टिकट ही नहीं। पहले कैसे थे पानी?शुरुआत में एस्ट्रोनॉट्स प्लास्टिक प्लास्टिक और स्ट्रो जैसे टुकड़े का प्रयोग किया जाता था। यह तरीका निश्चित रूप से सुरक्षित था, लेकिन इसमें “घूंट लेकर पीने” जैसा अनुभव नहीं था। फूला या चाय की चटनी और स्वाद भी ठीक नहीं लगता। ‘जीरो-जी कप’ क्या है?इस समस्या का समाधान नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट ने आउट किया। उन्होंने एक सामान्य खास डिजाइन वाला जीरो-जी कप तैयार किया, जिससे अंतरिक्ष में भी कप की तरह का सिप लेकर पानी या फुला पी जा सकता है। यह कप कैसे काम करता है? (सरल विज्ञान)जीरो-जी कप का जादू दो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर रुका है: सतही तनाव (सतह तनाव)केपिलरी एक्शन (केपिलरी एक्शन) कप का डिज़ाइन टियर-ड्रॉप (आंसू) जैसा होता है और इसमें एक चिप गिल्ली (चैनल) बनी होती है। जब भी पानी डाला जाता है, तो वह कप की दीवारों से चिपक जाता हैसैन्सरी नाली का पानी ऊपर की ओर खींचा जाता हैधीरे-धीरे पानी कप के किनारे तक पहुँच जाता है जैसे ही एस्ट्रोनॉट कप को स्टॉक तक बेचा जाता है, पानी खुद ही किनारे पर आ जाता है और वे सामान्य तरीकों से सिप ले सकते हैं। ये खास क्यों है?बिना स्ट्रॉ के पीने का अनुभवफुलाए/चाय की अनुभूति संभव हैतरल पदार्थ का टूटना नहीं होताछलकने का ख़तरा कम मानसिक आराम भी देता हैअंतरिक्ष में लंबे समय तक जीवित रहना मानसिक रूप से परिवर्तनशील होता है। ऐसे में “घर का अनुभव जैसा” – जैसे कप से चाय फ़्रैंक – एस्ट्रोनॉट्स को आराम और सामान्य अनुभव मिलता है। जीरो-जी कप सिर्फ एक पॉश्चर नहीं, बल्कि विज्ञान और जरूरत का सबसे अच्छा मेल है। इसमें दिखाया गया है कि नासा कैसे छोटे-छोटे आवेदकों के लिए भी बड़े-बड़े इनोवेशन करती है-ताकीस्पेस में जीवन आसान और इंसान बनाया जा सके।
iPhone यूजर्स के लिए खुशखबरी: iOS 26.4 में बिना इंटरनेट भी गाना पहचानने का फीचर

नई दिल्ली Apple ने iOS 26.4 अपडेट के साथ iPhone यूजर्स के लिए म्यूजिक एक्सपीरियंस को और भी आसान और स्मार्ट बना दिया है। इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण ऑफलाइन म्यूजिक रिकॉग्निशन फीचर है, जो बिना इंटरनेट के आस-पास बज रहे किसी भी गाने को पहचान सकता है। नियंत्रण केंद्र में नया बटन ऑन करने से iPhone के गानों की धुनें रिकॉर्ड हो जाती हैं और जैसे ही इंटरनेट आता है, Apple Music या Shazam से मैच कर गानों का नाम, एल्बम, कलाकार और लिंक मिलता है। ऐसे यात्री ट्रेन, मेट्रो, बस या हवाईअड्डे जैसी जगहों पर भी गाने कभी मिस नहीं होंगे। iOS 26.4 में Apple Music को भी नया रूप दिया गया है। नई प्लेलिस्ट प्लेग्राउंड फीचर एआई की मदद से यात्रियों के मूड और जरूरतों के हिसाब से प्लेलिस्ट बनाई गई है। आईआरईटी “पार्टी”, “वर्कआउट” या “रिलैक्स” मूड हो, बस टाइप करें और एआई ऑटोमास्टर्स की सूची तैयार करें। साथ ही, कॉन्सर्ट डिस्कवरी फीचर आपके होने वाले उत्साही और शौकीनों के आधार पर आस-पास वाले लाइव शो की जानकारी देता है। दृश्य और सुधार: प्लेयर अब फुल‑ स्क्रीनशॉट स्क्रीनशॉट और नए एनीमेशन के साथ और भी अधिक आकर्षक लग रहा है। एम्बिएंट म्यूजिक विजेट होम स्क्रीन पर आ गया है, जो नींद, ठंडक, उत्पादकता और सेहत जैसे मूड के लिए तैयार प्लेलिस्ट दिखाता है। स्टार्स बस टैप करें और प्लेयर सीधे म्यूजिक बजाना शुरू करें। इस अपडेट में मैसेजिंग एक्सपीरियंस भी बेहतर हुआ है। मैसेजेस ऐप में नए स्क्रीन अनिमेशंस और ट्रायल रिफॉर्मेशन आ गए हैं, जिसमें चैटिंग और इंटरैक्टिव और विजुअल हो गया है। 8 नए कोम भी शामिल हैं, जिनमें ओर्का, ट्रॉम्बोन, बैले डांसर, लैंडस्लाइड और डिस्टोर्डेड फेस शामिल हैं। विशिष्टता: चोरी हुई डिवाइस सुरक्षा अब सभी iPhones में डिफॉल्ट ऑन रहेगी। मोबाइल चोरी या वर्कशॉप पर बायो सामान, पासकोड बदलाव और वैलेट/बैकअप एक्सेस की सुरक्षा लॉक लगाई जाएगी। इसके अलावा, एक्सेसिबिलिटी सुधार के तहत ब्राइट इफेक्ट्स सेटिंग को कम करना है, जो स्क्रीन पर तेज फ्लैश और लाइट्स को कम कर देता है। कौन कर सकता है इस्तेमाल: iPhone 11 और उसके बाद आने वाले सभी मॉडल इस अपडेट का फायदा उठा सकते हैं। iOS 26.4 से लेकर iOS 26.4 तक के ग्राहकों के लिए म्यूजिक और चैटिंग का अनुभव, नए प्लेलिस्ट टूल्स, विजुअल अपडेट और सिक्योरिटी फीचर्स का पूरा फायदा मिलेगा, जिससे अब iPhone पर म्यूजिक और चैटिंग का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा हो गया है।