IPL 2026 Playoffs: एक अनार, कई दावेदार… आखिरी जगह के लिए जोरदार टक्कर

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन अब अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां प्लेऑफ्स की जंग ने पूरी तरह से समीकरण बदल दिए हैं। क्रिकेट फैंस के लिए यह स्थिति बिल्कुल वैसी हो गई है जैसे कहावत “एक अनार और सौ बीमार”, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां एक नहीं बल्कि सिर्फ एक प्लेऑफ स्पॉट के लिए पांच टीमें मैदान में जूझ रही हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और गुजरात टाइटन्स (GT) ने प्लेऑफ्स में अपनी जगह पक्की कर ली है। SRH की चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ जीत के बाद यह तस्वीर और साफ हो गई कि टॉप-4 की तीन सीटें भर चुकी हैं, जबकि चौथे स्थान के लिए घमासान जारी है। इस आखिरी जगह के लिए पंजाब किंग्स (PBKS), राजस्थान रॉयल्स (RR), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। पॉइंट्स टेबल की स्थिति इतनी पेचीदा हो गई है कि हर मैच सीधे प्लेऑफ समीकरण को बदल सकता है। फिलहाल पंजाब किंग्स चौथे स्थान पर बनी हुई है, लेकिन उनके लिए आगे की राह आसान नहीं है क्योंकि अधिकतम 15 अंकों तक ही पहुंचने की संभावना है। वहीं राजस्थान रॉयल्स इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है, क्योंकि वह अकेली टीम है जो 16 अंकों तक पहुंचकर सीधे प्लेऑफ का टिकट हासिल कर सकती है। राजस्थान के पास अभी दो अहम मुकाबले बचे हैं, और खास बात यह है कि ये दोनों टीमें पहले ही प्लेऑफ रेस से बाहर हो चुकी हैं। ऐसे में अगर राजस्थान दोनों मैच जीत लेती है तो वह बिना किसी अन्य परिणाम पर निर्भर हुए क्वालीफाई कर जाएगी। लेकिन यदि एक भी मैच में हार होती है, तो पूरा गणित बिगड़ जाएगा और फिर पंजाब, KKR और अन्य टीमों के बीच नेट रन रेट का खेल शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर, कोलकाता नाइट राइडर्स के पास भी उम्मीद बाकी है, लेकिन उन्हें अपने दोनों मैच जीतने होंगे ताकि वे 15 अंकों तक पहुंच सकें। वहीं दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स की उम्मीदें भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन उनका सफर अब दूसरों के परिणामों पर निर्भर हो चुका है। इस पूरे परिदृश्य ने IPL 2026 के लीग स्टेज को बेहद रोमांचक बना दिया है, जहां हर ओवर, हर रन और हर विकेट प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह अंतिम सप्ताह किसी फाइनल से कम नहीं होगा।
परिवार के दर्द को दिल में दबाकर मैदान में उतरे ईशान किशन, तूफानी पारी खेल SRH को दिलाई यादगार जीत

नई दिल्ली । चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद को आईपीएल 2026 के मैच में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले ईशान किशन एक असहनीय दर्द में थे। यह दर्द उनके शरीर में नहीं, बल्कि उनके दिल और दिमाग पर हावी था। 70 रनों की मैच विनिंग पारी खेलने के बाद प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए ईशान किशन ने बताया कि उनके कजिन की बहन का हाल ही में देहांत हो गया था। वह उनके लिए आज की पारी की मोटिवेशन था। उनका कजिन स्टैंड्स में था। पूरे परिवार के लिए मैंने यह मैच जीता। पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ईशान किशन ने कहा, “मुझे लगता है, जब मैं विकेट कीपिंग कर रहा था, तो मुझे लगा कि यह विकेट आसान नहीं है। मुझे अब भी लगता है कि इस टोटल का पीछा करना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि विकेट बिल्कुल भी आसान नहीं था, खासकर जब स्पिनर बॉलिंग कर रहे थे और वे स्लो बॉल बहुत अच्छी तरह से काम कर रही थीं, लेकिन साथ ही, नंबर तीन बैटर के तौर पर, मुझे लगा कि मेरा काम बस गेम खत्म करने की कोशिश करना है, क्योंकि बैट्समैन जो अंदर आ रहे हैं, खासकर बैक एंड पर, उनके लिए सिंगल लेना और साथ ही बाउंड्री लगाना मुश्किल होता है। इसलिए मुझे बस आखिरी ओवर तक खेलना था।”IPL 2026 News in Hindi – आईपीएल 2026 न्यूज़,आईपीएल समाचारऐसी पिच पर कैसे अप्रोच करनी चाहिए? इस पर ईशान ने कहा, “यह बस वहां रहने, खुद पर विश्वास करने के बारे में था। कभी-कभी वह सिचुएशन मुश्किल होती है, लेकिन हम सब जानते हैं कि कैसे, ये गेम जीते जाते हैं, क्योंकि आपको खुद पर विश्वास करने की जरूरत होती है। आप किसी भी समय खुद पर शक नहीं कर सकते। इसलिए मैं बस इसे सिंपल रखने की कोशिश कर रहा था, जितना हो सके उतने ओवर बैटिंग करने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि लेफ्ट-हैंडर होने के नाते, बीच में होने के कारण, बॉलर्स के लिए हर बार एरिया सही रखना मुश्किल होता है। ऐसे में, मैं बस इसे सिंपल रख रहा था और आखिरी ओवर तक खेलने की कोशिश कर रहा था।” परिवार में आई त्रासदी को लेकर ईशान किशन ने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि यह मोटिवेशन के बारे में भी है और मेरे लिए मेरा मोटिवेशन आज था, मेरा कजिन बस वहीं खड़ा था। उसने अपनी बहन को खो दिया। यह हमारे परिवार में एक मुश्किल समय था और वे यहां पहली बार मैच देख रहे थे। इसलिए मैं बस उनके लिए गेम फिनिश करना चाहता था और मुझे खुशी है कि वे इस इनिंग्स को देखने के लिए यहां थे और मैं यह गेम खत्म कर पाया। मैं भगवार का शुक्रगुजार हूं। मुझे पावर का एहसास हो रहा था।
पहलवानी के माहौल में पले दीपक पूनिया ने कम उम्र से ही कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

नई दिल्ली । पहलवानी की परंपरा और अखाड़े की मिट्टी में पले-बढ़े भारतीय पहलवान Deepak Punia की कहानी संघर्ष, अनुशासन और असाधारण प्रतिभा का ऐसा उदाहरण है, जिसने उन्हें कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर पहचान दिला दी। हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव में जन्मे दीपक का बचपन कुश्ती के माहौल में बीता, जहां उनके पिता सुभाष स्वयं एक पहलवान रह चुके थे और उन्होंने ही बेटे को पहलवानी की शुरुआती ट्रेनिंग दी। मात्र पांच साल की उम्र में अखाड़े से जुड़कर दीपक ने जिस तरह से अपनी क्षमता दिखानी शुरू की, उसने आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। दंगलों में छोटी उम्र में ही जीत हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली थी। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी और स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं के दौरान उनके खेल में निखार साफ दिखाई देने लगा। इसी दौरान उन्हें प्रसिद्ध कोचिंग सिस्टम और प्रशिक्षण सुविधाओं से जुड़ने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। मिट्टी पर पारंपरिक कुश्ती से निकलकर मैट पर मुकाबला करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगातार अभ्यास से खुद को ढाल लिया। यह बदलाव उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी यात्रा शुरू हुई। साल 2016 उनके करियर का शुरुआती सुनहरा दौर रहा, जब उन्होंने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप और अन्य जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। 2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद वह वैश्विक स्तर पर सबसे चर्चित युवा पहलवानों में शामिल हो गए। ओलंपिक मंच पर पहुंचकर उन्होंने भारत की उम्मीदों को नई ऊंचाई दी। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों के 86 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक मुकाबले तक पहुंचकर मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि अंतिम मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ा संकेत था कि देश के युवा खिलाड़ी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। इसके बाद भी उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां कभी चोट तो कभी तकनीकी कारणों ने उनकी राह मुश्किल की। कई महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग इवेंट्स में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार वापसी की कोशिश करते रहे। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंचों पर उन्होंने भारत के लिए कई पदक जीतकर अपनी जगह मजबूत की। आज दीपक पूनिया को उन खिलाड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। युवा खिलाड़ियों के लिए वे आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो यह दिखाते हैं कि संघर्ष से ही सफलता की असली कहानी लिखी जाती है।
कप्तानी और रवैये पर फिर सवाल, रियान पराग का वीडियो वायरल, नन्हे फैन से हुई धक्का-मुक्की पर विवाद

नई दिल्ली । राजस्थान रॉयल्स के युवा कप्तान रियान पराग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें वे एक नन्हे फैन के साथ कथित तौर पर सख्त व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और इसके बाद उनके रवैये को लेकर बहस छिड़ गई है। घटना उस समय की बताई जा रही है जब रियान पराग सुरक्षा घेरे के बीच से गुजर रहे थे। इसी दौरान एक छोटा बच्चा भीड़ से निकलकर उनके करीब पहुंच गया और उनके साथ फोटो लेने की कोशिश करने लगा। वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चा लगातार उनके साथ चलकर तस्वीर लेने की कोशिश कर रहा था और इसी दौरान वह उनके काफी करीब पहुंच गया। स्थिति के अनुसार, रियान पराग ने पहले बच्चे को दूर रहने का इशारा किया और उसे साइड में हटने के लिए कहा। लेकिन जब बच्चा नहीं रुका, तो उन्होंने उसे हाथ से पकड़कर किनारे की ओर हटा दिया और आगे बढ़ गए। इस पूरी घटना का वीडियो कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने रियान पराग के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा है कि एक पेशेवर खिलाड़ी और कप्तान होने के नाते उन्हें फैंस, खासकर बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और विनम्र तरीके से पेश आना चाहिए था। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि सुरक्षा घेरा और भीड़ को देखते हुए खिलाड़ी पर दबाव की स्थिति भी हो सकती है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब रियान पराग चर्चा में आए हों। पिछले समय में भी उनके व्यवहार और मैदान के बाहर की गतिविधियों को लेकर कई बार बहस होती रही है। इसके चलते वे अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना का विषय बने रहते हैं। मैदान पर प्रदर्शन की बात करें तो इस सीजन उनका खेल भी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अब तक 11 मुकाबलों में लगभग 258 रन बनाए हैं, जिसमें सिर्फ दो अर्धशतक शामिल हैं। उनके इस प्रदर्शन को लेकर भी टीम चयन और उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर उनके समर्थक इसे सुरक्षा स्थिति से जुड़ा सामान्य व्यवहार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे फैंस के प्रति असंवेदनशील रवैया मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद पर खिलाड़ी या टीम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
इटैलियन ओपन पर जैनिक सिनर का कब्जा, कैस्पर रूड को हराकर हासिल की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली । इटली की राजधानी रोम में खेले गए इटैलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला ऐतिहासिक बन गया, जहां युवा टेनिस स्टार जैनिक सिनर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपने करियर का एक बड़ा मुकाम हासिल किया, बल्कि घरेलू दर्शकों के सामने इटली के लंबे इंतजार को भी खत्म कर दिया। करीब पांच दशक बाद किसी इतालवी खिलाड़ी ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है, जिससे पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल बन गया। फाइनल मुकाबले में सिनर का सामना नॉर्वे के अनुभवी खिलाड़ी कैस्पर रूड से हुआ। शुरुआत में रूड ने आक्रामक खेल दिखाते हुए दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन सिनर ने संयम और रणनीति के साथ मैच में वापसी की। पहले सेट में बढ़त हासिल करने के बाद उन्होंने अपने खेल को और अधिक सटीक और आक्रामक बनाया। लगातार बेसलाइन से लगाए गए गहरे और नियंत्रित शॉट्स ने उन्हें मैच में मजबूत पकड़ दिलाई और धीरे-धीरे उन्होंने मुकाबले का पूरा रुख अपने पक्ष में कर लिया। दोनों सेटों में समान स्कोर के साथ समाप्त हुए इस फाइनल में सिनर ने मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस का बेहतरीन प्रदर्शन किया। लंबे समय तक चले इस मुकाबले में उन्होंने न केवल तकनीकी श्रेष्ठता दिखाई, बल्कि दबाव के क्षणों में भी खुद को संतुलित रखा। यही वजह रही कि वे निर्णायक पलों में बढ़त बनाए रखने में सफल रहे और खिताब जीतने में कामयाब हुए। इस जीत के साथ सिनर ने अपने करियर का एक और बड़ा अध्याय जोड़ा है। लगातार कई बड़े टूर्नामेंट जीतते हुए उन्होंने विश्व टेनिस में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। इस सफलता के साथ वे उस चुनिंदा सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने एटीपी मास्टर्स स्तर पर सभी प्रमुख खिताब अपने नाम किए हैं, जो उनके निरंतर प्रदर्शन और उच्च स्तर की क्षमता को दर्शाता है। मैच के बाद भावुक होते हुए सिनर ने अपने प्रदर्शन और टीम के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अपनी टीम के समर्थन को इस सफलता की नींव बताया, जिसने पूरे सीजन उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा। वहीं, फाइनल में हार के बावजूद कैस्पर रूड ने सिनर के प्रदर्शन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने माना कि घरेलू दर्शकों के सामने इस तरह का प्रदर्शन करना असाधारण उपलब्धि है और यह मैच उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण मुकाबलों में से एक रहा। उन्होंने सिनर को इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनका खेल वर्तमान टेनिस युग में एक नई ऊंचाई स्थापित कर रहा है। रोम के दर्शकों के लिए यह मुकाबला यादगार बन गया, जहां घरेलू खिलाड़ी की जीत ने पूरे स्टेडियम को उत्साह से भर दिया। इस जीत ने न केवल सिनर के करियर को नई दिशा दी, बल्कि इटली में टेनिस के प्रति बढ़ते जुनून को भी और मजबूत कर दिया है।
मुशफिकुर रहीम का शतक, बांग्लादेश ने पाकिस्तान को दिया 437 रन का विशाल लक्ष्य, तीसरे दिन खेल बना रोमांचक

नई दिल्ली । सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में बांग्लादेश ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 437 रनों का विशाल लक्ष्य रखकर मुकाबले को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। मैच के तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक पाकिस्तान ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत तो की, लेकिन दो ओवर खेलने के बाद बिना किसी रन के विकेट बचाकर दिन खत्म किया। अब अंतिम दिन का खेल निर्णायक साबित होगा, जहां दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने की उम्मीद है। इस मुकाबले में बांग्लादेश की शुरुआत पहली पारी में उतनी मजबूत नहीं रही और टीम महज 278 रनों पर सिमट गई थी। इस पारी में सबसे शानदार प्रदर्शन लिटन दास ने किया, जिन्होंने 126 रनों की जिम्मेदार और आक्रामक पारी खेली। उनकी पारी में 16 चौके और 2 छक्के शामिल रहे, जिसने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। कप्तान नजमुल हुसैन शान्तो ने भी 29 रन बनाकर कुछ देर तक संघर्ष किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां बनाने में असफल रहे। पाकिस्तान की गेंदबाजी इस पारी में काफी प्रभावी रही, जहां खुर्रम शहजाद ने चार विकेट लेकर बांग्लादेश की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। मोहम्मद अब्बास ने भी तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, जबकि हसन अली को दो सफलताएं मिलीं। साजिद खान ने एक विकेट लेकर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। इसके जवाब में पाकिस्तान की पहली पारी पूरी तरह लड़खड़ा गई और टीम सिर्फ 232 रन पर सिमट गई। इस पारी में बाबर आजम ने 68 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। कप्तान शान मसूद और सलमान आगा ने 21-21 रन बनाए, जबकि साजिद खान ने 38 रनों की उपयोगी पारी खेली। बांग्लादेश की गेंदबाजी यहां बेहद प्रभावी रही, जहां नाहिद राणा और तैजुल इस्लाम ने तीन-तीन विकेट हासिल किए। तस्कीन अहमद और मेहदी हसन ने दो-दो विकेट लेकर पाकिस्तान की पारी को जल्द समाप्त कर दिया। पहली पारी के आधार पर बांग्लादेश को 46 रनों की बढ़त मिली, जिसने टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी। दूसरी पारी में बांग्लादेश ने बेहद आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 390 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस पारी में अनुभवी बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने शतक लगाते हुए 137 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 13 चौके शामिल रहे। वहीं लिटन दास ने एक बार फिर उपयोगी योगदान देते हुए 69 रन बनाए। महमूदुल हसन जॉय ने 52 रनों की अहम पारी खेली, जिसने टीम की स्थिति को और मजबूत किया। पाकिस्तान की गेंदबाजी दूसरी पारी में भी कुछ हद तक प्रभावी रही, जहां खुर्रम शहजाद ने चार विकेट झटके। साजिद खान ने तीन विकेट लिए, जबकि हसन अली और मोहम्मद अब्बास ने भी विकेट निकालने में सफलता पाई। इसके बावजूद बांग्लादेश ने बड़ा लक्ष्य खड़ा कर पाकिस्तान को दबाव में डाल दिया। अब पाकिस्तान के सामने चौथी पारी में 437 रनों का कठिन लक्ष्य है, जो टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। तीसरे दिन के अंतिम क्षणों में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज क्रीज पर उतरे, लेकिन कोई रन बनाए बिना दिन का खेल समाप्त करना पड़ा। अंतिम दिन का खेल इस मैच और संभवतः पूरी सीरीज का फैसला तय कर सकता है।
PBKS vs RCB: धर्मशाला में प्लेऑफ की जंग, कौन मारेगा बाजी?

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है और अब हर मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। ऐसे में Punjab Kings और Royal Challengers Bengaluru के बीच होने वाला मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। धर्मशाला के खूबसूरत हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में दोनों टीमें जीत के इरादे से उतरेंगी। फैंस को इस मैच में चौकों-छक्कों की बारिश और कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। पंजाब किंग्स इस सीजन में काफी संतुलित टीम नजर आई है। टीम के बल्लेबाज लगातार रन बना रहे हैं, जबकि गेंदबाजों ने भी दबाव के मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया है। घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर पंजाब जीत दर्ज करना चाहेगी। दूसरी तरफ आरसीबी की टीम भी जबरदस्त फॉर्म में दिखाई दे रही है। टीम के स्टार बल्लेबाज लगातार मैच जिताने वाली पारियां खेल रहे हैं। गेंदबाजी यूनिट भी संतुलित नजर आ रही है, जिससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। कैसी रहेगी धर्मशाला की पिच?धर्मशाला की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है, जिससे बड़े स्कोर बनने की संभावना रहती है। हालांकि शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और उछाल मिल सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है। हेड टू हेड रिकॉर्डदोनों टीमों के बीच अब तक मुकाबला काफी रोमांचक रहा है। पिछले कुछ मैचों में पंजाब ने बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन आरसीबी के पास ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो अकेले दम पर मैच का रुख बदल सकते हैं। यही वजह है कि इस मुकाबले को बराबरी की टक्कर माना जा रहा है। संभावित प्लेइंग इलेवनपंजाब किंग्सप्रभसिमरन सिंहशिखर धवनलियाम लिविंगस्टोनजितेश शर्मासैम करनशशांक सिंहहरप्रीत बराड़कगिसो रबाडाअर्शदीप सिंहराहुल चाहरहर्षल पटेल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरुविराट कोहलीफाफ डु प्लेसिसरजत पाटीदारग्लेन मैक्सवेलकैमरून ग्रीनदिनेश कार्तिकमहिपाल लोमरोरमोहम्मद सिराजयश दयालकर्ण शर्मालॉकी फर्ग्यूसन किस टीम का पलड़ा भारी?अगर मौजूदा फॉर्म और संतुलन की बात करें तो मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। पंजाब को घरेलू मैदान का फायदा मिल सकता है, लेकिन आरसीबी की बल्लेबाजी लाइनअप किसी भी गेंदबाजी आक्रमण पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में जो टीम दबाव के क्षणों को बेहतर संभालेगी, जीत उसी के खाते में जा सकती है। कब और कहां देखें मैच?आईपीएल 2026 का यह मुकाबला टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर प्रसारित किया जाएगा, जबकि ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध रहेगी।
ऑरेंज कैप की रेस में बड़ा उलटफेर संभव, विराट कोहली बन सकते हैं नंबर-1 या फिर साई सुदर्शन बरकरार

नई दिल्ली । आज आईपीएल 2026 में दो मैच खेले जाने हैं। पहला मैच पंजाब किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच होगा। वहीं दूसरे मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स की टीम राजस्थान रॉयल्स से भिड़ेगी। इस दौरान विराट कोहली, केएल राहुल, वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह जैसे खिलाड़ी ऑरेंज कैप की रेस में आगे की तरफ बढ़ते हुए दिखाई देंगे। आईए एक नजर आईपीएल 2026 ऑरेंज कैप की लिस्ट पर डालते हैं- IPL 2026 ऑरेंज कैप लिस्टगुजरात टाइटंस के सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन 554 रनों के साथ पहले पायदान पर पहुंच गए हैं। वहीं जीटी के कप्तान शुभमन गिल 552 रनों के साथ दूसरे पायदान पर हैं। हेनरिक क्लासेन इस सीजन 500 रन का आंकड़ा पार करने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं, उनके नाम 508 रन है। ऑरेंज कैप की लिस्ट में चौथे पायदान पर आरसीबी के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली हैं। कोहली के नाम इस सीजन 484 रन दर्ज है। आज उनकी नजरें ऑरेंज कैप के साथ अपनी टीम को प्लेऑफ का टिकट दिलाने पर भी होगी। विराट कोहली को अगर ऑरेंज कैप हासिल करनी है तो कम से कम 71 रन बनाने होंगे, तभी वह साई सुदर्शन को लिस्ट में पछाड़ पाएंगे। लिस्ट में पांचवें पायदान पर अभिषेक शर्मा 481 रनों के साथ मौजूद हैं। ऑरेंज कैप की रेस में आज एक्शन में दिल्ली कैपिटल्स के केएल राहुल, राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी और पंजाब किंग्स के प्रभसिमरन सिंह और कूपर कोनोली जैसे खिलाड़ी भी होंगे जो फिलहाल टॉप-5 से बाहर हैं। केएल राहुल के नाम इस सीजन अभी तक 477 रन दर्ज है, वह टॉप-5 से ज्यादा दूर नहीं है। वहीं वैभव सूर्यवंशी ने 11 मैचों में 440 रन बनाए हैं, उनकी टीम राजस्थान रॉयल्स को 3 और मैच खेलने हैं। पंजाब किंग्स के प्रभसिमरन सिंह 439 और कूपर कोनोली 436 रनों के साथ इस रेस में बने हुए हैं।इन सभी चारों बल्लेबाजों की नजरें आज टॉप-5 में अपनी जगह बनाने पर होगी। देखने वाली बात यह है कि इनमें से कौन कामयाब होता है और किसको इंतजार करना पड़ेगा।
KKR ने GT को 29 रन से हराया, हाईस्कोरिंग मुकाबले में प्लेऑफ की उम्मीदें जिंदा..

नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के मैच नंबर-60 में शनिवार (16 मई) को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) का सामना गुजरात टाइटन्स (GT) से हुआ. कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हुएइस मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स ने गुजरात टाइटन्स पर 29 रनों से जीत हासिल की. कोलकाता नाइट राइडर्स ने गुजरात टाइटन्स को जीत के लिए 248 रनों का टारगेट दिया था, लेकिन वो 4 विकेट पर 218 रन ही बना सकी.इस जीत के चलते कोलकाता नाइट राइडर्स प्लेऑफ की रेस में अब भी बनी हुई है. मौजूदा सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है. कोलकाता नाइट राइडर्स ने 12 में से 5 मुकाबले जीते हैं और उसके 11 अंक हैं. दूसरी ओर गुजरात टाइटन्स ने 13 मैच खेलकर 8 में जीत दर्ज की है. गुजरात टाइटन्स के 16 पॉइंट्स हैं. गुजरात की पारी की हाइलाइट्सरनचेज में गुजरात टाइटन्स की शुरुआत तूफानी रही. साई सुदर्शन और कप्तान शुभमन गिल ने मिलकर 42 रन जोड़े. जब सुदर्शन 23 रनों पर थे, तो उन्हें चोट की वजह से रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. इसके बाद क्रीज पर उतरे निशांत सिंधु (1 रन) कुछ खास नहीं कर पाए और उनका विकेट सुनील नरेन ने लिया. यहां से जोस बटलर और कप्तान शुभमन गिल ने मिलकर 128 रनों की साझेदारी कर गुजरात टाइटन्स को मैच में वापस लाने की कोशिश की. शुभमन ने 49 गेंदों पर 85 रन बनाए, जिसमें सात छक्के और पांच चौके शामिल रहे. शुभमन गिल स्पिनर सुनील नरेन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में बाउंड्री लाइन पर अनुकूल रॉय के हाथों लपके गए. शुभमन के आउट होने के बाद साई सुदर्शन दोबारा बैटिंग के लिए उतरे, हालांकि उनकी इनिंग्स जरूरी रनरेट के हिसाब से रफ्तार नहीं पकड़ पाई. सुदर्शन ने 6 चौके और तीन छक्के की मदद से 28 बॉल पर 53* रनों का योगदान दिया. विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर का भी यही हाल रहा. बटलर ने 35 बॉल पर 57 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. बटलर का विकेट तेज गेंदबाज सौरभ दुबे ने लिया. राहुल तेवतिया सिर्फ 2 रन बना सके और उनका विकेट कैमरन ग्रीन ने झटका. ऐसी रही कोलकाता नाइट राइडर्स की बैटिंगकोलकाता नाइट राइडर्स ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 2 विकेट पर 247 रन बनाए. कोलकाता नाइट राइडर्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही. कप्तान अजिंक्य रहाणे 14 रनों के निजी स्कोर पर चलते बने. रहाणे को तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने बोल्ड किया. इसके बाद फिन एलन और अंगकृष रघुवंशी ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 95 रनों की साझेदारी की. इस साझेदारी में फिन एलन का योगदान काफी ज्यादा रहा. एलन ने सिर्फ 35 बॉल पर 93 रन बनाए, जिसमें 10 छक्के और 4 चौके शामिल रहे. एलन को स्पिनर आर साई किशोर ने आउट किया.यहां से अंगकृष रघुवंशी और कैमरन ग्रीन के बीच तीसरे विकेट के लिए नाबाद 108 रनों की साझेदारी हुई, जिसने कोलकाता नाइट राइडर्स को विशाल स्कोर तक पहुंचाया. अंगकृष रघुवंशी ने 7 छक्के और 4 चौके की मदद से 44 बॉल पर नाबाद 82 रनों का योगदान दिया. वहीं कैमरन ग्रीन ने 28 बॉल पर 52* रनों की पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात टाइटन्स के बीच इंडियन प्रीमियर लीग में अब तक 7 मुकाबले खेले गए हैं. इस दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2 मुकाबले जीते. जबकि गुजरात टाइटन्स को 4 मैचों में जीत हासिल हुई. इसके अलावा एक मुकाबला बारिश से भी धुला. मौजूदा सीजन में दोनों टीमों दूसरी बार आमने-सामने हुई हैं. 17 अप्रैल 2026 को खेले गए मुकाबले में गुजरात टाइटन्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 5 विकेट से पराजित किया था. कोलकाता vs गुजरात h2hकुल IPL मैच: 7कोलकाता ने जीते: 2गुजरात ने जीते: 4बेनतीजा: 1कोलकाता नाइट राइडर्स की प्लेइंग-11: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), फिन एलन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, वरुण चक्रवर्ती, सौरभ दुबे और कार्तिक त्यागी. इम्पैक्ट सब: मथीशा पथिराना.गुजरात टाइटन्स की प्लेइंग-11: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), निशांत सिंधु, वॉशिंगटन सुंदर, जेसन होल्डर, राशिद खान, अरशद खान, कगिसो रबाडा, आर साई किशोर और मोहम्मद सिराज.इम्पैक्ट सब: राहुल तेवतिया.
भारतीय एथलेटिक्स में नया नाम, सावन बरवाल का संघर्ष और सफलता की कहानी

नई दिल्ली। भारत में लंबे समय तक मैराथन और लंबी दूरी की दौड़ को क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों की तरह पहचान नहीं मिल पाई, लेकिन हिमाचल प्रदेश के धावक Sawan Barwal ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस सोच को बदलने की कोशिश की है। हाल ही में उन्होंने देश का 48 साल पुराना राष्ट्रीय मैराथन रिकॉर्ड तोड़कर भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया। हिमाचल की जोगिंदर नगर की पहाड़ियों से निकलकर भारतीय सेना में एथलीट बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित सुविधाओं और संसाधनों की कमी के बावजूद सावन ने लगातार अभ्यास और अनुशासन के बल पर खुद को शीर्ष स्तर के धावकों में स्थापित किया। अपने सफर पर बात करते हुए सावन कहते हैं कि पहाड़ों में पले-बढ़े होने से उन्हें सहनशक्ति और मानसिक मजबूती मिली। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण ने उनकी क्षमता को निखारा और बाद में प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन बाद में जब उन्हें एक्सीलेंस सेंटर में बेहतर ट्रेनिंग, रिकवरी और न्यूट्रिशन की सुविधाएं मिलीं तो उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ। सेना में शामिल होने के बाद उन्हें स्थिरता और पेशेवर माहौल मिला, जिससे उनका करियर आगे बढ़ा। सावन के अनुसार, लंबी दूरी की दौड़ सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक खेल भी है। हर दिन लक्ष्य तय करना, समय के अनुसार प्रशिक्षण लेना और लगातार सुधार की कोशिश ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। वे कहते हैं कि “हमें ट्रेनिंग की रुकावटों को तोड़ना होगा” और लगातार अनुशासन बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है। उनके करियर में परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उनके बड़े भाई ने आर्थिक रूप से सहायता कर उन्हें स्पोर्ट्स शूज़, स्पाइक्स और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए। यह सहयोग उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, खासकर उस समय जब वे आर्थिक रूप से स्थिर नहीं थे। चोट और कठिन दौरों पर बात करते हुए सावन ने स्वीकार किया कि 2023 में लगी गंभीर चोट के बाद छह से सात महीने तक उनका करियर अनिश्चितता में रहा। उस समय उन्होंने खुद पर संदेह भी किया, लेकिन धैर्य और निरंतर प्रयास ने उन्हें वापसी का रास्ता दिखाया। सावन का मानना है कि भारत में अब लंबी दूरी की दौड़ को पहले की तुलना में ज्यादा पहचान मिल रही है। युवाओं की भागीदारी बढ़ी है और मैराथन में प्रतिस्पर्धा का स्तर भी लगातार ऊपर जा रहा है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही लक्ष्य, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से कोई भी एथलीट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है।