यह कदम राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें केजरीवाल सिसोदिया सहित 21 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने चार्जशीट में नामित किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोप तय करने से इनकार कर दिया था।
सीबीआई के प्रवक्ता का कहना है कि निचली अदालत ने जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इसी आधार पर एजेंसी ने उच्च न्यायालय में अपील करने का फैसला लिया है।
अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि सीबीआई ने वरिष्ठ नेताओं को बिना किसी ठोस सामग्री के आरोपी बनाया। न्यायालय ने आरोपपत्र में कई खामियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। साथ ही केजरीवाल को भी पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में इस प्रकरण में शामिल किया गया। अदालत ने जांच प्रक्रिया में कमियों को लेकर एजेंसी को फटकार भी लगाई।
फैसले के बाद केजरीवाल ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए इसे उनकी पार्टी को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश बताया। वहीं सिसोदिया ने कहा कि अदालत का निर्णय संविधान और कानून के शासन में उनके विश्वास को मजबूत करता है।