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बदलते वैश्विक समीकरण: अमेरिका पर बढ़ा दबाव, चीन-रूस बने चुनौती


नई दिल्ली।  भारत की वैश्विक कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। एस. जयशंकर दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे जी-7 विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा।

फ्रांस में होगी अहम कूटनीतिक बैठक

विदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस के अब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। उन्हें फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने आमंत्रित किया है। इस दौरान जयशंकर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिससे भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक मुद्दों पर होगी गहन चर्चा

इस जी-7 बैठक में दुनिया के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें यूक्रेन में जारी युद्ध, पुनर्निर्माण की योजनाएं, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रखने पर भी विचार-विमर्श होगा।

यूक्रेन संकट पर विशेष फोकस

बैठक में यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर खास सत्र आयोजित होंगे। इसमें न्यूक्लियर सेफ्टी, ह्यूमैनिटेरियन डीमाइनिंग और फंडिंग सिस्टम पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों की भूमिका पर भी जोर रहेगा, जो यूक्रेन की आर्थिक बहाली में मदद कर सकते हैं।

समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोर

वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद अहम है। इस बैठक में मैरीटाइम रूट की सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता लाने के प्रयास किए जाएंगे।

ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की पहल

जी-7 देश वैश्विक शासन प्रणाली को और आधुनिक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे नए ढांचे तैयार करने पर जोर होगा, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़े जोखिमो का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

भारत समेत कई देशों की भागीदारी

इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ जी-7 देश ही नहीं, बल्कि भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे कई साझेदार देश भी शामिल होंगे। यह जी-7 की बढ़ती आउटरीच और सहयोग की नीति को दर्शाता है।

इवियन समिट की तैयारी का मंच

यह बैठक जून में होने वाले जी-7 लीडर्स समिट (इवियन समिट) की तैयारी का अहम चरण मानी जा रही है। यहां होने वाली चर्चाएं भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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