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Chhota Nehru Stadium: छोटा नेहरू स्टेडियम का नाम बदलने पर इंदौर में सियासत तेज छत्रपति शिवाजी स्टेडियम बनाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस भाजपा आमने सामने

 
Chhota Nehru Stadium:  इंदौर /मध्य प्रदेश के Indore में स्थित Chhota Nehru Stadium का नाम बदलने के प्रस्ताव के बाद शहर की राजनीति अचानक गरमा गई है। नगर निगम की मेयर इन काउंसिल बैठक में स्टेडियम का नाम बदलकर Chhatrapati Shivaji Maharaj के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित किया गया है। जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया वैसे ही इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई और Bharatiya Janata Party तथा Indian National Congress आमने सामने आ गए।

दरअसल नगर निगम मुख्यालय में आयोजित मेयर इन काउंसिल की बैठक में शहर के ऐतिहासिक छोटे नेहरू स्टेडियम का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया था जिसे बैठक में मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव के अनुसार अब इस स्टेडियम का नाम छत्रपति शिवाजी स्टेडियम रखने की बात कही जा रही है। यह निर्णय सामने आते ही शहर की राजनीति में बहस और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस के प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि यदि शहर में कोई नया और भव्य स्टेडियम बनाया जाता है तो उसका नाम छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा जाना सम्मान की बात होगी लेकिन पहले से मौजूद छोटे नेहरू स्टेडियम का नाम बदलना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यह केवल एक नाम बदलने का मामला नहीं है बल्कि इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े व्यक्तित्वों के सम्मान से भी जुड़ा विषय है। कांग्रेस का आरोप है कि जब भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े किसी नाम या विरासत की बात सामने आती है तब भाजपा नेताओं की असहजता और राजनीतिक सोच दिखाई देने लगती है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav ने कहा कि नगर निगम ने फिलहाल केवल प्रस्ताव पारित किया है और इस पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया आगे चलेगी। उन्होंने कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि छोटा नेहरू आखिर कौन हैं और इस नाम के पीछे किस ऐतिहासिक संदर्भ को जोड़ा जाता है।

महापौर ने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीति में ऐसा कौन सा व्यक्तित्व रहा है जिसे छोटा नेहरू के नाम से जाना गया हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश आज भी नेहरू की नीतियों के परिणाम भुगत रहा है और कांग्रेस को इतिहास के नाम पर राजनीति करने के बजाय स्पष्टता से जवाब देना चाहिए।

स्टेडियम के नाम बदलने को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल नगर निगम के प्रस्ताव तक सीमित नहीं रही बल्कि यह शहर की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रस्ताव पर आगे क्या फैसला होता है और क्या वास्तव में छोटा नेहरू स्टेडियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी स्टेडियम किया जाएगा या फिर राजनीतिक दबाव के चलते इस पर पुनर्विचार किया जाएगा। फिलहाल इस मुद्दे ने इंदौर की राजनीति में एक नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।

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