Chambalkichugli.com

बिना युद्ध के अमेरिका को चुनौती: दुर्लभ खनिजों के जरिए चीन की नई रणनीति



नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच चीन एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे वह बिना युद्ध किए भी अमेरिका की सैन्य ताकत को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने दुर्लभ खनिजों यानी Rare Earth Elements की आपूर्ति और तकनीकी सप्लाई चेन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक सैन्य उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है, जिनमें अमेरिकी F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।

रिपोर्टों के अनुसार चीन की रणनीति इन महत्वपूर्ण कच्चे संसाधनों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर नियंत्रण बनाए रखने की है। अगर भविष्य में इन खनिजों की आपूर्ति सीमित होती है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के कई उन्नत हथियारों के निर्माण और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। आधुनिक जेट इंजन, रडार सिस्टम, सेंसर और मिसाइल तकनीक में इन धातुओं की अहम भूमिका होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पहले से ही दुनिया में रेयर अर्थ खनिजों की प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में उसने इनके निर्यात नियमों को भी सख्त किया है। इसके साथ ही चीन अपनी औद्योगिक नीतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी तेजी से काम कर रहा है, ताकि तकनीकी और औद्योगिक बढ़त बनाए रखी जा सके।

दूसरी ओर United States भी इस संभावित खतरे को समझ चुका है। अमेरिकी सरकार ने 2027 तक रक्षा क्षेत्र में चीनी रेयर अर्थ खनिजों पर निर्भरता कम करने की योजना बनाई है। इसके लिए नई खदानों के विकास और घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा।

विश्लेषकों के अनुसार भविष्य में महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि संसाधनों, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण से तय होगी। ऐसे में रेयर अर्थ खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ अमेरिका और अन्य देशों के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

कीवर्ड: चीन, अमेरिका, रेयर अर्थ खनिज, एफ-35 फाइटर जेट, वैश्विक रणनीति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *