Chambalkichugli.com

सोमवार के शुभ अवसर पर शिव पूजा कैसे करें, जलाभिषेक से लेकर आरती तक पूरी जानकारी


नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शिव को ‘आशुतोष’ कहा गया है, अर्थात् जो थोड़े से प्रयास और निष्कलंक भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उनके प्रसन्न होने पर जीवन के क्लेश, रोग, शोक, दुर्भाग्य और बाधाएं दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से सोमवार का दिन शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंदपुराण में वर्णित उपायों से सोमवार को भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है।

सोमवार शिव पूजा का महत्व

सोमवार का दिन चंद्रमा और भगवान शिव दोनों से जुड़ा हुआ है। इस दिन शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। शिवपुराण के अनुसार, सोमवार को किया गया भजन, जप और व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है। सच्चे भाव से शिव की आराधना करने वाले भक्तों के समस्त कष्ट हर लिए जाते हैं, और भगवान आशुतोष स्वरूप शीघ्र प्रसन्न होकर वरदान देते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शिव ध्यान

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ध्यान करते समय भगवान शिव के त्रिनेत्र, जटाजूट में गंगा, माथे पर चंद्रमा और नीलकंठ स्वरूप का स्मरण करें।
मौन साधना करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। इस विधि से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मन की एकाग्रता बढ़ती है।

शिवलिंग पर पंचामृत और गंगाजल अभिषेक

सोमवार को शिवलिंग का अभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से बना पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद गंगाजल से अभिषेक करें। अभिषेक के समय ॐ नमः शिवाय, ॐ रुद्राय नमः और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
इस विधि से मन की शुद्धि होती है, रोग दूर होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

प्रिय वस्तुएं अर्पित करें

भगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अत्यंत प्रिय हैं।

बिल्वपत्र (तीन दल वाला) अर्पित करें, क्योंकि यह ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक है।
धतूरा और आक के फूल चढ़ाने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।
भस्म लगाना भी शुभ माना जाता है।
अर्पण करते समय भावपूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण करें।
सोमवार व्रत, शिव कथा और महामृत्युंजय मंत्र

सोमवार का व्रत रखने से धन, आरोग्य और शांति प्राप्त होती है। व्रत में फलाहार करें और शाम को शिव कथा का श्रवण करें।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी है:

ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

इस मंत्र का 108 बार जाप रुद्राक्ष माला से करें। इससे अकाल मृत्यु, रोग और भय का नाश होता है।

समर्पण ही सर्वोच्च उपाय

शिवपुराण में कहा गया है कि यदि भक्त के पास पूजन सामग्री न हो तो केवल सच्चे भाव और समर्पण से भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। निष्काम भाव से शिव का स्मरण करने वाले भक्त के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें शांति, स्वास्थ्य और सौभाग्य प्राप्त होता है।

सोमवार को ये सरल विधियां अपनाकर भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। नियमित शिव भक्ति से भक्त को आशुतोष महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *