कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामले की जड़ें गुरुवार की घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं, लेकिन शुक्रवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा के वरिष्ठ विधायक श्रीचंद कृपलानी ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता के साथ उठाया। कृपलानी ने सीधे तौर पर रोहित बोहरा पर उंगली उठाते हुए कहा कि सदन की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाला ऐसा व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि विधायक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और उन पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सदन की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है और पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
स्पीकर वासुदेव देवनानी का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि एक विधायक लाखों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता है और उसे बड़ी संख्या में लोग देखते हैं, इसलिए उसका आचरण आदर्श होना चाहिए। देवनानी ने आश्वासन दिया कि, “पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज देखी जाएगी। यदि वीडियो में विधायक का आचरण सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं पाया गया, तो नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
कांग्रेस का बचाव: ‘मुद्दे को तूल न दें’
वहीं, कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने भाजपा के आरोपों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि रोहित बोहरा अपनी सीट पर बैठे हुए थे और मामले को राजनीतिक द्वेष के चलते अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। खान ने पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी ऐसे विवादों को आपसी संवाद और बैठकों से सुलझाया जाता रहा है, इसलिए इस पर ‘मीडिया ट्रायल’ के बजाय संयम बरतना चाहिए।
अब जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल राजस्थान की सियासत में पारा चढ़ा हुआ है। अब सारा दारोमदार विधानसभा अध्यक्ष की जांच पर है। वीडियो समीक्षा के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि रोहित बोहरा पर लगे आरोप कितने सटीक हैं। क्या विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक हमला करार देकर बचाव कर पाएगी, यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा।