तेल की कीमतों में तेजी का कारण ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले को माना जा रहा है। यह क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। जवाब में ईरान ने कतर के प्रमुख वैश्विक गैस हब, रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया। कतर के विदेश मंत्रालय और एनर्जी विभाग ने पुष्टि की है कि मिसाइल हमले से बड़े स्तर पर नुकसान हुआ और आग बुझाने के लिए आपातकालीन बचाव दल तुरंत तैनात किए गए। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत सहित अन्य तेल आयातक देशों पर असर डाल सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी अतिरिक्त हमले का विरोध किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि इजरायल ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र के एक प्रमुख प्लांट पर हमला किया, जिससे केवल प्लांट का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हुआ।
एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।