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इजरायल-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति संकट, कीमतों में सोमवार को उछाल की संभावना


नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि युद्ध जारी रहता है तो सोमवार को बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।

हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की परिवहन में अभी कोई बाधा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन टैंकरों के जोखिम में फंसने और टारगेट बनने की आशंका के कारण कई प्रमुख तेल व्यापारी माल ढुलाई को निलंबित करने पर मजबूर हैं। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और उससे बने उत्पाद निकलते हैं, जो वैश्विक आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि टैंकर माल ढुलाई दरें पहले ही बढ़ चुकी हैं। मध्य पूर्व से चीन तक जाने वाले बड़े कच्चे तेल वाहकों के लिए 2026 में दरें अब तक तीन गुना बढ़ चुकी हैं, जो जोखिम लेने में कंपनियों की हिचक को दर्शाता है। खाड़ी देश विश्व की लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करते हैं। आपूर्ति में कमी का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्ध के दौरान एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधे निशाना बनाया जाएगा या नहीं और समुद्री मार्गों पर सेवाएं कितनी जल्दी बहाल होती हैं।

अब तक, ईरान और संयुक्त अमेरिकी-इजरायली बलों के बीच युद्ध में किसी प्रमुख तेल और गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और कुवैत में विस्फोटों की खबरें आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के खारग द्वीप के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जो तेहरान के अधिकांश कच्चे तेल निर्यात का प्रमुख टर्मिनल है।

विश्लेषकों ने 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध का हवाला देते हुए चेतावनी दी है कि अल्पकालिक संघर्षों का भी तेल की कीमत और आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इस संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजार अस्थिर हो सकता है, और निवेशक सतर्क हो गए हैं।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी) ने मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर हमलों की नई लहर की घोषणा की है। ये हमले हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों का बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं। कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई इस हमले में मारे गए।

ईरान सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा है इस जघन्य अपराध का जवाब जरूर दिया जाएगा और यह इस इस्लामी दुनिया के इतिहास में नया अध्याय लिखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबी अवधि तक चलता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति में बड़ी कमी आ सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और कीमतों में तेजी आएगी। निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और भविष्य की स्थिति के स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।

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