अष्टसिद्धियों के नाम और अर्थ
महिमा – शरीर को अत्यंत विशाल रूप में विस्तार करने की क्षमता
गरिमा – शरीर को अत्यधिक भारी बना लेना
लघिमा – स्वयं को अत्यंत हल्का कर लेना
प्राप्ति – इच्छित स्थान या वस्तु को प्राप्त करने की शक्ति
प्राकाम्य – मनचाही इच्छा को पूर्ण करने की क्षमता
ईशित्व – समस्त जगत पर प्रभुत्व की शक्ति
वशित्व – दूसरों को अपने नियंत्रण में करने की क्षमता
इन सिद्धियों को पाने वाला साधक जीवन में सफलता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी संदर्भ में हनुमान जी से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए सूर्य देव को गुरु बनाया था। सूर्यदेव ने उन्हें न केवल समस्त ज्ञान दिया बल्कि अपना तेज भी प्रदान किया।
कथा के अनुसार सूर्यदेव ने हनुमान जी को बताया कि वे अष्टसिद्धियां केवल एक गृहस्थ को ही प्रदान कर सकते हैं। ऐसे में हनुमान जी को उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह करना पड़ा ताकि वे पूर्ण ज्ञान और सिद्धियां प्राप्त कर सकें। हालांकि यह विवाह केवल एक आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक रूप में माना जाता है।
इसके अलावा मान्यता यह भी है कि हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नव निधि का वरदान Sita माता से प्राप्त हुआ था, जिसका उल्लेख हनुमान चालीसा में भी मिलता है। महानवमी का यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति और साधना से व्यक्ति अपने भीतर की शक्तियों को जागृत कर सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।