इस्लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रयाय बन चुका है। यही कारण है कि ईरान जैसे मुस्लिम देश को भी भरोसा नहीं है। पाकिस्तान भले ही अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता का केंद्र होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को पाकिस्तान में हवाई हमले का डर सता रहा था। इसलिए ईरान ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद के लिए कई नकली विमान भेजे, जिनमें से केवल एक में ही प्रतिनिधिमंडल सवार था।
इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की अगली कतारों को खाली रखा। इन खाली सीटों पर मीनाब स्कूल स्ट्राइक (Minab school strike) में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और उनका सामान (स्कूल बैग, जूते, कपड़े) रखे गए थे।
वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है, जिसमें ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। अमेरिकी वार्ताकारों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ अप्रैल की रात को घोषणा की थी कि ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर समझौता हो गया है। बाद में खबर आई कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए वार्ता शनिवार को पाकिस्तान में होगी।
लेबनान पर जारी है तकरार
यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
ईरान की अर्ध-सरकारी ‘तसनीम’ समाचार एजेंसी ने खबर दी थी कि ”पहले रखी गई शर्तें” पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी। यह बात इस्लामाबाद रवाना होने से पहले गालिबफ द्वारा ‘एक्स’ पर दिए गए संदेश से भी मेल खाती है।
गालिबफ ने ‘एक्स’ पर कहा था, ”दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी लागू नहीं हुए हैं- लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की संपत्तियों पर लगी रोक हटाना।”