पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में शनाका ने स्वीकार किया कि वे मैच को फिनिश कर सकते थे लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद करीबी मुकाबला था और वे जिम्मेदारी लेते हैं कि आखिरी क्षणों में टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी। उन्होंने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव के क्षणों में शानदार गेंदबाजी की जिसने मैच का रुख बदल दिया।
पूरे टूर्नामेंट पर नजर डालें तो यह श्रीलंका के लिए कठिन अभियान रहा। टीम ने अपने सात में से चार मैच गंवाए जिनमें सुपर 8 के तीन मुकाबले शामिल थे। अपनी सरजमीं पर खेलने के बावजूद टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। शनाका ने साफ कहा कि चोटों ने टीम का संतुलन बिगाड़ दिया। प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने संयोजन और रणनीति दोनों को प्रभावित किया जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा।
खास तौर पर वानिंदु हसरंगा और मथीशा पथिराना के टूर्नामेंट से बाहर होने को कप्तान ने बड़ा झटका बताया। शनाका ने कहा कि ये दोनों सिर्फ खास गेंदबाज नहीं बल्कि टीम की रणनीतिक ताकत थे। वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर ऐसे खिलाड़ियों की कमी साफ महसूस होती है। उनके अनुसार अगर टीम पूरी तरह फिट होती तो सेमीफाइनल तक पहुंचना असंभव नहीं था।
आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शनाका ने आत्ममंथन का संकेत दिया। उन्होंने माना कि एक खिलाड़ी होने के नाते दबाव महसूस होता है और कभी कभी प्रतिक्रिया भावनात्मक हो सकती है। उन्होंने फैंस से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था और वे भविष्य में इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे। उनका यह भावुक संदेश साफ करता है कि हार ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है।
हालांकि निराशा के बीच उन्होंने भविष्य की उम्मीद भी दिखाई। युवा बल्लेबाज पवन रथनायके की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और क्रीज का शानदार उपयोग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने वेलालगे जैसे उभरते खिलाड़ियों को श्रीलंकाई क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य बताया। शनाका ने भरोसा जताया कि चोटिल खिलाड़ी जल्द वापसी करेंगे और टीम नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरेगी।
अंत में सिंहली भाषा में फैंस को संबोधित करते हुए शनाका ने दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि दर्शकों का समर्थन देखकर उन्हें जीत की उम्मीद थी। उन्होंने स्वीकार किया कि हार से वे बेहद निराश हैं लेकिन एक टीम के रूप में वे मजबूत वापसी का वादा करते हैं। श्रीलंका का यह विश्व कप अभियान भले ही अधूरा रह गया हो लेकिन कप्तान का आत्मस्वीकृति और जिम्मेदारी लेना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।