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पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक: भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाह कमा रहे लाखों, पॉलीहाउस में फूलों की खेती से बदली किस्मत

भोपाल । भोपाल जिले के फंदा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के किसान रामसिंह कुशवाह ने आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। कभी धान गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले रामसिंह कुशवाह सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे लेकिन अब वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से हर महीने लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल आर्थिक उन्नति का उदाहरण है बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गई है।

रामसिंह कुशवाह बताते हैं कि उनका परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था लेकिन बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही थी। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के बारे में जानकारी मिली। इस योजना के तहत उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना का लाभ लेते हुए लगभग एक हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों की खेती शुरू की।

बाद में राज्य योजना के तहत वर्ष 2023-24 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से सब्सिडी प्राप्त कर एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया और गुलाब जरबेरा तथा गेंदा के लगभग 30 हजार पौधे लगाए। आज वे प्रतिदिन करीब चार हजार कट फ्लावर बाजार में बेचते हैं और इससे रोजाना चार से छह हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

फूलों के उत्पादन को बढ़ाने और लागत कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम भी स्थापित किया है। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग चार लाख रुपये है जिसमें से दो लाख रुपये की सब्सिडी सरकार की ओर से प्राप्त हुई है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से एक एकड़ की खेती में पानी खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 घंटे स्वतः दी जाती है जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है। इस तकनीक को अपनाकर रामसिंह कुशवाह भोपाल जिले में ऑटोमेटेड बागवानी प्रणाली अपनाने वाले पहले किसान बन गए हैं।

रामसिंह कुशवाह की खेती में उगाए गए गुलाब और जरबेरा के फूल अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनकी सप्लाई दिल्ली जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक की जा रही है। आधुनिक तकनीक वैज्ञानिक पद्धति और ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाने से उन्हें बेहतर उत्पादन मिल रहा है। इन सिंचाई प्रणालियों पर भी उन्हें लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला है।

आज उनकी खेती से प्रतिदिन हजारों फूलों का उत्पादन हो रहा है और इससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। फूलों और फलों की खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि गांव के अन्य किसानों को भी नई दिशा दी है।

रामसिंह कुशवाह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की योजनाओं के कारण उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का अवसर मिला है। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं। उनकी सफलता की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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