विशेष रूप से, ईस्ट कोस्ट रेलवे के दुव्वाडा-विशाखापत्तनम- विजयनगरम सेक्शन में 106 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा, जिससे मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा। रेल मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है।
तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा सुधार में बड़ा कदम
साउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के अंतर्गत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस रूट को भी 1×25 केवी से 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। यह मुंबई–चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके सुधार से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी, यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिलेगी।
इसी के साथ, वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। लगभग 1,000 किलोमीटर क्षेत्र में बिछाई जाने वाली इस फाइबर केबल से एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोकने वाली सुरक्षा प्रणाली है, जो रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार करेगी।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल माल और यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि रेलवे संचालन अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बन जाएगा। आधुनिक संचार नेटवर्क और उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम के माध्यम से भारत की रेलवे संरचना को भविष्य के लिए और मजबूत बनाया जा रहा है।