गोस्वामी तुलसीदास रचित ‘हनुमान चालीसा’ हनुमान जी की भक्ति का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है इसमें कहा गया है “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता” अर्थात माता सीता ने हनुमान जी को आठ दिव्य शक्तियां और नौ प्रकार की संपत्तियों का वरदान दिया था
हनुमान जी में इन शक्तियों का अद्भुत प्रयोग करने का सामर्थ्य था यही कारण है कि वे किसी भी रूप में प्रकट हो सकते थे पल में किसी भी स्थान पर पहुंच सकते थे और असंभव कार्यों को भी संभव कर सकते थे हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से भक्तों को इन दिव्य शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है संकट मोचन की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं साहस बढ़ता है और जीवन में सफलता मिलती है
आइए जानते हैं हनुमान जी की अष्ट सिद्धियां और नव निधियां :
अष्ट सिद्धियां – आठ दिव्य शक्तियां हैं
अणिमा : बहुत सूक्ष्म रूप धारण करने की शक्ति
महिमा : इच्छानुसार बहुत बड़ा रूप धारण करने की शक्ति
गरिमा : शरीर को अत्यंत भारी बनाने की शक्ति
लघिमा : शरीर को अत्यंत हल्का बनाने की शक्ति
प्राप्ति : किसी भी वस्तु को तुरंत प्राप्त करने की शक्ति
प्राकाम्य : इच्छानुसार किसी भी जगह पहुंचने, जल या आकाश में रहने की शक्ति
ईशित्व : दैवीय शक्तियों का नियंत्रण
वशित्व : इंद्रियों और मन पर पूर्ण नियंत्रण
नव निधियां – नौ प्रकार की दिव्य संपत्तियां हैं
पद्म निधि : स्वर्ण-चांदी का संग्रह और दान करने वाला सात्विक स्वभाव
महापद्म निधि : धार्मिक कार्यों में धन लगाने वाला स्वभाव
नील निधि : तीन पीढ़ियों तक चलने वाली संपत्ति
मुकुंद निधि : राज्य और सत्ता से संबंधित संपत्ति
नंद निधि : कुल का आधार बनने वाली संपत्ति
मकर निधि : अस्त्र-शस्त्रों का संग्रह
कच्छप निधि : स्वयं उपभोग करने योग्य संपत्ति
शंख निधि : एक पीढ़ी तक रहने वाली संपत्ति
खर्व निधि : मिश्रित फलों वाली संपत्ति
हनुमान जन्मोत्सव के दिन इन दिव्य शक्तियों और संपत्तियों का स्मरण भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक शक्ति साहस और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है यह पर्व हमें भक्ति और निष्ठा की महत्ता भी याद दिलाता है