15 से 20 जिलों की दीदियां आईं
भोपाल, भिंड, मुरैना, इंदौर, सीहोर, सागर, सीधी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, सतना, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी, धार, झाबुआ, मंदसौर, खरगोन, बैतूल, विदिशा और बुरहानपुर से आजीविका दीदियां अपने उत्पाद बेचने आईं।
ऑर्गेनिक गुलाल और पारंपरिक व्यंजन
बालाघाट की दीदियों ने ऑर्गेनिक गुलाल बनाया: अरारोट और पलाश के फूल सुखाकर, हल्दी, बेसन और चुकंदर जैसी प्राकृतिक सामग्री से रंग तैयार किया गया।
सीधी से महुआ के लड्डू: जोड़ों के दर्द, कमजोरी और सांस की तकलीफ में मददगार।
अनूपपुर के कोदो बिस्किट: किसानों से सीधे लेकर, बिना मिलावट के हाथों से तैयार।
शुद्ध मसाले, खोया और पारंपरिक गुजिया भी उपलब्ध।
रंगों के साथ रोजगार का उत्सव
यह मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और हुनर का प्रदर्शन है। आजीविका मार्ट के माध्यम से महिलाओं को अपनी कला और मेहनत दिखाने का मंच मिला।धर्मेंद्र सेठ ने बताया कि मेला इस लिहाज से खास है कि घर का बना शुद्ध सामान लोगों को मिल रहा है, जिससे भरोसे के साथ खरीदारी संभव हो रही है।होली के रंगों के साथ यह मेला आजीविका का संगम न केवल त्योहार को खास बना रहा है, बल्कि ग्रामीण बहनों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।