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ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

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