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डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।

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