निरीक्षण के दौरान टीम ने पीथमपुर स्थित 400 केवी सबस्टेशन का दौरा किया जहां जीका की सहायता से 315 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने ट्रांसफॉर्मर की तकनीकी विशेषताओं और इसके संचालन से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इसके साथ ही 132 केवी मंगल्या से दक्षिण जोन इंदौर ट्रांसमिशन लाइन का भी मूल्यांकन किया गया। यह लाइन राज्य के पहले 132 केवी जीआईएस सबस्टेशन महालक्ष्मी के लिए लाइन इन लाइन आउट व्यवस्था के तहत विकसित की गई है जिससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एमपी ट्रांसको के अधिकारियों ने बताया कि नए ट्रांसफॉर्मर और ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में बड़ा सुधार हुआ है। पहले जहां उद्योगों को वोल्टेज में उतार चढ़ाव और अनियमित सप्लाई की समस्या का सामना करना पड़ता था वहीं अब उन्हें चौबीसों घंटे निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल रही है। इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारु हुई है और लागत में भी कमी आई है।
मूल्यांकनकर्ता हिसाए ताकाहाशी ने केवल आधिकारिक प्रस्तुतियों तक सीमित न रहते हुए जमीनी हकीकत जानने का निर्णय लिया। उन्होंने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न इकाइयों में काम कर रहे लोगों और उद्योग संचालकों से सीधे बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता विश्वसनीयता और परियोजना के वास्तविक प्रभाव को लेकर फीडबैक लिया ताकि मूल्यांकन व्यावहारिक आधार पर किया जा सके।
पीथमपुर धार क्षेत्र में चार संयंत्र संचालित करने वाली अग्रणी पैकेजिंग कंपनी एसआरएफ लिमिटेड ने भी अपने अनुभव साझा किए। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि नए पावर ट्रांसफॉर्मर के संचालन के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह स्थिर हो गई है और उत्पादन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आ रही है। कंपनी के विधिक प्रमुख ने कहा कि बेहतर बिजली उपलब्धता के कारण अब वे 132 केवी स्तर पर अपना लोड लगभग 15 एमवीए तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं जिससे दो नई उत्पादन इकाइयों को समर्थन मिल सकेगा।
इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित बिजली अवसंरचना परियोजनाएं न केवल तकनीकी रूप से सुदृढ़ हैं बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति दे रही हैं। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति ने निवेश और उत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है जिससे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिला है।