विधेयक के अनुसार इस कवरेज का लाभ सभी वर्गों और आय समूहों को मिलेगा। केवल वे लोग बाहर रहेंगे जिनके पास पहले से बेहतर हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध है। गंभीर बीमारियों जैसे किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसी सर्जरी के लिए कवरेज को बढ़ाकर 25 लाख रुपए किया गया है।
विधायक डॉ. सिंह ने सदन में कहा कि वर्तमान आयुष्मान योजना का दायरा सीमित है और 5 लाख रुपए की राशि गंभीर बीमारियों के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 10 लाख तक का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज लागू किया गया है। मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी के हिसाब से इस योजना पर सालाना 8 से 9 हजार करोड़ रुपए खर्च आएंगे।
डॉ. सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि जनता की जान बचाने और मुफ्त इलाज देने के लिए अगर कर्ज लेना पड़े तो वह इसका विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को राजनीति और वोट के फंडे से ऊपर उठाकर आम नागरिक का अनिवार्य अधिकार बनाना चाहिए।
विधायक ने सवाल उठाया कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को सेवाकाल और रिटायरमेंट के बाद भी शत-प्रतिशत मुफ्त इलाज मिलता है, तो आम जनता के साथ भेदभाव क्यों? उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को याद दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य में समानता होनी चाहिए।
सदन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि लाड़ली बहन योजना से भी परिवारों को स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभ मिलता है। इसके जवाब में डॉ. सिंह ने कहा कि 1500 रुपये की राशि बड़े ऑपरेशन के खर्च के सामने नगण्य है।
निजी सदस्य विधेयक ऐसे अवसरों में आता है जब कोई विधायक स्वयं कानून बनाने का प्रस्ताव रखता है। डॉ. सिंह ने इसे विधानसभा में अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बताया और सरकार से इसे गंभीरता से लेने का आग्रह किया। अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इस पहल को स्वीकार कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाती है।