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आकाश चोपड़ा ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान गिल के वैज्ञानिकों को ‘हरियाणा करने वाली’ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पोस्ट में सही समय पर बदलाव नहीं किये गये। खास बात यह है कि मोहम्मद सिराज के दो ओवर फाइनल तक बचे रहे और प्रसिद्घ कृष्णा को देर से हमले में टीम के लिए नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ। चोपड़ा के अनुसार, मैच के डायनामिक्स में बेहतर कंप्यूटर की जरूरत थी, जहां गुजरात फेल हो गया।
मध्यम क्रम बना चिंता का कारण
चोपड़ा ने गुजरात टाइटंस की ऑल्टरनेटिव पर भी चिंता का विषय बनाया। उनका मानना है कि टीम को ज्यादा से ज्यादा टॉप ऑर्डर पर अनाउंसमेंट की जरूरत है। शुबमन गिल और अन्य टॉप बॉस्ट के शुरुआती आउट होने से मिडिल नंबर के मैच में आउट होकर असफल रहे। उन्होंने कहा कि ग्लेन फिलिप्स का 25 रन बनाना भी टीम के लिए बड़ा योगदान माना जा रहा है, जो बताता है कि मध्यक्रम के खिलाड़ियों के अनुसार प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है।
टीम कॉम्बिनेशन पर भी उठे सवाल
आकाश चोपड़ा ने टीम चयन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन सुंदर को और अधिक आक्रामक खेल खेलने की जरूरत है, जबकि शाहरुख खान की टीम में शामिल होने के बावजूद वह जमीनी प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। चोपड़ा का मानना है कि युवा कुमार कुशाग्र को खिलाड़ी मिल सकता है। उन्होंने साफ कहा कि गुजरात को अपने 4, 5 और 6 नंबरों के लिए नामांकित से विचार करना होगा।
पंजाब को दी सीख: जीत के साथ आगे बढ़ो
जहां एक ओर गुजरात की आलोचना हुई, वहीं आकाश चोपड़ा ने पंजाब किंग्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में जीत के दो अंक सबसे अहम होते हैं। भले ही पंजाब ने लक्ष्य का पीछा करते हुए झटका झेले, लेकिन अंत में जीत ही मायने रखती है। उन्होंने कहा कि जीत के बाद सीखना ज्यादा आसान है और टीम को सकारात्मक निर्णय पर ध्यान देना चाहिए।
अय्यरी की वैज्ञानिक कोलैण्ड
चोपड़ा ने पंजाब के कैप्टन श्रेयस अय्यर की गर्लफ्रेंड की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि एरीयर ने सिर्फ पांच नामांकनों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें शानदार तरीके से दोहराया, जिससे गुजरात को बड़े पैमाने पर पहुंचने से पहले ही हासिल कर लिया गया। इसके अलावा युवा बल्लेबाज कूपर कोनोली ने मैच में अहम भूमिका निभाते हुए टीम को जीत दिलाई।
गुजरात के लिए चेतावनी, सुधार की आवश्यकता
इस हार के बाद यह साफ हो गया कि गुजरात टाइटंस को अपनी रणनीति और टीम संयोजन पर फिर से काम करना होगा। विशेष रूप से औद्योगिक और मध्यम श्रेणी के संस्थानों पर ध्यान देना जरूरी है, नहीं तो आगे का सफर मुश्किल हो सकता है।